
Manjeet Negi
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Executive Editor of @Aajtak & @Indiatoday #Defence #Strategicaffairs & #Politics, Author of 3 books,Tweets & retweets are personal…डर के आगे मन-जीत है…
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Today, CDS General Anil Chauhan retires after more than 40 years of distinguished service to the nation. Before demitting office, he visited the National War Memorial with his family, including his 90+ year-old father. He was accorded a Tri-Services Guard of Honour in recognition of his remarkable military career. From a young officer to India's top military post, General Chauhan's journey is a testament to leadership, dedication, and service. He has guided the Armed Forces through a period of significant transformation and integration. His career reflects unwavering commitment to national security and military excellence. A soldier, a leader, and an inspiration for generations to come. 🇮🇳 HQ IDS
Manjeet Negi43,464 次观看 • 13 天前

पौड़ी में डीएम के औचक निरीक्षण के दौरान जल संस्थान कार्यालय में कई कर्मचारी और अधिकारी अनुपस्थित मिले। वीडियो कॉल पर जेई घर पर मिले, जिसके बाद संबंधित जेई को प्रतिकूल प्रविष्टि देने और एई से जवाब तलब करने के निर्देश दिए गए। यह घटना सिर्फ एक विभाग की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। लोग अपनी ड्यूटी को गंभीरता से नहीं निभाते। चाहे सरकारी अस्पताल हो, सरकारी स्कूल, तहसील या कोई अन्य सरकारी संस्थान, लापरवाही का सबसे बड़ा असर आखिरकार आम जनता पर ही पड़ता है। जब अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्यों से दूर भागते हैं, तब जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। सरकारी नौकरी केवल वेतन और सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के प्रति जिम्मेदारी और जवाबदेही भी है। ऐसे लापरवाह तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना बेहद जरूरी है ताकि सिस्टम में अनुशासन बना रहे और लोगों का भरोसा प्रशासन पर कायम रह सके।
Manjeet Negi34,990 次观看 • 23 天前

सेना प्रमुख बनने के बाद सबसे पहले जनरल बिपिन रावत ने अफसर के घरों में तैनात अतिरिक्त ऑर्डरली हटाकर उन्हें फील्ड ड्यूटी में लगाया, जिससे पूर्व आर्मी चीफ की पत्नी उनसे नाराज़ हो गई थीं। यही साफ़ सोच उन्हें सबसे अलग बनाती थी,सुनिए उनका यह किस्सा। #bipinrawat #generalbipinrawat
Manjeet Negi90,745 次观看 • 4 个月前

DRDO has rolled out the Vikram VT21 Advanced Armoured Platform (tracked & wheeled), developed by Vehicle Research and Development Laboratory with partners Tata Advanced Systems Limited and Bharat Forge Limited in a record 3 years. The platform is designed for Infantry Combat Vehicle (ICV) and Armoured Personnel Carrier (APC) roles for Indian Armed Forces. It offers advanced protection with STANAG Level 4 & 5 modular blast and ballistic protection. DRDO Tata Advanced Systems Limited Bharat Forge Ltd
Manjeet Negi32,313 次观看 • 1 个月前

शायद अलकनंदा नदी कुछ समय बाद विलुप्त हो जाए, तो हमें आश्चर्य नहीं होगा। श्रीनगर गढ़वाल में अलकनंदा की जो हालत हो चुकी है, वह बेहद दुखद और चिंताजनक है। अवैध खनन ने नदी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। दिन-रात जेसीबी और ट्रकों ने लगातार खुदाई कर नदी को भीतर से खोखला कर दिया है। जहाँ कभी जल की अविरल धारा बहती थी, आज वहाँ सूखी रेत और गड्ढे दिखाई देते हैं। नदी का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह नष्ट किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संतुलन, जलस्तर और जैव विविधता पर गहरा असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की आजीविका और भविष्य भी खतरे में है। हैरानी की बात यह है कि राज्य सरकार और उसके अधिकारी पूरी तरह मौन हैं। सब जानते हैं कि यह चुप्पी किसके हित में है। नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। यह सरकार की नाकामी और उदासीनता को साफ दर्शाता है। प्राकृतिक संसाधनों का यह दोहन किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। अब हर जागरूक नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है कि वह आवाज़ उठाए और सरकार को जवाबदेह बनाए।
Manjeet Negi21,567 次观看 • 4 个月前

देहरादून से प्राप्त एक वीडियो ने बिंदाल नदी के साथ हो रहे गंभीर पर्यावरणीय अपराध को उजागर किया है। वीडियो में साफ़ दिखाई देता है कि किस तरह भू-माफिया और खनन माफिया ने मिलकर नदी के प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़ की है। बिंदाल नदी का मुख/प्रवाह जबरन बदला गया है, जो पूरी तरह अवैध है। नदी क्षेत्र के भीतर नियमों को दरकिनार कर पक्के ढांचे खड़े कर दिए गए हैं। वहां अवैध भरान और निर्माण कार्य भी धड़ल्ले से किया गया है। यह सब किसी एक दिन का काम नहीं, बल्कि सुनियोजित गतिविधियों का परिणाम लगता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े स्तर पर यह सब आखिर किसकी शह पर हो रहा है? क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं देता, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? राज्य सरकार की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाला NGT इस पूरे मामले में अब तक खामोश क्यों है? नदी के प्राकृतिक मुख से छेड़छाड़ भविष्य में बाढ़ और बड़े नुकसान को न्योता दे सकती है। देहरादून पहले ही पर्यावरणीय दबाव झेल रहा है, ऐसे में यह लापरवाही बेहद खतरनाक है। अब ज़रूरत है कि दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो और संरक्षण देने वालों को भी बेनकाब किया जाए।
Manjeet Negi16,435 次观看 • 5 个月前
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