
UP Congress
@INCUttarPradesh • 632,438 subscribers
Official Twitter Account of Uttar Pradesh Congress.
Shorts
Videos

वर्दी का दर्द: दुश्मन से लड़े या अपनों को बचाए? देवरिया के फौजी की पीड़ा ने झकझोरा देश की सरहद पर बर्फ की चोटियों और गोलियों की गड़गड़ाहट के बीच देश की हिफाजत करने वाले वीर जवान जब अपनी ही माटी पर अपनों की चीखें सुनते हैं, तो वर्दी का यह दर्द कलेजा चीर देने वाला होता है। जम्मू-कश्मीर की LOC पर तैनात उत्तर प्रदेश के देवरिया के वीर बहादुर सिंह का यह वीडियो डबल इंजन सरकार के उस खोखले दावों की पोल खोल रहा है, जिसमें 'कानून का राज' और 'माफियाओं पर बुलडोजर' चलने का ढोल पीटा जाता है। जब एक सैनिक खुद यह पूछने पर मजबूर हो जाए कि वह सरहद पर दुश्मनों से लड़े या अपनी बुजुर्ग माता-पिता और बहनों को स्थानीय दबंगों और भू-माफियाओं के चंगुल से बचाए, तो यह व्यवस्था के मुंह पर कालिख है। सीएम योगी से मिलने की गुहार और सेना द्वारा दो-दो बार आधिकारिक पत्र भेजे जाने के बावजूद यदि जिला प्रशासन और पुलिस के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती, तो यह साफ साबित होता है कि जनता और जवानों की सुरक्षा के कागजी दावे सिर्फ चुनावी जुमले बनकर रह गए हैं। उत्तर प्रदेश में गुंडाराज के खात्मे का दावा करने वाली सरकार के राज में अगर एक सैनिक का परिवार ही महफूज नहीं है, तो आम आदमी की सुरक्षा का भगवान ही मालिक है। क्या 'योगी-मोदी' मॉडल का मतलब यही है कि जो जवान देश के लिए अपनी जान दांव पर लगाता है, उसके परिवार को न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ें और माफिया खुलेआम तांडव मचाते रहें?
UP Congress115,044 görüntüleme • 9 gün önce

ड्यूटी के नाम पर इंसानियत को कुचलने वाली व्यवस्था! यूपी के बस्ती में सड़क हादसे में घायल महिला सिपाही केसरी वर्मा की समय पर इलाज न मिलने से मौत बेहद दर्दनाक और शर्मनाक है। सिर में चार टांके लगे थे, छुट्टी के लिए आवेदन दिया गया, लेकिन संवेदनहीन अधिकारियों ने छुट्टी तक नहीं दी। पति सिपाही नागेंद्र वर्मा का दर्द सिस्टम की पोल खोलता है—“अगर एसपी ऑफिस से छुट्टी मिल जाती और समय पर मेरी पत्नी केसरी का इलाज हो जाता, तो आज वह जिंदा होती। छुट्टी की एप्लिकेशन में सिटी स्कैन की कॉपी भी लगाई थी, सिर में चार टांके लगे होने की बात भी लिखी थी। फिर भी छुट्टी नहीं दी गई।” एक महिला सिपाही की जान चली गई, लेकिन जिम्मेदारों की जवाबदेही कब तय होगी? भाजपा सरकार में पुलिसकर्मियों से ड्यूटी तो चाहिए, लेकिन उनकी जिंदगी की कोई कीमत नहीं? ये कैसी व्यवस्था है, जहां इलाज से ज्यादा जरूरी कागजी आदेश हो गया है?
UP Congress21,960 görüntüleme • 5 gün önce

शिक्षा के मंदिर में दरिंदगी, भाजपा राज में बेटियां सुरक्षित नहीं! मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र में 10वीं की छात्रा के साथ हुई दरिंदगी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भाजपा राज में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के दावे सिर्फ कागजी और खोखले हैं। स्कूल के प्रबंधक के बेटे और शिक्षक प्रतीक त्रिपाठी द्वारा 4 महीने तक लगातार एक नाबालिग का शोषण किया जाना और विरोध करने पर फेल करने की धमकी देना इस व्यवस्था के माथे पर बड़ा कलंक है। हद तो तब हो गई जब आरोपी ने अपनी दबंगई दिखाते हुए पीड़िता की बातचीत का ऑडियो वायरल कर दिया, जिसके बाद सदमे में आकर मासूम छात्रा को सुसाइड की कोशिश तक करनी पड़ी। क्या यही है भाजपा सरकार का 'सुशासन', जहां सत्ता और रसूख के नशे में चूर लोग बेटियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं और पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है? जब शिक्षा के मंदिरों में ही दरिंदे शिक्षकों के रूप में बैठे हों और बेटियां सुरक्षित न हों, तो सरकार के विकास और सुरक्षा के सारे भाषण बेमानी हो जाते हैं। क्या इस मामले में भी हमेशा की तरह रसूखदारों को बचाने के खेल खेले जाएंगे या फिर सरकार इस कुकृत्य पर कोई सख्त कार्रवाई करने की हिम्मत जुटाएगी?
UP Congress18,661 görüntüleme • 5 gün önce

खाकी के रखवाले ही सुरक्षित नहीं, अधिकारियों की प्रताड़ना से छलांग लगाने को मजबूर सिपाही! कानपुर देहात से सामने आई यह दिल दहला देने वाली घटना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिस विभाग के भीतर चल रहे अंधेरगर्दी की पोल खोलती है। एसपी ऑफिस की छत से कूदकर जान देने की कोशिश करने वाले सिपाही अंकित देशवाल का मामला यह चीख-चीख कर कह रहा है कि मौजूदा बीजेपी राज में महकमे के भीतर ही अधिकारी किस हद तक तानाशाही और मानसिक प्रताड़ना पर उतर आए हैं। घटना से ठीक 16 घंटे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सिपाही का यह दर्दनाक पोस्ट सामने आया था कि — "आप लोग सुसाइड करने पर मजबूर कर रहे हैं। अरे अधिकारी तो न्याय दिलाते हैं न।" इस गंभीर इल्जाम के बाद भी महकमे के नुमाइंदे बेशर्मी से इसे 'छत से झांकते समय नीचे गिरना' बताकर लीपापोती करने में जुट गए हैं। बीजेपी सरकार के 'सुशासन' का दावा करने वाले नुमाइंदों की नाक के नीचे पुलिस महकमे में यह सब क्या चल रहा है? विभागीय प्रताड़ना के इस काले सच पर पर्दा डालने वाले इन अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई कब होगी, या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी दबा दिया जाएगा?
UP Congress23,836 görüntüleme • 6 gün önce

गजब का विकास! मथुरा की सड़क बनी 'छाता', स्कूटी सीधे पाताल लोक को रवाना! करोड़ों की लागत से बनी सड़कों का यह हाल है कि पहली बारिश ने ही भाजपा के 'स्मार्ट सिटी' के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। मथुरा की सड़कें अब चलने के लिए नहीं, बल्कि गाड़ियों को निगलने के लिए 'छाता' बनी हुई हैं। चारों तरफ भ्रष्टाचार के गहरे गड्ढे हैं, जहाँ गाड़ियां पलट रही हैं और एक स्कूटी तो पूरी की पूरी सड़क के अंदर ही समा गई। जनता टैक्स भर रही है और बदले में उन्हें मिल रही है जानलेवा सड़कें। 'गड्ढामुक्त उत्तर प्रदेश' का ढिंढोरा पीटने वाले जवाब दें कि जनता के पैसों से भ्रष्टाचार की यह कैसी 'वाटरप्रूफ' सड़कें बनाई जा रही हैं?
UP Congress154,094 görüntüleme • 1 ay önce

सरकारी अस्पतालों में मौत का तांडव: डॉक्टरों की गैरहाजिरी, ANM की लापरवाही और बीजेपी के 'उत्तम स्वास्थ्य' के दावों की पोल! उत्तर प्रदेश के मऊ जिला अस्पताल से सामने आई यह दिल दहला देने वाली घटना बीजेपी सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख देती है। जहाँ एक ओर सरकारें 'बेहतर इलाज' के बड़े-बड़े विज्ञापन छपवाती हैं, वहीं ज़मीनी हकीकत यह है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मनमानी और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही अब मासूमों की जान ले रही है। मऊ में प्रसव के लिए लाई गई एक गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत सिर्फ एक 'हादसा' नहीं, बल्कि पूरी तरह से प्रशासनिक और चिकित्सकीय हत्या है। पहले तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने मरीज को देखने से ही साफ इनकार कर दिया और पल्ला झाड़ते हुए उसे प्राइवेट अस्पतालों में ले जाने की सलाह दी। हद तो तब हो गई जब गैर-जिम्मेदाराना रवैये के बीच एक गलत इंजेक्शन लगा दिया गया, जिससे पल भर में माँ और बच्चे दोनों की सांसें थम गईं। पूरी घटना के दौरान अस्पताल का पूरा अमला अपनी जिम्मेदारी से भागता नजर आया। भाजपा राज में सरकारी अस्पताल मरीजों के लिए 'इलाज का केंद्र' नहीं बल्कि मौत का कुआं ही बने रहेंगे
UP Congress20,530 görüntüleme • 7 gün önce

कानपुर से आया यह वीडियो रोंगटे खड़े कर देने वाला है, जहाँ एक 9-10 साल की मासूम बच्ची अपने घर के सामने रहने वाले रसूखदार लड़के की गंदी हरकतों और प्रताड़ना से इस कदर खौफ में है कि उसे रोते हुए न्याय की भीख मांगनी पड़ रही है। घर में माँ-बेटी अकेली हैं, और आरोपी परिवार पैसे और रसूख के दम पर पुलिस-प्रशासन को जेब में रखकर घूम रहा है। जब माँ शिकायत करने जाती है, तो उन्हें गालियाँ और धमकियाँ मिलती हैं। योगी जी, क्या यही है आपका "मिशन शक्ति"? क्या भाजपा के राज में अब 9 साल की बच्चियों को भी अपनी सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर आकर रोना पड़ेगा? बाद में मोमबत्तियाँ जलाने से बेहतर है कि आज इस मासूम के लिए आवाज़ उठाइए और इस अहंकारी रसूखदार परिवार पर बुलडोज़र वाली कार्रवाई कीजिए। आखिर कब तक बेटियां अपने ही घर के बाहर निकलने से डरती रहेंगी?
UP Congress142,661 görüntüleme • 1 ay önce

विज्ञापनों में 'सुरक्षित' एक्सप्रेसवे, हकीकत में गुंडों का अड्डा! यह है उत्तर प्रदेश के तथाकथित 'हाईटेक और सुरक्षित' एक्सप्रेसवे की जमीनी हकीकत, जिसके विज्ञापनों पर भाजपा सरकार करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाती है। यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्कॉर्पियो गाड़ी (संख्या: UP65EP9384) में 10 से 15 हथियारबंद और डंडे लिए गुंडे सरेआम तांडव मचा रहे हैं। ये गुंडे एक्सप्रेसवे पर चल रहे आम परिवारों, बहन-बेटियों की गाड़ियों के आगे जबरन ब्रेक लगाकर भयानक दुर्घटना कराने और उन्हें असंतुलित करने का जानलेवा प्रयास कर रहे हैं। हद तो तब हो गई जब जेवर टोल प्लाजा को ये गुंडे बिना रुके, बिना टैक्स दिए सरेआम तोड़कर भाग निकले! गाड़ी के आगे नंबर प्लेट तक नहीं है। मुख्यमंत्री जी, कहाँ है आपकी वो 'जीरो टॉलरेंस' नीति? कहाँ हैं आपके वो बड़े-बड़े दावे कि 'यूपी में अब अपराधी या तो जेल में हैं या प्रदेश छोड़ चुके हैं'? तत्काल इन पर बुलेट की रफ्तार से कार्रवाई करे, वरना आपके सुरक्षा के दावे सिर्फ कागजी साबित होंगे।
UP Congress155,801 görüntüleme • 2 ay önce

मोदी जी कहते हैं "सब चंगा सी", योगी जी कहते हैं "अपराधी गले में तख्ती लटकाए घूम रहे हैं"... लेकिन कैराना (शामली) के सीसीटीवी फुटेज में अपराधी तख्ती नहीं, सरेआम अवैध कट्टा लेकर तांडव कर रहे हैं। 22 सेकंड में फायरिंग करके अपराधी गायब हैं और पुलिस अब भी 'तलाश जारी है' का रटा-रटाया जवाब दे रही है। क्या यही भाजपा सरकार का 'रामराज्य' है जहां अपराधी कट्टा फंसने पर सड़क पर ठोक-ठोक कर उसे ठीक करते हैं और पुलिस तमाशबीन बनी रहती है? 5 नामजद आरोपी पुलिस की पहुंच से बाहर क्यों? शर्मनाक!
UP Congress495,927 görüntüleme • 7 ay önce

गाजियाबाद की सड़क पर अर्धनग्न अवस्था में बैठी एक औरत कह रही है, "मैं कहती रही मेरे पांच बच्चे हैं छोड़ दो मुझे... नेताजी का बेटा मुझे झाड़ियां में ले गया... दारू की बोतल खोली दारू पिया और मेरा रेप किया..." यह बात कितनी मार्मिक है! अगर यह सुन कर भी सत्ताधीश का दिल नहीं पसीजता है तो तय मानिए कि उसके सीने में हृदय नहीं पत्थर है। कौन हैं वो नेताजी, जिन्होंने इतने नीच पुत्र को जन्म दिया है? इसका पर्दाफाश होना चाहिए और उसे इतनी कठोर सजा मिलनी चाहिए कि उसे माँ के ममता की कीमत समझ में आ जाये। अगर योगी सरकार इस मामले के गुनहगार को भी बचाने की कोशिश करती है तो उसे माँ और मातृत्व का अपमान कहा जायेगा।
UP Congress1,225,487 görüntüleme • 2 yıl önce

वीडियो मैनपुरी के पीडब्ल्यूडी कार्यालय का है.. जो पीट रहे हैं वो ठेकेदार हैं और जो पिट रहे हैं वो बड़े बाबू हैं.. बड़े बाबू दलित हैं तो जातिसूचक गालियां भी दी गईं.. बड़े बाबू की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने नियमों के अनुसार ठेकेदार के बिल को भुगतान से पहले जांच के लिए भेज दिया था। जब इस मामले पर एक्सईएन से पूछा गया, तो उन्होंने कहा: 'कोई बेवजह नहीं मारता, कुछ न कुछ बात तो होगी ही।' सत्ता और संरक्षण के नशे में चूर गुंडों को पता है कि दलित कर्मचारियों को निशाना बनाना आज बिना किसी डर के संभव है। योगीराज में जातीय नफरत का बीज कूट-कूट कर भरा हुआ है। शर्मनाक!
UP Congress419,680 görüntüleme • 1 yıl önce
1:57
Sensitive content
This media may contain sensitive content.

मुख्यमंत्री जी, अपने ही घर का हाल देखिए! गोरखपुर में ब्रह्मभोज के सामूहिक कार्यक्रम के बीच, एक सम्मानित अधिवक्ता के पिता और बिजली विभाग के ठेकेदार की सब्बल और तलवारों से सरेआम निर्मम हत्या कर दी गई। जब मुख्यमंत्री के अपने गृह क्षेत्र में ऐसा वीभत्स 'जंगलराज' पैर पसार चुका है, तो सोचिए प्रदेश के बाकी जिलों में आम जनता किस खौफ में जी रही होगी? आज उत्तर प्रदेश में न्याय की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं के परिवार भी सुरक्षित नहीं बचे हैं। यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की ध्वस्त हो चुकी कानून-व्यवस्था का सीधा प्रमाण है। मुख्यमंत्री जी, इस महा-जंगलराज पर तो आपकी चुप्पी नहीं चल सकती!
UP Congress28,963 görüntüleme • 22 gün önce

ये है भाजपा सरकार का तथाकथित 'कानून राज'! जब सूबे की राजधानी लखनऊ में सरेआम दबंगई, गुंडागर्दी और अराजकता का ये खौफनाक आलम है, तो पूरे प्रदेश की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अपराधियों में पुलिस और कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं रह गया है। कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है! योगी आदित्यनाथ जी.. ये कैसा जंगलराज कायम किया है आपने?
UP Congress27,757 görüntüleme • 22 gün önce

योगी के जंगलराज में नहीं सुरक्षित हैं बेटियां सहारनपुर में छेड़छाड़ से परेशान एक 10वीं की छात्रा ने कीटनाशक पीकर जान दे दी। छात्रा के द्वारा ही बनाया गया आत्महत्या का यह वीडियो लानत भेज रहा है योगी आदित्यनाथ की सरकार को, जिसने एंटी रोमियो स्क्वॉड के गठन के दौरान विज्ञापन में करोड़ों खर्च करके वाह-वाही लूटी थी, लेकिन सही मायने में उनका एंटी रोमियो स्क्वॉड सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित रह गया। आज प्रदेश में गुंडों का ऐसा खौफ हो गया है कि बेटियां घर से बाहर निकलने से डर रहीं हैं। शर्म करो योगी सरकार!
UP Congress309,442 görüntüleme • 1 yıl önce

भाजपा का 'पोस्टर बॉय' और वसूली का खेल! खुद को भाजपा नेता बताकर होटल में 2 लाख की रंगदारी मांगना ही क्या भाजपा का 'चाल-चरित्र' है? डांसरों के साथ वीडियो और सरेआम वसूली साबित करती है कि सत्ता के संरक्षण में अपराधी बेखौफ हैं। जब अपराधी फंसता है, तो भाजपा उसे 'अपना' मानने से इनकार कर देती है—यह दोहरा मापदंड कब तक चलेगा? शहर भर में पोस्टर लगाकर खुद को नेता बताने वाले पर पुलिस तब जागी जब मामला हाथ से निकल गया।
UP Congress107,403 görüntüleme • 4 ay önce

अमेठी में एक महिला पत्रकार SDM मुसाफिरखाना के दफ्तर में अपने मकान पर दबंग द्वारा किए गए कब्जे की शिकायत लेकर गई थी। उसने जब SDM साहिबा से उनके द्वारा दिए गए मौखिक आदेश पर मकान पर हुए कब्जे की बात कही तो साहिबा भड़क उठीं और बोलीं, "मैं आपका काम नही कर पाऊंगी, मेरा मूड खराब हो गया" और उन्होंने पत्रकार को ऑफिस से बाहर निकलवा दिया। योगीराज में महिला पत्रकार को न्याय मांगने के लिए अपनी बूढ़ी मां के साथ दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जब जनता की समस्याओं की आवाज उठाने वाली को बेघर होकर भटकना पड़ रहा है तो क्या आप सपने में भी सोच सकते हैं कि यहाँ आम आदमी को न्याय मिलेगा?
UP Congress447,672 görüntüleme • 2 yıl önce

अगर तुम्हें अब भी चीखें नहीं सुनाई देती हैं तो बहरा होना ही भला। अगर तुम अब भी देख नहीं सकते तो अंधा होना ही बेहतर। अगर तुम अब भी बोल नहीं सकते तो गूंगा रहना ही सबसे उचित। क्या तुम्हें अब भी शर्म नहीं आती? क्या तुमने मनुष्यता भी बेच खाई है? अब भी बोल दो मणिपुर का 'म'।
UP Congress624,989 görüntüleme • 3 yıl önce