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Dilip Mandal

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Senior Advisor, Ministry of Information & Broadcasting, Government of India

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मोदी जी के सबसे पक्के वोटर.... ये सबऑल्टर्न हिंदुत्व है. कल्चरल नेशनलिज्म यहां सबसे मजबूत है. इनको रेख्ता, सूफी और लिट फेस्ट नहीं चाहिए. इनका उत्सव भी कितना भारतीय है. भावी मुख्यमंत्री जी, इनको कभी दुखी मत करना.

मोदी जी के सबसे पक्के वोटर.... ये सबऑल्टर्न हिंदुत्व है. कल्चरल नेशनलिज्म यहां सबसे मजबूत है. इनको रेख्ता, सूफी और लिट फेस्ट नहीं चाहिए. इनका उत्सव भी कितना भारतीय है. भावी मुख्यमंत्री जी, इनको कभी दुखी मत करना.

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सपा ने मन बना लिया है कि मुसलमानों को अलग से आरक्षण दिए जाने तक वह महिला आरक्षण का समर्थन नहीं करेगी. अखिलेश यादव और धर्मेंद्र यादव के बाद सपा सांसद इकरा हसन ने भी ये मांग उठा दी. जबकि वे खुद बिना आरक्षण चुन कर आई हैं क्योंकि सीट का समीकरण उनके पक्ष में था.

सपा ने मन बना लिया है कि मुसलमानों को अलग से आरक्षण दिए जाने तक वह महिला आरक्षण का समर्थन नहीं करेगी. अखिलेश यादव और धर्मेंद्र यादव के बाद सपा सांसद इकरा हसन ने भी ये मांग उठा दी. जबकि वे खुद बिना आरक्षण चुन कर आई हैं क्योंकि सीट का समीकरण उनके पक्ष में था.

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आँख बंद कीजिए और #SuryakumarYadav के जादू को महसूस कीजिए। BCCI के बदमाश सलेक्टर्स ने इसके दस साल छीन लिए थे। अब हमारा शेर भूखा है। वह क़हर बरपा रहा है। ये दुनिया का सर्वकालिक श्रेष्ठ बल्लेबाज़ है।

आँख बंद कीजिए और #SuryakumarYadav के जादू को महसूस कीजिए। BCCI के बदमाश सलेक्टर्स ने इसके दस साल छीन लिए थे। अब हमारा शेर भूखा है। वह क़हर बरपा रहा है। ये दुनिया का सर्वकालिक श्रेष्ठ बल्लेबाज़ है।

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बागेश्वर बाबा धीरेंद्र और उसके भाई गाँव में नहीं हैं क्योंकि वहाँ भीम आर्मी और ओबीसी महासभा तथा जयस के लोग पहुँच गए हैं। बाबा के तमंचाबाज लंपट भाई के जेल जाने की घड़ी क़रीब आ पहुँची है। बाबा को उसके भविष्य के बारे में पता चल चुका है। Chandra Shekhar Aazad

बागेश्वर बाबा धीरेंद्र और उसके भाई गाँव में नहीं हैं क्योंकि वहाँ भीम आर्मी और ओबीसी महासभा तथा जयस के लोग पहुँच गए हैं। बाबा के तमंचाबाज लंपट भाई के जेल जाने की घड़ी क़रीब आ पहुँची है। बाबा को उसके भविष्य के बारे में पता चल चुका है। Chandra Shekhar Aazad

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पश्चिम बंगाल में हवा बदल गई है और उसका प्रमाण ममता बनर्जी का यह विदाई गीत है. एसआईआर के खिलाफ धरने में ममता जी का वोट बैंक को ये संदेश देना कि - "हम हैं तो आप सुरक्षित हैं, वरना आपको घेरकर निपटाने में दूसरे समुदाय को एक सेकेंड नहीं लगेगा"- को मैं ममता बनर्जी का विदाई संदेश मानता हूं. ये बयान सत्ता जाने के डर से ही आया है.

पश्चिम बंगाल में हवा बदल गई है और उसका प्रमाण ममता बनर्जी का यह विदाई गीत है. एसआईआर के खिलाफ धरने में ममता जी का वोट बैंक को ये संदेश देना कि - "हम हैं तो आप सुरक्षित हैं, वरना आपको घेरकर निपटाने में दूसरे समुदाय को एक सेकेंड नहीं लगेगा"- को मैं ममता बनर्जी का विदाई संदेश मानता हूं. ये बयान सत्ता जाने के डर से ही आया है.

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आधी रात को जब भारत से रहा है तब दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी इकॉनॉमी कैलिफ़ोर्निया में सीनेट ज्यूडीशरी कमेटी में जातिवाद विरोधी क़ानून पास हो गया है। किसी भी सीनेटर ने खिलाफ वोट नहीं डाला। राजधानी सेक्रामेंटो की सड़कों पर आम्बेडकरवादी भांगड़ा कर रहे हैं। #SB403

आधी रात को जब भारत से रहा है तब दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी इकॉनॉमी कैलिफ़ोर्निया में सीनेट ज्यूडीशरी कमेटी में जातिवाद विरोधी क़ानून पास हो गया है। किसी भी सीनेटर ने खिलाफ वोट नहीं डाला। राजधानी सेक्रामेंटो की सड़कों पर आम्बेडकरवादी भांगड़ा कर रहे हैं। #SB403

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बरसात से पहले आज आख़िरी बार जाल फेंका गया। हमारे यहां लोग आम तौर पर बरसात में मछलियाँ नहीं पकड़ते। ये मछलियों के प्रजनन का समय है। मछली प्रकृति की अनमोल और अप्रतिम कृति 🙏🏽 है। मछली उत्पादन में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। कुल उत्पादन 175 लाख टन है। हम नंबर-वन होने से दो पायदान ही दूर हैं। सरकार मछली पालन और एक्सपोर्ट को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए 2019 में केंद्र सरकार में एक अलग विभाग बनाया गया है। इस मछली का वैज्ञानिक नाम - सिरहिनस मृगला।

बरसात से पहले आज आख़िरी बार जाल फेंका गया। हमारे यहां लोग आम तौर पर बरसात में मछलियाँ नहीं पकड़ते। ये मछलियों के प्रजनन का समय है। मछली प्रकृति की अनमोल और अप्रतिम कृति 🙏🏽 है। मछली उत्पादन में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। कुल उत्पादन 175 लाख टन है। हम नंबर-वन होने से दो पायदान ही दूर हैं। सरकार मछली पालन और एक्सपोर्ट को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए 2019 में केंद्र सरकार में एक अलग विभाग बनाया गया है। इस मछली का वैज्ञानिक नाम - सिरहिनस मृगला।

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4 अगस्त, 2005... ... जब ममता बनर्जी ने, बांग्लादेशी अवैध घुसपैठियों को प. बंगाल की वोटर लिस्ट से हटाने की मांग को लेकर, लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था. उस समय तक ममता बनर्जी प. बंगाल की राजनीति में लेफ्ट से काफी पीछे और विपक्ष में थीं क्योंकि वहां अल्पसंख्यकों की पहली पसंद तब लेफ्ट था. 2004 लोकसभा चुनाव में तृणमूल का सिर्फ एक सांसद जीता, वो थी ममता बनर्जी. ममता बनर्जी ने लेफ्ट की राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि प. बंगाल की वोटर लिस्ट में कई लाख अवैध घुसपैठिए हैं. उनको हटाया जाए. जब उन्हें बात कहने का मौका नहीं मिला तो 4 अगस्त, 2005 को उन्होंने अवैध घुसपैठियों की तथाकथित लिस्ट लोकसभा के डिप्टी स्पीकर के मुंह पर मार दी और फिर उसी दिन लोकसभा से इस्तीफा दे दिया. पर इसे नामंजूर कर दिया गया. उनका आरोप था "पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों के नाम हैं. राज्य सरकार (लेफ्ट फ्रंट) इसे लेकर कुछ नहीं कर रही है. इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए." और एक ममता बनर्जी आज हैं. घुसपैठियों की पहचान के सवाल पर वे "गृह युद्ध" और "रक्तपात" की धमकी देती हैं. 2009 में यूपीए के साथ आने के बाद से उनकी राजनीति पूरी तरह बदल गई. एकमुश्त 30% वोट की यही तो ताकत है.

4 अगस्त, 2005... ... जब ममता बनर्जी ने, बांग्लादेशी अवैध घुसपैठियों को प. बंगाल की वोटर लिस्ट से हटाने की मांग को लेकर, लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था. उस समय तक ममता बनर्जी प. बंगाल की राजनीति में लेफ्ट से काफी पीछे और विपक्ष में थीं क्योंकि वहां अल्पसंख्यकों की पहली पसंद तब लेफ्ट था. 2004 लोकसभा चुनाव में तृणमूल का सिर्फ एक सांसद जीता, वो थी ममता बनर्जी. ममता बनर्जी ने लेफ्ट की राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि प. बंगाल की वोटर लिस्ट में कई लाख अवैध घुसपैठिए हैं. उनको हटाया जाए. जब उन्हें बात कहने का मौका नहीं मिला तो 4 अगस्त, 2005 को उन्होंने अवैध घुसपैठियों की तथाकथित लिस्ट लोकसभा के डिप्टी स्पीकर के मुंह पर मार दी और फिर उसी दिन लोकसभा से इस्तीफा दे दिया. पर इसे नामंजूर कर दिया गया. उनका आरोप था "पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों के नाम हैं. राज्य सरकार (लेफ्ट फ्रंट) इसे लेकर कुछ नहीं कर रही है. इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए." और एक ममता बनर्जी आज हैं. घुसपैठियों की पहचान के सवाल पर वे "गृह युद्ध" और "रक्तपात" की धमकी देती हैं. 2009 में यूपीए के साथ आने के बाद से उनकी राजनीति पूरी तरह बदल गई. एकमुश्त 30% वोट की यही तो ताकत है.

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मुसलमानों का देश के संसाधनों पर पहला हक वाला मनमोहन सिंह का बयान अचानक नहीं आया था. ठीक इसी दौरान कोशिश हो रही थी कि: 1. शिड्यूल्ड कास्ट की लिस्ट में मुसलमानों को भी घुसाया जाए 2. मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में अलग से 15% आरक्षण दिया जाए 3. ओबीसी आरक्षण को धर्म के आधार पर बांट कर मुसलमानों को 6% अलग दिया जाए. 4. धर्म परिवर्तन करने पर भी एससी का दर्जा सुरक्षित रहे. मुसलमानों को संसाधनों पर पहला हक देना सिर्फ बयान (दिसंबर, 2006, दिल्ली) नहीं था. इसकी प्रक्रिया चल रही थी. रिटायर्ड चीफ जस्टिस और कांग्रेसी नेता सांसद रंगनाथ मिश्रा इसी दौरान अपनी रिपोर्ट में लिख रहा था कि मुसलमानों में भी जाति है, इसलिए उनमें भी एससी माना जाए और एससी लिस्ट में उनको भी आरक्षण दिया जाए. ये भी सिफारिश की गई कि कोई एससी अगर धर्म बदल कर मुसलमान या ईसाई बनता है तो भी उसका एससी दर्जा बना रहे. रंगनाथ मिश्रा धर्मांतरण का रास्ता साफ करने की कोशिश कर रहे थे और सरकार की शह उनको हासिल थी. मनमोहन सिंह 3 नवंबर, 2006 को, मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण की चर्चा छेड़ चुके थे. रंगनाथ कमीशन ने मुसलमानों को नौकरियों में 15% आरक्षण देने की सिफारिश की थी. ओबीसी के 27% से 6% काटकर मुसलमानों को देने की सिफारिश भी कांग्रेस द्वारा गठित इस आयोग में है. मनमोहन सिंह के बयान से ठीक एक महीना पहले सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आई थी, जिसने ये गलतबयानी की थी कि मुसलमानों की हालत दलितों से भी खराब है. मुस्लिम आरक्षण के लिए चौतरफा माहौल बनाया जा रहा था. इसका सीधा नुकसान देश के सबसे वंचित एससी, एसटी और ओबीसी को होना था. रउनके विरोध के कारण ये हो नहीं पाया. इसमें आईएएस अफसर आशा दास मैडम की बड़ी भूमिका है. उसके बारे में फिर कभी. वो भयानक किस्म के मुस्लिम तुष्टिकरण का दौर था. मगर क्यों? कांग्रेस का मकसद क्या था? मैं इस वीडियो में बता रहा हूं कि कांग्रेस दरअसल इस समय सपा, बसपा और आरजेडी से अपना मुसलमान वोट वापस लेने की कोशिश में जुटी थी.

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1,065,896 次观看 • 2 年前

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रामपूजन के धार्मिक आयोजन के लिए खिचड़ी प्रसाद बनाते देश के शीर्ष अर्थशास्त्री, खांटी बंगाली डॉ. अशोक लाहिड़ी अब नीति आयोग (पुराना नाम योजना आयोग) के कर्ता-धर्ता होंगे. इस पद पर पहले नरसिंह राव, मनमोहन सिंह, प्रणव मुखर्जी आदि रह चुके हैं. देश की नीतियां कैसे बनेंगी, इसका वे मार्गदर्शन करेंगे. प्रधानमंत्री Narendra Modi का ये अच्छा सेलेक्शन है. पेशे से शिक्षक डॉ. लाहिड़ी अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के पीएम रहने के दौरान भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार थे. वे वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में काम कर चुके हैं. मंगलकामनाएं Dr. Ashok Kumar Lahiri . भारत को वामपंथी सुस्त आर्थिक नीतियों के बचे-खुचे प्रभाव से मुक्त कीजिए. आपके ही मार्गदर्शन में ये कार्य संपन्न हो.

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60,890 次观看 • 1 个月前

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अरविंद केजरीवाल का ठीक दस साल पुराना यानी 2014 लोकसभा चुनाव से पहले का बहुत ही क्रांतिकारी इंटरव्यू और देश बेचने वाले बेईमान राहुल गांधी, बेईमान मनमोहन सिंह और इनसे देश खरीदने वाले सबसे बेईमान लुटेरे मुकेश अंबानी. सुनिए सरजी के श्रीमुख से: "राहुल गांधी ने, पिछले दस साल में इस सरकार ने देश को उठाकर मुकेश अंबानी को सौंप दिया है. मुकेश अंबानी इस देश को चला रहे हैं." "पिछले दस साल के अंदर यूपीए सरकार ने, गांधी परिवार ने, मनमनोहन सिंह जी ने उठाकर इस देश को चंद बड़े लोगों के कदमों में रख दिया, इनक्लूडिंग मुकेश अंबानी." केजरीवाल के तब के ऐसे सैकड़ों इंटरव्यू और भाषण हैं, जिनके निशाने पर राहुल और मुकेश अंबानी थे. तब मुकेश अंबानी केजरीवाल की नजर में भारत के सबसे भ्रष्ट, लुटेरे और बेईमान उद्योगपति थे. जहां तक मुझे याद आ रहा है कि केजरीवाल ने मुकेश अंबानी के बारे में पिछले सात-आठ साल में एक शब्द नहीं कहा है. रिलायंस के खिलाफ, गैस की कीमतों में हेराफेरी को लेकर, केजरीवाल की सरकार ने 2013 में FIR करने का आदेश एंटी करप्शन ब्यूरो को दिया था. दूसरी बार सरकार बनने के बाद से, अब तक, उस केस को लेकर केजरीवाल ने फिर कभी बात भी नहीं की. " 2004 से 2014 के बीच मुकेश अंबानी को देश बेचने वाले " राहुल गांधी अब केजरीवाल के राजनीतिक सखा, दोस्त हैं. कुछ तो हुआ है, कुछ हो रहा है. क्या इस चुनाव में यानी 2024 में केजरीवाल ने मुकेश और अनिल अंबानी का नाम लिया है, जिनकी दिल्ली वाली बिजली कंपनी के खिलाफ आंदोलन करते हुए आम आदमी पार्टी बनी थी? क्या खेल हो सकता है? मैं गारंटी से कह रहा हूं कि केजरीवाल ने हाल के वर्षों में अनिल अंबानी का नाम एक बार भी नहीं लिया है. मुझे गलत साबित कीजिए. केजरीवाल अराजक और निहिलिस्ट और अस्थिर-चंचल मन वाले व्यक्ति है. मूल स्वभाव में वे फोर्ड फाइंडेशन पोषित एनजीओ हैं. वे विध्वंसक हैं. वे बना नहीं सकते. देखते रहिए. उनकी पार्टी के आधे से ज्यादा संस्थापक जा चुके हैं. वे अपनी पार्टी भी तोड़ देंगे. वे देश तो क्या ही बनाएंगे? Arvind Kejriwal Sanjay Pugalia CNBC-AWAAZ Rahul Gandhi

Dilip Mandal

374,796 次观看 • 2 年前

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कल रात मुझे ये शानदार मछली जिंदा मिली तो इसकी प्रशंसा करने से रोक नहीं पाया. ये बुआल मछली है. एक तरह से नदी या मीठे पानी की शार्क या कैटफिश समझिए. हमारे परिवार में मछली का बिजनेस रहा है. इसलिए मैं सैकड़ों तरह की मछलियां पहचानता हूं. दुनिया के किसी भी देश में जाऊं तो मछली मार्केट जरूर जाता हूं. मेरे पिताजी के बड़े भाई पशुपति नारायण मंडल का दामोदर नदी में मछली का कई किलोमीटर का ठेका उठता था. बाद में वे शाकाहारी बन गए. वे स्वतंत्रता सेनानी थे. तब कांग्रेस में ही सब तरह के लोग थे तो वे भी कांग्रेस में थे. वे कांग्रेस के रामगढ़ राष्ट्रीय अधिवेशन में भी शामिल हुए थे. पिताजी पता नहीं कैसे कांग्रेस से छिटक कर सोशलिस्ट बन गए. दोनों भाई अलग अलग रास्ते चले. देखिए इस मछली की क्या शान है. क्या चमक है. क्या गरिमा है. क्या एकदम से अर्नेस्ट हेमिंग्वे की कथा ओल्ड मैन एंड द सी की याद ताजा हो जाती है. है कि नहीं?

Dilip Mandal

370,695 次观看 • 2 年前