
History Of Rajputana
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|| मूल कर्तव्य: क्षत्रिय इतिहास अध्ययन ||
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पूरा वीडियो तो डालिये त्रिपाठी जी, इस वीडियो के शुरुआत में ही पता लग रहा है कि वीडियो बना रही महिला के पति ने पहले HDFC एम्प्लोयी आस्था सिंह के खिलाफ अभद्र शब्दों का प्रयोग किया। कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति उसको पलट के जवाब देगा, स्वाभिमान समझ आता है, या वो भी अपनी पत्रकारिता के साथ बेच आये हैं?
History Of Rajputana24,653 views • 5 months ago

सुखदेव सिंह जी गोगामेड़ी की हत्या को लेकर पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा का बयान।
History Of Rajputana79,679 views • 2 years ago

मेवाड़ के 77वें महाराणा और एकलिंग जी दीवान विश्वराज सिंह जी मेवाड़ (Vishvaraj Singh Mewar) का राज तिलक हुआ संपन्न। सलूम्बर के रावत साहब देवव्रत सिंह जी चूंडावत ने अंगूठा काटकर रक्त से विश्वराज सिंह जी मेवाड़ का राजतिलक किया। पितामह भीष्म ने जैसे हस्तिनापुर गद्दी के लिए ज्येष्ठ पुत्र होते हुए भी त्याग किया वैसे ही रावत साहब देवव्रत सिंह जी के पूर्वज चूंडा जी ने मेवाड़ के लिए त्याग किया, तभी से मेवाड़ में नए महाराणा चुनने का अधिकार चूंडावतो के पाटवी ठिकाने सलूम्बर को है। मेवाड़ का असली उत्तराधिकारी और गादीपति उसी को माना जाता है, जिसके पास : 1 - सलूम्बर के चूंडावतो की तलवार और स्याही। 2 - महाराणा प्रताप के छोटे भाई महाराज शक्ति सिंह जी के वंशज शक्तावतों के पाटवी ठिकाने भीण्डर के शक्तावतों का भाला और 3 - राणा सांगा के समय त्याग करने वाले झाला अज्ज़ा जी सज्जा जी तथा महाराणा प्रताप के समय त्याग करने वाले झाला मन्ना जी वंशजो के पाटवी ठिकाने बड़ी सादड़ी के झालाओ का चंवर ये तीनो चीजे जिसे प्रदान की जाती है, वही मेवाड़ का महाराणा बनता है। ये तीनो चीजे पुरे मेवाड़ के ठिकानेदारों और आमजन की मौजूदगी में महाराणा भगवत सिंह जी देवलोक गमन उपरान्त उनके ज्येष्ठ पुत्र महेंद्र सिंह जी को प्रदान की गयी थी, जिसके बाद आज विश्वराज सिंह जी को प्रदान की गयी है। जय एकलिंग जी जय महाराणा जय क्षात्र धर्म
History Of Rajputana48,231 views • 1 year ago

अभी दिल्ली विश्विद्यालय में "जाट सम्मेलन" और "आंबेडकर जयंती" नाम के 2 casteless आयोजन हुए. 3-4 सप्ताह बाद Yogesh Singh और Prafulla Akant के पेट में मरोड़े उठने लगेंगी और DU को याद आयेगा की 'प्रताप जयंती' तो जाति आधारित कार्यक्रम है, इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती. ये हमारे बच्चों को धमकाएंगे कि कैसे महाराणा प्रताप पर कार्यक्रम करने से आपको पुलिस उठा ले जायेगी, ये हमारे छात्रों को महाराणा प्रताप पर कार्यक्रम करने के लिए राष्ट्र विरोधी, सनातन विरोधी और पता नहीं क्या क्या संज्ञाएँ देंगे. ऐसा ये लोग दिल्ली विश्विद्यालय और बनारस विश्विद्यालय में कर चुके हैं, वह din दूर नहीं जब महाराणा का नाम लेने पर लोगों को राष्ट्र विरोधी घोषित कर दिया जाएगा. इन लोगों में हमारे लिए कितनी घृणा है, और कैसे हमारे चिन्हों को दबाया जा रहा है, ये उसका प्रत्यक्ष उदाहरण है.
History Of Rajputana11,043 views • 3 months ago

छोटिया जी से आग्रह रहेगा कि रात 8 बजे के बाद ट्वीट न किया करें, उनके शब्दों में अर्थ ढूँढना मुश्किल हो जाता है। एक तरफ़ वे अंग्रेज़ों के परिधान को “अंग्रेज़ों का परिधान” कहने में संकोच नहीं करते, पर राजपूतों के परिधान को “राजपूतों का परिधान” कहने में उन्हें कुण्ठा महसूस होती है। मैंने तो स्पष्ट लिखा ही है कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारे पूर्वजों द्वारा आविष्कृत परिधान आज प्रधानमंत्री द्वारा धारण किया जाता है। लेकिन जिस प्रकार सर प्रताप सिंह द्वारा आविष्कृत जोधपुर कोट को “नेहरू जैकेट” बना दिया गया, उसी प्रकार सर प्रताप सिंह द्वारा स्थापित और महाराजा सरदार सिंह द्वारा प्रचलित साफे की ऐतिहासिक पहचान को हम धूमिल नहीं होने देंगे। Arvind Chotia जी का इतिहास और सामाजिक समझ दोनों ही कमज़ोर हैं, इसलिए वे साफे का व्यावहारिक उपयोग नहीं समझ पाते। हर समाज का अपना परिधान होता था जो उनके रीति-रिवाज़ और आजीविका के अनुसार निर्धारित था। इसमें कोई ऊँच-नीच नहीं, सब अपनी जगह महान हैं। उदाहरणतया रेबारी साफा उनके इतिहास का प्रतीक है, उस पहचान को आप उस समाज से क्यों छीनना चाहते हैं? यह कहीं न कहीं जातीय कुण्ठा दर्शाता है। मुझे स्वयं रेबारी साफा बहुत पसंद है, विशेषकर उसका विशिष्ट लाल रंग। कल को यदि मैं उसे धारण भी करूँ, तो भी उसे सम्मानपूर्वक “रेबारी साफा” ही कहना पसंद करूँगा, जिस प्रकार पुरोहितों का अपना साफा था, महाजनों का अपना, जाटों का अपना, महेश्वरियों का अपना। आप राजस्थान के इतिहास को क्यों समाप्त करना चाहते हैं, छोटिया जी? ईश्वर छोटिया जी को रात 8 बजे के बाद अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की क्षमता प्रदान करें। 🙏
History Of Rajputana20,414 views • 8 months ago

जाट चाहे किसी भी संवैधानिक पद पर बैठा हो वो पहले जाट है फिर इस देश का नागरिक। एक जाट गवर्नर और उपराष्ट्रपति के खयाल आप अपनी जाति के प्रति रोज देखते ही रहते हैं। आज एक पूर्व PM के भी जान लीजिए। जो लोग प्रधानमंत्री के पद पर बैठ कर भी न्याय नहीं कर पाते, उनसे लोग कैसे उम्मीद कर सकते हैं किसी भी न्याय की?
History Of Rajputana28,137 views • 1 year ago

मूल ओबीसी जातियां जैसे बिश्नोई, माली , लोहार, नाई, कुम्हार, सुथार, आदि की आवाज सबसे पहले कर्नल केसरी सिंह ने ही उठाई थी की किस तरह राजस्थान में एक विशेष वर्ग इन सभी मूल obc जातियों का हक खाने पर आमदा है।इस वीडियो को देखे और कर्नल साहब का Modus Operandi समझे। #RajasthanWithKesari
History Of Rajputana46,737 views • 2 years ago

There’s a fundamental difference between the two: Rajputs pushed the Mughal Empire into disarray. Marathas entered the scene later, not as liberators, but as tax collectors on behalf of Mughals. In fact, Mahadji Scindia officially served as the Wakil of Mughal Emperor. Listen to this video of a Jat officer speaking about the Maratha regime’s tax oppression. The core issue lies in intent: Marathas never aspired to rule. They were content with looting and pillaging, often the subjects were put through multiple competing Maratha chiefs, each seeking their own gain rather than building a just and accountable system.
History Of Rajputana21,479 views • 11 months ago

भारत में अगर ऐतिहासिक कृतघ्नता और बौद्धिक दरिद्रता के उदाहरण गिनाने हों, तो यह क्लिप बिना किसी संदेह के शीर्ष पर आएगी। जिस भूमि का नाम ही राव शेखाजी के नाम पर पड़ा हो, उसी शेखावाटी में खड़े होकर कुछ लोग यह कहते फिरें कि उन्होंने राव शेखाजी का नाम नहीं सुना और उनकी मूर्ति नहीं लगने देंगे—यह केवल अज्ञान नहीं, यह खुला हुआ ढिठाई भरा अपमान है। राव शेखाजी कोई लोककथा के पात्र नहीं थे, बल्कि उसी भूभाग के निर्माता थे जिस पर ये लोग आज सांस ले रहे हैं। उनके वंशजों ने पाँच सौ वर्षों तक शेखावाटी को आबाद रखा, संगठित किया, आक्रमणकारियों से बचाया और मरुस्थल को बसने योग्य बनाया। अगर इतिहास में ज़रा भी ईमानदारी बची होती, तो यह प्रश्न ही नहीं उठता कि उनका सम्मान क्यों होना चाहिए। राव शेखाजी के नाम से इनकार करना किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं है; यह पूरे शेखावाटी अंचल, उसके बलिदान, उसके शौर्य और उसकी पहचान पर थूकने के बराबर है। जिन्हें अपने क्षेत्र के संस्थापक का नाम भी असहज करता है, उन्हें इतिहास से समस्या नहीं, उन्हें अपनी औक़ात याद दिलाने से समस्या है। PS: मूर्ति लग चुकी है, अब जिसे जितनी खुजली हो जो उखाड़ सकता है, उखाड़ कर दिखा दे। इतिहास को हटाने की ताक़त किसी में नहीं है।
History Of Rajputana13,398 views • 6 months ago

Fact check: 1. महाराजा हरि सिंह जी कश्मीर पर हमले से 1 महीने पहले ही अपने प्रधानमंत्री महर चंद महाजन को नेहरू से प्रत्यर्पण हेतु दिल्ली भेजते हैं। 2. नेहरू प्रत्यर्पण को यह कहकर मना कर देते हैं कि पहले शेख अब्दुल्लाह को कैद से रिहा किया जाए। महाराजा अब्दुल्लाह के खतरनाक मंसूबों को जानते हुए मना करते हैं, और बिना रिहा किए ही विलय की संभावना को तलाशते हैं। 3. नेहरू किसी भी कीमत पर बिना अब्दुल्लाह के जम्मू कश्मीर का विलय नहीं चाहते थे। 4. अंततः महाराजा कश्मीर बचाने के लिए अबदुल्लाह को रिहा करने के लिए मान जाते हैं और जम्मू कश्मीर का विलय भारत में होता है। 5. ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह जामवाल के नेतृत्व में डोगरा फोर्सेस बहादुरी से लड़ती है और पाकिस्तानी लड़ाकों को श्रीनगर पहुंचने से रोक लेती है। 6. पटेल के कहने पर भारतीय फोर्सेस को दिल्ली कश्मीर भेजा जाता है। 7. भारतीय फोर्सेस श्रीनगर को सेफ करके पूरे कश्मीर पर कब्ज़ा हेतु आगे बढ़ती है। 8. तब तक नेहरू बिना केबिनेट से पूछे, बिना सरदार पटेल को बताए, कश्मीर मामले को United Nations में घसीट ले जाते हैं और भारतीय ल जाते है जिससे ना सिर्फ भारतीय फोर्सेज को रुकना पड़ता है बल्कि ये पूरा कश्मीर मामला ही हमेशा के लिए लटक जाता है। महाराजा कितने दूरदर्शी थे और वो क्यों अब्दुल्लाह को रिहा नहीं करना चाहते थे वो इसी बात से साबित हो जाता है कि आज़ादी के महज 6 साल बाद ही नेहरू खुद शेख अब्दुल्लाह को 11 साल के लिए कैद कर देते हैं। कश्मीर समस्या के केवल 2 ही लोग ज़िम्मेदार है: जवाहर लाल नेहरू और शेख अब्दुल्लाह। पर यह बात विपुल मिश्रा जैसे लोगों को नहीं समझ आएगी Exx Cricketer
History Of Rajputana24,052 views • 1 year ago

यह देश वाकई विचित्र है। इस देश में ऐसे-ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने राज्यपाल रहते हुए खुले मंच से अपनी जाति के लोगों को गोवा राजभवन में आकर छुट्टियाँ मनाने का सार्वजनिक निमंत्रण दिया। लेकिन तब न किसी सुभाषिनी अली को तकलीफ़ हुई, न Umashankar Singh उमाशंकर सिंह को, न ही ANIL, @vivektri, Piyush Rai या के पेट में दर्द उठा। मगर जैसे ही एक बैंक कर्मचारी के साथ एक पुरुष ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया, उसे गालियाँ दीं, और उस महिला ने अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई—पूरा लिबरल कबीला तिलमिला उठा। हाँ, हम ठाकुर हैं। जिसे जो उखाड़ना है, उखाड़ ले। These same dumbsters turn deaf when Jatt songs dominate the Punjabi music industry.
History Of Rajputana10,478 views • 5 months ago

पहले समझ जाते तो ये दिन ना देखना पड़ता! #क्षत्रिय_स्वाभिमान_सर्वोपरि
History Of Rajputana24,552 views • 2 years ago

ऐसी महिलाए शेरों को जन्म देती है। 🙏🏻 सियाचिन में बंकर में आग लगने पर देवरिया के लाल अमर बलिदानी कैप्टन अंशुमन सिंह ने अपनी जान की परवाह किए बिना कई सैनिकों की बचाई थी जान। कैप्टन अंशुमन सिंह की वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित गया। शत शत नमन 🙏🏻
History Of Rajputana22,714 views • 2 years ago

Haifa Battle: A historic turning point which ended the 400 yrs of Turkish rule over Haifa when Maj Dalpat Singh & Th. Aman Singh of Jodhpur Lancers led last great cavalry charge in world. The victory was one of its kind as outnumbered Rajput swords defeated Ottoman machine guns.
History Of Rajputana25,749 views • 2 years ago
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