
Prof. Mukesh Kumar
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Four decades in Print, TV and Digital Journalism, Editor, https://t.co/RS9qlqSpu1 and Satyahindi YouTube Channel, Media Educator, Writer, Columnist, Poet.
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ये मोदी-मोहन यादव की पुलिस है। मुसलमान देखते ही ख़ून की प्यासी हो जाती है। इतनी बर्बरता उसके अंदर तो पहले से बैठी रहती है मगर जब सरकार सिर पर हाथ रहकर कहे मरो तो वह पूरी बेरहमी से टूट पड़ती है। ये वीडियो उज्जैन का है मगर ये दृश्य देश के किसी भी हिस्से में देखा जा सकता है। बीजेपी शासित राज्यों में तो ये बहुत आम बात है।
Prof. Mukesh Kumar124,465 просмотров • 14 дней назад

कांवड़िया यात्रा के बाद मुंबई से पेश है जन्माष्टमी महोत्सव पर दही हांडी उत्सव। कितना सुंदर नृत्य है धार्मिक भावनाओं और हिंदुओं की आस्था से परिपूर्ण। श्रद्धालु भी कितने भक्ति भाव से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना में लिप्त हैं। हिंदू धर्म पर कोई संकट नहीं है। वह फल फूल रहा है। जय कन्हैया लाल की।
Prof. Mukesh Kumar109,063 просмотров • 1 месяц назад

सड़कों पर भौंडा नाच नाचती इन लड़कियों को मैं दोष नहीं दूंगा, क्योंकि इन्हें पता ही नहीं है कि ये क्या कर रही हैं। आस्था के नाम पर इस्तेमाल की जा रही हैं ये अज्ञानी लड़कियां। इन्हें भी अगर अच्छी शिक्षा मिलती तो ये भी जंतर मंतर या सोशल मीडिया पर देश और अपने भविष्य के लिए लड़ाई लड़तीं। कृपया इनको न कोसिए, इन पर तरह खाइए। ये बेचारी नरभक्षी होते जा रहे हिंदुत्व की शिकार हैं।
Prof. Mukesh Kumar99,492 просмотров • 2 месяцев назад

दिल्ली ही नहीं मुंबई भी चुनावी लूट को लेकर उबल रही है। ये जन सैलाब इसका प्रमाण है। और ये तो दोपहर का वीडियो है। शाम होते-होते तक अक्खा मुंबई सड़कों पर होगी और देवेन्द्र फणनवीस अपना सिर पीट रहे होंगे। उन्होंने सोचा था कि प्रदर्शन के लिए कोई जगह नहीं देंगे तो वह फ्लॉप हो जाएगा मगर हो उसका ठीक उल्टा रहा है।
Prof. Mukesh Kumar14,922 просмотров • 11 дней назад

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रम्प को रोककर अपनी बात कही। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने ट्रम्प की ग़लती को दुरुस्त किया, ट्रम्प ने जो बोला उसे चुपचाप स्वीकार नहीं कर लिया। ज़ेलेंस्की सबसे कमज़ोर स्थिति में थे मगर वे दादागीरी के ख़िलाफ़ प्रतिरोध करने लगे, झगड़ पड़े। एक भारत के प्रधानमंत्री मोदी थे जो ट्रम्प के गरल को अमृत वचनों की तरह सुनते रहे। ये फ़र्क़ है नेतृत्व का। फिर भी भक्त डंका बजाते रहेंगे क्योंकि वे भी इसी ग़ुलाम मानसिकता के लोग हैं।
Prof. Mukesh Kumar277,673 просмотров • 1 год назад

ज्ञानेश कुमार जी ये क्या तमाशा लगा रखा है..... हमारे सांसदों की निजता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन हो रहा है। उनके फोटो खींचे जा रहे हैं, वीडियो बनाए जा रहे हैं। इसका फूटेज आम लोगों तक नहीं जाना चाहिए था। और मतदान ईवीएम से क्यों नहीं किया जा रहा है.....जहाँ मोदी जी जीत के प्रति आश्वस्त होते हैं वहां बैलेट पेपर से मतदान करवाते हैं, जहाँ नहीं होते ईवीएम से वोट डलवाते हैं।
Prof. Mukesh Kumar161,975 просмотров • 1 год назад

शर्मनाक है। एक सामान्य सी बात भी कहने के लिए चुटका चाहिए। क्या प्रधानमंत्री के अंदर इतना डर बैठा हुआ है कि वे दो शब्द भी अपने मन से नहीं बोल पा रहे? उन्हें स्क्रिप्ट क्यों चाहिए? क्या वे बीमार हैं, उनकी याददाश्त धोखा देने लगी है? इन सवालों के जवाब मांगना ज़रूरी है क्योंकि एक ओर ये देश की छवि को बरबाद करना है और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री की शासन-प्रशासन की क्षमता को लेकर प्रश्न उठाने वाला है।
Prof. Mukesh Kumar23,571 просмотров • 1 месяц назад

पता करना चाहिए कि ये आयडिया योगी आदित्यनाथ को किसने दिया या फिर ये उनके उर्वर दिमाग़ की ही उपज है। जो भी है, धर्म का इतना फूहड़ और भौंडा रूप देखकर किसी को भी वितृष्णा हो सकती है। लेकिन क्या इसके लिए ये कांवड़िए ही ज़िम्मेदार हैं....वे लोग कहाँ है जिन्हें हर समय हिंदू ख़तरे में दिखता है....क्या उन्हें नहीं लगता कि हिंदू धर्म को असली ख़तरा इस तरह के आयोजन के कर्ता-धर्ताओं से है....अगर नहीं लगता तो फिर मान लेना चाहिए कि पूरे कुँए में ही भंग घुली हुई है या फिर सब हिंदुत्व के उग्र रूप से आतंकित हैं।
Prof. Mukesh Kumar34,530 просмотров • 2 месяцев назад

लाल किले की प्राचीर पर एक थका और मजबूर प्रधानमंत्री था। बैसाखियों पर टिकी सरकार वाला ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिटा और घरेलू स्तर पर साख गंवा चुका प्रधानमंत्री। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता साबित करने के लिए गले का ज़ोर लगाता, मगर अपनी कमज़ोरियों को छिपाने के लिए बातें बनाता प्रधानमंत्री। नौजवानों और किसानों को बरगलाता, त्रस्त-परेशान व्यापारियों को झुनझुना पकड़ाता प्रधानमंत्री। फैक्ट चेक अभी बाक़ी है। दावों की पोल भी अभी खुलेगी।
Prof. Mukesh Kumar158,132 просмотров • 1 год назад

ये तो जन्मजात संघी लग रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर में मैं भी पढ़ा हूँ और भली-भाँति जानता हूँ कि वहाँ किस तरह मासूम मन में हिंदुत्व रोपा जाता है। अब अगर उपेंद्र द्विवेद्वी शिशु मंदिर का गुणगान कर रहे हैं तो बिल्कुल स्पष्ट है कि वे आरएसएस की पाठशाला में तैयार स्वयंसेवक हैं जो सेना के सर्वोच्च पद पर पहुँचकर सेना को भी संघी बनाने के अभियान में जुटा हुआ है। हाल में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री की ऐसी प्रशंसा की थी जैसी कोई संघी ही कर सकता है या फिर हद दर्ज़े का चाटुकार। ऐसे सैन्य अधिकारियों के रहते आप अराजनीतिक सेना की उम्मीद नहीं कर सकते और न ही ये भरोसा रख सकते हैं कि ये लोकतंत्र को बनाए रखने में योगदान देंगे।
Prof. Mukesh Kumar123,155 просмотров • 11 месяцев назад

जेन ज़ी और जंतर मंतर आंदोलन के बारे में आरएसएस के नेता क्या कह रहे हैं अगर आपने इस पर गौर नहीं किया तो समझिए कि आप बहुत बड़ी गफ़लत में हैं। आरएसएस के प्रमुख नेता, सलाहकार एस गुरुमूर्ति को सुनिए। वे कह रहे हैं कि जेन ज़ी के आंदोलनकारी अपराधी, रेपिस्ट, हत्यारे, गुंडे और गैंगस्टर थे। इसके पहले केरल का एक संघी नेता कह चुका है कि मैं होता तो छात्रों पर फायरिंग करवाता। संघियों के इस बयान का सीधा सा मतलब है कि अब वे आंदोलनकारियों के साथ क्या करने जा रहे हैं। कई जगहों से वीडियो आ चुके हैं जिनमें आंदोलन में हिस्सा लेने वालों का बजरंगियों ने मारा-पीटा है। ये सरकार भी अंदरखाने तैयारी कर ही रही होगी। फेस रिक्गनीशन मशीनों के ज़रिए वह आंदोलनकारियों की शिनाख़्त कर सकती है और फिर एक ऐसा अभियान चलाया जा सकता है जिसमें चुन-चुनकर निशाना साध जाए।
Prof. Mukesh Kumar32,601 просмотров • 2 месяцев назад