
Prof. Mukesh Kumar
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Four decades in Print, TV and Digital Journalism, Editor, https://t.co/RS9qlqSpu1 and Satyahindi YouTube Channel, Media Educator, Writer, Columnist, Poet.
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सड़कों पर भौंडा नाच नाचती इन लड़कियों को मैं दोष नहीं दूंगा, क्योंकि इन्हें पता ही नहीं है कि ये क्या कर रही हैं। आस्था के नाम पर इस्तेमाल की जा रही हैं ये अज्ञानी लड़कियां। इन्हें भी अगर अच्छी शिक्षा मिलती तो ये भी जंतर मंतर या सोशल मीडिया पर देश और अपने भविष्य के लिए लड़ाई लड़तीं। कृपया इनको न कोसिए, इन पर तरह खाइए। ये बेचारी नरभक्षी होते जा रहे हिंदुत्व की शिकार हैं।
Prof. Mukesh Kumar99,379 görüntüleme • 25 gün önce

पता करना चाहिए कि ये आयडिया योगी आदित्यनाथ को किसने दिया या फिर ये उनके उर्वर दिमाग़ की ही उपज है। जो भी है, धर्म का इतना फूहड़ और भौंडा रूप देखकर किसी को भी वितृष्णा हो सकती है। लेकिन क्या इसके लिए ये कांवड़िए ही ज़िम्मेदार हैं....वे लोग कहाँ है जिन्हें हर समय हिंदू ख़तरे में दिखता है....क्या उन्हें नहीं लगता कि हिंदू धर्म को असली ख़तरा इस तरह के आयोजन के कर्ता-धर्ताओं से है....अगर नहीं लगता तो फिर मान लेना चाहिए कि पूरे कुँए में ही भंग घुली हुई है या फिर सब हिंदुत्व के उग्र रूप से आतंकित हैं।
Prof. Mukesh Kumar34,530 görüntüleme • 23 gün önce

जेन ज़ी और जंतर मंतर आंदोलन के बारे में आरएसएस के नेता क्या कह रहे हैं अगर आपने इस पर गौर नहीं किया तो समझिए कि आप बहुत बड़ी गफ़लत में हैं। आरएसएस के प्रमुख नेता, सलाहकार एस गुरुमूर्ति को सुनिए। वे कह रहे हैं कि जेन ज़ी के आंदोलनकारी अपराधी, रेपिस्ट, हत्यारे, गुंडे और गैंगस्टर थे। इसके पहले केरल का एक संघी नेता कह चुका है कि मैं होता तो छात्रों पर फायरिंग करवाता। संघियों के इस बयान का सीधा सा मतलब है कि अब वे आंदोलनकारियों के साथ क्या करने जा रहे हैं। कई जगहों से वीडियो आ चुके हैं जिनमें आंदोलन में हिस्सा लेने वालों का बजरंगियों ने मारा-पीटा है। ये सरकार भी अंदरखाने तैयारी कर ही रही होगी। फेस रिक्गनीशन मशीनों के ज़रिए वह आंदोलनकारियों की शिनाख़्त कर सकती है और फिर एक ऐसा अभियान चलाया जा सकता है जिसमें चुन-चुनकर निशाना साध जाए।
Prof. Mukesh Kumar32,601 görüntüleme • 1 ay önce

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रम्प को रोककर अपनी बात कही। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने ट्रम्प की ग़लती को दुरुस्त किया, ट्रम्प ने जो बोला उसे चुपचाप स्वीकार नहीं कर लिया। ज़ेलेंस्की सबसे कमज़ोर स्थिति में थे मगर वे दादागीरी के ख़िलाफ़ प्रतिरोध करने लगे, झगड़ पड़े। एक भारत के प्रधानमंत्री मोदी थे जो ट्रम्प के गरल को अमृत वचनों की तरह सुनते रहे। ये फ़र्क़ है नेतृत्व का। फिर भी भक्त डंका बजाते रहेंगे क्योंकि वे भी इसी ग़ुलाम मानसिकता के लोग हैं।
Prof. Mukesh Kumar277,673 görüntüleme • 1 yıl önce

ज्ञानेश कुमार जी ये क्या तमाशा लगा रखा है..... हमारे सांसदों की निजता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन हो रहा है। उनके फोटो खींचे जा रहे हैं, वीडियो बनाए जा रहे हैं। इसका फूटेज आम लोगों तक नहीं जाना चाहिए था। और मतदान ईवीएम से क्यों नहीं किया जा रहा है.....जहाँ मोदी जी जीत के प्रति आश्वस्त होते हैं वहां बैलेट पेपर से मतदान करवाते हैं, जहाँ नहीं होते ईवीएम से वोट डलवाते हैं।
Prof. Mukesh Kumar161,975 görüntüleme • 11 ay önce

लाल किले की प्राचीर पर एक थका और मजबूर प्रधानमंत्री था। बैसाखियों पर टिकी सरकार वाला ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिटा और घरेलू स्तर पर साख गंवा चुका प्रधानमंत्री। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता साबित करने के लिए गले का ज़ोर लगाता, मगर अपनी कमज़ोरियों को छिपाने के लिए बातें बनाता प्रधानमंत्री। नौजवानों और किसानों को बरगलाता, त्रस्त-परेशान व्यापारियों को झुनझुना पकड़ाता प्रधानमंत्री। फैक्ट चेक अभी बाक़ी है। दावों की पोल भी अभी खुलेगी।
Prof. Mukesh Kumar158,132 görüntüleme • 1 yıl önce

ये तो जन्मजात संघी लग रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर में मैं भी पढ़ा हूँ और भली-भाँति जानता हूँ कि वहाँ किस तरह मासूम मन में हिंदुत्व रोपा जाता है। अब अगर उपेंद्र द्विवेद्वी शिशु मंदिर का गुणगान कर रहे हैं तो बिल्कुल स्पष्ट है कि वे आरएसएस की पाठशाला में तैयार स्वयंसेवक हैं जो सेना के सर्वोच्च पद पर पहुँचकर सेना को भी संघी बनाने के अभियान में जुटा हुआ है। हाल में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री की ऐसी प्रशंसा की थी जैसी कोई संघी ही कर सकता है या फिर हद दर्ज़े का चाटुकार। ऐसे सैन्य अधिकारियों के रहते आप अराजनीतिक सेना की उम्मीद नहीं कर सकते और न ही ये भरोसा रख सकते हैं कि ये लोकतंत्र को बनाए रखने में योगदान देंगे।
Prof. Mukesh Kumar123,142 görüntüleme • 9 ay önce

असमिया गायक और एक्टिविस्ट ज़ुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि देने अडानी क्यों पहुँचा इसे समझना ज़रूरी है। ये कोई श्रद्धा का मामला नहीं है और न ही ज़ुबीन से किसी भावनात्मक लगाव से उसने ऐसा किया है। मामला ये है कि असम की जनता हिमंता सरकार पर भड़की हुई है क्योंकि वह अडानी को ज़मीन लुटा रही है। वह नहीं चाहती कि अडानी वहाँ आए। वह उसका खुलकर विरोध कर रही है। ज़ुबीन गर्ग ने इस ख़तरे को लेकर असमिया लोगों को चेताया था और उसी से पैदा हुई चेतना है जो उन्हें गुजराती लॉबी से बचने के लिए प्रेरित कर रही है। अडानी ज़ुबीन को नक़ली श्रद्धांजलि देकर उनके रोष को ठंडा करने के लिए पहुँचा था। मगर असम के लोग इतने बेवकूफ़ नहीं हैं कि इसके झाँसे में आ जाएंगे।
Dr. Mukesh Kumar133,295 görüntüleme • 11 ay önce

ज़ोहरान ममदानी ने डोनल्ड ट्रम्प की नींद उड़ा दी है। वे उन्हें ग़ालियाँ दे रहे हैं। उन्हें पागल, कम्युनिस्ट बता रहे हैं। कह रहे हैं कि ममदानी स्मार्ट नहीं हैं। ममदानी न्यूयॉर्क सिटी के मेयर के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार नामित हुए हैं। उनके चुने जाने की पूरी संभावना है। वे बेहद लोकप्रिय हैं। ममदानी को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट बताया जाता है। वे हेल्थकेयर, हाउसिंग आदि के पक्ष में खड़े हैं और ट्रम्प द्वारा चलाए जा रहे प्रवासियों के अभियान के विरोध में हैं। उन्होंने मोदी की तुलना नेतन्याहू से की है। हो सकता है मोदी और उनके समर्थक इस तुलना से खुश हों मगर जो लोग समझते हैं वे समझ गए होंगे कि वे क्या कह रहे हैं। उन्होंने गुजरात दंगों को नरसंहार कहा है। ये भी कहा है कि वे मोदी को न्यूयॉर्क में रैली नहीं करने देंगे।
Dr. Mukesh Kumar86,123 görüntüleme • 1 yıl önce

मोदी सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कुछ बोलती है और देश के अंदर ठीक उसका उल्टा करती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के दूत कहते हैं कि धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता ,मगर सोशल मीडिया मुसलमानों और ईसाईयों के साथ हिंसा की ख़बरों से पटा हुआ है। इस हिंसा में हिंदुत्व आतंकवादी भर नहीं हैं बल्कि सरकार, प्रशासन और पुलिस भी शामिल हैं। लेकिन क्या झूठ बोलने से बच छिप जाता है? हरगिज़ नहीं। इसीलिए अमेरिकी आयोग आर एस एस पर प्रतिबंध लगाने की सिफ़ारिश कर रहा है और पूरी दुनिया में भारत की फासीवादी सरकार की चर्चा हो रही है।
Prof. Mukesh Kumar24,922 görüntüleme • 5 ay önce
