
Dilip Mandal
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Senior Advisor, Ministry of Information & Broadcasting, Government of India
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भारत ने 500 टन हिल्सा मछली यानी इलीश माछ बांग्लादेश को बेचा है. अभी 300 टन और जाएगा. आज तक तो हम लोग यही सुने थे कि बांग्लादेश से हम लोग इलीश मछली मंगाते हैं. गंगा (पद्मा) नदी का इलीश. लेकिन भारतीय मछुआरों ने खेल पलट दिया है. मोदी युग में भारत में मछली उत्पादन तेजी से बढ़ा है.
Dilip Mandal50,251 görüntüleme • 5 gün önce

क्या पंडित नेहरू ने किसी भाषण में "हिंदू राइट विंग सांप्रदायिकता" को कम्युनिज्म से भी खतरनाक कहा था? सारे रिकॉर्ड, नेहरू के समस्त भाषणों के संग्रह, नेहरू रचना संकलन और नेहरू आर्काइव को देखने के बाद मैं पूरे यकीन से कह रहा हूं कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था. पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी नेहरू से संबद्ध किसी भी प्राथमिक सोर्स से अपने भाषण को प्रमाणित करें, वरना क्षमा याचना कर लें. अंसारी जी को हिंदुओं से समस्या हो सकती है और ऐसी राय रखने के अधिकार है, पर इतिहास से छेड़छाड़ न करें. हिंदू और मुसलमानों को लेकर नेहरू के तमाम तरह के विचार सामने हैं, पर ये वाली बात उनके किसी भाषण में नहीं है.
Dilip Mandal35,687 görüntüleme • 4 gün önce

फूफा जी कह रहे हैं कि एक डबल डेकर मालगाड़ी जब 250 ट्रक का माल अकेले ले जाएगी तो ट्रकों का क्या होगा! मालगाड़ी से 30 घंटे की दूरी 12 घंटे में पूरी हो रही है तो 18 घंटा जल्दी पहुंचकर क्या करेंगे. मनमोहन सिंह ने 2004 में जिस फ्रेड कोरिडोर की कल्पना की थी, उस पर नरेंद्र मोदी ने 2014 में काम शुरू किया और कल ये महा परियोजना पूरी हो गयी. ये पहला चरण है. अभी और कोरिडोर बनेंगे. 2800 किलोमीटर का ये मालगाड़ी महामार्ग (डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर) सिर्फ सामान ढोने के लिए हैं. इन पर हर दिन 443 मालगाड़ियां दौड़ रही हैं. सवा किलोमीटर से भी लंबी डबल डेकर मालगाड़ी चलाई जा चुकी है. मोदी शिलान्यास और उद्घाटन दोनों करने वाले प्रधानमंत्री हैं.
Dilip Mandal135,993 görüntüleme • 15 gün önce

आरक्षण और यूजीसी को सभी पक्षों के यूट्यूबर्स भूल जाएं. आमदनी के लिए अब दूसरा मुद्दा तलाश लें. इसमें कुछ था नहीं, फिर भी काफी व्यूज और रेवेन्यू इससे निचोड़ा जा चुका है. इनका सारा रस निकल चुका है. अब ये सूख गया है. आरक्षण पर कोई विवाद ही नहीं है. ईडब्ल्यूएस आरक्षण संविधान के आर्टिकल 16 में आने के बाद से अब कोई सामाजिक वर्ग आरक्षण से बाहर नहीं है. एससी-एसटी पर कोई विवाद कभी था नहीं. वो मूल संविधान से निकला है. गरीब ओबीसी को 1993 में और गरीब सवर्ण को 2019 में दे दिया गया है. दोनों पर 8 लाख की लिमिट है. ओबीसी और जनरल दोनों में क्रीमी लेयर बाहर है. नरेंद्र मोदी ऐसे भी राष्ट्रीय आम सहमति के बिना कुछ करते नहीं है. ईडब्ल्यूएस भी कांग्रेस, सपा, तृणमूल, बसपा सबकी सहमति से संविधान में आया. तो अब यही स्थिति बनी रहेगी. 2019 में सब फ्रीज हो चुका है. उसके बाद दो लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. आरक्षण पर एकमात्र एक्शन महिलाओं को एमपी-एमएलए बनाने का है. मोदी जी वो जरूर करेंगे. अभी सहमति बना रहे हैं. यूजीसी पर भी यथास्थिति ही है. इस पर कभी कोई एक्ट नहीं बना. कोई कानून न प्रस्तावित था, न है. एक्ट बनने की बात अभी तक आई नहीं है. मंत्रालय में कोई ड्राफ्ट भी नहीं है. किसी ने सोचा भी नहीं है. अफसर लोग कुछ कुछ करते रहते हैं. उन पर कोर्ट और संसदीय समिति का दबाव होता है. लेकिन अफसर कानून थोड़ी न बनाएंगे. एक्ट तो तब बनेगा जब संसद में आएगा, बहस होगी, पास होगा. इसलिए जिनको हमेशा से प्रोटेक्शन मिल रहा था, उनको ही मिलता रहेगा. यूजीसी की न एक्ट बनाने की औकात है, न उसने इसकी कोशिश की है. यूजीसी खुद ही एक एक्ट से बनी संस्था है. यूजीसी भी ज्यादा दिन नहीं रहेगा. नया ढांचा बनने वाला है. जो संशय बना था, कोर्ट के आदेश से वह दूर हो चुका है. ये दोनों विवाद मुख्य रूप से दिल्ली में चलाया जा रहा था और इससे सिर्फ यूपी प्रभावित हो रहा था. पता नहीं क्यों? दक्षिण, पश्चिम और पूर्वी भारत में किसी को पता भी नहीं है ये मुद्दा. आरक्षण पर बिहार के माननीय मुख्यमंत्री को सुना जाए.
Dilip Mandal105,470 görüntüleme • 14 gün önce

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने आज कौशिकी अमावश्या के दिन कोलकाता के कालीघाट तीर्थ पर मां तारा की उपासना की. प्रसाद में मछली की मुंडी और पुलाव खाया. लेकिन इससे पहले आज विधानसभा में ये भी कहा कि बाबा बागेश्वर को पूरा अधिकार है शाकाहार के प्रचार का और कोलकाता में उनकी फोटो जलाने वाले गिरफ्तार किए जाएंगे. भारत ऊपर से एक पेचीदा देश लगता है. लेकिन नीयत ठीक हो तो ज्यादातर समाधान बहुत सरल होते हैं. मुख्यमंत्री मछली खाएंगे, पर शाकाहारियों का सम्मान भी बना रहेगा. इस तरह आरक्षण और यूजीसी के बाद एक और विवाद खत्म हो गया.
Dilip Mandal38,058 görüntüleme • 13 gün önce

रेड अलर्ट: US कंपनी मेटा ने सबसे बड़े लोकतंत्र के पीएम Narendra Modi की फेसबुक पोस्ट कुछ घंटों के लिए रोक दी. मोदी एक कॉरपोरेशन के शिकार बन गए. अगर वो ये कर सकते हैं तो क्या उन्होंने एक खास इंस्टा पोस्ट को वायरल नहीं किया होगा? क्या आप यकीन से कह सकते हैं कि ये नहीं हुआ होगा? सोशल मीडिया का सारा कंट्रोल तो अमेरिकी कंपनीयों के पास है. उनके लिए चुटकियों का काम है. सोशल मीडिया ने दुनिया में युद्ध कराए हैं, और सरकारें बदली हैं. आप अपने मोबाइल पर जो देख रहे हैं, वह कौन डिसाइड कर रहा है? वो आप नहीं हैं. सिर्फ चीन, रूस और कुछ हद तक जापान ने अमेरिकी कंट्रोल की समस्या का समाधान किया है. बाकी देश सोचने लगे हैं.
Dilip Mandal156,387 görüntüleme • 1 ay önce

कमाई का बंपर मौका! एनजीओ, फॉरेन फंडेड पत्रकारों और वकीलों के लिए डॉलर और यूरो कमाने का बंपर मौका आ रहा है. भारत न्यूक्लियर एनर्जी का काम बढ़ाने वाला है. इस तरीके से सबसे कम प्रदूषण से बिजली बनती है. सभी विकसित देशों में ये पॉपुलर है. इसके विरोध में काफी कमाई है.
Dilip Mandal12,273 görüntüleme • 4 gün önce

भारतीय संविधान पर संविधान सभा में ये आरोप लगे कि इसमें भारतीय क्या है. सब यहां वहां से लिया गया है. बाबा साहब का 25 नवंबर 1949 का जवाब है कि इसका स्वर भारतीय है. इसकी पद्धतियां बौद्ध हैं. ये भारत की जरूरतों के लिए बना है. इस संदर्भ में ये जानना महत्वपूर्ण है कि महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर दुनिया भर में दो सौ साल में जो हासिल हुआ, वह सब संविधान में ले लिया गया. दो सौ साल का काम भारतीय संविधान ने दो साल में कर लिया. मेरी टिप्पणी एनडीटीवी पर.
Dilip Mandal24,635 görüntüleme • 11 gün önce

ये मेरी एकदम ही "पर्सनल वाली निजी राय" है. इसलिए उम्मीद है कोई विवाद नहीं होगा: जिसको कुछ लोग रेवड़ी या फ्रीबीज या सरकारी भीख तक कहते हैं, वह लोगों को आलसी नहीं, उद्यमी बना रहा है. दरअसल वे लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि रामचरना ने नए जूते और ललमुनिया ने नई साड़ी पहन ली.
Dilip Mandal21,364 görüntüleme • 10 gün önce

मुसलमानों का देश के संसाधनों पर पहला हक वाला मनमोहन सिंह का बयान अचानक नहीं आया था. ठीक इसी दौरान कोशिश हो रही थी कि: 1. शिड्यूल्ड कास्ट की लिस्ट में मुसलमानों को भी घुसाया जाए 2. मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में अलग से 15% आरक्षण दिया जाए 3. ओबीसी आरक्षण को धर्म के आधार पर बांट कर मुसलमानों को 6% अलग दिया जाए. 4. धर्म परिवर्तन करने पर भी एससी का दर्जा सुरक्षित रहे. मुसलमानों को संसाधनों पर पहला हक देना सिर्फ बयान (दिसंबर, 2006, दिल्ली) नहीं था. इसकी प्रक्रिया चल रही थी. रिटायर्ड चीफ जस्टिस और कांग्रेसी नेता सांसद रंगनाथ मिश्रा इसी दौरान अपनी रिपोर्ट में लिख रहा था कि मुसलमानों में भी जाति है, इसलिए उनमें भी एससी माना जाए और एससी लिस्ट में उनको भी आरक्षण दिया जाए. ये भी सिफारिश की गई कि कोई एससी अगर धर्म बदल कर मुसलमान या ईसाई बनता है तो भी उसका एससी दर्जा बना रहे. रंगनाथ मिश्रा धर्मांतरण का रास्ता साफ करने की कोशिश कर रहे थे और सरकार की शह उनको हासिल थी. मनमोहन सिंह 3 नवंबर, 2006 को, मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण की चर्चा छेड़ चुके थे. रंगनाथ कमीशन ने मुसलमानों को नौकरियों में 15% आरक्षण देने की सिफारिश की थी. ओबीसी के 27% से 6% काटकर मुसलमानों को देने की सिफारिश भी कांग्रेस द्वारा गठित इस आयोग में है. मनमोहन सिंह के बयान से ठीक एक महीना पहले सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आई थी, जिसने ये गलतबयानी की थी कि मुसलमानों की हालत दलितों से भी खराब है. मुस्लिम आरक्षण के लिए चौतरफा माहौल बनाया जा रहा था. इसका सीधा नुकसान देश के सबसे वंचित एससी, एसटी और ओबीसी को होना था. रउनके विरोध के कारण ये हो नहीं पाया. इसमें आईएएस अफसर आशा दास मैडम की बड़ी भूमिका है. उसके बारे में फिर कभी. वो भयानक किस्म के मुस्लिम तुष्टिकरण का दौर था. मगर क्यों? कांग्रेस का मकसद क्या था? मैं इस वीडियो में बता रहा हूं कि कांग्रेस दरअसल इस समय सपा, बसपा और आरजेडी से अपना मुसलमान वोट वापस लेने की कोशिश में जुटी थी.
Dilip Mandal1,066,257 görüntüleme • 2 yıl önce

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में कल श्रीनगर में हुए इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत संपूर्ण ‘वंदे मातरम्’ के गायन से हुई. कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन के अपने पार्टनर नेशनल कॉन्फ्रेंस की इस कारण आलोचना की है. पता नहीं क्यों?
Dilip Mandal23,426 görüntüleme • 15 gün önce

चीन ने खूब इंफ्रास्ट्र्चर बनाया. इतना कोयला जलाया कि सूरज नजर नहीं आता था. मस्जिदों को शौचालय बना दिए. पर्यावरण तथा मानवाधिकार वाले इस पर चुप रहे. लेकिन भारत सांस भी लेता है तो वे शोर मचाने लगते हैं. जानिए लेफ्टि. जनरल अजय सिंह से, जो निकोबार संयुक्त कमान के कमांडर-इन-चीफ थे.
Dilip Mandal86,684 görüntüleme • 2 ay önce

राहुल गांधी चाय की दुकानों में जाति खोज रहे हैं, लेकिन उन्हें जाति बाथरूम में खोजनी चाहिए। कांग्रेस ऑफिस के बाथरूम में। 1998 में अति पिछड़ी जाति के सीताराम केसरी को कांग्रेस अध्यक्ष पद से जिस तरह हटाकर सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाया गया, वह राजनीति के अंधेरे अध्यायों में से एक है। मैं उन दिनों अमर उजाला में राजनीतिक संवाददाता था और उस घटनाक्रम का गवाह रहा हूं। कांग्रेस मुख्यालय में उस दिन 200 से ज्यादा पत्रकार मौजूद थे। चचा केसरी को बाथरूम में बंद कर दिया गया। उनके कपड़े... फिर सोनिया जी आईं और उनकी ताजपोशी हुई। चचा केसरी ने कांग्रेस सेवादल में ड्रम बजाने से लेकर अध्यक्ष बनने तक का सफर तय किया था। लेकिन उन्हें हटाने के लिए प्रक्रिया का इंतजार नहीं किया गया। Narendra Modi Sanjay Pugalia
Dilip Mandal33,404 görüntüleme • 24 gün önce

"कोलकाता में तो जुमे की नमाज सड़क पर ही होगी" का अहंकार एक दिन में टूट गया. स्ट्रीट पावर को खत्म करने के लिए लाठी-गोली की जरूरत नहीं पड़ती. लोकतंत्र में सिर्फ सरकार महाबली है. सड़क पर दादागीरी तब तक चलती है, जब तक सरकार चलने देती है. फिर कोई सरकार कहती है अब से कानून तोड़ना बंद. सब मान जाते हैं. यहां हर मस्जिद में नमाज अंदर ही हुई. कहीं कहीं दो शिफ्ट लगाई गई. पर नमाज हुई अंदर ही.
Dilip Mandal134,850 görüntüleme • 4 ay önce

The Election Commission of India should ban CSDS caste and religion-based voting survey or ask them to reveal the raw data and make it public. CSDS, funded by the Ford Foundation and other foreign agencies, releases data on which caste and religious groups vote for which parties, influencing political narratives and creating further divisions. The accuracy of this data is questionable, as people are often reluctant to disclose their caste and voting choices, even anonymously. We don't have the varifiable raw data to check it. The data is used to create divisive analyses that suggest voting patterns based on caste and religion, fostering suspicion and discord among different groups. The funding of such surveys by international organizations like the Ford Foundation aims to fragment Indian society further, given India’s rise as a global power. The Election Commission should ban caste and religion-focused surveys to prevent further societal divisions. Election Commission of India
Dilip Mandal635,017 görüntüleme • 2 yıl önce

MSP खत्म करना क्यों जरूरी. #FarmersProtest पर कोई भी राय बनाने से पहले देख लें. फसल की कीमत तय करने का काम खरीदार और बेचने वाले के बीच तय होना चाहिए. सरकार द्वारा कीमत तय करना अच्छी बात नहीं है, खासकर तब जबकि हर साल करोड़ों रुपए का अनाज सरकारी गोदामों के बाहर सड़ जाता है.
Dilip Mandal624,999 görüntüleme • 2 yıl önce