
Huma Naaz
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Journalist at @The_Mooknayak
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ये वसीम रजा है बता रहे है के कैसे इन्होंने शोएब और इसरार के साथ मिलकर ग्रीन लेमन होटल की आग में फंसे लोगों को बचाया , उन्होंने बताया के गद्दे वाले की शॉप से गद्दे लेकर सामने बिछाये जिस पर दूसरी - तीसरी मंजिल से कूद कर लोगों ने जान बचाई। इनके जज्बे को सलाम है ये सभी हौजरानी गांव से हैं। ये असली हिंदुस्तान की तस्वीर जो नहीं देखता के सामने कौन है । इन सबको दिल से सलाम और शुक्रिया नहीं तो कैजुअल्टी और भी बढ़ सकती थी । #Delhi #MalviyaNagar #DelhiFireTragedy #lemongreen
Huma Naaz117,685 次观看 • 11 天前

के टूटेंगे सारे भरम धीरे धीरे..... ये रतन रंजन है कट्टर मोदी समर्थक, प्रखर हिंदू अब खुद ही सिस्टम का आईना दिखा रहे हैं , शायद इन्हें याद आ गया हो के ये भी बिहारी है और बिहारियों को पूरे देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया है। सुनिए क्या कह रहे हैं कि “न्याय तभी तेजी से मिलेगा जब आरोपी मुस्लिम होगा… तब सारे संगठन भी एक्टिव होंगे और कानून भी जाग जाएगा।” मतलब, न्याय अब अपराध से नहीं, पहचान से तय होता है , अब हत्यारे का धर्म देख कर तय किया जाएगा कब और कितनी आवाज उठानी है । जब अपने ही लोग ये बात कहने लगें, तो समझ लीजिए समस्या “नैरेटिव” नहीं, हकीकत बन चुकी है। अब सवाल ये नहीं कि कौन बोल रहा है, सवाल ये है कि जो बोला जा रहा है… वो हमारे समाज का कड़वा सच है। #StopRacismAgainstBiharis #PandavKumar #jantarmantar
Huma Naaz109,008 次观看 • 1 个月前

दोनों वीडियो ध्यान से सुनिए और देखिए कि रिपोर्टिंग का स्तर किस हद तक गिर चुका है। शर्म को भी शर्म आ जाए, लेकिन शायद इन्हें नहीं आएगी। AajTak की एंकर महोदया एक घटना में बोल रही है एक युवक की हत्या हो गई दूसरे में बोल रही है हिन्दू युवक की हत्या हो गई वाह रे डबल स्टैंडर्ड। बकरीद के दिन दो घटनाएं हुईं एक जहांगीरपुरी में और दूसरी गाज़ियाबाद में। दोनों मामलों में आपसी विवाद के दौरान एक-एक युवक की जान गई। फर्क सिर्फ इतना था कि जहांगीरपुरी में मरने वाला मुस्लिम था और गाज़ियाबाद में हिन्दू। लेकिन मीडिया की नज़र में दोनों मौतों की कीमत एक जैसी नहीं है। जहांगीरपुरी की घटना बस एक साधारण हेडलाइन बनकर रह गई, जबकि गाज़ियाबाद की घटना को ऐसे पेश किया जा रहा है मानो पूरे शहर में आग लगा देनी हो। सवाल है कि क्या मुसलमान की हत्या, हत्या नहीं होती? क्या इंसान की जान की अहमियत उसका धर्म तय करेगा? अगर दोनों घटनाओं की प्रकृति एक जैसी है, तो रिपोर्टिंग का पैमाना अलग क्यों है? पत्रकारिता का काम सच दिखाना होता है, समाज को बांटना नहीं। लेकिन जब खबरों का वजन मरने वाले के धर्म से तय होने लगे, तब समझ लीजिए कि खबरें नहीं, एजेंडे परोसे जा रहे हैं। #JahangirpuriMurder #Ghaziabadmurder #AajTak
Huma Naaz12,608 次观看 • 15 天前
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सीमांचल के सफर में एक बात साफ़ नज़र आई — लोगों के दिल में Asaduddin Owaisi और AIMIM को लेकर नाराज़गी गहरी है, ख़ासकर बुज़ुर्गों के बीच। कहते हैं, “वादा ओवैसी स्कूल से लेकर ओवैसी अस्पताल तक का था, लेकिन हुआ कुछ नहीं।” उल्टा “सीमांचल-सीमांचल” करके इलाक़ा सरकार के निशाने पर आ गया — काम तो नहीं हुआ, हाँ “घुसपैठियों” का ठप्पा ज़रूर लग गया। लोग पूछते हैं — “जब पूरा विपक्ष राहुल गांधी के साथ लामबंद था, तब ओवैसी साहब कहाँ थे?” “जब सीमांचल में वोटर लिस्ट से नाम कट रहे थे, तब कौन आया था?” बुज़ुर्गों का कहना है — “राहुल गांधी न होते, तो शायद आधे वोटर लिस्ट से बाहर हो चुके होते।” उधर, Akhtarul Iman पर भी अपने ही लोग टिकट बेचने के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में एक बात ज़मीन पर साफ़ दिखती है — सोशल मीडिया पर जो तूफ़ान #AIMIM का है, वो ज़मीन पर सन्नाटा है। वहीं दूसरी ओर, राहुल गांधी को लेकर लोगों में उम्मीद और भरोसा दिख रहा है —वो उन्हें अपना नेता मान रहे हैं। कांग्रेस के लिए ये एक सकारात्मक संकेत (Positive Sign) है सीमांचल से। #सीमांचल #Seemanchal #congress Rahul Gandhi
Huma Naaz23,761 次观看 • 7 个月前

"इस हैदराबादी को इंशाअल्लाह इस हाल मे छोड़ेंगे के वो फिर कभी हमारी किसी विधानसभा मे जहां मुस्लिम नुमाइंदे चुने जाते है वहां पर दुबारा जाने की पूरे मुल्क मे हिम्मत ना करे..पहली बार तेरा वास्ता अमनतुल्लाह से पड़ा है " Amanatullah Khan AAP ने Asaduddin Owaisi को दिया चैलेंज। #DelhiElections
Huma Naaz39,209 次观看 • 1 年前
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