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Hansraj Meena

@HansrajMeena • 763,931 subscribers

Environmental & Socio- Political Activist with Principle of secularism, Equality, Humanity & Justice. A Tribal, Son Of Farmer. Founder of @TribalArmy.

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मोदी है तो मुमकिन है !

मोदी है तो मुमकिन है !

240,617 views

7.8% GDP ग्रोथ के आंकड़ों का ढोल पीटने से देश के गरीब की थाली नहीं भर जाती !

7.8% GDP ग्रोथ के आंकड़ों का ढोल पीटने से देश के गरीब की थाली नहीं भर जाती !

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मजबुरी होगी नहीं तो इतना रिस्क कोई नहीं लेता हैं।

मजबुरी होगी नहीं तो इतना रिस्क कोई नहीं लेता हैं।

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मोदी है तो मुमकिन है !

मोदी है तो मुमकिन है !

72,204 views

भाजपा सरकार यमुना नदी को कितने दिनों में पीने लायक स्वच्छ बनाएगी? यह सवाल मैं हर दिन पूछूंगा, जब तक जवाब और समाधान नहीं मिलता!

भाजपा सरकार यमुना नदी को कितने दिनों में पीने लायक स्वच्छ बनाएगी? यह सवाल मैं हर दिन पूछूंगा, जब तक जवाब और समाधान नहीं मिलता!

956,275 views

मुंबई अंधेरी रेलवे स्टेशन पर एक यात्री की जान बचाने वाले सतर्क RPF जवान को सलाम! उनकी बहादुरी और तत्परता ने बड़ा हादसा होने से रोक दिया। ऐसे जांबाज सुरक्षाकर्मी ही असली हीरो हैं! RPF INDIA कृपया इन्हें उचित सम्मान दें।

मुंबई अंधेरी रेलवे स्टेशन पर एक यात्री की जान बचाने वाले सतर्क RPF जवान को सलाम! उनकी बहादुरी और तत्परता ने बड़ा हादसा होने से रोक दिया। ऐसे जांबाज सुरक्षाकर्मी ही असली हीरो हैं! RPF INDIA कृपया इन्हें उचित सम्मान दें।

840,798 views

"किसान आंदोलन में कंगना रनौत ने धरने पर बैठने वाली महिलाओं को यह बोला था कि 100-100 रु के लिए धरने पर बैठती है, तब मेरी मां भी वहां बैठी थी।" CISF महिला जवान कुलविंदर कौर का गुस्सा बाजिव है। मैं बतौर एक किसान का बेटा होने के नाते उनके स्वाभिमान के साथ खड़ा हूं। #KanganaRanaut

"किसान आंदोलन में कंगना रनौत ने धरने पर बैठने वाली महिलाओं को यह बोला था कि 100-100 रु के लिए धरने पर बैठती है, तब मेरी मां भी वहां बैठी थी।" CISF महिला जवान कुलविंदर कौर का गुस्सा बाजिव है। मैं बतौर एक किसान का बेटा होने के नाते उनके स्वाभिमान के साथ खड़ा हूं। #KanganaRanaut

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सोशल मीडिया पर ‘एलियन स्टार’ के नाम से मशहूर इस 13 वर्षीय लड़के का नाम मोतीलाल मेघवाल है। कभी अपने अलग लुक की वजह से मजाक का सामना करने वाले मोतीलाल ने उसी चीज़ को अपनी ताकत बना लिया। इंस्टाग्राम रील्स, फेसबुक और यूट्यूब पर अपने हुनर से लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच बनाने वाला मोतीलाल इस बात की मिसाल है कि दलित समाज के बच्चे भी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान बना रहे हैं। भीख मांगकर नहीं, मेहनत करके नाम कमाया है।

सोशल मीडिया पर ‘एलियन स्टार’ के नाम से मशहूर इस 13 वर्षीय लड़के का नाम मोतीलाल मेघवाल है। कभी अपने अलग लुक की वजह से मजाक का सामना करने वाले मोतीलाल ने उसी चीज़ को अपनी ताकत बना लिया। इंस्टाग्राम रील्स, फेसबुक और यूट्यूब पर अपने हुनर से लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच बनाने वाला मोतीलाल इस बात की मिसाल है कि दलित समाज के बच्चे भी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान बना रहे हैं। भीख मांगकर नहीं, मेहनत करके नाम कमाया है।

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आखिरकार मंदिर के चढ़ावे का पैसा दिख ही गया !

आखिरकार मंदिर के चढ़ावे का पैसा दिख ही गया !

150,443 views

सरेंडर होने से अच्छा है देश के लिए युद्ध में लड़ते-लड़ते शहीद हो जाना ! #Khamenei

सरेंडर होने से अच्छा है देश के लिए युद्ध में लड़ते-लड़ते शहीद हो जाना ! #Khamenei

291,144 views

दिल्ली के जंतर मंतर के बाद अब छतरपुर में भी आंदोलन को कुचल दिया गया। आंदोलन कर रहे आदिवासियों को पुलिस ने जबरन उठाकर हिरासत में ले लिया। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज़ दबाना किसी भी लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। क्या शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना भी अब अपराध बन गया है?

दिल्ली के जंतर मंतर के बाद अब छतरपुर में भी आंदोलन को कुचल दिया गया। आंदोलन कर रहे आदिवासियों को पुलिस ने जबरन उठाकर हिरासत में ले लिया। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज़ दबाना किसी भी लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। क्या शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना भी अब अपराध बन गया है?

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ये मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर जैसे आदिवासी इलाकों की हकीकत है। रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग घर-परिवार छोड़कर गुजरात पलायन करने को मजबूर हैं। और साहब कहते हैं—“विकसित भारत बनाएंगे।” जब आदिवासी गांवों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन तक नहीं है, तो ये कैसा विकास और किसका विकसित भारत? दावों से नहीं, गांवों की हकीकत से विकास मापिए।

ये मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर जैसे आदिवासी इलाकों की हकीकत है। रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग घर-परिवार छोड़कर गुजरात पलायन करने को मजबूर हैं। और साहब कहते हैं—“विकसित भारत बनाएंगे।” जब आदिवासी गांवों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन तक नहीं है, तो ये कैसा विकास और किसका विकसित भारत? दावों से नहीं, गांवों की हकीकत से विकास मापिए।

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बीजेपी का अंत नजदीक आ चुका है !

बीजेपी का अंत नजदीक आ चुका है !

102,467 views

मध्यप्रदेश में गरीब आदिवासी व्यक्ति पर पेशाब करने वाले भाजपा के युवा नेता प्रवेश शुक्ला की यह शरारत और उद्दंडता असहनीय है। आदिवासियों के प्रति बीजेपी का यह असली चेहरा है। मप्र प्रशासन प्रवेश शुक्ला के विरूद्ध एससी एसटी एक्ट के तहत कड़ी कार्यवाही करें। #ArrestPraveshShukla

मध्यप्रदेश में गरीब आदिवासी व्यक्ति पर पेशाब करने वाले भाजपा के युवा नेता प्रवेश शुक्ला की यह शरारत और उद्दंडता असहनीय है। आदिवासियों के प्रति बीजेपी का यह असली चेहरा है। मप्र प्रशासन प्रवेश शुक्ला के विरूद्ध एससी एसटी एक्ट के तहत कड़ी कार्यवाही करें। #ArrestPraveshShukla

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"मंदिर में फोटो खींचना मना है !" अब समझ आया है कि मंदिरों में यह क्यों लिखा रहता है !

"मंदिर में फोटो खींचना मना है !" अब समझ आया है कि मंदिरों में यह क्यों लिखा रहता है !

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मैं फिलिस्तीन के साथ हूं। मैं मजलूमों के साथ हूं। मैं मानवता, न्याय, शांति और आजादी के साथ हूं। आक्रमणकारी इजरायल की दशकों से जारी अत्याचार और तानाशाही के खिलाफ हूं। #IStandWithPalestine

मैं फिलिस्तीन के साथ हूं। मैं मजलूमों के साथ हूं। मैं मानवता, न्याय, शांति और आजादी के साथ हूं। आक्रमणकारी इजरायल की दशकों से जारी अत्याचार और तानाशाही के खिलाफ हूं। #IStandWithPalestine

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पुल बनाने से नहीं, मंदिर बनाने से वोट मिलता है !

पुल बनाने से नहीं, मंदिर बनाने से वोट मिलता है !

421,693 views

कृषि के बाद, पाखण्ड हमारे युग का सबसे बड़ा उद्योग है !

कृषि के बाद, पाखण्ड हमारे युग का सबसे बड़ा उद्योग है !

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यह तस्वीर पाकिस्तान की नहीं, बल्कि राजस्थान के बाड़मेर की है। जहां एक पिता और बेटी रात के अंधेरे में मीलों पानी की तलाश में भटकते हैं। यह गहराते जल संकट की दर्दनाक तस्वीर है, जो जल जीवन मिशन के दावों की विफलता को उजागर करती है।

यह तस्वीर पाकिस्तान की नहीं, बल्कि राजस्थान के बाड़मेर की है। जहां एक पिता और बेटी रात के अंधेरे में मीलों पानी की तलाश में भटकते हैं। यह गहराते जल संकट की दर्दनाक तस्वीर है, जो जल जीवन मिशन के दावों की विफलता को उजागर करती है।

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मध्यप्रदेश के बरौदिया में दलित युवती से छेड़छाड़ के 3 साल पुराने केस में समझौता न करने पर BJP मंत्री के गुंडों ने पीड़िता के 18 साल के भाई की हत्या कर दी। बेटे को बचाने आई मां को निर्वस्त्र कर मारपीट की गई। उनका मकान तोड़ दिया। क्या सीएम Shivraj Singh Chouhan इस बहन की चीखें सुनेंगे?

मध्यप्रदेश के बरौदिया में दलित युवती से छेड़छाड़ के 3 साल पुराने केस में समझौता न करने पर BJP मंत्री के गुंडों ने पीड़िता के 18 साल के भाई की हत्या कर दी। बेटे को बचाने आई मां को निर्वस्त्र कर मारपीट की गई। उनका मकान तोड़ दिया। क्या सीएम Shivraj Singh Chouhan इस बहन की चीखें सुनेंगे?

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अंबुजा सीमेंट की पुरुँगा कोयला खदान परियोजना आदिवासियों पर विकास नहीं, विनाश थोप रही है। 2.25 मिलियन टन कोयला निकालने के नाम पर जंगल, नदी, संस्कृति और घर छीनने की साज़िश जारी है। कॉरपोरेट मुनाफ़े के लिए आदिवासियों का अस्तित्व कुचला जा रहा है। 1. अगर यह परियोजना विकास है, तो सबसे पहले उसी ज़मीन पर रहने वाले आदिवासियों को ही बेघर क्यों किया जा रहा है? विकास किसका? मुनाफ़े का या इंसानों का? 2. जब संविधान अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति को सर्वोच्च अधिकार देता है, तो आदिवासियों की स्पष्ट आपत्ति के बावजूद खनन कंपनियों को अनुमति किस अधिकार से दी जा रही है? लोकतंत्र कहाँ है? 3. जंगल, नदी, जलस्त्रोत और पर्यावरण नष्ट होने की कीमत पर 2.25 मिलियन टन कोयला निकाला जाएगा तो आने वाली पीढ़ियों की बर्बादी का बिल कौन भरेगा? सरकार, कंपनी या फिर वही आदिवासी जिनकी कोई गलती नहीं?

Hansraj Meena

807,169 views • 10 months ago

क्या अब न्यायालय अथवा जेलों की आवश्यकता नहीं बची ?
0:29

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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के बीच विनोद जाखड़ और विजय शंकर मीणा को लेकर सामने आई कथित ऑडियो बेहद गंभीर और चिंताजनक है। ऑडियो में ABVP से जुड़े छात्र नेताओं द्वारा कथित तौर पर गाली-गलौज, धमकी और जातिगत रूप से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाना शर्मनाक है। छात्र राजनीति में वैचारिक मतभेद और चुनावी प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की जाति को निशाना बनाकर अपमानित करना, गाली देना या धमकी देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। खासकर जब विश्वविद्यालय युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, समानता और संवैधानिक अधिकारों की समझ देने का केंद्र होना चाहिए, तब इस तरह की भाषा छात्र राजनीति की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मैं जातिगत अपमान, गाली-गलौज और धमकी की ऐसी भाषा की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

Hansraj Meena

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