
Dr. Pallavi Patel
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विधायक, सिराथू 251 विधानसभा, कौशाम्बी,उत्तर प्रदेश Daughter of Dr Sone Lal Patel. सामाजिक न्याय के मिशन @adkamerawadi से जुड़िये
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देश की राजधानी नई दिल्ली के जंतर मंतर पर बीते 10 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और छात्र संगठन आइसा के छात्रनेताओं से वार्ता कर केंद्र सरकार को शिक्षा व्यवस्था को लेकर मांगों पर हल निकालना चाहिए। महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री और संसद के इतने करीब हो रहे लोकतांत्रिक आंदोलन की अवहेलना कतई ठीक नहीं है।
Dr. Pallavi Patel11,019 次观看 • 28 天前
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गाजीपुर की नाबालिक बेटी निशा विश्वकर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत... अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के संगीन आरोप लगे, पुलिस विवेचना जारी... पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे सपा के पूर्व मंत्री श्री रामआसरे विश्वकर्मा व अन्य नेताओं और पुलिस बल पर दुस्साहसिक सत्तासंरक्षित सामंतवादियों द्वारा हमला, पथराव। सरकार के दबाव में पीड़ित पक्ष पर ही पुलिसिया कार्यवाही। अब सवाल यह है कि क्या भाजपा के तथाकथित रामराज्य में संगीन अपराधों को रोकने में विफल योगी सरकार पीड़ित पक्ष के कानूनी और संवैधानिक अधिकारों को भी छीन लेना चाहती है ?
Dr. Pallavi Patel21,972 次观看 • 3 个月前
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यूजीसी एक्ट 2026 में ओबीसी-एससी-एसटी छात्रों के सम्मान की बात उठी और तुरंत रोक लगा दी गई। देश की रीढ़—पिछड़ा, दलित, आदिवासी और मुसलमान समाज की आवाज़ लगातार कुचली जा रही है। यह भाजपा सरकार के फूट डालो और राज करो के तहत कमाई पढ़ाई और दवाई जैसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रायोजित षड्यंत्र भी है।
Dr. Pallavi Patel20,894 次观看 • 6 个月前

ये निर्णय जो आया है ये अधूरा निर्णय है ,अगर सरकार ये मान रही है की पेपर लीक हुआ है तो सबसे पहले सरकार ये सुनिश्चित करे की इसी प्रवेश पत्र के माध्यम से अधिकतम 15 दिन में या कह लीजिए लोकसभा की अधिसूचना लगने से पहले दुबारा करा दिया जाए। #UPPOLICE_EXAM #UPPolice_Re_exam
Dr. Pallavi Patel65,194 次观看 • 2 年前

मणिपुर जल रहा है, महिलाएं अपमानित हो रही हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाएं अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं—कहीं केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में महिलाएं चिताओं पर बैठने को मजबूर हैं, तो कहीं महिला पहलवान न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रही हैं। मजदूर महंगाई और LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतों से परेशान होकर पलायन को मजबूर हैं। लेकिन इन सबके बीच देश का ‘प्रधान सेवक’ चुप दिखाई देता है—कभी इवेंट्स में व्यस्त, तो कभी छवि निर्माण में। जब भी सामने आते हैं, तो संवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव को साधने की कोशिश करते हैं। आपने बार-बार जवाबदेही से ज्यादा चुप्पी और संवाद से ज्यादा विभाजन को चुना है।
Dr. Pallavi Patel11,076 次观看 • 3 个月前