
Medha Yadav
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नागरिक ज़िम्मेदार हूँ। Tweets ठोस निजी हैं। काम जारी है @jist_news के साथ
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बिहार में 4 हज़ार वेकेंसीज़ के लिए 14 लाख लोग परीक्षा देने पहुंचे। स्टेशन पर जो लोग मौजूद थे, जो बच्चे ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे वो सब आम थे, उनमें कोई सरकारी अफ़सर या मिनिस्टर का बच्चा नहीं था। जो सिस्टम परीक्षा आयोजित करवाता है क्या उसके पास ये डेटा नहीं होता कि कितने बच्चों ने फॉर्म भरा है और उनको क्या-क्या व्यवस्था करनी होगी? ये तो पेपर लीक जैसी लापरवाही से बहुत पहले की बातें हैं।
Medha Yadav137,722 views • 3 months ago

धनबाद की एक और जगह, कोयले की ख़ानों के आस-पास बसी बस्तियाँ इसी तरह रहती हैं। डंपर वाले को थोड़े बहुत पैसे देकर कोयला गिराते हैं, फिर उसे फुटकर में बेचते हैं। ग़रीबी की वजह से मूलभूत सुविधाओं से ये लोग इतने दूर हैं कि रोज़ाना कुछ कमा पाना ही इनका दीर्घकालिक लक्ष्य बन जाता है।
Medha Yadav342,532 views • 1 year ago

दूसरी बार में सफ़ल लैंडिंग हो गई। प्लेन रनवे को छू गया, डर ख़त्म हुआ तो लोगों ने तालियाँ बजाईं। ज़्यादातर यात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे थे, वहाँ का डर ज़हन में ताज़ा रहा होगा। लेकिन जब बाहर निकली तो कुछ लोगों को ये कहते हुए सुना कि “अरे लेट हो गए काफ़ी” ग़ज़ब लोग हैं, जब हवा में जान पे बनने को आगयी थी, तब ज़िंदगी माँग रहे थे हम। जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ! 🌸🦚
Medha Yadav15,252 views • 17 days ago

No accountability at all. जवाबदेही शब्द ही शायद नागरिकशास्त्र की किताबों तक सिमट के रह गया है।
Medha Yadav46,080 views • 2 months ago

शिक्षा कैसे पुल बनती है ये इसका उदाहरण रहा। झारखंड के जामताड़ा का एक गाँव, भाषा समझने में थोड़ी मुश्किल हो रही थी। तब वहाँ ये बच्ची मिली, अर्पिता नाम था। फिर उतनी देर के लिए अर्पिता मेरी अनुवादक रही, उसकी वजह से मैं वहाँ के लोगों की बात आप तक पहुँचा पायी। जब बेसिक शिक्षा इतनी दूरी पाट सकती है तो सोचती हूँ यहाँ भरपूर मौक़े पहुंचना कितना कुछ बदल देंगे।
Medha Yadav186,711 views • 1 year ago

हम में से किसी ने भी अपनी जाति मर्ज़ी से नहीं चुनी। लेकिन फिर भी हम में से कुछ लोग अपनी जाति पर गर्व करते हैं और कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें जीवनभर जाति की वजह से अपमान झेलना पड़ता है। ये रिपोर्ट देखकर शायद आप समझ पाएंगे कि देश में ऊँची और नीची जाति के बीच की खाई को जीना क्या होता है।
Medha Yadav130,715 views • 10 months ago

गैंगरेप को लेकर एक महिला मुख्यमंत्री का फूहड़ और बेतुका बयान सुनने के बाद फिर से ये शेयर कर रही हूँ। जगह भी कोलकाता ही थी, और रात के करीब 1:30 बज रहे थे, जब ये बात मैं RG कर मेडिकल कॉलेज से थोड़ी दूर खड़े होकर बोल रही थी। माहौल ऐसा था कि कैब ड्राइवर भी डर की वजह से छोड़कर जा चुके थे। लेकिन मैंने वहाँ खड़े रहना चुना, रोते चीखते लोगों को सुनना चुना। उस वक्त वही मेरा दायित्व था। बाहर तो उसको नहीं निकलने देना चाहिए जो समाज के लिए लोगों के लिए खतरा है। ग़ज़ब हाल है मानसिकता का!
Medha Yadav129,739 views • 11 months ago

When did the last time you laugh without listening to a joke? 🙊
Medha Yadav74,776 views • 6 months ago

ग्राउंड पर किए गए मेरे अब तक के काम की सबसे ख़ूबसूरत बात ये है कि उसने मुझे उन लोगों को समझने का मौक़ा दिया जिन्होंने जल जंगल ज़मीन को सबसे ज़्यादा सहेजा है, जिसे वो पूजते हैं, प्रकृति जिनकी ज़िंदगी है। लेकिन बदलते दौर और भागती हुई दुनिया ने उन्हें ही सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाया, उनका हक़ छीना है। ये वीडियो 2024 की झारखंड की एक रिपोर्ट का हिस्सा है। जिसने एक छोटी बच्ची मेरी अनुवादक बनी और मुझे उनकी समस्याएँ समझने में उसने मदद की। #worldtribalday #jharkhand
Medha Yadav16,396 views • 1 month ago

ये हो गया स्वागत बिहार में। बिहार चुनाव का पहला वीडियो पटना के गांधी मैदान से।
Medha Yadav85,069 views • 11 months ago

एक रिपोर्ट से लौटते वक़्त राजस्थान में सिरोही से पाली के बीच में बिरामी टोल के पास हाईवे पर। मेरे वहाँ रुकने से पहले ही ये बीच सड़क पर बेसुध पड़े हुए थे। लोगों को लगा कि ज़िंदा नहीं हैं। लेकिन ताज्जुब है किसी ने सड़क से किनारे करने की भी ज़हमत नहीं की। मैंने 6 किलोमीटर पहले ही टोल क्रॉस किया था। तो किसी व्यक्ति की मदद से उसी टोल को सूचना दी। टोल फ्री एम्बुलेंस तो रेस्पॉन्सिव नहीं थी लेकिन टोल वालों ने बिना देरी के एम्बुलेंस वहाँ भेजी। प्रार्थना है कि ये ठीक हों। फ़ोन का लॉक नहीं खोल पाए। पहचान के लिए आधार चेक किया, सीकर के शाहपुरा के रहने वाले हैं। NHAI
Medha Yadav16,703 views • 1 month ago

किसी भूकंप या बाढ़ में हज़ारों लोग मारे जाएँ तो वो डिज़ास्टर हो जाता है, लेकिन यहाँ मज़दूर हज़ारों की संख्या में मर रहे हैं पर कोई ज़िम्मेदारी लेने वाला नहीं। ये सिलिकोसिस पर की गई रिपोर्ट राजस्थान की है। सिलिकोसिस फेफड़ों की वो बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन सरकार ने आँकड़ों में ढूँढ लिया है शायद। तो आपके पांव के नीचे जो पत्थर है वो किसी ऐसे ही मज़दूर की ज़िंदगी की दर्दनाक नक्काशी है।
Medha Yadav10,392 views • 28 days ago

क्या पत्रकारिता का पैमाना सरनेम तय करेगा? ऐसा पहली बार नहीं हुआ मेरे साथ कि मेरी मेहनत मेरी रिपोर्टिंग को एक झटके में मेरे सरनेम तक समेट दिया गया हो, यही उस गहरी बीमारी का सबूत है जिसे Ingrained discrimination कहते हैं। मैं पहलगाम अटैक के दौरान भीड़ से घिरी थी, ऑपरेशन सिंदूर में बॉर्डर पर थी, अलग अलग चुनाव में जातिविशेष के गढ़ में थी और इन सब जगह मैं एक रिपोर्टर ही थी, जो अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही थी।
Medha Yadav48,103 views • 7 months ago