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पाठशाला गुरुजी ( Pathshala GuruG )

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Questioner l Thinker l Interested in Politics l Breaking silence with sense l

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हुमा कुरैशी ने कुछ समय पहले कहा था कि वह अब कभी nude scenes नहीं करेंगी। उनका कहना था कि उनका भी परिवार है, पिता हैं, भाई हैं, और वह ऐसा कोई काम नहीं करना चाहतीं जिससे उन्हें अपने परिवार के सामने शर्मिंदगी महसूस हो। अब Toxic के ट्रेलर लॉन्च के दौरान उनकी ड्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई तो लोगों ने उनके पुराने बयान को भी याद करना शुरू कर दिया। सवाल यह नहीं है कि किसी अभिनेत्री को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। सवाल सिर्फ इतना है कि जब कोई व्यक्ति अपने लिए कोई व्यक्तिगत सीमा तय करता है, तो क्या वह सीमा सिर्फ फिल्मों में निभाए जाने वाले किरदारों और intimate scenes तक सीमित मानी जाए, या उसके सार्वजनिक पहनावे और presentation पर भी लोग उसी कसौटी को लागू कर सकते हैं ? आखिर “मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी जिससे उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो” जैसी बात का दायरा कितना व्यापक है ?

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हुमा कुरैशी ने कुछ समय पहले कहा था कि वह अब कभी nude scenes नहीं करेंगी। उनका कहना था कि उनका भी परिवार है, पिता हैं, भाई हैं, और वह ऐसा कोई काम नहीं करना चाहतीं जिससे उन्हें अपने परिवार के सामने शर्मिंदगी महसूस हो। अब Toxic के ट्रेलर लॉन्च के दौरान उनकी ड्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई तो लोगों ने उनके पुराने बयान को भी याद करना शुरू कर दिया। सवाल यह नहीं है कि किसी अभिनेत्री को क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। सवाल सिर्फ इतना है कि जब कोई व्यक्ति अपने लिए कोई व्यक्तिगत सीमा तय करता है, तो क्या वह सीमा सिर्फ फिल्मों में निभाए जाने वाले किरदारों और intimate scenes तक सीमित मानी जाए, या उसके सार्वजनिक पहनावे और presentation पर भी लोग उसी कसौटी को लागू कर सकते हैं ? आखिर “मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी जिससे उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो” जैसी बात का दायरा कितना व्यापक है ?

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कुछ समय पहले किसी गांव में कोई बैल कुएँ में गिर गया था l उसे बचाने के लिए जब दो-तीन युवा कुएं में उतरे तो उनके साथ हादसा हो गया l इसे चेक करने के लिए गांव वालों ने आपस में पूछा कि अब कुएं के अंदर कौन जाएगा ? तो किसी की आवाज नहीं आई l उसके बाद ग्रामीणों ने यह जाँचने के लिए एक बकरी को बांधकर कुएं के अंदर उतार दिया कि इसके साथ कोई दुर्घटना होती है या नहीं होती है l इसके बाद कुछ लोगों ने बाद में पूछा भी कि आपने एक बेजुबान जानवर को क्यों कुएं के अंदर उतार दिया l तो उनमें से एक व्यक्ति बोला कि हमने कहां उतारा l जब हमने सबसे पूछा कि अब कुएं में कौन उतरेगा, तो सभी लोग शांत थे l तब यही बकरी जोर से चिल्लाने लगी...मैं.. मैं... मैं...

कुछ समय पहले किसी गांव में कोई बैल कुएँ में गिर गया था l उसे बचाने के लिए जब दो-तीन युवा कुएं में उतरे तो उनके साथ हादसा हो गया l इसे चेक करने के लिए गांव वालों ने आपस में पूछा कि अब कुएं के अंदर कौन जाएगा ? तो किसी की आवाज नहीं आई l उसके बाद ग्रामीणों ने यह जाँचने के लिए एक बकरी को बांधकर कुएं के अंदर उतार दिया कि इसके साथ कोई दुर्घटना होती है या नहीं होती है l इसके बाद कुछ लोगों ने बाद में पूछा भी कि आपने एक बेजुबान जानवर को क्यों कुएं के अंदर उतार दिया l तो उनमें से एक व्यक्ति बोला कि हमने कहां उतारा l जब हमने सबसे पूछा कि अब कुएं में कौन उतरेगा, तो सभी लोग शांत थे l तब यही बकरी जोर से चिल्लाने लगी...मैं.. मैं... मैं...

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आप जब 8 साल पुराना यह पहला वीडियो देखेंगे तो समझ आएगा कि राहुल गांधी का मजाक बनाने के लिए मोदी जी किस स्तर तक गए थे l इन 8 सालों में राहुल गांधी को समझ आया कि कैसे किसी व्यक्ति को उसी की भाषा में जवाब देना है l कैसे उसके बनाये तिलिस्म को उसकी ही अदाकारी से तोड़कर रख देना हैँ l आज जब राहुल गांधी जी ने मोदी जी की विदेश नीति को सिर्फ एक एक्टिंग से ध्वस्त करके रख दिया तो पूरे सोशल मीडिया पर भूचाल आ गया l मोदी सरकार का बचाव करने वाले गोदी एंकर्स को विपक्ष के नेता में खामियां दिखने लगी l इनकी आंखों को तब शायद मोदियाबिंद हुआ होगा l वो शेर क्या था... दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए सामने आइना रख लिया कीजिए...

आप जब 8 साल पुराना यह पहला वीडियो देखेंगे तो समझ आएगा कि राहुल गांधी का मजाक बनाने के लिए मोदी जी किस स्तर तक गए थे l इन 8 सालों में राहुल गांधी को समझ आया कि कैसे किसी व्यक्ति को उसी की भाषा में जवाब देना है l कैसे उसके बनाये तिलिस्म को उसकी ही अदाकारी से तोड़कर रख देना हैँ l आज जब राहुल गांधी जी ने मोदी जी की विदेश नीति को सिर्फ एक एक्टिंग से ध्वस्त करके रख दिया तो पूरे सोशल मीडिया पर भूचाल आ गया l मोदी सरकार का बचाव करने वाले गोदी एंकर्स को विपक्ष के नेता में खामियां दिखने लगी l इनकी आंखों को तब शायद मोदियाबिंद हुआ होगा l वो शेर क्या था... दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए सामने आइना रख लिया कीजिए...

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वैभव सूर्यवंशी ने मैच के अंतिम सेशन में शानदार कैच भी पकड़ लिया है क्योंकि आलोचकों की नजर सिर्फ उसकी बैटिंग पर ही नहीं उसकी फिटनेस पर भी है l

वैभव सूर्यवंशी ने मैच के अंतिम सेशन में शानदार कैच भी पकड़ लिया है क्योंकि आलोचकों की नजर सिर्फ उसकी बैटिंग पर ही नहीं उसकी फिटनेस पर भी है l

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फोटो और वीडियो में class मंच पर जो अशोक चिन्ह दिख रहा है, मुझे लगता है किसी प्राइवेट संस्थान द्वारा इसका उपयोग करना कानून के अनुसार भी प्रतिबंधित हैं l The State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 की धारा 3 और 4 कहती हैं कि - धारा 3 (Prohibition of improper use of emblem) कहती है कि कोई व्यक्ति अशोक चिन्ह का ऐसा उपयोग नहीं कर सकता जिससे यह आभास हो कि उसका संबंध सरकार से है या वह कोई सरकारी संस्था/दस्तावेज है, जब तक कि केंद्र सरकार की अनुमति न हो। इसके अलावा धारा 4 कहती है कि किसी व्यापार, व्यवसाय, पेशे या व्यावसायिक गतिविधि के लिए अशोक चिन्ह का उपयोग नहीं किया जा सकता, सिवाय उन मामलों के जिन्हें नियमों द्वारा अनुमति दी गई हो। विशेषज्ञ लोग अपनी राय दें l

फोटो और वीडियो में class मंच पर जो अशोक चिन्ह दिख रहा है, मुझे लगता है किसी प्राइवेट संस्थान द्वारा इसका उपयोग करना कानून के अनुसार भी प्रतिबंधित हैं l The State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 की धारा 3 और 4 कहती हैं कि - धारा 3 (Prohibition of improper use of emblem) कहती है कि कोई व्यक्ति अशोक चिन्ह का ऐसा उपयोग नहीं कर सकता जिससे यह आभास हो कि उसका संबंध सरकार से है या वह कोई सरकारी संस्था/दस्तावेज है, जब तक कि केंद्र सरकार की अनुमति न हो। इसके अलावा धारा 4 कहती है कि किसी व्यापार, व्यवसाय, पेशे या व्यावसायिक गतिविधि के लिए अशोक चिन्ह का उपयोग नहीं किया जा सकता, सिवाय उन मामलों के जिन्हें नियमों द्वारा अनुमति दी गई हो। विशेषज्ञ लोग अपनी राय दें l

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अब जितने भी लोग इस वीडियो को देखें l उसके बाद इन महाशय के class के किसी भी रैंडम वीडियो पर जाकर उनके द्वारा डिजिटल board पर लिखे हुए शब्दों को ध्यान से पढ़ें, और खुद देखें कि सरकारी शिक्षकों को ताना देने वाला यह व्यक्ति कितना शुद्ध hindi /english लिखता है l

अब जितने भी लोग इस वीडियो को देखें l उसके बाद इन महाशय के class के किसी भी रैंडम वीडियो पर जाकर उनके द्वारा डिजिटल board पर लिखे हुए शब्दों को ध्यान से पढ़ें, और खुद देखें कि सरकारी शिक्षकों को ताना देने वाला यह व्यक्ति कितना शुद्ध hindi /english लिखता है l

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अभिनय शर्मा सर को तो आप जानते होंगे ? वहीं अभिनय शर्मा सर जो छात्रों को मैथ्स पढ़ाने के साथ-साथ,सरकार को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास कराने के लिए भी हमेशा खड़े रहते हैँ l सर की लाइव क्लास के दौरान किसी छात्र ने कमेंट करके बोला, कि सर अपना बैंक बैलेंस दिखाइए l अविनय शर्मा सर भी कहां रुकने वाले थे, उन्होंने बोला, दिखा दूँ अकाउंट का बैलेंस ? जोड़ भी नहीं पाएगा l अभी रोता फिरता फिरेगा ये l पानी माँगने लगेगा ये l और ये कहते-कहते सर ने अपना बैंक अकाउंट खोलकर मोबाइल स्क्रीन को live कैमरे के सामने यह कहते हुए कर दिया कि...एक्सिस बैंक में है भाई....जोड़ लेना भाई l और फिर मोबाइल स्क्रीन पर जो आंकड़ा दिखा वह चौंकाने वाला था l आप भी जोड़ लीजिये कितना है l

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260,578 görüntüleme • 4 gün önce

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दिल का दौरा समझकर दिया CPR, महिला की दो पसलियां टूट गईं... कैलारस ( MP ) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। तिलोंजरी हायर सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ 41 वर्षीय शिक्षिका ललिता धाकड़ गर्मी के कारण चक्कर आने से स्कूटी से गिर गईं। उसी दौरान वहां से गुजर रहे दो युवकों ने उन्हें सड़क पर अचेत अवस्था में देखा। हार्ट अटैक की आशंका में उन्होंने बिना देर किए CPR देना शुरू कर दिया। इसके बाद वे शिक्षिका को अपनी गाड़ी से कैलारस अस्पताल लेकर चले, लेकिन रास्ते भर भी लगातार उनके सीने पर दबाव डालकर CPR देते रहे। अस्पताल पहुंचने पर बीएमओ डॉ. मनीष शर्मा और उनकी टीम ने जांच के बाद बताया कि शिक्षिका को दिल का दौरा नहीं पड़ा था। कुछ देर बाद उनकी हालत तो संभल गई, लेकिन उन्होंने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। एक्स-रे में पता चला कि लगातार और संभवतः गलत तरीके से CPR देने के कारण उनकी दो पसलियां टूट गई थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया गया। यह घटना बताती है कि आपातकाल में मदद करने की भावना जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक CPR की सही तकनीक का प्रशिक्षण भी है। सही समय पर सही तरीके से दिया गया CPR जीवन बचा सकता है, जबकि गलत तरीके से किया गया CPR गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकता है।

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316,874 görüntüleme • 2 ay önce

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GEN-Z के इशारों, उनके स्लैंग, उनके मीम्स, उनके ह्यूमर और उनकी बॉडी लैंग्वेज को समझने के लिए X (Twitter) पर भी ऐसे सैकड़ों वीडियो होने चाहिए। क्योंकि हर पीढ़ी की अपनी एक भाषा होती है। अगर हम सिर्फ शब्द सुनते हैं, लेकिन उनके पीछे छिपे संदर्भ, व्यंग्य और भाव नहीं समझते, तो उस पीढ़ी को भी सही ढंग से नहीं समझ पाएँगे। आज की GEN-Z सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि AURA, POV, W, L, Cooked, Delulu जैसे संकेतों और इंटरनेट संस्कृति के माध्यम से संवाद करती है। जो इन्हें समझ लेगा, वही इस पीढ़ी से जुड़ा रहेगा। वरना कहीं ऐसा न हो कि X (Twitter) अपने अलग ही AURA होने के गर्व में इस पूरी पीढ़ी से धीरे-धीरे disconnect हो जाए।

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165,178 görüntüleme • 2 ay önce

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"कितने सारे बच्चे हैं, जो मुझसे यह सीख रहे हैं कि जीवन में एक बार पैसा कमा लो तो फिर क्या करना है, ये भी तो बताना होगा " बरसात में भीगता यह बंदा अलख पांडेय उन सवालों के जवाब दे रहा है जो उनकी Emotional marketing पर उठते रहे हैँ l पूछने वाला अलख पांडेय से कहता कि लोग कहते हैँ कि यह आप सेवा कार्य आप इसलिए कर रहे हैं कि ताकि आपके कोर्स बिक सके l अलख पांडे ने इसके जवाब में कहा कि मैं यह चीज मैं बहुत समय से सुन रहा हूं और अगर ऐसा है तो फिर बिल्कुल मत खरीदो कोर्स l उसके बाद उन्होंने कहा कि क्या मैं यह काम करना बंद कर दूं l उन्होंने कहा कि मैंने physics Wallah बनाया ताकि भारत में शिक्षा को सस्ता कर सकूँ और वह मैंने किया भी l उसके बाद कई दूसरे लोगों ने भी वो मॉडल बनाया और भारत में online शिक्षा सस्ती हुई l मुझे लगता है अलख पांडे पर ऐसे सवाल कम से कम ऐसे सेवा कार्यों के लिए नहीं उठाये जाने चाहिए l Emotional marketing के और भी तरीके हैँ जो उपयोग होते रहे हैँ, तो ये सवाल सिर्फ उन विशेष संदर्भ तक ही सीमित रहने चाहिए l

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68,405 görüntüleme • 1 ay önce

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"नहीं, sir plz सर, रजत के बिना मैं अधूरा हूँ। रजत आइये " इरफ़ान के ये शब्द कृतज्ञता, संवेदनशीलता और रिश्तों की गरिमा का प्रमाण था। इरफ़ान के ये शब्द रजत के माध्यम से पत्रकारिता के हर उस माध्यम का ऋणी भी महसूस कराते हैँ जो इरफ़ान जैसे संघर्षशील चेहरे को पहचानकर , उसे सुनकर और फिर देश के सामने रखते हैँ l आवाज़ चाहे कितनी भी दमदार क्यों न हो, उसे दूर तक पहुँचाने के लिए एक सच्चे माध्यम की आवश्यकता होती है। इरफान की आवाज़ और रजत की पत्रकारिता दोनों ने मिलकर एक ऐसी कहानी लिखी, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है । नोट :- यह दृश्य तब का है जब राहुल गांधी इरफान से मिलने उनके घर पहुँचे, तब एक दिल छू लेने वाला दृश्य देखने को मिला। जिस पत्रकार रजत पांडे ने अपनी रिपोर्टिंग के माध्यम से इरफान की आवाज़ को पूरे देश तक पहुँचाया, उन्हें ही प्रोटोकॉल के चलते इरफ़ान के घर के भीतर जाने से रोका जा रहा था।

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74,289 görüntüleme • 2 ay önce

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गुरु मां के रूप में जानी जाने वाली नीतू mam पढ़ी-लिखी महिला हैँ और अब उन्होंने लड्डू गोपाल के बढ़ते प्रचलन पर अपने विचार रखें हैँ l चुंकि वह खुद एक महिला हैँ इसलिए उनकी बात तार्किक भी लगती है l सबसे पहले तो वह कहती है कि "जब तक अंधविश्वास खत्म नहीं होगा,तब तक हम लोग तरक्की नहीं करेंगे l आज के जमाने में यह देखकर मुझे उम्मीद नहीं है कि यह कभी खत्म होने वाला है l" नीतू मैम ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख़्यतः उन महिलाओं पर प्रश्न चिन्ह लगाया जो लड्डू गोपाल को लेकर ब्यूटी पार्लर पहुंचती है, डॉक्टर के पास पहुंच रही है स्कूल में लड्डू गोपाल को सारे सब्जेक्ट में 100 में से 100 नंबर दिए जा रहे हैं l नीतू मैम का कहना है कि ये डॉक्टर और टीचर्स भी इन महिलाओं के मेंटल डिसऑर्डर को नहीं समझ पा रहे हैँ l इसको भक्ति का नाम दिया जा रहा है l नीतू मैम ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि बेचारी यह जो महिलाएं हैं ना इनको घर पर सुनने वाला हस्बैंड नहीं है l उनकी सास उन्हें पीड़ित करती आ रही हैँ l हस्बैंड उस महिला को इमोशनल सपोर्ट नहीं दे रहे हैं l तो वह महिला वह इमोशनल सपोर्ट उस लड्डू गोपाल में चाहती है l उन्होंने आगे कहा कि यह कोई भक्ति नहीं है एक मेंटल डिसऑर्डर है l वह अपने मन की भड़ास,अपने दिल की बात किसी को नहीं बता पा रही है, तो उसने एक बच्चा पाल लिया है लड्डू गोपाल....

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30,683 görüntüleme • 1 ay önce