
Medha Yadav
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नागरिक ज़िम्मेदार हूँ। Tweets ठोस निजी हैं। काम जारी है @jist_news के साथ
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धनबाद की एक और जगह, कोयले की ख़ानों के आस-पास बसी बस्तियाँ इसी तरह रहती हैं। डंपर वाले को थोड़े बहुत पैसे देकर कोयला गिराते हैं, फिर उसे फुटकर में बेचते हैं। ग़रीबी की वजह से मूलभूत सुविधाओं से ये लोग इतने दूर हैं कि रोज़ाना कुछ कमा पाना ही इनका दीर्घकालिक लक्ष्य बन जाता है।
Medha Yadav342,477 views • 11 months ago

When did the last time you laugh without listening to a joke? 🙊
Medha Yadav74,776 views • 3 months ago

शिक्षा कैसे पुल बनती है ये इसका उदाहरण रहा। झारखंड के जामताड़ा का एक गाँव, भाषा समझने में थोड़ी मुश्किल हो रही थी। तब वहाँ ये बच्ची मिली, अर्पिता नाम था। फिर उतनी देर के लिए अर्पिता मेरी अनुवादक रही, उसकी वजह से मैं वहाँ के लोगों की बात आप तक पहुँचा पायी। जब बेसिक शिक्षा इतनी दूरी पाट सकती है तो सोचती हूँ यहाँ भरपूर मौक़े पहुंचना कितना कुछ बदल देंगे।
Medha Yadav186,633 views • 11 months ago

हम में से किसी ने भी अपनी जाति मर्ज़ी से नहीं चुनी। लेकिन फिर भी हम में से कुछ लोग अपनी जाति पर गर्व करते हैं और कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें जीवनभर जाति की वजह से अपमान झेलना पड़ता है। ये रिपोर्ट देखकर शायद आप समझ पाएंगे कि देश में ऊँची और नीची जाति के बीच की खाई को जीना क्या होता है।
Medha Yadav130,494 views • 7 months ago

गैंगरेप को लेकर एक महिला मुख्यमंत्री का फूहड़ और बेतुका बयान सुनने के बाद फिर से ये शेयर कर रही हूँ। जगह भी कोलकाता ही थी, और रात के करीब 1:30 बज रहे थे, जब ये बात मैं RG कर मेडिकल कॉलेज से थोड़ी दूर खड़े होकर बोल रही थी। माहौल ऐसा था कि कैब ड्राइवर भी डर की वजह से छोड़कर जा चुके थे। लेकिन मैंने वहाँ खड़े रहना चुना, रोते चीखते लोगों को सुनना चुना। उस वक्त वही मेरा दायित्व था। बाहर तो उसको नहीं निकलने देना चाहिए जो समाज के लिए लोगों के लिए खतरा है। ग़ज़ब हाल है मानसिकता का!
Medha Yadav129,694 views • 8 months ago

कोई शायर जब अपने शेर, अपनी ग़ज़ल भूलने लगे, जब याद दिलाने पर भी याद ना आए कुछ तो कैसा लगता होगा। शायद बेचैनी होती होगी, मगर जब कुछ याद नहीं रहता तो क्या याद रहता है? क्या उन्हें ये मालूम होता होगा कि उनके शेर दुनिया को याद रहने लगे, लोग खुदको उनमें ढूँढने लगे। जब कोई उलझा हुआ व्यक्ति किसी से ये कहता हो कि “परेशाँ हो तुम भी परेशाँ हूँ मैं भी चलो मय-कदे में वहीं बात होगी” तो कितनी गिरहें सुलझती होंगी। पता नहीं कोई शायर किसी ग़ज़ल का इतना बड़ा हो जाना, किसी नज़्म का आसमान हो जाना महसूस कर भी पाता होगा या नहीं, लेकिन हम दूर से देखने सुनने और इस लिखे हुए को पढ़ने वाले लोग कितना मुस्कुराते हैं, कितना महसूस करते हैं, कितना जीते हैं इन अल्फ़ाज़ के बूते पर। क्या खूब ज़िंदगी रही हमारे सामने, क्या खूब बीती होगी वो शायर जाने। जहाँ रहें सुकूँ में रहें, बशीर बद्र साहब! 💫🙏🌸
Medha Yadav12,590 views • 18 days ago

ये हो गया स्वागत बिहार में। बिहार चुनाव का पहला वीडियो पटना के गांधी मैदान से।
Medha Yadav85,069 views • 8 months ago

क्या पत्रकारिता का पैमाना सरनेम तय करेगा? ऐसा पहली बार नहीं हुआ मेरे साथ कि मेरी मेहनत मेरी रिपोर्टिंग को एक झटके में मेरे सरनेम तक समेट दिया गया हो, यही उस गहरी बीमारी का सबूत है जिसे Ingrained discrimination कहते हैं। मैं पहलगाम अटैक के दौरान भीड़ से घिरी थी, ऑपरेशन सिंदूर में बॉर्डर पर थी, अलग अलग चुनाव में जातिविशेष के गढ़ में थी और इन सब जगह मैं एक रिपोर्टर ही थी, जो अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही थी।
Medha Yadav48,035 views • 4 months ago

क्या-क्या लिखूँ इस रिपोर्ट के लिए। क्या ये लिखूँ कि जलवायु परिवर्तन की क़ीमत ये माँयें अपनी कोख से चुका रही हैं, या ये लिखूँ कि एक दिन की पगार ना काटी जाये इसलिए ये अपना यूटरस निकलवा रही हैं। ये गन्ना किसान हैं जिन्हें किसान का दर्जा भी नहीं मिला है, महाराष्ट्र में ये औरतें अपनी बच्चेदानी निकलवा रही हैं, और ये सब कुछ नया नहीं है, लेकिन बदला भी नहीं है। Report is live on Jist’s YouTube.
Medha Yadav13,663 views • 1 month ago

इस बार भी दिवाली घर से दूर वाली है। जब हम घर से दूर होते हैं तो आस-पास की दुनिया और चीज़ों में अपना घर ढूँढते हैं। बिहार में राघोपुर विधानसभा में थी, बाज़ार लगा था तो शगुन के खील-बतासे और दीये ख़रीद लिए। ये भाई पटना बाज़ार समिति में पढ़ते हैं और त्योहार पर अपने घर, पिता जी का हाथ बँटवाने आए हैं। (साथ ही अगली बार से कपड़े का थैला रखा करूँगी शूट पर।) सभी को दिवाली की शुभकामनाएं। 🪔
Medha Yadav59,962 views • 7 months ago

आप सबकी हिम्मत और आशीर्वाद मुझतक इस शक्ल में पहुँचा है। कृतज्ञ हूँ, आभारी हूँ! 🙏🌿🌸✨ IIMCAA award for ‘Reporter of the year’ (Broadcast). ये अवॉर्ड मुझे उस रिपोर्ट के लिए मिला है जिसने मुझपर गहरी छाप छोड़ी। मध्य प्रदेश के अलीराजपुर एयर झाबुआ से की गई रिपोर्ट, जो देश के सबसे गरीब ज़िले के हिस्से में आई एक हक़ीक़त पर थी।
Medha Yadav28,619 views • 3 months ago

मधुबनी के एक गांव में लोगों को सुविधा और जवाबदेही से दूर रखने की एक ग़ज़ब तरकीब दिखी। इस हेल्थ सेंटर में पहले तो ताला लगा हुआ था, ऊपर से पदाधिकारियों के नंबर ऐसे लिखे थे कोई फोन ही न कर पाए। ये सब देखकर दुख होता है, योजनाएं बन भी जाएं तो मक्कार लोग उनका लाभ लोगों तक पहुंचने ही नहीं देते। सब अपना काम ईमानदारी से करने लगें तो कितना कुछ बेहतर हो सकता है।
Medha Yadav44,951 views • 7 months ago