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Naveen Sharma Sikandrabad

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किसान पुत्र❤️ पिता-श्री वाचस्पति शर्मा सिकंदराबाद ,बुलंदशहर,उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी🚲

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उत्तर प्रदेश सरकार कर्मचारियों का शोषण करने और अपनी झूठी वाहवाही का ढिंढोरा पीटने में बहुत माहिर है। ​एक तरफ सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन' देने के लिए पोर्टल और आयोग बनाने का दिखावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ यूपी के गांवों में 58,000 से ज्यादा पंचायत सहायकों को पिछले 5 सालों से केवल 6000 रूपए मानदेय देकर उनका शोषण कर रही है। ​आज की कमरतोड़ महंगाई में 6000 रूपए में क्या होता है? क्या पंचायत सहायकों और उनके बाल-बच्चों को सम्मानजनक ज़िंदगी जीने का कोई हक़ नहीं है? सरकार तुरंत इनकी मांगें सुने, इनका शोषण बंद करे और पंचायत सहायकों के मांग के अनुसार उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करे। ​Yogi Adityanath पंचायतीराज उत्तर प्रदेश Government of UP Akhilesh Yadav ​#PanchayatSahayakUP #पंचायत_सहायक_यूपी

उत्तर प्रदेश सरकार कर्मचारियों का शोषण करने और अपनी झूठी वाहवाही का ढिंढोरा पीटने में बहुत माहिर है। ​एक तरफ सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन' देने के लिए पोर्टल और आयोग बनाने का दिखावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ यूपी के गांवों में 58,000 से ज्यादा पंचायत सहायकों को पिछले 5 सालों से केवल 6000 रूपए मानदेय देकर उनका शोषण कर रही है। ​आज की कमरतोड़ महंगाई में 6000 रूपए में क्या होता है? क्या पंचायत सहायकों और उनके बाल-बच्चों को सम्मानजनक ज़िंदगी जीने का कोई हक़ नहीं है? सरकार तुरंत इनकी मांगें सुने, इनका शोषण बंद करे और पंचायत सहायकों के मांग के अनुसार उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करे। ​Yogi Adityanath पंचायतीराज उत्तर प्रदेश Government of UP Akhilesh Yadav ​#PanchayatSahayakUP #पंचायत_सहायक_यूपी

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मंत्री जी जो आप कर सकते हैं, वही तो नहीं कर रहे हैं अगर आप अपनी जिम्मेदारी निभा रहे होते तो आपको ऐसा कहने की जरूरत ही नहीं पड़ती कि आप युवाओं की बात तत्परता से सुनते हैं। आपकी सरकार बस पढ़े लिखे डिग्रीधारी युवाओं का शोषण कर रही है और कुछ नहीं। आप बस कैमरे के सामने आकर कहते हैं कि हम युवाओं की बातों को सुन रहे हैं विभागों को आदेश दे रहे हैं। पर कुछ हो नहीं रहा है। हर रोज इको गार्डन, UPSSSC के भवन के सामने जूनियर अस्सिटेंट, फार्मासिस्ट, शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी, पंचायत सहायक, आशा कार्यकर्ता, लाइब्रेरियन के अभ्यर्थी अपनी जायज मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे है।

मंत्री जी जो आप कर सकते हैं, वही तो नहीं कर रहे हैं अगर आप अपनी जिम्मेदारी निभा रहे होते तो आपको ऐसा कहने की जरूरत ही नहीं पड़ती कि आप युवाओं की बात तत्परता से सुनते हैं। आपकी सरकार बस पढ़े लिखे डिग्रीधारी युवाओं का शोषण कर रही है और कुछ नहीं। आप बस कैमरे के सामने आकर कहते हैं कि हम युवाओं की बातों को सुन रहे हैं विभागों को आदेश दे रहे हैं। पर कुछ हो नहीं रहा है। हर रोज इको गार्डन, UPSSSC के भवन के सामने जूनियर अस्सिटेंट, फार्मासिस्ट, शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी, पंचायत सहायक, आशा कार्यकर्ता, लाइब्रेरियन के अभ्यर्थी अपनी जायज मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे है।

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अपनी जायज मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है SSC_GD के छात्रों को सरकार अभी कहेगी ये युवा देशद्रोही है इनके साथ खड़े होने वाले अध्यापकों के ऊपर सरकार मुकदमा दर्ज करेगी और आयोग भी बयान देगा की परीक्षा में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है किसी भी तरह की धांधली नहीं हुई है परीक्षा एकदम निष्पक्ष और पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई है अगर परीक्षा को लेकर कोई भी भ्रामक वीडियो या फिर अफवाह फैलाई जाती है और इसमें कोई छात्र सम्मिलित मिलता है तो उसके ऊपर भी मुकदमा होगा यानी उसका भविष्य खराब कर दिया जाएगा, मेरा एक सवाल है अगर सरकार और आयोग किसी भी एग्जाम को सुचारू रूप से नहीं करवा सकती तो युवाओं और छात्रों से कह दे कि हम आपके भविष्य से यूं ही खिलवाड़ करते रहेंगे क्योंकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित है हमें देश के गरीब, मजदूर के बच्चों से क्या मतलब है, अगर बेरोजगार युवाओं से ऐसी अव्यवस्था नहीं झेली जा रही है तो वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर पकौड़े तले... #ssc_gd

अपनी जायज मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है SSC_GD के छात्रों को सरकार अभी कहेगी ये युवा देशद्रोही है इनके साथ खड़े होने वाले अध्यापकों के ऊपर सरकार मुकदमा दर्ज करेगी और आयोग भी बयान देगा की परीक्षा में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है किसी भी तरह की धांधली नहीं हुई है परीक्षा एकदम निष्पक्ष और पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई है अगर परीक्षा को लेकर कोई भी भ्रामक वीडियो या फिर अफवाह फैलाई जाती है और इसमें कोई छात्र सम्मिलित मिलता है तो उसके ऊपर भी मुकदमा होगा यानी उसका भविष्य खराब कर दिया जाएगा, मेरा एक सवाल है अगर सरकार और आयोग किसी भी एग्जाम को सुचारू रूप से नहीं करवा सकती तो युवाओं और छात्रों से कह दे कि हम आपके भविष्य से यूं ही खिलवाड़ करते रहेंगे क्योंकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित है हमें देश के गरीब, मजदूर के बच्चों से क्या मतलब है, अगर बेरोजगार युवाओं से ऐसी अव्यवस्था नहीं झेली जा रही है तो वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर पकौड़े तले... #ssc_gd

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जब किराए में 50% की छूट देनी ही नहीं थी, तो युवा साथियों को ऐसी उम्मीद भी नहीं दिलानी चाहिए थी। ज़रा उस विद्यार्थी के बारे में सोचिए, जिसका कुल किराया 1000 रुपये पड़ने वाला था, लेकिन वह घर से सिर्फ 700 रुपये यह सोचकर लेकर निकला कि 50% छूट मिलने पर आने-जाने का काम 500 में हो जाएगा और बचे हुए पैसों से खाने-पीने तथा अन्य जरूरी खर्च पूरे कर लेगा। साहब, विद्यार्थी जीवन बहुत संघर्षों से भरा होता है। घरवालों से 1000-500 रुपये मांगने के लिए भी एक विद्यार्थी को कितनी बार सोचना पड़ता है, कितना साहस जुटाना पड़ता है, इस बात को परीक्षाओं कि तैयारी करने वाला एक युवा ही समझ सकता है। घोषणाएं करने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि उन पर भरोसा करके लाखों विद्यार्थी अपनी योजनाएं बनाते हैं। #uppoliceexam #students

जब किराए में 50% की छूट देनी ही नहीं थी, तो युवा साथियों को ऐसी उम्मीद भी नहीं दिलानी चाहिए थी। ज़रा उस विद्यार्थी के बारे में सोचिए, जिसका कुल किराया 1000 रुपये पड़ने वाला था, लेकिन वह घर से सिर्फ 700 रुपये यह सोचकर लेकर निकला कि 50% छूट मिलने पर आने-जाने का काम 500 में हो जाएगा और बचे हुए पैसों से खाने-पीने तथा अन्य जरूरी खर्च पूरे कर लेगा। साहब, विद्यार्थी जीवन बहुत संघर्षों से भरा होता है। घरवालों से 1000-500 रुपये मांगने के लिए भी एक विद्यार्थी को कितनी बार सोचना पड़ता है, कितना साहस जुटाना पड़ता है, इस बात को परीक्षाओं कि तैयारी करने वाला एक युवा ही समझ सकता है। घोषणाएं करने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि उन पर भरोसा करके लाखों विद्यार्थी अपनी योजनाएं बनाते हैं। #uppoliceexam #students

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कल जंतर-मंतर पर युवाओं के न्याय की बात क्या की, आज मुझे 'हाउस अरेस्ट' (नज़रबंद) कर दिया गया है। लेकिन सरकार यह भूल रही है कि वह एक व्यक्ति को चार दीवारों में कैद कर सकती हैं, करोड़ों युवाओं के इंकलाब को नहीं। लाला लाजपत राय जी ने कहा था कि उनके सिर पर पड़ी एक-एक लाठी अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील बनेगी। आज मैं कहता हूँ— जंतर-मंतर पर मासूम छात्रों पर चलायी गई लाठियां और यह पुलिसिया कार्रवाई, इस अहंकारी व्यवस्था के पतन की शुरुआत है। जो सरकार करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती, वह हमें डराने का यह "पुलिसिया शॉर्टकट" अपना रही है। हम गांधी के रास्ते पर शांति से अपना हक मांग रहे हैं, लेकिन सत्ता यह न भूले कि इसी देश के युवाओं के भीतर भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद भी बसते हैं। युवाओं की जान और उनका भविष्य किसी मंत्री के पद से बहुत बड़ा है। साथियों, हमारी लड़ाई जारी है। मेरी नज़रबंदी से हमारा हौसला नहीं टूटेगा, बल्कि और मजबूत होगा। आप सब डटे रहना! #JantarMantarprotests #Youth

कल जंतर-मंतर पर युवाओं के न्याय की बात क्या की, आज मुझे 'हाउस अरेस्ट' (नज़रबंद) कर दिया गया है। लेकिन सरकार यह भूल रही है कि वह एक व्यक्ति को चार दीवारों में कैद कर सकती हैं, करोड़ों युवाओं के इंकलाब को नहीं। लाला लाजपत राय जी ने कहा था कि उनके सिर पर पड़ी एक-एक लाठी अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील बनेगी। आज मैं कहता हूँ— जंतर-मंतर पर मासूम छात्रों पर चलायी गई लाठियां और यह पुलिसिया कार्रवाई, इस अहंकारी व्यवस्था के पतन की शुरुआत है। जो सरकार करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती, वह हमें डराने का यह "पुलिसिया शॉर्टकट" अपना रही है। हम गांधी के रास्ते पर शांति से अपना हक मांग रहे हैं, लेकिन सत्ता यह न भूले कि इसी देश के युवाओं के भीतर भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद भी बसते हैं। युवाओं की जान और उनका भविष्य किसी मंत्री के पद से बहुत बड़ा है। साथियों, हमारी लड़ाई जारी है। मेरी नज़रबंदी से हमारा हौसला नहीं टूटेगा, बल्कि और मजबूत होगा। आप सब डटे रहना! #JantarMantarprotests #Youth

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सरकार और SSC आखिरकार छात्रों से चाहती क्या है लाखों छात्र 45 से 50 डिग्री तापमान की भरी दुपहरी में SSC-GD की परीक्षा देने के लिए सैकड़ो किलोमीटर से 1000-1500 खर्च करके सेंट्ररो पर पहुंचते हैं और उन्हें पता चलता है कि 25 मई की दूसरे और तीसरे शिफ्ट कि परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है छात्रों ने जब कारण पूछा तो उन्हें साफ तौर पर कोई भी कारण नहीं बताया, कुछ एक सेंटर पर यह बताकर पेपर कैंसिल कर दिया गया कि उनके पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह दूसरे और तीसरे शिफ्ट के बच्चों की परीक्षा कर पाएं लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मुजफ्फरपुर बिहार ऐसे तमाम सेंटरो से वीडियोस और तस्वीरें आ रहे हैं जहां पर SSC-GD के परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है जिस वजह से छात्र हंगामा कर रहे हैं और सड़कों पर प्रदर्शन भी कर रहे हैं अभी कुछ दिन पहले ही यह भी खबर आ रही थी कि 13-13 लाख, 6-6 लाख में SSC-GD के पेपर आउट कराए जा रहे थे, नोएडा में भी अभी सात लोगों को इसी मामले में पकड़ा गया था, सरकार ढंग से एक पेपर भी नहीं करा सकती और विश्व गुरु बनने का खोखला दावा करती है, #SSC_GD_PAPER_CANCEL #SSC #SSC_GD

सरकार और SSC आखिरकार छात्रों से चाहती क्या है लाखों छात्र 45 से 50 डिग्री तापमान की भरी दुपहरी में SSC-GD की परीक्षा देने के लिए सैकड़ो किलोमीटर से 1000-1500 खर्च करके सेंट्ररो पर पहुंचते हैं और उन्हें पता चलता है कि 25 मई की दूसरे और तीसरे शिफ्ट कि परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है छात्रों ने जब कारण पूछा तो उन्हें साफ तौर पर कोई भी कारण नहीं बताया, कुछ एक सेंटर पर यह बताकर पेपर कैंसिल कर दिया गया कि उनके पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह दूसरे और तीसरे शिफ्ट के बच्चों की परीक्षा कर पाएं लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मुजफ्फरपुर बिहार ऐसे तमाम सेंटरो से वीडियोस और तस्वीरें आ रहे हैं जहां पर SSC-GD के परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया है जिस वजह से छात्र हंगामा कर रहे हैं और सड़कों पर प्रदर्शन भी कर रहे हैं अभी कुछ दिन पहले ही यह भी खबर आ रही थी कि 13-13 लाख, 6-6 लाख में SSC-GD के पेपर आउट कराए जा रहे थे, नोएडा में भी अभी सात लोगों को इसी मामले में पकड़ा गया था, सरकार ढंग से एक पेपर भी नहीं करा सकती और विश्व गुरु बनने का खोखला दावा करती है, #SSC_GD_PAPER_CANCEL #SSC #SSC_GD

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बेरोजगार युवाओं और गरीब-मजदूर माता-पिता के बच्चों की जिंदगी से खेलना इस देश में बहुत ही आसान हो गया फिर चाहे वह सरकारी नौकरी, डॉक्टर बनने, शिक्षक बनने या CBSE बोर्ड की परीक्षाएं हो, हर एक एग्जाम में आपको धांधली, पेपर लीक या खुलेआम मोबाइल से चीटिंग करते हुए कुछ न कुछ नजारा देखने को मिल जाएगा, भारत के शिक्षा व्यवस्था को सिस्टम और सरकार ने इतना अव्यवस्थित और नाकाम बना दिया है की हर दिन बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खेला जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से पीड़ा पहुंचाई जा रही है, आप जरा सोच कर देखिए कि जब इन वीडियोस को 10वीं 12वीं में पढ़ने वाले छात्र देखते होंगे तो वह क्या सोचते होंगे कि कल हम भी जब इन परीक्षाओं की तैयारी करेंगे तो हमारे साथ भी सिस्टम और सरकार ऐसे ही खिलवाड़ करेगी ।

बेरोजगार युवाओं और गरीब-मजदूर माता-पिता के बच्चों की जिंदगी से खेलना इस देश में बहुत ही आसान हो गया फिर चाहे वह सरकारी नौकरी, डॉक्टर बनने, शिक्षक बनने या CBSE बोर्ड की परीक्षाएं हो, हर एक एग्जाम में आपको धांधली, पेपर लीक या खुलेआम मोबाइल से चीटिंग करते हुए कुछ न कुछ नजारा देखने को मिल जाएगा, भारत के शिक्षा व्यवस्था को सिस्टम और सरकार ने इतना अव्यवस्थित और नाकाम बना दिया है की हर दिन बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खेला जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से पीड़ा पहुंचाई जा रही है, आप जरा सोच कर देखिए कि जब इन वीडियोस को 10वीं 12वीं में पढ़ने वाले छात्र देखते होंगे तो वह क्या सोचते होंगे कि कल हम भी जब इन परीक्षाओं की तैयारी करेंगे तो हमारे साथ भी सिस्टम और सरकार ऐसे ही खिलवाड़ करेगी ।

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बिहार में मद्य निषेध सिपाही कि 4200 से ज्यादा पदों की भर्ती परीक्षा के दौरान पाटलीपुत्र स्टेशन पर जो अव्यवस्था और हाहाकार देखने को मिला, वह बेहद शर्मनाक है। जब सरकार और प्रशासन को पहले से पता होता है कि लाखों अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरा है तो लॉजिस्टिक्स और पर्याप्त ट्रेनों की व्यवस्था किए बिना, जब आप अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्रों को उनके गृह जनपदो से सैकड़ों किलोमीटर दूर (38 जिलों में) फेंकेंगे, तो स्टेशनों पर ऐसा जनसैलाब और अराजकता होना लाज़मी है। ट्रेनों की लेटलतीफ़ी और इस कुप्रबंधन के कारण हज़ारों विद्यार्थियों की परीक्षा लेट हो गई या पूरी तरह से छूट गई। उनके सालों की मेहनत और पैसों की बर्बादी का ज़िम्मेदार आखिर कौन है, लाखों युवाओं को उनके नसीब पर छोड़कर, ट्रेनों के इंजनों पर चढ़ने को मजबूर कर के क्या हम ऐसे 'विश्व गुरु' बनेंगे साहब? परीक्षा कराने का मतलब सिर्फ टेंडर निकालना नहीं, बच्चों को सुरक्षित सेंटर तक पहुँचाने की जवाबदेही लेना भी होता है। #BiharPoliceExam #SystemFailure #PatnaRailwayStation

बिहार में मद्य निषेध सिपाही कि 4200 से ज्यादा पदों की भर्ती परीक्षा के दौरान पाटलीपुत्र स्टेशन पर जो अव्यवस्था और हाहाकार देखने को मिला, वह बेहद शर्मनाक है। जब सरकार और प्रशासन को पहले से पता होता है कि लाखों अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरा है तो लॉजिस्टिक्स और पर्याप्त ट्रेनों की व्यवस्था किए बिना, जब आप अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्रों को उनके गृह जनपदो से सैकड़ों किलोमीटर दूर (38 जिलों में) फेंकेंगे, तो स्टेशनों पर ऐसा जनसैलाब और अराजकता होना लाज़मी है। ट्रेनों की लेटलतीफ़ी और इस कुप्रबंधन के कारण हज़ारों विद्यार्थियों की परीक्षा लेट हो गई या पूरी तरह से छूट गई। उनके सालों की मेहनत और पैसों की बर्बादी का ज़िम्मेदार आखिर कौन है, लाखों युवाओं को उनके नसीब पर छोड़कर, ट्रेनों के इंजनों पर चढ़ने को मजबूर कर के क्या हम ऐसे 'विश्व गुरु' बनेंगे साहब? परीक्षा कराने का मतलब सिर्फ टेंडर निकालना नहीं, बच्चों को सुरक्षित सेंटर तक पहुँचाने की जवाबदेही लेना भी होता है। #BiharPoliceExam #SystemFailure #PatnaRailwayStation

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क्या अब उत्तर प्रदेश में होनहार युवाओं की नियति सिर्फ सड़कों पर बैठकर अनवरत धरना देना ही रह गई है। जब प्रदेश के विद्यालयों में पद खाली पड़े हैं, तो आखिर आयोग और प्रदेश के शिक्षा मंत्री जी उन पदों पर भर्ती निकालने से क्यों कतरा रहे हैं। 8 साल के लंबे वनवास के बाद अगर कोई शिक्षक भर्ती आती भी है, तो नाम मात्र ही आती है। सड़कों पर उतरे युवाओ कि मांग साफ हैं, हमें 60,000 पदों पर प्राथमिक शिक्षक भर्ती चाहिए। जब पद मौजूद हैं और योग्य अभ्यर्थी भी तो फिर यह लेटलतीफी क्यों। सरकार को युवाओं के सब्र का और इम्तिहान नहीं लेना चाहिए और अविलंब युवाओं के मांग के अनुसार शिक्षक भर्ती का नोटिफिकेशन जारी करना चाहिए! Yogi Adityanath Basic Education UP Government of UP उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) #UPTeacherVacancy #शिक्षक_भर्ती_दो

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उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती का 8 सालों का इंतजार इतना लंबा हो चुका है कि शिक्षक भर्ती की तैयारी करने वाली बहनों को अपनी जायज मांग और हक के लिए अपने छोटे-छोटे मासूम बच्चों को कड़कती धूप में लेकर धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। सरकार आखिर चाहती क्या है जब शिक्षा मंत्रालय कह रहा है कि यूपी में 1,40,000 से ज्यादा शिक्षक भर्ती के पद खाली हैं तो आखिर उत्तर प्रदेश सरकार विज्ञापन जारी क्यों नहीं कर रही है। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का मांग तो केवल 60,000 तक है जो बिल्कुल जायज है। तो फिर उत्तर प्रदेश सरकार विज्ञापन आखिर क्यों नहीं जारी कर रही है क्यों इस तरह से छात्रों और विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है सरकार। Yogi Adityanath Basic Education UP Government of UP उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) #UPTeacherVacancy #शिक्षक_भर्ती_दो #prayagraj

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जब उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्यों में 15 से 25% तक के राज्य के सरकारी नौकरियों में वेटिंग लिस्ट जारी की जाती है। तो फिर उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है। UPSSSC, UP POLICE, CONSTABLE, UPSI, HOMEGUARD और प्रदेश की अन्य भर्तियो में भी वेटिंग लिस्ट जारी होना चाहिए। दशमलव के कुछ अंकों या नंबरों से मेरिट लिस्ट से बाहर हजारों अभ्यर्थियों को भी वेटिंग लिस्ट के जरिए मौका मिलना चाहिए। कुछ नंबरों की वजह से हमें युवाओं को बाहर का रास्ता दिखाकर उनके भविष्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। सालों की मेहनत के बाद दशमलव अंको से पीछे रह जाना एक युवा के लिए कितना तकलीफदेह है यह समझना हर किसी के लिए संभव नहीं है। इसलिए अगर पद खाली हो रहे हैं अभ्यर्थी मेडिकल, फिजिकल सारे चीजों को पास करने के बाद भी ज्वाइन नहीं कर रहे हैं या ज्वाइन करने के बाद भी किसी वजह से छोड़ रहे हैं, तो वेटिंग लिस्ट जारी करके उनसे पीछे कतार में खड़े युवाओं को मौका मिलना चाहिए। सरकार अगर गुजरात मॉडल लागू करने का हर राज्य में दावा करती है तो सरकार को यह भी दावा करना चाहिए कि गुजरात में जिस तरह से सरकारी नौकरियों की भर्तियों में वेटिंग लिस्ट जारी होता है इस तरह उत्तर प्रदेश में भी जारी होना चाहिए। Yogi Adityanath CM Office, GoUP Government of UP #UPPoliceWaitingList #UPSSSC_WaitingList #WaitingListInUP #UPPoliceConstable

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मध्य प्रदेश के भोपाल में सड़कों पर उतरी इन नर्सिंग छात्राओं का दर्द और आक्रोश, प्रदेश की खस्ताहाल चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है। बालाघाट से 12 घंटे का सफर तय करके आई एक छात्रा के आंसू गवाही दे रहे हैं कि 4 साल की नर्सिंग डिग्री के लिए 6 साल बर्बाद हो चुके हैं। सोचिए, गरीब परिवारों की ये बेटियां, जिनके मां-बाप ने ज़मीनें बेचकर इन्हें पढ़ाया, वो आज सड़क पर क्यों रो रही है। छात्रा खुद कह रही है कि तीन साल में एक बार फर्स्ट ईयर का एग्जाम हुआ है, वो भी कई बार टलने के बाद। परिवार शादी के लिए दबाव बना रहा है पर सरकार को इनके भविष्य की कोई परवाह नहीं! इन छात्राओं की मांग है रुके हुए रिज़ल्ट तुरंत घोषित किए जाएं। सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों के बीच भेदभाव खत्म हो और दोनों के रिज़ल्ट साथ आएं। नर्सिंग की परीक्षाओं को नियमित किया जाए ताकि 4 साल की डिग्री 4 साल में ही पूरी हो। जब ये छात्राएं कमिश्नर ऑफिस या स्वास्थ्य मंत्री के पास गुहार लगाती हैं, तो उन्हें अनसुना कर दिया जाता है। एक छात्रा का यह सवाल बहुत वाजिब है कि अगर हम अपना हक़ मांगते हैं, तो पुलिस लड़कियों को धक्का मारती है... जब बिना नर्सों के अस्पताल नहीं चल सकते, तो फिर नर्सों को उनके हक़ क्यों नहीं दिए जाते। सरकार को इन बेटियों की आवाज़ सुननी चाहिए। ये वो बेटियां हैं जो कल को हमारे अस्पतालों में दिन-रात सेवा करेंगी। इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ तुरंत बंद हो! Chief Minister, MP Public Health & Medical Education Department, MP #Bhopal #NursingStudentsProtest #JusticeForNursingStudents #SaveFuture

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अपनी जायज मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है SSC_GD के छात्रों को सरकार अभी कहेगी ये युवा देशद्रोही है इनके साथ खड़े होने वाले अध्यापकों के ऊपर सरकार मुकदमा दर्ज करेगी और आयोग भी बयान देगा की परीक्षा में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है किसी भी तरह की धांधली नहीं हुई है परीक्षा एकदम निष्पक्ष और पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई है अगर परीक्षा को लेकर कोई भी भ्रामक वीडियो या फिर अफवाह फैलाई जाती है और इसमें कोई छात्र सम्मिलित मिलता है तो उसके ऊपर भी मुकदमा होगा यानी उसका भविष्य खराब कर दिया जाएगा, मेरा एक सवाल है अगर सरकार और आयोग किसी भी एग्जाम को सुचारू रूप से नहीं करवा सकती तो युवाओं और छात्रों से कह दे कि हम आपके भविष्य से यूं ही खिलवाड़ करते रहेंगे क्योंकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित है हमें देश के गरीब, मजदूर के बच्चों से क्या मतलब है, अगर बेरोजगार युवाओं से ऐसी अव्यवस्था नहीं झेली जा रही है तो वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर पकौड़े तले... #ssc_gd

Naveen Sharma Sikandrabad

54,213 次观看 • 3 个月前

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पहले NEET हुआ, फिर री-NEET हुआ और अब रिजल्ट के नाम पर छात्रों के साथ यह कैसा अन्याय हो रहा है। आख़िर सिस्टम और सरकार देश के होनहार युवाओं के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं। एक तरफ़ छात्र OMR शीट के मिलान में 638 और 660 नंबर पाकर डॉक्टर बनने का सपना देख रहे थे, लेकिन रिजल्ट आया तो उन्हें महज़ 38 और 116 नंबर देकर क्वालिफ़ाइंग लिस्ट से ही बाहर कर दिया गया! 600-600 अंकों का यह अंतर कोई मामूली बात नहीं है। सोनीपत में एक ही छात्र के तो दो अलग-अलग रिजल्ट सामने आ रहे हैं—एक दिन स्कोरकार्ड पर 605 अंक दिखते हैं और अगले ही दिन उसे घटाकर सीधे 60 अंक कर दिया जाता है! आंसर-की आने के महज़ 3-4 घंटे के भीतर ऐसा कौन सा जादुई रिजल्ट तैयार किया गया जिसने कई बच्चों के सालों की तपस्या को एक झटके में शून्य कर दिया यह सीधा-सीधा छात्रों के मानसिक शोषण और उनके अधिकारों पर डाका है। सरकार और सिस्टम को अपनी आँखों से धृतराष्ट्र की पट्टी हटानी होगी। और इस पूरे मामले की बिना किसी लीपापोती के उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच करनी होगी। और एक-एक छात्र की ओएमआर और रिजल्ट की विसंगति को सुधारा जाना चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए ।

Naveen Sharma Sikandrabad

24,697 次观看 • 1 个月前

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उत्तर प्रदेश में मिशन रोजगार के विज्ञापनों की चमक अगर आंखों से उतर गई हो तो लखनऊ के पिकअप भवन UPSSSC दफ्तर के बाहर खड़े इन नौजवानों की बेबसी देख लीजिए। ​बैनर पर लिखी लाइन— सचिव जी दया करो और हमसे अब यह प्रताड़ना नहीं झेली जाएगी, चीख-चीख कर बता रही है कि इस सिस्टम की लेटलतीफी ने होनहार युवाओं को किस कदर तोड़ कर रख दिया है। अपने ही हक़ के लिए नौजवानों को इस तरह सड़कों पर गिड़गिड़ाने के लिए मजबूर करना बेहद शर्मनाक है। ​PET 2022 के आधार पर 'जूनियर असिस्टेंट' (5512 पद) की यह भर्ती निकाली गई थी। आज लगभग तीन साल का लंबा वक्त बीतने को है, लेकिन परिणाम के नाम पर अभ्यर्थियों के हाथ सिर्फ मायूसी, तारीखें और अंतहीन इंतज़ार लगा है अभ्यर्थी कई बार आयोग के दफ्तर के सामने रिजल्ट जारी करने के लिए प्रदर्शन कर चुके हैं उपमुख्यमंत्री के घर के बाहर भी प्रदर्शन कर चुके हैं और जनता दरबार में जाकर मुख्यमंत्री जी से भी मिल चुके हैं पर फिर भी रिजल्ट जारी नहीं किया गया है अब तक। क्या उत्तर प्रदेश में कोई भी चयन प्रक्रिया बिना सड़क पर उतरे, बिना धूप-बारिश सहे और बिना धरना-प्रदर्शन किए पूरी नहीं हो सकती। ​आयोग की फाइलों में धूल फांक रहे नौजवानों के भविष्य को अब और मत लटकाइए। हमारी सरकार से स्पष्ट मांग है कि इस मानसिक प्रताड़ना पर तुरंत रोक लगे और जूनियर असिस्टेंट का परिणाम तत्काल प्रभाव से जारी कर युवाओं को न्याय दिया जाए! ​Yogi Adityanath Government of UP @upssscofficial #JuniorAssistant5512 #UPSSSC_Result_Do #LucknowProtest #JusticeForUPStudents

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जब किराए में 50% की छूट देनी ही नहीं थी, तो युवा साथियों को ऐसी उम्मीद भी नहीं दिलानी चाहिए थी। ज़रा उस विद्यार्थी के बारे में सोचिए, जिसका कुल किराया 1000 रुपये पड़ने वाला था, लेकिन वह घर से सिर्फ 700 रुपये यह सोचकर लेकर निकला कि 50% छूट मिलने पर आने-जाने का काम 500 में हो जाएगा और बचे हुए पैसों से खाने-पीने तथा अन्य जरूरी खर्च पूरे कर लेगा। साहब, विद्यार्थी जीवन बहुत संघर्षों से भरा होता है। घरवालों से 1000-500 रुपये मांगने के लिए भी एक विद्यार्थी को कितनी बार सोचना पड़ता है, कितना साहस जुटाना पड़ता है, इस बात को परीक्षाओं कि तैयारी करने वाला एक युवा ही समझ सकता है। घोषणाएं करने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि उन पर भरोसा करके लाखों विद्यार्थी अपनी योजनाएं बनाते हैं। #uppoliceexam #students

Naveen Sharma Sikandrabad

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