
Hridayesh Joshi
@hridayeshjoshi • 34,493 subscribers
Founder - Eco N Energy Talk https://t.co/xZ1wzhfkSd Books: 'Rage of the River' @PenguinIndia, 'Laal Lakeer' @HarperCollinsIN
Shorts
Videos

"प्रशांत किशोर तृणमूल कांग्रेस के पतन का मुख्य कारण है।" - कल्याण बनर्जी टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी कह रहे हैं कि प्रशांत किशोर की I-PAC ने तृणमूल कांग्रेस के संगठन को ध्वस्त कर दिया। वह साफ कह रहे हैं कि Prashant Kishore is the main reason to destroy the Trinmool Congress politics. He is an opportunist. बनर्जी की ये बात भले ही पार्टी की हार के बाद उपजी हो लेकिन उनका यह कहना सही है कि प्रशांत किशोर की टीम ने राजनीतिक पार्टियों को पंगु कर दिया है। वह चुनाव को संगठन खड़ा करने और जनता के बीच जाने से अधिक अब मैनेजमेंट, डिजिटल कम्युनिकेशन और पैसे का खेल समझने लगी हैं। इस वीडियो में कल्याण बनर्जी का साफ कहना है कि कार्यकर्ता को ज़मीन से काटने और भ्रम में रखने में आई-पैक ही कारण है।
Hridayesh Joshi241,385 views • 2 months ago

अभी करीब 45 डिग्री तापमान है, रात 8 बजे 40 डिग्री से कम नहीं होगा। हीटवेव की सबसे ख़तरनाक बात यह है कि रातें विशेषकर शहरों में काफी गर्म हो रही हैं। आज मंगलवार को रात 11 बजे का तापमान 36 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। रातें ठंडी नहीं होंगी तो जिन लोगों के पास एसी की सुविधा नहीं है उनका शरीर स्टैस में रहेगा और बुज़िर्गों, दिल के मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह बहुत घातक है। पूरे वीडियो का लिंक कमेंट सेक्शन में है।
Hridayesh Joshi142,961 views • 2 months ago

"आपने नीतीश कुमार का चेहरा देखकर वोट दिया तो उनका बेटा मंत्री बनेगा। आपने मोदी जी के नाम पर वोट दिया तो जिसको वो चाहेंगे वो मुख्यमंत्री बनेगा। आपने (वोट देते वक्त) अपने बच्चों का चेहरा नहीं देखा तो आपका बच्चा मज़दूर बनेगा। आपके बच्चे अनपढ़ रहेंगे। आपके बच्चों को बेरोज़गारी का दर्द झेलना पड़ेगा। इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है" - प्रशांत किशोर
Hridayesh Joshi78,997 views • 2 months ago

After hearing a lot of buzz on social media and in the newspapers, I went to Lodhi Garden this morning. As soon as I reached there, the bird flew away, and all the birdwatchers left. How heartbreaking it was! Following a birder's advice, I set up my camera on a tripod and waited alone. A few people kept coming and going, asking, "Did you see it?" 🙂 Finally an about hour-long wait wasn't disappointing. Video - Hridayesh Joshi Oriental Pied Hornbill , Lodi Garden If you want to know detail there in link on one TOI story in the comment ... anu mathur Mohit Mehta #Birdwatching
Hridayesh Joshi42,602 views • 2 months ago

एक्सक्लूसिव - जर्मनी से दिल्ली पहुँचा 170 साल पुराना हिमालय! 🏔️✨ म्यूनिख के 'अल्पाइंस म्यूजियम' की दुर्लभ पेंटिंग्स पहली बार भारत में दिखाई जा रही हैं। जब कैमरा नहीं था, तब जर्मन भाइयों ने हिमालय को कैसे रंगों में उतारा? हमारी ये विशेष रिपोर्ट ज़रूर देखें: #EcoNEnergyTalk #Himalaya #AncientArt #Uttarakhand #NorthEastIndia
Hridayesh Joshi50,342 views • 3 months ago

ये एल निनो वर्ष है यानी बारिश कम और मौसम सूखा रहेगा। इस बात की प्रबल संभावना है कि यह सुपर एल निनो वर्ष भी हो सकता है. ऐसे में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि देश के कई हिस्सों में सूखा पड़ सकता है और कहीं पर अचानक बहुत बारिश और बाढ़ भी आ सकती है। आशंंका है कि ऐसे में हिमाचल और उत्तराखंड जैसे राज्यों में जंगलों की आग व्यापक और अधिक विनाशकारी हो सकती है। #forestfire #fire #heatwave
Hridayesh Joshi28,601 views • 1 month ago

देवप्रयाग के गांवों का संकट सारे गांवों का है। क्यों? 👇 देवप्रयाग के पास गांवों में जल संकट के खिलाफ प्रदर्शन की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। लोग यहां पर गंगा को बनाने वाली भागीरथी और अलकनंदा के संगम की दुहाई दे रहे हैं जो ठीक है। लेकिन ये महान नदियां भले ही मैदानी क्षेत्र में सिंचाई और पनबिजली के काम आती हों गांवों की प्यास नहीं बुझातीं। गांवों के काम आने वाली नदियां होती हैं वो जलधारायें जो गांवों के पास होती हैं और लोगों की जीवनदायिनी बनती हैं। जो वैटलैंड जो स्रोत बनाते हैं। वो नौले या कुंयें जिनसे लोग पानी भरते हैं। वो सब सूख रहे हैं। यही छोटी - बड़ी जलधारायें इन बड़ी नदियों का जलागम बनाती हैं यानी कैचमेंट। इन जल धाराओं को गधेरे, फॉरेस्ट रिवर्स और स्प्रिंग्स कहा जाता है। जंगलों और वेटवैंड का नष्ट होना और सड़क निर्माण में मलबे का गलत निस्तारण और अंधाधुंध निर्माण इनके खत्म होने की कुछ वजहें हैं। एक स्वस्थ कैचमेंट पानी को रोककर बाढ़ को नियंत्रित करता है और साल भर बड़ी नदियों में पानी बनाये रखता है। लेकिन हमने कैचमेंट को खत्म कर बाढ़ और सूखी नदियों के लिए आदर्श स्थिति बना दी है। बड़ी नदियां पनबिजली, सिंचाई या धार्मिक अनुष्ठानों (या फिर मैदानी क्षेत्र में जल आपूर्ति ) के लिए तो ठीक हैं लेकिन गांवों को खुशहाल रखने के लिए नदियों का जलागम क्षेत्र स्वस्थ रखना होगा। इस बारे में मेरी लिखी रिपोर्ट्स का लिंक कमेंट सेक्शन में है और यू-ट्यूब चैनल जहां हम ये सब जानकारी देते हैं।
Hridayesh Joshi27,020 views • 1 month ago

हम अपने शहरों में बढ़ती हीटवेव को लेकर बात होती है लेकिन हमारे महासागरों में पनप रहे एक खामोश संकट को ओर हमारा ध्यान शायद ही जाता हो। समुद्री हीटवेव्स (Marine Heatwaves)— के बारे में जानिये The Migration Story पूरे वीडियो का लिंक कमेंट सेक्शन में है। Nidhi Jamwal Roxy Koll ⛈
Hridayesh Joshi22,792 views • 1 month ago

ये तस्वीर हिमाचल के शिमला के ढली-संजौली बाईपास की है। पहाड़ों पर लैंड स्लाइड असामान्य बात नहीं लेकिन पिछले कुछ सालों से जितनी बड़ी संख्या और जितने बड़े पैमाने पर भूस्खलन हो रहे हैं। जंगलों का कटान, अनियंत्रित निर्माण और सड़कों को बनाने के लिए ढलानों पर विस्फोट से सारे कारण मिलकर एक बड़ी समस्या खड़ी कर रहे हैं. वीडियो - सोशल मीडिया
Hridayesh Joshi17,179 views • 1 month ago

The first day of the Kedarnath Yatra has once again exposed a hard truth — our approach to Himalayan tourism is deeply flawed. I witnessed severe difficulties faced by pilgrims due to an overwhelming rush. This is not devotion alone — this is mismanagement. There is no serious planning on carrying capacity. Fragile Himalayan regions like Kedarnath cannot handle unlimited numbers. Regulating footfall is not restriction — it is protection: of people, of ecology, and of faith itself. We also need to question the growing “zip-pass tourism” model — helicopters, express access, rushed darshans. This may look efficient, but it sidelines the very people who sustain the local economy. Small dhabas, tea sellers, porters, and local businesses depend on pilgrims who stay, walk, and engage. When tourists come and leave within hours, the local economy loses its lifeline. And when disasters or disruptions occur, communication collapses. Panic spreads, bookings get cancelled across the region, and once again, it is the local communities that suffer the most. This is an ecologically sensitive zone. Visual spectacles like helicopters showering petals may look grand, but they are completely unnecessary and out of sync with the spirit of the Himalaya. We must ask: 👉 Are we building a system that respects the mountains? 👉 Or are we turning sacred spaces into high-speed consumption zones? We are not against tourism. We are for sustainable, responsible tourism — one that balances faith, environment, and livelihoods. Because in the Himalaya, every decision echoes far beyond the moment. And while such issues trend only when something goes wrong and are quickly forgotten, I consistently raise these concerns through my videos to build long-term awareness — do subscribe and join Eco N Energy Talk: #Kedarnath #SustainableTourism #Himalaya #CharDham #ResponsibleTravel
Hridayesh Joshi32,941 views • 3 months ago

सुबह सुबह ये बात मैं बहुत भारी मन से लिख रहा हूं। पिछले कुछ महीनों के फील्ड वर्क, रिसर्च, अध्ययन और विशेषज्ञों से बात के बाद मेरा यह विश्वास और दृढ़ हुआ है कि हम आधुनिकता और संपत्ति के डेरे, जो हमारे शहर बना रहे हैं वो हमारी नेचुरल वेल्थ और संसाधनों को पूरी तरह नष्ट कर रहे हैं। जो झीलें, तालाब और जलधारायें हमारे पास हुआ करती थीं उनका जलागम नष्ट करके पिछले कुछ दशकों में ये शहरी बसावटें खड़ी की गईं हैं और इस कारण पैदा हुआ ख़तरा हम नहीं देख पा रहे। सच ये है कि शहरों ने न केवल आसपास की वॉटर बॉडीज़ को प्रदूषित और नष्ट कर दिया है वह दूर दराज़ के गांवों और कस्बों का पानी खींचकर अपनी जल संकट की भरपाई कर रहे हैं। बढ़ते हीटआईलैंड प्रभाव के पीछे एक कारण यह भी है। हमारे शहरों में ग्राउंड वॉटर की समस्या का बढ़ना इसका एक और संकेतक है। मैंने कार्बनकॉपी पॉडकास्ट के लिए इस बारे में दो विशेषज्ञों आईआईटी दिल्ली के डॉ अजय माथुर और संरक्षण जीवविज्ञानी और रीवाइ्ल्डर विजय धस्माना और पर्यावरण कार्यकर्ता भवरीन कंधारी से बात की है। पूरी बातचीत का लिंक कमेंट सेक्शन में है। अगर संभव हो तो देखें .. हो सकता है बहुत रुचिकर नहीं लगे लेकिन आपको जानकारी ज़रूर मिलेगी।
Hridayesh Joshi16,779 views • 1 month ago

इंडियन पिट्टा इसके नौ रंगों के कारण इसे नौरंग कहा जाता है। दक्षिण भारत से माइग्रेट कर यह मध्य और उत्तर भारत में आती है और प्रजनन और नेस्टिंग करती है। अपने रंग और संगीत के साथ यहां यह अपनी पूरी भव्यता में दिख रही है। 🪶इस शानदार वीडियो के लिए Abhinav Poonia Photography का धन्यवाद।
Hridayesh Joshi15,803 views • 1 month ago

कल शाम मेट्रो से सफर करते हुए यह नज़ारा कालिंदी कुंज वाले रूट पर दिखा.. मैजेंटा लाइन पर बैठकर हर सुबह या शाम सड़क पर आप 5-7 किलोमीटर लंबा यह भारी जाम देख सकते हैं.. पब्लिक ट्रांसपोर्ट की अहमियत और उपयोगिता समझ में आती है जब सड़क पर वाहन ठहरे हों और आप उनके ऊपर से कुछ ही मिनटों में निकल जाते हैं...
Hridayesh Joshi60,816 views • 9 months ago