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Prof. Mukesh Kumar

@mukeshbudharwi15,556 subscribers

Four decades in Print, TV and Digital Journalism, Editor, https://t.co/RS9qlqSXjz and Satyahindi YouTube Channel, Media Educator, Writer, Columnist, Poet.

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तमाम देशों के शासनाध्यक्ष संयुक्त राष्ट्र की महासभा में हिस्सा ले रहे हैं मगर दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला सबसे बड़ा लोकतंत्र का नेता नहीं पहुंचा। जानते हैं क्यों? क्योंकि उसे ट्रम्प से डर लगता है। उसे डर है कि कहीं ट्रम्प फिर से फ़ज़ीहत न कर दे। कहीं उससे आमना-सामना न हो जाए। उनसे वन टू वन मीटिंग से ख़ौफ़ होता है। उससे भी ज़्यादा इससे कि कहीं मीडिया का सामना न करना पड़ जाए। पहले कभी कोई प्रधानमंत्री इस तरह मैदान छोड़कर भागा था क्या?

तमाम देशों के शासनाध्यक्ष संयुक्त राष्ट्र की महासभा में हिस्सा ले रहे हैं मगर दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला सबसे बड़ा लोकतंत्र का नेता नहीं पहुंचा। जानते हैं क्यों? क्योंकि उसे ट्रम्प से डर लगता है। उसे डर है कि कहीं ट्रम्प फिर से फ़ज़ीहत न कर दे। कहीं उससे आमना-सामना न हो जाए। उनसे वन टू वन मीटिंग से ख़ौफ़ होता है। उससे भी ज़्यादा इससे कि कहीं मीडिया का सामना न करना पड़ जाए। पहले कभी कोई प्रधानमंत्री इस तरह मैदान छोड़कर भागा था क्या?

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अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया है। इस हमले के ख़तरनाक नतीजे निकल सकते हैं। जंग फैल सकती है। यमन ने ऐलान किया है कि वह अमेरिकी जहाजों पर हमले करेगा।

अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया है। इस हमले के ख़तरनाक नतीजे निकल सकते हैं। जंग फैल सकती है। यमन ने ऐलान किया है कि वह अमेरिकी जहाजों पर हमले करेगा।

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ये वीडियो क्लिप संभालकर रख लीजिए। क्या पता कब भारत सरकार इसे देखने दिखाने पर प्रतिबंध लगा दे।

ये वीडियो क्लिप संभालकर रख लीजिए। क्या पता कब भारत सरकार इसे देखने दिखाने पर प्रतिबंध लगा दे।

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राजनाथ सिंह ये सोचकर भाषण देकर बैठ गए थे कि उन्होंने विपक्ष को ध्वस्त कर दिया मगर गौरव गोगोई ने उनको एक झटके में ही ध्वस्त कर दिया। एक-एक करके ऐसे सवाल खड़े कर दिए जिनके जवाब देना सरकार के लिए बहुत मुश्किल होगा।

राजनाथ सिंह ये सोचकर भाषण देकर बैठ गए थे कि उन्होंने विपक्ष को ध्वस्त कर दिया मगर गौरव गोगोई ने उनको एक झटके में ही ध्वस्त कर दिया। एक-एक करके ऐसे सवाल खड़े कर दिए जिनके जवाब देना सरकार के लिए बहुत मुश्किल होगा।

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नितिन गडकरी की भाव-मुद्राएं देखिए आपको समझ में आ जाएगा कि वे मोदी से कितना असहमत हैं। वे साफ़-साफ़ जता रहे हैं कि मैं आपके गीत गाने वालों में से नहीं हूँ। मैं भक्तों की कतार से अलग हूँ। इसे पलट कर ये भी कहा जा सकता है कि वे मोदी मंडली से अलग-थलग पड़ गए हैं।

नितिन गडकरी की भाव-मुद्राएं देखिए आपको समझ में आ जाएगा कि वे मोदी से कितना असहमत हैं। वे साफ़-साफ़ जता रहे हैं कि मैं आपके गीत गाने वालों में से नहीं हूँ। मैं भक्तों की कतार से अलग हूँ। इसे पलट कर ये भी कहा जा सकता है कि वे मोदी मंडली से अलग-थलग पड़ गए हैं।

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व्लादिमीर पुतिन कह रहे हैं कि ये हैं कौन जो कहते हैं ये करो, वो न करो, चेतावनी देते हैं, धमकियां देते हैं। ये किस हैसियत से ऐसा करते हैं। पुतिन इन दिनों अमेरिका की दादागीरी को जमकर चुनौती दे रहे हैं। आए दिन उसका पाखंड उजागर करते हैं, उसकी बखिया उधेड़ते हैं।

व्लादिमीर पुतिन कह रहे हैं कि ये हैं कौन जो कहते हैं ये करो, वो न करो, चेतावनी देते हैं, धमकियां देते हैं। ये किस हैसियत से ऐसा करते हैं। पुतिन इन दिनों अमेरिका की दादागीरी को जमकर चुनौती दे रहे हैं। आए दिन उसका पाखंड उजागर करते हैं, उसकी बखिया उधेड़ते हैं।

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भंडाफोड़ सबूतों और गवाहों के साथ। संघ परिवार के पास इनका कोई जवाब नहीं है इसलिए वे ग़ाली-गलौज़ पर उतर आए हैं। उनके पास राहुल गाँधी के निष्कर्षों का कोई जवाब नहीं है। अब वे ढिठाई दिखाएँगे, थेथरई करेंगे या नरैटिव को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

भंडाफोड़ सबूतों और गवाहों के साथ। संघ परिवार के पास इनका कोई जवाब नहीं है इसलिए वे ग़ाली-गलौज़ पर उतर आए हैं। उनके पास राहुल गाँधी के निष्कर्षों का कोई जवाब नहीं है। अब वे ढिठाई दिखाएँगे, थेथरई करेंगे या नरैटिव को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

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ये तो जन्मजात संघी लग रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर में मैं भी पढ़ा हूँ और भली-भाँति जानता हूँ कि वहाँ किस तरह मासूम मन में हिंदुत्व रोपा जाता है। अब अगर उपेंद्र द्विवेद्वी शिशु मंदिर का गुणगान कर रहे हैं तो बिल्कुल स्पष्ट है कि वे आरएसएस की पाठशाला में तैयार स्वयंसेवक हैं जो सेना के सर्वोच्च पद पर पहुँचकर सेना को भी संघी बनाने के अभियान में जुटा हुआ है। हाल में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री की ऐसी प्रशंसा की थी जैसी कोई संघी ही कर सकता है या फिर हद दर्ज़े का चाटुकार। ऐसे सैन्य अधिकारियों के रहते आप अराजनीतिक सेना की उम्मीद नहीं कर सकते और न ही ये भरोसा रख सकते हैं कि ये लोकतंत्र को बनाए रखने में योगदान देंगे।

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123,123 просмотров • 8 месяцев назад

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असमिया गायक और एक्टिविस्ट ज़ुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि देने अडानी क्यों पहुँचा इसे समझना ज़रूरी है। ये कोई श्रद्धा का मामला नहीं है और न ही ज़ुबीन से किसी भावनात्मक लगाव से उसने ऐसा किया है। मामला ये है कि असम की जनता हिमंता सरकार पर भड़की हुई है क्योंकि वह अडानी को ज़मीन लुटा रही है। वह नहीं चाहती कि अडानी वहाँ आए। वह उसका खुलकर विरोध कर रही है। ज़ुबीन गर्ग ने इस ख़तरे को लेकर असमिया लोगों को चेताया था और उसी से पैदा हुई चेतना है जो उन्हें गुजराती लॉबी से बचने के लिए प्रेरित कर रही है। अडानी ज़ुबीन को नक़ली श्रद्धांजलि देकर उनके रोष को ठंडा करने के लिए पहुँचा था। मगर असम के लोग इतने बेवकूफ़ नहीं हैं कि इसके झाँसे में आ जाएंगे।

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133,295 просмотров • 9 месяцев назад

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ज़ोहरान ममदानी ने डोनल्ड ट्रम्प की नींद उड़ा दी है। वे उन्हें ग़ालियाँ दे रहे हैं। उन्हें पागल, कम्युनिस्ट बता रहे हैं। कह रहे हैं कि ममदानी स्मार्ट नहीं हैं। ममदानी न्यूयॉर्क सिटी के मेयर के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार नामित हुए हैं। उनके चुने जाने की पूरी संभावना है। वे बेहद लोकप्रिय हैं। ममदानी को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट बताया जाता है। वे हेल्थकेयर, हाउसिंग आदि के पक्ष में खड़े हैं और ट्रम्प द्वारा चलाए जा रहे प्रवासियों के अभियान के विरोध में हैं। उन्होंने मोदी की तुलना नेतन्याहू से की है। हो सकता है मोदी और उनके समर्थक इस तुलना से खुश हों मगर जो लोग समझते हैं वे समझ गए होंगे कि वे क्या कह रहे हैं। उन्होंने गुजरात दंगों को नरसंहार कहा है। ये भी कहा है कि वे मोदी को न्यूयॉर्क में रैली नहीं करने देंगे।

Dr. Mukesh Kumar

86,123 просмотров • 1 год назад

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ये 140 करोड़ के देश और हज़ारों साल की सभ्यता वाले देश के प्रधानमंत्री मोदी हैं। इनकी भाषा से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये किस सभ्यता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 5-7 युवकों ने शर्ट उतारकर प्रदर्शन क्या कर दिया, इनकी बिलबिलाहट रुक नहीं रही है....एक पूरी पार्टी को नंगा बता रहे हैं। प्रदर्शन के सौ तरीक़े होते हैं। ये भी एक तरीक़ा था। मणिपुर की महिलाओं ने पूरी तरह से नग्न होकर प्रदर्शन किया था...क्या प्रधानमंत्री मणिपुर की सभी महिलाओं को नंगा बता देंगे। जाने कितने देशों में नग्न प्रदर्शन हुए हैं, होते रहते हैं, क्या उन्हें वे नंगा घोषित कर देंगे.... और ये तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। उनके लोग तो हिंसक प्रदर्शन करते हैं। हथियार लेकर प्रदर्शन करते हैं। धर्मस्थलों को गिराने वाले प्रदर्शन करते हैं। दूसरे धर्मों के ख़िलाफ़ गालियों वाले गाने चलाकर प्रदर्शन करते हैं। तो उनको क्या कहा जाए- वहशी, अपराधी, लोफर, लफंगे, असभ्य.... दरअसल, इन्हें जिस तरह की ट्रेनिंग मिली है उसमें लोकतांत्रिक मर्यादाओं का कोई पाठ नहीं पढ़ाया जाता। उन्हें पता ही नहीं है कि विपक्ष क्या होता है, विपक्षी दलों का क्या महत्व होता है। वे उन्हें शत्रु ही दिखते हैं। फिर अहंकार इतना है कि कोई उंगली भी उठा दे तो ये अपमानित महसूस करने लगते हैं। देशद्रोही, अर्बन नक्सल, टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसी ग़ालियों के साथ हमले करने लगते हैं। ये एक लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री नहीं, एक ऐसा तानाशाह बोल रहा है, जिसे एक सम्मेलन से अपनी ब्रांडिंग करनी थी, मगर अपनी मूर्खताओं की वज़ह से दाँव उलटा पड़ गया। अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए ये छिछोरी भाषा के साथ पलटवार कर रहा है। धिक्कार है।

Dr. Mukesh Kumar

14,676 просмотров • 4 месяцев назад