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Medha Yadav

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नागरिक ज़िम्मेदार हूँ। Tweets ठोस निजी हैं। काम जारी है @jist_news के साथ

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बहुत वक़्त लगा है बहुत मुश्किल हुई। समय, भाषा और तापमान कुछ भी साथ नहीं दे रहा था। लेकिन कोशिश की है कि थोड़े कहे में बहुत समझाया जा सके। ये रिपोर्ट इस हफ़्ते आप तक पहुंचेगी। Stay with us! 🙏🙂

बहुत वक़्त लगा है बहुत मुश्किल हुई। समय, भाषा और तापमान कुछ भी साथ नहीं दे रहा था। लेकिन कोशिश की है कि थोड़े कहे में बहुत समझाया जा सके। ये रिपोर्ट इस हफ़्ते आप तक पहुंचेगी। Stay with us! 🙏🙂

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That’s how Jharkhand sees me off. 😃

That’s how Jharkhand sees me off. 😃

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When did the last time you laugh without listening to a joke? 🙊

Medha Yadav

74,776 просмотров • 3 месяцев назад

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कोई शायर जब अपने शेर, अपनी ग़ज़ल भूलने लगे, जब याद दिलाने पर भी याद ना आए कुछ तो कैसा लगता होगा। शायद बेचैनी होती होगी, मगर जब कुछ याद नहीं रहता तो क्या याद रहता है? क्या उन्हें ये मालूम होता होगा कि उनके शेर दुनिया को याद रहने लगे, लोग खुदको उनमें ढूँढने लगे। जब कोई उलझा हुआ व्यक्ति किसी से ये कहता हो कि “परेशाँ हो तुम भी परेशाँ हूँ मैं भी चलो मय-कदे में वहीं बात होगी” तो कितनी गिरहें सुलझती होंगी। पता नहीं कोई शायर किसी ग़ज़ल का इतना बड़ा हो जाना, किसी नज़्म का आसमान हो जाना महसूस कर भी पाता होगा या नहीं, लेकिन हम दूर से देखने सुनने और इस लिखे हुए को पढ़ने वाले लोग कितना मुस्कुराते हैं, कितना महसूस करते हैं, कितना जीते हैं इन अल्फ़ाज़ के बूते पर। क्या खूब ज़िंदगी रही हमारे सामने, क्या खूब बीती होगी वो शायर जाने। जहाँ रहें सुकूँ में रहें, बशीर बद्र साहब! 💫🙏🌸

Medha Yadav

12,590 просмотров • 18 дней назад