
Hansraj Meena
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Environmental & Socio- Political Activist with Principle of secularism, Equality, Humanity & Justice. A Tribal, Son Of Farmer. Founder of @TribalArmy.
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शाबास बेटी ! ज्ञानू जब तक जेल नहीं चला जाता है तब तक रुकना नहीं है।
Hansraj Meena244,463 görüntüleme • 13 gün önce

उज्जैन जैसे पवित्र धार्मिक नगर में श्मशान घाट पर जलती चिता से मानव मांस निकालकर खाने का वायरल वीडियो बेहद घृणित, अमानवीय और शर्मनाक है। आस्था, धर्म या तंत्र-मंत्र के नाम पर ऐसी वीभत्स हरकत किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। मृतक की गरिमा और परिजनों की भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों पर तत्काल निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
Hansraj Meena302,375 görüntüleme • 1 ay önce

भारत के इतिहास में शायद ही कभी नेता विपक्ष के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार हुआ है !
Hansraj Meena46,548 görüntüleme • 11 gün önce

ये तस्वीर दिल्ली की नहीं, कोलकाता की है। देश में नई क्रांति आ चुकी है !
Hansraj Meena293,334 görüntüleme • 2 ay önce
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मध्यप्रदेश के कटनी में दलित परिवार के 15 साल के बच्चे और उसकी मां के साथ थाना प्रभारी और पुलिस स्टॉफ की क्रूरता मानवता को झकझोर कर रख देने वाली है। यह घटना ना सिर्फ मप्र पुलिस की क्रूरता को दर्शाती है, बल्कि समाज में व्याप्त दलितों के प्रति हिंसा की मानसिकता को भी उजागर करती हैं।
Hansraj Meena2,160,011 görüntüleme • 2 yıl önce

अंबुजा सीमेंट की पुरुँगा कोयला खदान परियोजना आदिवासियों पर विकास नहीं, विनाश थोप रही है। 2.25 मिलियन टन कोयला निकालने के नाम पर जंगल, नदी, संस्कृति और घर छीनने की साज़िश जारी है। कॉरपोरेट मुनाफ़े के लिए आदिवासियों का अस्तित्व कुचला जा रहा है। 1. अगर यह परियोजना विकास है, तो सबसे पहले उसी ज़मीन पर रहने वाले आदिवासियों को ही बेघर क्यों किया जा रहा है? विकास किसका? मुनाफ़े का या इंसानों का? 2. जब संविधान अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति को सर्वोच्च अधिकार देता है, तो आदिवासियों की स्पष्ट आपत्ति के बावजूद खनन कंपनियों को अनुमति किस अधिकार से दी जा रही है? लोकतंत्र कहाँ है? 3. जंगल, नदी, जलस्त्रोत और पर्यावरण नष्ट होने की कीमत पर 2.25 मिलियन टन कोयला निकाला जाएगा तो आने वाली पीढ़ियों की बर्बादी का बिल कौन भरेगा? सरकार, कंपनी या फिर वही आदिवासी जिनकी कोई गलती नहीं?
Hansraj Meena807,169 görüntüleme • 10 ay önce
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मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में बरेला आदिवासी परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाकर उनकी मक्के की फसलें उजाड़ना बेहद शर्मनाक और अमानवीय है। सवाल है कि आखिर किसके आदेश पर आदिवासियों के घर और आजीविका उजाड़ी जा रही है? जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मकान नहीं तोड़ने के निर्देश दिए थे, तो फिर कार्रवाई किसके इशारे पर जारी रही? क्या भाजपा सरकार में आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की कोई कीमत नहीं है? इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और प्रभावित परिवारों को न्याय व मुआवजा मिले। Shivraj Singh Chouhan Dr Mohan Yadav Narendra Modi
Hansraj Meena23,380 görüntüleme • 7 gün önce

मध्यप्रदेश के सिरोंज में किसान मूलचंद की खड़ी फसल पर प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर चला दिया गया। सदमे में किसान बेहोश हो गया। पत्नी गिड़गिड़ाती रही। लेकिन निर्दयी प्रशासन ने 8-10 दिन की फसल काटने की मोहलत नहीं दी! CM Dr Mohan Yadav आप तो स्वयं को किसान का बेटा बताते है। शर्म नहीं आती?
Hansraj Meena1,016,802 görüntüleme • 1 yıl önce

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के बीच विनोद जाखड़ और विजय शंकर मीणा को लेकर सामने आई कथित ऑडियो बेहद गंभीर और चिंताजनक है। ऑडियो में ABVP से जुड़े छात्र नेताओं द्वारा कथित तौर पर गाली-गलौज, धमकी और जातिगत रूप से अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाना शर्मनाक है। छात्र राजनीति में वैचारिक मतभेद और चुनावी प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की जाति को निशाना बनाकर अपमानित करना, गाली देना या धमकी देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। खासकर जब विश्वविद्यालय युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, समानता और संवैधानिक अधिकारों की समझ देने का केंद्र होना चाहिए, तब इस तरह की भाषा छात्र राजनीति की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मैं जातिगत अपमान, गाली-गलौज और धमकी की ऐसी भाषा की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
Hansraj Meena63,939 görüntüleme • 1 ay önce
