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History Of Rajputana

@KshatriyaItihas34,441 subscribers

|| मूल कर्तव्य: क्षत्रिय इतिहास अध्ययन ||

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"Here lies the strength of Rajput traditions, standing tall amidst the pages of history" Rivaba Ravindrasinh Jadeja 🙏🏻

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मेवाड़ के 77वें महाराणा और एकलिंग जी दीवान विश्वराज सिंह जी मेवाड़ (Vishvaraj Singh Mewar) का राज तिलक हुआ संपन्न। सलूम्बर के रावत साहब देवव्रत सिंह जी चूंडावत ने अंगूठा काटकर रक्त से विश्वराज सिंह जी मेवाड़ का राजतिलक किया। पितामह भीष्म ने जैसे हस्तिनापुर गद्दी के लिए ज्येष्ठ पुत्र होते हुए भी त्याग किया वैसे ही रावत साहब देवव्रत सिंह जी के पूर्वज चूंडा जी ने मेवाड़ के लिए त्याग किया, तभी से मेवाड़ में नए महाराणा चुनने का अधिकार चूंडावतो के पाटवी ठिकाने सलूम्बर को है। मेवाड़ का असली उत्तराधिकारी और गादीपति उसी को माना जाता है, जिसके पास : 1 - सलूम्बर के चूंडावतो की तलवार और स्याही। 2 - महाराणा प्रताप के छोटे भाई महाराज शक्ति सिंह जी के वंशज शक्तावतों के पाटवी ठिकाने भीण्डर के शक्तावतों का भाला और 3 - राणा सांगा के समय त्याग करने वाले झाला अज्ज़ा जी सज्जा जी तथा महाराणा प्रताप के समय त्याग करने वाले झाला मन्ना जी वंशजो के पाटवी ठिकाने बड़ी सादड़ी के झालाओ का चंवर ये तीनो चीजे जिसे प्रदान की जाती है, वही मेवाड़ का महाराणा बनता है। ये तीनो चीजे पुरे मेवाड़ के ठिकानेदारों और आमजन की मौजूदगी में महाराणा भगवत सिंह जी देवलोक गमन उपरान्त उनके ज्येष्ठ पुत्र महेंद्र सिंह जी को प्रदान की गयी थी, जिसके बाद आज विश्वराज सिंह जी को प्रदान की गयी है। जय एकलिंग जी जय महाराणा जय क्षात्र धर्म

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48,231 görüntüleme • 1 yıl önce

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अभी दिल्ली विश्विद्यालय में "जाट सम्मेलन" और "आंबेडकर जयंती" नाम के 2 casteless आयोजन हुए. 3-4 सप्ताह बाद Yogesh Singh और Prafulla Akant के पेट में मरोड़े उठने लगेंगी और DU को याद आयेगा की 'प्रताप जयंती' तो जाति आधारित कार्यक्रम है, इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती. ये हमारे बच्चों को धमकाएंगे कि कैसे महाराणा प्रताप पर कार्यक्रम करने से आपको पुलिस उठा ले जायेगी, ये हमारे छात्रों को महाराणा प्रताप पर कार्यक्रम करने के लिए राष्ट्र विरोधी, सनातन विरोधी और पता नहीं क्या क्या संज्ञाएँ देंगे. ऐसा ये लोग दिल्ली विश्विद्यालय और बनारस विश्विद्यालय में कर चुके हैं, वह din दूर नहीं जब महाराणा का नाम लेने पर लोगों को राष्ट्र विरोधी घोषित कर दिया जाएगा. इन लोगों में हमारे लिए कितनी घृणा है, और कैसे हमारे चिन्हों को दबाया जा रहा है, ये उसका प्रत्यक्ष उदाहरण है.

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11,043 görüntüleme • 3 ay önce

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छोटिया जी से आग्रह रहेगा कि रात 8 बजे के बाद ट्वीट न किया करें, उनके शब्दों में अर्थ ढूँढना मुश्किल हो जाता है। एक तरफ़ वे अंग्रेज़ों के परिधान को “अंग्रेज़ों का परिधान” कहने में संकोच नहीं करते, पर राजपूतों के परिधान को “राजपूतों का परिधान” कहने में उन्हें कुण्ठा महसूस होती है। मैंने तो स्पष्ट लिखा ही है कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारे पूर्वजों द्वारा आविष्कृत परिधान आज प्रधानमंत्री द्वारा धारण किया जाता है। लेकिन जिस प्रकार सर प्रताप सिंह द्वारा आविष्कृत जोधपुर कोट को “नेहरू जैकेट” बना दिया गया, उसी प्रकार सर प्रताप सिंह द्वारा स्थापित और महाराजा सरदार सिंह द्वारा प्रचलित साफे की ऐतिहासिक पहचान को हम धूमिल नहीं होने देंगे। Arvind Chotia जी का इतिहास और सामाजिक समझ दोनों ही कमज़ोर हैं, इसलिए वे साफे का व्यावहारिक उपयोग नहीं समझ पाते। हर समाज का अपना परिधान होता था जो उनके रीति-रिवाज़ और आजीविका के अनुसार निर्धारित था। इसमें कोई ऊँच-नीच नहीं, सब अपनी जगह महान हैं। उदाहरणतया रेबारी साफा उनके इतिहास का प्रतीक है, उस पहचान को आप उस समाज से क्यों छीनना चाहते हैं? यह कहीं न कहीं जातीय कुण्ठा दर्शाता है। मुझे स्वयं रेबारी साफा बहुत पसंद है, विशेषकर उसका विशिष्ट लाल रंग। कल को यदि मैं उसे धारण भी करूँ, तो भी उसे सम्मानपूर्वक “रेबारी साफा” ही कहना पसंद करूँगा, जिस प्रकार पुरोहितों का अपना साफा था, महाजनों का अपना, जाटों का अपना, महेश्वरियों का अपना। आप राजस्थान के इतिहास को क्यों समाप्त करना चाहते हैं, छोटिया जी? ईश्वर छोटिया जी को रात 8 बजे के बाद अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की क्षमता प्रदान करें। 🙏

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20,414 görüntüleme • 8 ay önce

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Fact check: 1. महाराजा हरि सिंह जी कश्मीर पर हमले से 1 महीने पहले ही अपने प्रधानमंत्री महर चंद महाजन को नेहरू से प्रत्यर्पण हेतु दिल्ली भेजते हैं। 2. नेहरू प्रत्यर्पण को यह कहकर मना कर देते हैं कि पहले शेख अब्दुल्लाह को कैद से रिहा किया जाए। महाराजा अब्दुल्लाह के खतरनाक मंसूबों को जानते हुए मना करते हैं, और बिना रिहा किए ही विलय की संभावना को तलाशते हैं। 3. नेहरू किसी भी कीमत पर बिना अब्दुल्लाह के जम्मू कश्मीर का विलय नहीं चाहते थे। 4. अंततः महाराजा कश्मीर बचाने के लिए अबदुल्लाह को रिहा करने के लिए मान जाते हैं और जम्मू कश्मीर का विलय भारत में होता है। 5. ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह जामवाल के नेतृत्व में डोगरा फोर्सेस बहादुरी से लड़ती है और पाकिस्तानी लड़ाकों को श्रीनगर पहुंचने से रोक लेती है। 6. पटेल के कहने पर भारतीय फोर्सेस को दिल्ली कश्मीर भेजा जाता है। 7. भारतीय फोर्सेस श्रीनगर को सेफ करके पूरे कश्मीर पर कब्ज़ा हेतु आगे बढ़ती है। 8. तब तक नेहरू बिना केबिनेट से पूछे, बिना सरदार पटेल को बताए, कश्मीर मामले को United Nations में घसीट ले जाते हैं और भारतीय ल जाते है जिससे ना सिर्फ भारतीय फोर्सेज को रुकना पड़ता है बल्कि ये पूरा कश्मीर मामला ही हमेशा के लिए लटक जाता है। महाराजा कितने दूरदर्शी थे और वो क्यों अब्दुल्लाह को रिहा नहीं करना चाहते थे वो इसी बात से साबित हो जाता है कि आज़ादी के महज 6 साल बाद ही नेहरू खुद शेख अब्दुल्लाह को 11 साल के लिए कैद कर देते हैं। कश्मीर समस्या के केवल 2 ही लोग ज़िम्मेदार है: जवाहर लाल नेहरू और शेख अब्दुल्लाह। पर यह बात विपुल मिश्रा जैसे लोगों को नहीं समझ आएगी Exx Cricketer

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24,052 görüntüleme • 1 yıl önce

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भारत में अगर ऐतिहासिक कृतघ्नता और बौद्धिक दरिद्रता के उदाहरण गिनाने हों, तो यह क्लिप बिना किसी संदेह के शीर्ष पर आएगी। जिस भूमि का नाम ही राव शेखाजी के नाम पर पड़ा हो, उसी शेखावाटी में खड़े होकर कुछ लोग यह कहते फिरें कि उन्होंने राव शेखाजी का नाम नहीं सुना और उनकी मूर्ति नहीं लगने देंगे—यह केवल अज्ञान नहीं, यह खुला हुआ ढिठाई भरा अपमान है। राव शेखाजी कोई लोककथा के पात्र नहीं थे, बल्कि उसी भूभाग के निर्माता थे जिस पर ये लोग आज सांस ले रहे हैं। उनके वंशजों ने पाँच सौ वर्षों तक शेखावाटी को आबाद रखा, संगठित किया, आक्रमणकारियों से बचाया और मरुस्थल को बसने योग्य बनाया। अगर इतिहास में ज़रा भी ईमानदारी बची होती, तो यह प्रश्न ही नहीं उठता कि उनका सम्मान क्यों होना चाहिए। राव शेखाजी के नाम से इनकार करना किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं है; यह पूरे शेखावाटी अंचल, उसके बलिदान, उसके शौर्य और उसकी पहचान पर थूकने के बराबर है। जिन्हें अपने क्षेत्र के संस्थापक का नाम भी असहज करता है, उन्हें इतिहास से समस्या नहीं, उन्हें अपनी औक़ात याद दिलाने से समस्या है। PS: मूर्ति लग चुकी है, अब जिसे जितनी खुजली हो जो उखाड़ सकता है, उखाड़ कर दिखा दे। इतिहास को हटाने की ताक़त किसी में नहीं है।

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13,398 görüntüleme • 6 ay önce

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