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Huma Naaz

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Journalist at @The_Mooknayak

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ये वीडियो देखते हुए मेरे रोंगटे खड़े हो गए। पहली नज़र में आपको लगेगा कि शायद कोई आपसी झगड़ा हुआ होगा। लेकिन सच इससे कहीं ज़्यादा डरावना है। ये प्रियंका शर्मा हैं। जगह दिल्ली का राजीव चौक मेट्रो, गेट नंबर 7। समय—शाम करीब 7:15 बजे। प्रियंका एक चाय की दुकान पर अकेले चाय पी रही थीं। तभी कुछ लोग उन्हें घेर लेते हैं। वीडियो में एक बुज़ुर्ग महिला भी दिखाई देती हैं, जो उनके बाल खींचती नज़र आती हैं। उनके साथ गाली-गलौज की जाती है और नफरती भीड़ उन्हें चारों तरफ़ से घेर लेती है। सवाल है अगर कोई झगड़ा नहीं हुआ था, तो फिर ये सब क्यों? प्रियंका का कसूर सिर्फ इतना था के वो CJP प्रोटेस्ट को सपोर्ट कर रही थी । प्रियंका एक यूट्यूबर हैं और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखती हैं। उनका आरोप है कि CJP के प्रोटेस्ट का समर्थन करने के कारण कुछ लोग लगातार उनका पीछा कर रहे थे। उनके मुताबिक, भीड़ ने उनसे कहा, "तेरा पीछा कर रहे थे, आज तू अकेली मिली है" और "राजस्थान वाली घटना याद है?"। भद्दि - भद्दि गालियाँ उनके रंग को लेकर घटिया बात कही गई । यदि यह आरोप सही है, तो यह बेहद गंभीर और आपराधिक धमकी का मामला है। Rekha Gupta आप दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं। आपसे सीधा सवाल है—अगर यही आपकी बेटी या आपके परिवार की कोई लड़की होती, जिसे राजधानी के बीचों-बीच इस तरह भीड़ घेर लेती, बाल खींचे जाते, गालियां दी जातीं और कथित तौर पर रेप जैसी धमकियां दी जातीं, तब भी क्या व्यवस्था का यही रवैया होता? प्रियंका का आरोप है कि पुलिस लगभग आधे घंटे बाद पहुंची और केवल एक पुलिसकर्मी आया। उनके अनुसार, न तो मौके पर मौजूद लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई और न ही उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने का इंतज़ाम किया गया। अगर रास्ते में उस लड़की के साथ कोई अनहोनी हो जाती CP Delhi #DilKiPolice , तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? एक महिला मुख्यमंत्री के राज में अगर किसी लड़की को उसकी राय रखने की वजह से भीड़ इस तरह निशाना बनाए, तो यह बेहद गंभीर सवाल है। यह किसी विचारधारा का नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और नागरिकों के अभिव्यक्ति के अधिकार का मामला है। सबसे डरावना ये है के ये नफ़ती गैंग के लोग लोगों के साथ अभ्रदता करते है डराते है , मारते है किसी की दाढ़ी खींचते है , फिर वीडियो बनाकर वायरल भी करते है । आखिर इनमें इतनी हिम्मत आती कहां से है CP Delhi #DilKiPolice । लगातार कनॉट प्लेस में ऐसी घटना हो रही है । प्रियंका ने जिस हिम्मत के साथ अकेले उस भीड़ का सामना किया, वह साहस की मिसाल है। लेकिन किसी भी लड़की को ऐसी स्थिति में अकेले लड़ने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। अब ज़रूरत है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और Delhi Police यदि आरोप सही पाए जाएं, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। शायद प्रधानमंत्री का यही बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ नारा है, जहां दिल्ली में कोई बेटी सुरक्षित नहीं तो और जगह क्या होगी सुरक्षा? NCW Alka Lamba 🇮🇳 Congress BJP Arvind Kejriwal #CJPProtest #RekhaGupta #DelhiPolice

Huma Naaz

70,472 Aufrufe • vor 17 Tagen

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के टूटेंगे सारे भरम धीरे धीरे..... ये रतन रंजन है कट्टर मोदी समर्थक, प्रखर हिंदू अब खुद ही सिस्टम का आईना दिखा रहे हैं , शायद इन्हें याद आ गया हो के ये भी बिहारी है और बिहारियों को पूरे देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया है। सुनिए क्या कह रहे हैं कि “न्याय तभी तेजी से मिलेगा जब आरोपी मुस्लिम होगा… तब सारे संगठन भी एक्टिव होंगे और कानून भी जाग जाएगा।” मतलब, न्याय अब अपराध से नहीं, पहचान से तय होता है , अब हत्यारे का धर्म देख कर तय किया जाएगा कब और कितनी आवाज उठानी है । जब अपने ही लोग ये बात कहने लगें, तो समझ लीजिए समस्या “नैरेटिव” नहीं, हकीकत बन चुकी है। अब सवाल ये नहीं कि कौन बोल रहा है, सवाल ये है कि जो बोला जा रहा है… वो हमारे समाज का कड़वा सच है। #StopRacismAgainstBiharis #PandavKumar #jantarmantar

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दोनों वीडियो ध्यान से सुनिए और देखिए कि रिपोर्टिंग का स्तर किस हद तक गिर चुका है। शर्म को भी शर्म आ जाए, लेकिन शायद इन्हें नहीं आएगी। AajTak की एंकर महोदया एक घटना में बोल रही है एक युवक की हत्या हो गई दूसरे में बोल रही है हिन्दू युवक की हत्या हो गई वाह रे डबल स्टैंडर्ड। बकरीद के दिन दो घटनाएं हुईं एक जहांगीरपुरी में और दूसरी गाज़ियाबाद में। दोनों मामलों में आपसी विवाद के दौरान एक-एक युवक की जान गई। फर्क सिर्फ इतना था कि जहांगीरपुरी में मरने वाला मुस्लिम था और गाज़ियाबाद में हिन्दू। लेकिन मीडिया की नज़र में दोनों मौतों की कीमत एक जैसी नहीं है। जहांगीरपुरी की घटना बस एक साधारण हेडलाइन बनकर रह गई, जबकि गाज़ियाबाद की घटना को ऐसे पेश किया जा रहा है मानो पूरे शहर में आग लगा देनी हो। सवाल है कि क्या मुसलमान की हत्या, हत्या नहीं होती? क्या इंसान की जान की अहमियत उसका धर्म तय करेगा? अगर दोनों घटनाओं की प्रकृति एक जैसी है, तो रिपोर्टिंग का पैमाना अलग क्यों है? पत्रकारिता का काम सच दिखाना होता है, समाज को बांटना नहीं। लेकिन जब खबरों का वजन मरने वाले के धर्म से तय होने लगे, तब समझ लीजिए कि खबरें नहीं, एजेंडे परोसे जा रहे हैं। #JahangirpuriMurder #Ghaziabadmurder #AajTak

Huma Naaz

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सीमांचल के सफर में एक बात साफ़ नज़र आई — लोगों के दिल में Asaduddin Owaisi और AIMIM को लेकर नाराज़गी गहरी है, ख़ासकर बुज़ुर्गों के बीच। कहते हैं, “वादा ओवैसी स्कूल से लेकर ओवैसी अस्पताल तक का था, लेकिन हुआ कुछ नहीं।” उल्टा “सीमांचल-सीमांचल” करके इलाक़ा सरकार के निशाने पर आ गया — काम तो नहीं हुआ, हाँ “घुसपैठियों” का ठप्पा ज़रूर लग गया। लोग पूछते हैं — “जब पूरा विपक्ष राहुल गांधी के साथ लामबंद था, तब ओवैसी साहब कहाँ थे?” “जब सीमांचल में वोटर लिस्ट से नाम कट रहे थे, तब कौन आया था?” बुज़ुर्गों का कहना है — “राहुल गांधी न होते, तो शायद आधे वोटर लिस्ट से बाहर हो चुके होते।” उधर, Akhtarul Iman पर भी अपने ही लोग टिकट बेचने के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में एक बात ज़मीन पर साफ़ दिखती है — सोशल मीडिया पर जो तूफ़ान #AIMIM का है, वो ज़मीन पर सन्नाटा है। वहीं दूसरी ओर, राहुल गांधी को लेकर लोगों में उम्मीद और भरोसा दिख रहा है —वो उन्हें अपना नेता मान रहे हैं। कांग्रेस के लिए ये एक सकारात्मक संकेत (Positive Sign) है सीमांचल से। #सीमांचल #Seemanchal #congress Rahul Gandhi

Huma Naaz

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