
Prof. Mukesh Kumar
@mukeshbudharwi • 15,556 subscribers
Four decades in Print, TV and Digital Journalism, Editor, https://t.co/RS9qlqSXjz and Satyahindi YouTube Channel, Media Educator, Writer, Columnist, Poet.
Shorts
Videos

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रम्प को रोककर अपनी बात कही। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने ट्रम्प की ग़लती को दुरुस्त किया, ट्रम्प ने जो बोला उसे चुपचाप स्वीकार नहीं कर लिया। ज़ेलेंस्की सबसे कमज़ोर स्थिति में थे मगर वे दादागीरी के ख़िलाफ़ प्रतिरोध करने लगे, झगड़ पड़े। एक भारत के प्रधानमंत्री मोदी थे जो ट्रम्प के गरल को अमृत वचनों की तरह सुनते रहे। ये फ़र्क़ है नेतृत्व का। फिर भी भक्त डंका बजाते रहेंगे क्योंकि वे भी इसी ग़ुलाम मानसिकता के लोग हैं।
Prof. Mukesh Kumar277,673 Aufrufe • vor 1 Jahr

ज्ञानेश कुमार जी ये क्या तमाशा लगा रखा है..... हमारे सांसदों की निजता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन हो रहा है। उनके फोटो खींचे जा रहे हैं, वीडियो बनाए जा रहे हैं। इसका फूटेज आम लोगों तक नहीं जाना चाहिए था। और मतदान ईवीएम से क्यों नहीं किया जा रहा है.....जहाँ मोदी जी जीत के प्रति आश्वस्त होते हैं वहां बैलेट पेपर से मतदान करवाते हैं, जहाँ नहीं होते ईवीएम से वोट डलवाते हैं।
Prof. Mukesh Kumar161,975 Aufrufe • vor 10 Monaten

लाल किले की प्राचीर पर एक थका और मजबूर प्रधानमंत्री था। बैसाखियों पर टिकी सरकार वाला ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिटा और घरेलू स्तर पर साख गंवा चुका प्रधानमंत्री। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता साबित करने के लिए गले का ज़ोर लगाता, मगर अपनी कमज़ोरियों को छिपाने के लिए बातें बनाता प्रधानमंत्री। नौजवानों और किसानों को बरगलाता, त्रस्त-परेशान व्यापारियों को झुनझुना पकड़ाता प्रधानमंत्री। फैक्ट चेक अभी बाक़ी है। दावों की पोल भी अभी खुलेगी।
Prof. Mukesh Kumar158,117 Aufrufe • vor 11 Monaten

ये तो जन्मजात संघी लग रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर में मैं भी पढ़ा हूँ और भली-भाँति जानता हूँ कि वहाँ किस तरह मासूम मन में हिंदुत्व रोपा जाता है। अब अगर उपेंद्र द्विवेद्वी शिशु मंदिर का गुणगान कर रहे हैं तो बिल्कुल स्पष्ट है कि वे आरएसएस की पाठशाला में तैयार स्वयंसेवक हैं जो सेना के सर्वोच्च पद पर पहुँचकर सेना को भी संघी बनाने के अभियान में जुटा हुआ है। हाल में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री की ऐसी प्रशंसा की थी जैसी कोई संघी ही कर सकता है या फिर हद दर्ज़े का चाटुकार। ऐसे सैन्य अधिकारियों के रहते आप अराजनीतिक सेना की उम्मीद नहीं कर सकते और न ही ये भरोसा रख सकते हैं कि ये लोकतंत्र को बनाए रखने में योगदान देंगे।
Prof. Mukesh Kumar123,123 Aufrufe • vor 8 Monaten

असमिया गायक और एक्टिविस्ट ज़ुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि देने अडानी क्यों पहुँचा इसे समझना ज़रूरी है। ये कोई श्रद्धा का मामला नहीं है और न ही ज़ुबीन से किसी भावनात्मक लगाव से उसने ऐसा किया है। मामला ये है कि असम की जनता हिमंता सरकार पर भड़की हुई है क्योंकि वह अडानी को ज़मीन लुटा रही है। वह नहीं चाहती कि अडानी वहाँ आए। वह उसका खुलकर विरोध कर रही है। ज़ुबीन गर्ग ने इस ख़तरे को लेकर असमिया लोगों को चेताया था और उसी से पैदा हुई चेतना है जो उन्हें गुजराती लॉबी से बचने के लिए प्रेरित कर रही है। अडानी ज़ुबीन को नक़ली श्रद्धांजलि देकर उनके रोष को ठंडा करने के लिए पहुँचा था। मगर असम के लोग इतने बेवकूफ़ नहीं हैं कि इसके झाँसे में आ जाएंगे।
Dr. Mukesh Kumar133,295 Aufrufe • vor 9 Monaten

ज़ोहरान ममदानी ने डोनल्ड ट्रम्प की नींद उड़ा दी है। वे उन्हें ग़ालियाँ दे रहे हैं। उन्हें पागल, कम्युनिस्ट बता रहे हैं। कह रहे हैं कि ममदानी स्मार्ट नहीं हैं। ममदानी न्यूयॉर्क सिटी के मेयर के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार नामित हुए हैं। उनके चुने जाने की पूरी संभावना है। वे बेहद लोकप्रिय हैं। ममदानी को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट बताया जाता है। वे हेल्थकेयर, हाउसिंग आदि के पक्ष में खड़े हैं और ट्रम्प द्वारा चलाए जा रहे प्रवासियों के अभियान के विरोध में हैं। उन्होंने मोदी की तुलना नेतन्याहू से की है। हो सकता है मोदी और उनके समर्थक इस तुलना से खुश हों मगर जो लोग समझते हैं वे समझ गए होंगे कि वे क्या कह रहे हैं। उन्होंने गुजरात दंगों को नरसंहार कहा है। ये भी कहा है कि वे मोदी को न्यूयॉर्क में रैली नहीं करने देंगे।
Dr. Mukesh Kumar86,123 Aufrufe • vor 1 Jahr

मोदी सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कुछ बोलती है और देश के अंदर ठीक उसका उल्टा करती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के दूत कहते हैं कि धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता ,मगर सोशल मीडिया मुसलमानों और ईसाईयों के साथ हिंसा की ख़बरों से पटा हुआ है। इस हिंसा में हिंदुत्व आतंकवादी भर नहीं हैं बल्कि सरकार, प्रशासन और पुलिस भी शामिल हैं। लेकिन क्या झूठ बोलने से बच छिप जाता है? हरगिज़ नहीं। इसीलिए अमेरिकी आयोग आर एस एस पर प्रतिबंध लगाने की सिफ़ारिश कर रहा है और पूरी दुनिया में भारत की फासीवादी सरकार की चर्चा हो रही है।
Prof. Mukesh Kumar24,916 Aufrufe • vor 3 Monaten

पी साईंनाथ बता रहे हैं कि भारत के सभी संस्थानों में सबसे ज़्यादा जातिवादी मीडिया है। दलित राष्ट्रपति बन गए, सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश हो गए, यूनिवर्सिटी के कुलपति हो गए मगर किसी बड़े अख़बार या चैनल का का संपादक वे नहीं बन सके। ये मीडिया का पाखंड है, दोगलापन है। वह मेरिटोक्रेसी की आड़ में अपना जातिवाद छिपाता है। कई बार स्वीकार भी कर लेता है...जैसे चित्रा त्रिपाठी ख़ुद को ब्राम्हण बताकर गर्वित होती हैं।
Dr. Mukesh Kumar42,676 Aufrufe • vor 10 Monaten

अब सोशल मीडिया पर गलियाने और विशाल मंचों से चीखने-चिल्लाने का समय गया मोदी जी....अब समय आ गया है कि आप जनता के बीच जाएं....उनसे उनकी तरह मिलें। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो ये बंदा आपका सारा जनाधार खा जाएगा। केवल अंधभक्तों का गिरोह और मालवीय गैंग भर साथ रह जाएगा।
Dr. Mukesh Kumar26,725 Aufrufe • vor 10 Monaten

ये 140 करोड़ के देश और हज़ारों साल की सभ्यता वाले देश के प्रधानमंत्री मोदी हैं। इनकी भाषा से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये किस सभ्यता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 5-7 युवकों ने शर्ट उतारकर प्रदर्शन क्या कर दिया, इनकी बिलबिलाहट रुक नहीं रही है....एक पूरी पार्टी को नंगा बता रहे हैं। प्रदर्शन के सौ तरीक़े होते हैं। ये भी एक तरीक़ा था। मणिपुर की महिलाओं ने पूरी तरह से नग्न होकर प्रदर्शन किया था...क्या प्रधानमंत्री मणिपुर की सभी महिलाओं को नंगा बता देंगे। जाने कितने देशों में नग्न प्रदर्शन हुए हैं, होते रहते हैं, क्या उन्हें वे नंगा घोषित कर देंगे.... और ये तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। उनके लोग तो हिंसक प्रदर्शन करते हैं। हथियार लेकर प्रदर्शन करते हैं। धर्मस्थलों को गिराने वाले प्रदर्शन करते हैं। दूसरे धर्मों के ख़िलाफ़ गालियों वाले गाने चलाकर प्रदर्शन करते हैं। तो उनको क्या कहा जाए- वहशी, अपराधी, लोफर, लफंगे, असभ्य.... दरअसल, इन्हें जिस तरह की ट्रेनिंग मिली है उसमें लोकतांत्रिक मर्यादाओं का कोई पाठ नहीं पढ़ाया जाता। उन्हें पता ही नहीं है कि विपक्ष क्या होता है, विपक्षी दलों का क्या महत्व होता है। वे उन्हें शत्रु ही दिखते हैं। फिर अहंकार इतना है कि कोई उंगली भी उठा दे तो ये अपमानित महसूस करने लगते हैं। देशद्रोही, अर्बन नक्सल, टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसी ग़ालियों के साथ हमले करने लगते हैं। ये एक लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री नहीं, एक ऐसा तानाशाह बोल रहा है, जिसे एक सम्मेलन से अपनी ब्रांडिंग करनी थी, मगर अपनी मूर्खताओं की वज़ह से दाँव उलटा पड़ गया। अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए ये छिछोरी भाषा के साथ पलटवार कर रहा है। धिक्कार है।
Dr. Mukesh Kumar14,676 Aufrufe • vor 4 Monaten


