
मुसद्दीलाल
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ceo and founder alvi travel agency, हास्य, व्यंग, स्वतंत्र विचारक, आरटीआई एक्टिविस्ट
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ये ऐसे नहीं होता मित्रों, जहां आस्था और धर्म के नाम पर विश्वास तो अटूट होता परंतु ईश्वर पर विश्वास कमजोर होता है, जहां ईश्वर पर विश्वास कमजोर हुआ वहां हर किसी वस्तु में ईश्वर नजर आने लगता है, और जब ईश्वर नजर आने लगता है तो ईश्वर को सब कुछ समर्पित होता है, जिसका लाभ ऐसे पाखंडी लोग उठाते हैं, अब कुछ लोग कहते ईश्वर हर जगह तुझमें और मुझमें भी ईश्वर है कण कण में ईश्वर है, अब इस पाखंडी के अंदर ईश्वर है? क्या ईश्वर ऐसा कृत्य करेंगे? नहीं कदापि नहीं, यह भी सत्य है ईश्वर हर जगह है लेकिन किसी मनुष्य जीव निर्जीव में नहीं है, है हर जगह नजर सब पर रखता है, मेरा अपना मत है कि जो जीव निर्जीव जैसा खाता पीता सोता हंसता रोता हो, जन्म मृत्यु का भागी हो वह तो कदापि ईश्वर हो ही नहीं सकता,
मुसद्दीलाल49,191 views • 4 months ago
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