किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा -मुनव्वर राना #रक्षा_बंधन #RakshaBandhan2025
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इश्क़ घुला और ज़ात ख़तम चाँद खिला और रात ख़तम नए दौर की प्रेम कथा जिस्म मिला जज़्बात ख़तम रिश्ता विश्ता तुम जानो तुम मेरे हो बात ख़तम... -कुमार विश्वास
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ये हम ही हैं किसी के अगर हुए तो हुए तुम्हारा क्या है कोई होगा कोई था कोई है -इरफान सत्तार
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ये हम ही हैं के किसी के अगर हुए तो हुए तुम्हारा क्या है, कोई होगा, कोई था, कोई है। ~ इरफ़ान सत्तार
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इश्क़ घुला और ज़ात ख़तम चाँद खिला और रात ख़तम नए दौर की प्रेम कथा जिस्म मिला जज़्बात ख़तम रिश्ता विश्ता तुम जानो तुम मेरे हो बात ख़तम... -कुमार विश्वास
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तुम तो नज़रों से गिराने के भी लायक नहीं हो तुम समझते हो किसी जंग में मारेंगे तुम्हें..!! -सलीम सिद्दीकी
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अब दोस्त कोई लाओ मुकाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
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रहता है सिर्फ एक ही कमरे में आदमी उसका गुरूर रहता है बाकी मकान में -महशर अफ़रीदी
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दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आज़ाद हैं देखना है खींचता है मुझ पे पहला तीर कौन -परवीन शाकिर
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इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में। न पीने का सलीका न पिलाने का शऊर, ऐसे भी लोग चले आये हैं मयखाने में॥ ~ गोपालदास 'नीरज'
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घरों से भागने वाले बताएँ मोहब्बत से गुजारा हो गया क्या..?? ~ कुशल दौनेरिया
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दर्द का साज़ दे रहा हूँ तुम्हे, दिल के सब राज़ दे रहा हूँ तुम्हे, ये ग़ज़ल-गीत सब बहाने हैं, मैं तो आवाज़ दे रहा हूँ तुम्हें.... -कुमार विश्वास
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हम ने देखा तो हम ने ये देखा जो नहीं है वो ख़ूबसूरत है -जौन एलिया
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अब लगता है ठीक कहा था ग़ालिब ने बढ़ते-बढ़ते दर्द दवा हो जाता है -मदन मोहन दानिश
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जिनसे बरसों की पहचान की छुट गयी अजनबी आज से हम तुम्हारे हुए.... -विशाल बाग़
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नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन अब घर अच्छा लगता है -निदा फ़ाज़ली
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हमको उड़ने के तरीके न सिखाओ हम लोग पेड़ से आये हैं पिंजड़े से नहीं
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सबको मिल जाएगी मंज़िल ये जरूरी तो नहीं....
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मेरे तन के ज़ख़्म न गिन अभी, मेरी आँख में अभी नूर है मेरी बाज़ुओं पे निगाह कर, जो ग़ुरूर था वो ग़ुरूर है -अहमद फ़राज़