
P.N.Rai
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राजनीतिक विश्लेषक Political Analyst followed by @ARangnathan72, @KapilMishra etc पेंटिंग और पेंसिल स्केचिंग मेरा शौक। My YouTube Channel @CanvasTalesByPrakash
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CJP कभी भी अभिजीत दीपके के बेडरूम में नहीं बना था। CJP के पीछे की असली ताकत 'ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन' (Human Rights Foundation) है... ...और यह पूरा खेल ओस्लो फ्रीडम फोरम (Oslo Freedom Forum) में रचा गया था, जिसका आयोजन ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने किया था। और अंदाजा लगाइए कि भारत से वहां कौन-कौन से बड़े प्रतिभागी (attendees) पहुंचे थे? सौरभ दास और सुप्रिया शर्मा। और वहां की प्रमुख वक्ताओं (featured speakers) में से एक थीं हेलेन स्वैनसन — वही पत्रकार जिन्होंने मोदी जी के ओस्लो दौरे के समय (18 से 20 मई के दौरान) उनके सामने हंगामा (heckling) किया था। इसकी पटकथा काफी समय पहले ही तैयार कर ली गई थी। और इस पूरे तंत्र (ecosystem) को सौरभ दास और ठाकुर फाउंडेशन (Thakur Foundation) के ज़रिए भारत में लाया गया। ठाकुर फाउंडेशन ने सौरभ दास को शुरुआती स्टार्टअप फंड के तौर पर लगभग 11 लाख रुपये दिए थे। उन्होंने एक किताब भी लिखी है — दरअसल वे एक किताब लिख रहे हैं जिसके लिए उन्हें अग्रिम राशि (advance) मिली है। ठीक वैसे ही जैसे न्यूट गिंगरिच (Newt Gingrich) ने तब किया था जब वे अमेरिका में 'फॉक्स न्यूज़' (Fox News) लाने की कोशिश कर रहे थे। सौरभ दास के लिए भी वही तरीका अपनाया जा रहा है। तो, ये सारी चीजें बहुत पहले से ही तय थीं। दीपके को 'ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन' और 'जॉर्ज सोरोस फाउंडेशन' द्वारा अमेरिका में पूरे एक साल तक ट्रेनिंग दी गई थी। दूसरे साल उनके बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। अब एक भारी भरकम डोनेशन की बातें सामने आ रही हैं, ताकि वहां से उनकी डिग्री पक्की की जा सके। सुप्रिया शर्मा 'ओस्लो फ्रीडम फोरम' में दूसरी प्रमुख वक्ता थीं। और उन्होंने उमर खालिद पर खुलकर बात की — कि कैसे भारत में अन्य धर्मों का उत्पीड़न हो रहा है और हिंदू लोग हिटलर और मुसोलिनी जैसे हैं। यही उनकी सोच और विचारधारा थी, और उनके मुताबिक मोदी तानाशाह हैं... हां, सुप्रिया शर्मा ने 'लव जिहाद' पर एक किताब भी सह-लिखी (co-authored) है और बताया है कि यह एक काल्पनिक (fictional) कहानी है। वे भारत में भारी मात्रा में पैसा झोंक रहे हैं, इसीलिए FCRA इतना महत्वपूर्ण है और यही वजह है कि अन्य राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं। अधिकांश आंदोलनों की शुरुआत वामपंथी (Left) विचारधाराओं से हुई है, जहाँ छात्रों का माइंडवॉश करके आंदोलन खड़े किए जाते हैं। यह नेपाल में हुआ, बांग्लादेश में हुआ और बहुत पहले क्यूबा में भी ऐसा ही हुआ था। इस देश की Gen Z और Gen Alpha से मेरी यही अपील है — सरकार से जितने चाहें सवाल पूछें, उनसे वे काम करवाएं जो आप चाहते हैं, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में। लेकिन कृपया करके CJP, AAP, ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन और ओस्लो फोरम जैसी विचारधाराओं के बहकावे में न आएं। वे भारत को अस्थिर कर देंगे और इसे वापस अंधकार युग (Dark Ages) में धकेल देंगे।
P.N.Rai293,841 次观看 • 16 天前

*फिल्म "धुरंधर " के शॉक से* *अभी संभले नहीं कि ,* *एक और मुहकाला आ रहा हैं,* * "खानग्रेस" की* *पोल खोलने के लिए।* राजकुमार राव की "प्रहार" *अक्टूबर में पर्दे पर आ रही है।* *अंत तक देखें ट्रेलर।* 26 11 2008 इतिहास का वह काला दिन जब मुंबई की सड़कों होटल अस्पतालों रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म को खून से रंग दिया गया था। एक तरफ तत्कालीन गृह मंत्री अपने सूट बदलने में समय नष्ट कर रहा था इधर आतंकवादी खूनी खेल खेल रहे थे। एनएसजी को भेजने में घंटे की देरी कर दी गई। एक कांग्रेसी नेता ने उस आतंकवादी घटना को हिंदुओं के साथ जोड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। उसने तो महेश भट्ट के साथ मिलकर एक किताब का भी विमोचन कर दिया था जिसमें घटना को भगवा आतंकवाद से जोड़ दिया गया था। उतना ही नहीं आतंकवाद के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान को तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने बाढ़ के नाम पर 25 मिलियन डॉलर की मदद भी की थी। जिंदा पकड़े गए अजमल कसाब को बचाने की पूरी कोशिश की गई फांसी की सजा होने के बाद वामपंथियों ने उसके लिए दया याचिका दायर की थी जिसमें बड़े-बड़े कम्युनिस्ट और गद्दार सेकुलर नेता शामिल थे।
P.N.Rai21,020 次观看 • 1 天前

CEC का रोल वैसा ही होता है जैसा सुप्रीम कोर्ट के CJI का। बेंच के 3 में से अगर 2 जजों का फैसला अलग है तो CJI को मानना ही होता है। कोई वीटो नहीं होता। अगर 2 चुनाव आयुक्तों का मत एक तरफ है तो CEC कुछ नहीं कर सकता। उसके पास कोई वीटो पावर नहीं होता। इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर ने आधी अधूरी खबर बनाई ताकी माहौल को खराब किया जा सके। फैसला हमेशा चुनाव आयोग का होता है, CEC का नहीं। ठीक वैसे ही जैसे न्यायिक फैसला सुप्रीम कोर्ट का होता है, CJI का नहीं। मामला अगर सुप्रीम कोर्ट में गया तो मनु सिंघवी, सिब्बल के दलील देने के बाद भी विपक्ष एक बार फिर मुंह की खाएगा।
P.N.Rai106,588 次观看 • 23 天前

एक सवाल तो मोदी सरकार से पूछना ही चाहिए कि उस व्यक्ति को जिसे अमेरिकी डीप स्टेट ने भारत में उथल-पुथल करने के लिए भेजा है, जो आदमी सरकार उखाड़ देने की बात करता है, जो आदमी मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा मांगता है, जो आदमी संसद पर हमला करने के लिए उकसाता है, जो आदमी भारत को नेपाल और बांग्लादेश बनाना चाहता है, जो आदमी पुलिस कर्मियों पर हमला करवाता है, उसे 10 पुलिस कर्मियों की सुरक्षा किस लिए दी गई है? वह कोई जनप्रतिनिधि नहीं है, वह विधायक सांसद और मंत्री भी नहीं है, किसी संवैधानिक पद पर भी नहीं है, फिर उसे इतनी सुरक्षा क्यों दी जा रही है? उसकी सुरक्षा पर इतना खर्च क्यों किया जा रहा है, जिसका भुगतान भारत के टैक्स पेयर कर रहे हैं।
P.N.Rai16,734 次观看 • 4 天前

छोड़ो पढ़ना लिखना। छोड़ो डॉक्टर इंजीनियर बनना। छोड़ो साइंटिस्ट, प्रोफेसर बनना। छोड़ो वकील जज बनना। छोड़ो विधायक, एमपी बनना। सिर्फ कॉकरोच बन जाओ, लाइफ़ झक्कास है। भाई साहब, क्या इज्जत है। मंत्री, प्रधानमंत्री डरते हैं पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर डरते हैं। जबरदस्त सिक्युरिटी मिलती है। पैसे की बारिश होती है। मीडिया का नायक है। डीप स्टेट के लायक है। गालीबाजों का साथ है। पत्थरबाजों का साथ है। छात्रों के नाम सारे FIR माफ़ है। कानून तोड़ेगा तो भी चलेगा। सब माफ है।
P.N.Rai104,200 次观看 • 1 个月前

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अपील। आप दो सर्वोच्च न्यायालय बना दीजिए एक वीआईपी के लिए जिनकी संख्या.0001% भी नहीं है। जब भी ये याचिका दायर करते हैं तुरंत सुनवाई शुरू हो जाती है। और दूसरी आम आदमियों के लिए जिनकी संख्या 99.99% है। इन .00001% लोगों ने हमारा जीना मुहाल कर दिया है। हमें त्यौहार नहीं मानने दे रहे हैं। सड़कों को हाईजैक कर लिया है। हमें कॉकरोच की दया के ऊपर छोड़ दिया गया है।
P.N.Rai22,413 次观看 • 7 天前

काक्रोच आशुतोष रांका गलत रसोई में घुस गया । हिमंत विश्व शर्मा के घर की रसोई में। असम पुलिस ने उसे धर दबोचा है। दिल्ली में जितने कॉकरोच है सब फड़फड़ा रहे हैं। सब धमकी दे रहे हैं कि छोड़ दो नहीं तो हम आ रहे हैं। कॉकरोच को पता नहीं की हेमंत विश्व शर्मा ने पवन खेड़ा का पेड़ा बना दिया था। तुम किस खेत की मूली हो।
P.N.Rai62,679 次观看 • 22 天前

मैं प्रधानमंत्री मोदी को गाली देने वाली इस विषकन्या के माता पिता को देखना चाहूंगा जिन्होंने इसे इतनी गंदी परवरिश दी है। इस लड़की के बारे में अगर किसी को जानकारी है तो सार्वजनिक करें ताकि इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसने एक व्यक्ति को नहीं, राष्ट्र के प्रधान मंत्री को गलियां दी है।
P.N.Rai132,099 次观看 • 2 个月前

दुख तो है। लेकिन जानना चाहता हूं कि मेरी कार बस ट्रेन और जहाज को कौन चला रहा है। मैं नहीं चाहता कि मेरी जहाज को उड़ाने वाले पायलट को कोई सूअर आकर पीछे से वार करें और यात्रियों की जिंदगी खतरे में डाल दे। अगर वह सूअर सामने से आता तो Smit Machachad उसको एक पल में धराशाई कर देता लेकिन वह तो कायर निकाला। सरकार और न्यायपालिका से अनुरोध है कि वह ऐसा नियम बनाएं पायलट या ड्राइवर का नाम यात्रियों को यात्रा आरम्भ करने से पहले मालूम हो जाए। : अभिनेता राहुल सिंह
P.N.Rai26,787 次观看 • 14 天前

फिल्म चाइना गेट में अमरीश पुरी ने नसरुद्दीन शाह को कहा था कि तेरा तो खून ही गंदा है। जब जांच पड़ताल की गई तो पता चला नसीरुद्दीन शाह का खून तो हिंदुस्तानी है ही नहींm इसका परदादा अफगानिस्तान से आया था और रानी लक्ष्मीबाई के साथ गद्दारी किया था, जिससे खुश होकर अंग्रेजों ने उसे मेरठ के पास एक जागीर दे दी और नवाब का किताब भी दे दिया था। बटवारा के समय यह पाकिस्तान नहीं गए क्योंकि इसका बाप यहां पर नयाब तहसीलदार था। अच्छी कमाई थी। उसे भारत से प्यार नहीं था। नसरुद्दीन ने प्रधानमंत्री के लिए जो शब्द कहे हैं उसे साबित हो गया कि इसे भी भारत से प्यार नहीं है। अमरीश पुरी की बात सही साबित कर दिया। जय हिंद, जय भारत।
P.N.Rai124,423 次观看 • 2 个月前