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हिन्दी पंक्तियाँ

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ये पंक्तियाँ आप किसे समर्पित करना चाहेंगे?

ये पंक्तियाँ आप किसे समर्पित करना चाहेंगे?

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वक़्त ख़ुश ख़ुश काटने का मशवरा देते हुए रो पड़ा वो आप मुझ को हौसला देते हुए - रियाज़ मजीद

वक़्त ख़ुश ख़ुश काटने का मशवरा देते हुए रो पड़ा वो आप मुझ को हौसला देते हुए - रियाज़ मजीद

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अकेलेपन और एकांत में क्या अंतर है?

अकेलेपन और एकांत में क्या अंतर है?

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इस दौर के फरियादी जायें तो कहां जायें कानून तुम्हारा है दरबार तुम्हारा है। सूरज की तपन तुमसे बर्दाश्त नहीं होती इक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है। ~ अर्जुन सिंह चांद

इस दौर के फरियादी जायें तो कहां जायें कानून तुम्हारा है दरबार तुम्हारा है। सूरज की तपन तुमसे बर्दाश्त नहीं होती इक मोम के पुतले सा किरदार तुम्हारा है। ~ अर्जुन सिंह चांद

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सबको गिला है - बहुत कम मिला है...

सबको गिला है - बहुत कम मिला है...

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निर्धन गिरे पहाड़ से कोई न पूछे हाल धनी को कांटा लगे पूछे लोग हज़ार।

निर्धन गिरे पहाड़ से कोई न पूछे हाल धनी को कांटा लगे पूछे लोग हज़ार।

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लोग भूल जाएंगे, तुमने क्या कहा लोग भूल जाएंगे, तुमने क्या किया लेकिन लोग ये कभी नहीं भूलेंगे कि तुमने उन्हें कैसा महसूस करवाया। माया एंजेलो 🌻

लोग भूल जाएंगे, तुमने क्या कहा लोग भूल जाएंगे, तुमने क्या किया लेकिन लोग ये कभी नहीं भूलेंगे कि तुमने उन्हें कैसा महसूस करवाया। माया एंजेलो 🌻

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शोक में सिर्फ़ रहा जा सकता है, उसे कहा नहीं जा सकता। - पंकज चतुर्वेदी

शोक में सिर्फ़ रहा जा सकता है, उसे कहा नहीं जा सकता। - पंकज चतुर्वेदी

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सबको गिला है - बहुत कम मिला है ज़रा सोचिए - जितना आपको मिला है उतना कितनो को मिला है। - अज्ञात

सबको गिला है - बहुत कम मिला है ज़रा सोचिए - जितना आपको मिला है उतना कितनो को मिला है। - अज्ञात

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पहाड़ और नदी...

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पंक्तियाँ : सोनू जाॅनसन

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झारखंड में भी बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए छात्रों का प्रोटेस्ट देखते हुए अदम गोंडवी जी पंक्तियाँ याद आती हैं: "जो बदल सकती है इस दुनिया के मौसम का मिज़ाज उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिए।" Video: thelallantop

झारखंड में भी बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए छात्रों का प्रोटेस्ट देखते हुए अदम गोंडवी जी पंक्तियाँ याद आती हैं: "जो बदल सकती है इस दुनिया के मौसम का मिज़ाज उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिए।" Video: thelallantop

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सबको गिला है, बहुत कम मिला है। ज़रा सोचिए - जितना आपको मिला है, उतना कितनों को मिला है।

सबको गिला है, बहुत कम मिला है। ज़रा सोचिए - जितना आपको मिला है, उतना कितनों को मिला है।

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इस भारतीय टीम ने सब कुछ ऐसे नॉर्मल कर दिया, जैसा सदियों से वास्तव में होना चाहिए था।

इस भारतीय टीम ने सब कुछ ऐसे नॉर्मल कर दिया, जैसा सदियों से वास्तव में होना चाहिए था।

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वो प्रेम है.. 👌❤

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ये सुनिए 👌👌

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माता-पिता ❤❤

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UPSC topper Shakti Dubey.

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अचानक तुम आ जाओ इतनी रेलें चलती हैं भारत में कभी कहीं से भी आ सकती हो मेरे पास कुछ दिन रहना इस घर में जो उतना ही तुम्हारा भी है तुम्हें देखने की प्यास है गहरी तुम्हें सुनने की कुछ दिन रहना जैसे तुम गई नहीं कहीं मेरे पास समय कम होता जा रहा है मेरी प्यारी दोस्त घनी आबादी का देश मेरा कितनी औरतें लौटती हैं शाम होते ही अपने-अपने घर कई बार सचमुच लगता है तुम उनमें ही कहीं आ रही हो वही दुबली देह बारीक़ चारख़ाने की सूती साड़ी कंधे से झूलता झालर वाला झोला और पैरों में चप्पलें मैं कहता जूते पहनो खिलाड़ियों वाले भाग-दौड़ में भरोसे के लायक़ तुम्हें भी अपने काम में ज़्यादा मन लगेगा मुझसे फिर एक बार मिलकर लौटने पर दु:ख-सुख तो आते-जाते रहेंगे सब कुछ पार्थिव है यहाँ लेकिन मुलाक़ातें नहीं हैं पार्थिव इनकी ताज़गी रहेगी यहाँ हवा में! इनसे बनती हैं नई जगहें एक बार और मिलने के बाद भी एक बार और मिलने की इच्छा पृथ्वी पर कभी ख़त्म नहीं होगी पंक्तियाँ : आलोक धन्वा

अचानक तुम आ जाओ इतनी रेलें चलती हैं भारत में कभी कहीं से भी आ सकती हो मेरे पास कुछ दिन रहना इस घर में जो उतना ही तुम्हारा भी है तुम्हें देखने की प्यास है गहरी तुम्हें सुनने की कुछ दिन रहना जैसे तुम गई नहीं कहीं मेरे पास समय कम होता जा रहा है मेरी प्यारी दोस्त घनी आबादी का देश मेरा कितनी औरतें लौटती हैं शाम होते ही अपने-अपने घर कई बार सचमुच लगता है तुम उनमें ही कहीं आ रही हो वही दुबली देह बारीक़ चारख़ाने की सूती साड़ी कंधे से झूलता झालर वाला झोला और पैरों में चप्पलें मैं कहता जूते पहनो खिलाड़ियों वाले भाग-दौड़ में भरोसे के लायक़ तुम्हें भी अपने काम में ज़्यादा मन लगेगा मुझसे फिर एक बार मिलकर लौटने पर दु:ख-सुख तो आते-जाते रहेंगे सब कुछ पार्थिव है यहाँ लेकिन मुलाक़ातें नहीं हैं पार्थिव इनकी ताज़गी रहेगी यहाँ हवा में! इनसे बनती हैं नई जगहें एक बार और मिलने के बाद भी एक बार और मिलने की इच्छा पृथ्वी पर कभी ख़त्म नहीं होगी पंक्तियाँ : आलोक धन्वा

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पीड़ाएं केवल दुःख नहीं देती, साहस भी देती हैं। - स्मृति प्रशा

पीड़ाएं केवल दुःख नहीं देती, साहस भी देती हैं। - स्मृति प्रशा

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