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Dr. Pallavi Patel

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विधायक, सिराथू 251 विधानसभा, कौशाम्बी,उत्तर प्रदेश Daughter of Dr Sone Lal Patel. सामाजिक न्याय के मिशन @adkamerawadi से जुड़िये

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चाहे बाल खींचो, जेल में डालो, F.I.R. करो या लाठी चलाओ, UGC रेगुलेशन के समर्थन में हमारा कदम न रुकेगा, न झुकेगा।

चाहे बाल खींचो, जेल में डालो, F.I.R. करो या लाठी चलाओ, UGC रेगुलेशन के समर्थन में हमारा कदम न रुकेगा, न झुकेगा।

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सरकार के खुफिया की निगरानी और पुलिस के बल प्रयोग और सीमाएं सील करने के कारण फतेहपुर हत्या प्रकरण के पीड़ित परिवार के घर मैं मोटरसाइकिल से पहुंची। किसी भी कीमत पर न्याय की लड़ाई जारी रहेगी...

सरकार के खुफिया की निगरानी और पुलिस के बल प्रयोग और सीमाएं सील करने के कारण फतेहपुर हत्या प्रकरण के पीड़ित परिवार के घर मैं मोटरसाइकिल से पहुंची। किसी भी कीमत पर न्याय की लड़ाई जारी रहेगी...

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बड़े बुजुर्ग एक बात कहते हैं कि जो शिकारी होता है वह तालाब से मछली पकड़ने के लिए कांटे में मांस का लूथरा लगाता है #vidhansabha #UttarPradesh

बड़े बुजुर्ग एक बात कहते हैं कि जो शिकारी होता है वह तालाब से मछली पकड़ने के लिए कांटे में मांस का लूथरा लगाता है #vidhansabha #UttarPradesh

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अपना दल के संस्थापक, कमेरों के उत्थान के लिए सदैव संघर्षरत हम सबके आदर्श, प्रेरणास्रोत, मार्गदर्शक बोधिसत्व महामना यश:कायी डॉ० सोनेलाल पटेल जी की पुण्यतिथि पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि | तुम लोगों की लाठियों से एक सोनेलाल की आवाज नहीं दबेगी, मैं इतने सोनेलाल बना जाऊँगा, कि मेरे जाने के वर्षों बाद भी मेरी आवाज समाज में क्रांति का अलख जगाती रहेगी... | - डॉ. सोने लाल पटेल जी

अपना दल के संस्थापक, कमेरों के उत्थान के लिए सदैव संघर्षरत हम सबके आदर्श, प्रेरणास्रोत, मार्गदर्शक बोधिसत्व महामना यश:कायी डॉ० सोनेलाल पटेल जी की पुण्यतिथि पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि | तुम लोगों की लाठियों से एक सोनेलाल की आवाज नहीं दबेगी, मैं इतने सोनेलाल बना जाऊँगा, कि मेरे जाने के वर्षों बाद भी मेरी आवाज समाज में क्रांति का अलख जगाती रहेगी... | - डॉ. सोने लाल पटेल जी

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एक ओर लखनऊ में दलित बुज़ुर्ग रामपाल पासी को “पेशाब चाटने” पर मजबूर किया गया, दूसरी ओर उन्नाव में 14 साल के बच्चे की जान ले ली गई — जब सत्ता मौन हो और अत्याचार बोलता हो, तब राजनीति नहीं...संघर्ष ज़रूरी हो जाता है।

एक ओर लखनऊ में दलित बुज़ुर्ग रामपाल पासी को “पेशाब चाटने” पर मजबूर किया गया, दूसरी ओर उन्नाव में 14 साल के बच्चे की जान ले ली गई — जब सत्ता मौन हो और अत्याचार बोलता हो, तब राजनीति नहीं...संघर्ष ज़रूरी हो जाता है।

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डॉक्टर सोनेलाल पटेल पचास हड्डियाँ टूटने के बाद जब तीन महीने बाद बिस्तर से उठे, तो अपने शरीर की हड्डियों के दम पर नहीं, अपने शरीर में पड़े बारह किलो लोहे के दम पर उठे थे। वो उठे, वो उठे और वो एक हैसियत के साथ उठे, जो एक इंच भी नहीं झुकी, जो एक कदम भी पीछे नहीं हटी। जेल में रहकर के उन्होंने पैंसठ साल की उम्र में, 1999 में, जन्मों-जन्मों की यातना झेली थी, जो उनकी रीढ़ की हड्डी पर चोट करती थी। डॉक्टर कह रहे थे कि तुम खेत में काम करने वाले, तुम खेत की मेड़ पर काम करने वाले राजनेता हो। तब डॉक्टर सोनेलाल पटेल जब दोबारा खड़े हुए, तो चुनौती दे रहे थे। चुनौती दे रहे थे। आपने सुना होगा, मंचों से कहा था कि देश की राजनीति, देश की सत्ता किसी की बपौती नहीं है। इस देश में हक पिछड़ा वर्ग, आदिवासी का है। अपना अधिकार हमने लिया है, जानते हैं, कब्जा भी करना जानते हैं। जो हमें तलवार से देती है, वो तलवार चलाकर के गर्दन काटना भी जानते हैं और ढाल बनाकर के अपने वर्तमान और भविष्य को बचाना भी जानते हैं। मैं आपको यह बात इसलिए बता रहा हूँ कि वो नेक्स्ट की पीढ़ियाँ, जो अपने पूर्व की पीढ़ियों के प्यार, तपस्या और संघर्ष को नहीं जानते, उनके बनाए हुए इतिहास को नहीं जानते, तो आगे लड़ी जाने वाली लड़ाई को अपने आप ही आधी हार जाते हैं। वो कभी नया इतिहास नहीं लिख सकते।

Dr. Pallavi Patel

33,572 просмотров • 1 месяц назад

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कुछ दिन पहले एक बात कानों में पड़ी कि उत्तर प्रदेश की आधी आबादी को सालाना ₹50,000 दिए जाएंगे, जिसमें चुनाव से पहले ₹20,000 और बाकी बाद में दिए जाएंगे। सुनकर अच्छा लगा, क्योंकि इस प्रदेश की आधी आबादी हम भी हैं। लेकिन तुरंत बिहार की चुनावी घोषणाएं याद आ गईं—वहां भी बड़े-बड़े वादे किए गए। और फिर वो वादा भी याद आया, जब कहा गया था कि सरकार बनने पर हर खाते में ₹15 लाख आएंगे। इसलिए सवाल ये है कि कहीं 2027 के चुनाव से पहले ₹20,000 और ₹50,000 का सपना दिखाकर वोट तो नहीं मांगा जा रहा? चुनाव के बाद कहीं यही न कहा जाए कि “वो तो चुनावी जुमला था।” इसलिए बहनों-भाइयों, घोषणा सुनकर खुश होने से पहले वादे का हिसाब मांगिए, गारंटी मांगिए और पिछले वादों का जवाब मांगिए। वोट आपका है, फैसला आपका है—लेकिन फैसला वादों पर नहीं, उनके पिछले रिकॉर्ड पर होना चाहिए।

Dr. Pallavi Patel

24,133 просмотров • 27 дней назад

गाजीपुर की नाबालिक बेटी निशा विश्वकर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत... अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के संगीन आरोप लगे, पुलिस विवेचना जारी... पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे सपा के पूर्व मंत्री श्री रामआसरे विश्वकर्मा व अन्य नेताओं और पुलिस बल पर दुस्साहसिक सत्तासंरक्षित सामंतवादियों द्वारा हमला, पथराव। सरकार के दबाव में पीड़ित पक्ष पर ही पुलिसिया कार्यवाही। अब सवाल यह है कि क्या भाजपा के तथाकथित रामराज्य में संगीन अपराधों को रोकने में विफल योगी सरकार पीड़ित पक्ष के कानूनी और संवैधानिक अधिकारों को भी छीन लेना चाहती है ?
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