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पाठशाला गुरुजी ( Pathshala GuruG )

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वैभव सूर्यवंशी ने मैच के अंतिम सेशन में शानदार कैच भी पकड़ लिया है क्योंकि आलोचकों की नजर सिर्फ उसकी बैटिंग पर ही नहीं उसकी फिटनेस पर भी है l

वैभव सूर्यवंशी ने मैच के अंतिम सेशन में शानदार कैच भी पकड़ लिया है क्योंकि आलोचकों की नजर सिर्फ उसकी बैटिंग पर ही नहीं उसकी फिटनेस पर भी है l

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फोटो और वीडियो में class मंच पर जो अशोक चिन्ह दिख रहा है, मुझे लगता है किसी प्राइवेट संस्थान द्वारा इसका उपयोग करना कानून के अनुसार भी प्रतिबंधित हैं l The State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 की धारा 3 और 4 कहती हैं कि - धारा 3 (Prohibition of improper use of emblem) कहती है कि कोई व्यक्ति अशोक चिन्ह का ऐसा उपयोग नहीं कर सकता जिससे यह आभास हो कि उसका संबंध सरकार से है या वह कोई सरकारी संस्था/दस्तावेज है, जब तक कि केंद्र सरकार की अनुमति न हो। इसके अलावा धारा 4 कहती है कि किसी व्यापार, व्यवसाय, पेशे या व्यावसायिक गतिविधि के लिए अशोक चिन्ह का उपयोग नहीं किया जा सकता, सिवाय उन मामलों के जिन्हें नियमों द्वारा अनुमति दी गई हो। विशेषज्ञ लोग अपनी राय दें l

फोटो और वीडियो में class मंच पर जो अशोक चिन्ह दिख रहा है, मुझे लगता है किसी प्राइवेट संस्थान द्वारा इसका उपयोग करना कानून के अनुसार भी प्रतिबंधित हैं l The State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 की धारा 3 और 4 कहती हैं कि - धारा 3 (Prohibition of improper use of emblem) कहती है कि कोई व्यक्ति अशोक चिन्ह का ऐसा उपयोग नहीं कर सकता जिससे यह आभास हो कि उसका संबंध सरकार से है या वह कोई सरकारी संस्था/दस्तावेज है, जब तक कि केंद्र सरकार की अनुमति न हो। इसके अलावा धारा 4 कहती है कि किसी व्यापार, व्यवसाय, पेशे या व्यावसायिक गतिविधि के लिए अशोक चिन्ह का उपयोग नहीं किया जा सकता, सिवाय उन मामलों के जिन्हें नियमों द्वारा अनुमति दी गई हो। विशेषज्ञ लोग अपनी राय दें l

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दिल का दौरा समझकर दिया CPR, महिला की दो पसलियां टूट गईं... कैलारस ( MP ) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। तिलोंजरी हायर सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ 41 वर्षीय शिक्षिका ललिता धाकड़ गर्मी के कारण चक्कर आने से स्कूटी से गिर गईं। उसी दौरान वहां से गुजर रहे दो युवकों ने उन्हें सड़क पर अचेत अवस्था में देखा। हार्ट अटैक की आशंका में उन्होंने बिना देर किए CPR देना शुरू कर दिया। इसके बाद वे शिक्षिका को अपनी गाड़ी से कैलारस अस्पताल लेकर चले, लेकिन रास्ते भर भी लगातार उनके सीने पर दबाव डालकर CPR देते रहे। अस्पताल पहुंचने पर बीएमओ डॉ. मनीष शर्मा और उनकी टीम ने जांच के बाद बताया कि शिक्षिका को दिल का दौरा नहीं पड़ा था। कुछ देर बाद उनकी हालत तो संभल गई, लेकिन उन्होंने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। एक्स-रे में पता चला कि लगातार और संभवतः गलत तरीके से CPR देने के कारण उनकी दो पसलियां टूट गई थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया गया। यह घटना बताती है कि आपातकाल में मदद करने की भावना जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक CPR की सही तकनीक का प्रशिक्षण भी है। सही समय पर सही तरीके से दिया गया CPR जीवन बचा सकता है, जबकि गलत तरीके से किया गया CPR गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकता है।

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316,227 次观看 • 19 天前

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शिक्षकों को कानून की बेहतर समझ होना जरुरी हैँ l जब तक कानून की समझ नहीं होगी, कानून के प्रति सम्मान भी पैदा नहीं हो सकता l गलती, अपराध, षड़यंत्र, और लापरवाही भी कानूनी दृष्टि से महत्व रखती हैँ l और जब किसी हॉस्पिटल खोलने वाले को ये छूट देनी ही हैँ कि हजारों मरीजों के इलाज के बाद किसी मरीज की हॉस्पिटल की लापरवाही से मृत्यु होती हैँ तो उसे जनता द्वारा कुछ न कहा जाए तो ये छूट देश के हर हॉस्पिटल मालिक को मिलनी चाहिए और हर हॉस्पिटल के मालिक को भी उसकी अन्य आपराधिक मामलों में सलग्नता को सिर्फ छोटी सी गलती मान लेना चाहिए l और हॉस्पिटल के मालिकों को ही अकेला क्यों ये बेनिफिट तो हर field में जनहित में पैसा लगाने वाले को मिलना ही चाहिए l

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36,077 次观看 • 25 天前

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शुभांकर मिश्रा ने रौशन आनंद सर के साथ पॉडकास्ट में मेरे एक प्रश्न को सीधे-सीधे शामिल शामिल किया कि बदला लोगे या माफ़ करोगे l यह प्रश्न मैंने इसलिए suggest किया कि मुझे लगता है कि रौशन आनंद सर कुछ भी निर्णय लें, लेकिन जीवन के अलग-अलग पढ़ाव पर यह प्रश्न रौशन आनंद को परेशान करता रहेगा l वह कह रहे हैं कि “हम क्या ही बदला लेंगे, जिसका भाई ही चला गया हो।” लेकिन ऎसी स्थिति में व्यक्ति का ऐसे प्रश्नों के उत्तर खोजने का असली संघर्ष किसी पॉडकास्ट में नहीं बल्कि उसके भीतर शुरू होता है। अगर वह माफ कर देते है, तो जीवन के किसी मोड़ पर मन पूछेगा, “क्या मैंने कमजोरी दिखाई? क्या मुझे बदला लेना चाहिए था?” और अगर वह बदला लेते है, तब भी भीतर एक आवाज उठती रहेगी, “क्या इससे मेरा भाई वापस आ गया? क्या मुझे छोड़ देना चाहिए था?” जीवन के हर पड़ाव पर, हर शांत रात में, हर याद के साथ वही प्रश्न लौटने लगेगा काश बदला ले लिया होता… या काश माफ कर दिया होता… किसी प्रिय को खो देने के बाद व्यक्ति अक्सर बदले और क्षमा के बीच नहीं, बल्कि अपनी बची हुई शांति और अपने खोए हुए व्यक्ति की स्मृति के बीच खड़ा होता है।

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