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Rajat Sharma

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Chairman & Editor-in-Chief @indiatvnews | Host of India's longest running show #AapKiAdalat

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Some evenings feel like a pause — where time slows down and you’re simply grateful for the people around you. A meaningful evening celebrating Salman Khan’s birthday. Salman Khan #SalmanKhan

Some evenings feel like a pause — where time slows down and you’re simply grateful for the people around you. A meaningful evening celebrating Salman Khan’s birthday. Salman Khan #SalmanKhan

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एक भारत, एक संविधान— अनेकता में एकता की सबसे मजबूत डोर... 77 वर्षों की इस यात्रा में यही हमारी सबसे मजबूत नींव रही है. गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं #HappyRepublicDay #77thRepublicDay

एक भारत, एक संविधान— अनेकता में एकता की सबसे मजबूत डोर... 77 वर्षों की इस यात्रा में यही हमारी सबसे मजबूत नींव रही है. गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं #HappyRepublicDay #77thRepublicDay

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Happy birthday Jassi. You are gifted. Keep entertaining the world. Love the bond we share. Jassi #HappyBirthdayJassi

Happy birthday Jassi. You are gifted. Keep entertaining the world. Love the bond we share. Jassi #HappyBirthdayJassi

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स्वामी विवेकानंद ने भारत के युवाओं में दिशा देखी थी भीड़ नहीं. वो जानते थे युवा शक्ति में भारत को बदलने की क्षमता है. इस ऊर्जा को सही दिशा में लगाने का यही समय है, सही समय है. #SwamiVivekananda #NationalYouthDay

स्वामी विवेकानंद ने भारत के युवाओं में दिशा देखी थी भीड़ नहीं. वो जानते थे युवा शक्ति में भारत को बदलने की क्षमता है. इस ऊर्जा को सही दिशा में लगाने का यही समय है, सही समय है. #SwamiVivekananda #NationalYouthDay

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मेरे पास confirmed information है कि चुनाव में हार के बाद DMK ने AIADMK की सरकार बनवाने का प्रयास किया था. Stalin ने CPI-CPM और VCK से कहा था कि वो भी AIADMK को outside support दें. पर communist पार्टियों को AIADMK के BJP alliance से problem है. लेकिन उन्होंने विजय को support करने का फैसला Stalin को inform करके किया. इसलिए उनसे नाराज़गी कम है. Stalin की असली नाराज़गी कांग्रेस से है, जिसने बिना बात किए उतावला होकर विजय की TVK को support किया. DMK के नेताओं को लगता है कि अगर कांग्रेस अचानक DMK का साथ नहीं छोड़ती तो DMK और AIADMK मिलकर विजय की सरकार नहीं बनने देते. मज़े की बात ये है कि Congress और Left का support मिलने के बाद भी विजय बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाए हैं. वो राज्यपाल से तीन बार मिल चुके हैं लेकिन उनके पास कुल 116 विधायकों का ही support है. दो विधायकों की अभी भी कमी है. अब बदले हालात में कुछ भी हो सकता है. VCK के नेताओं की Stalin से meeting चल रही है. अब अगर DMK और AIADMK साथ आते हैं तो सबसे ज़्यादा मुश्किल कांग्रेस को होगी. #CMVijay #tamilnadulegislativeassemblyelection2026

Rajat Sharma

134,785 просмотров • 1 месяц назад

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मैं हैरान हूं कि राहुल गांधी को ये basic बात भी नहीं पता कि जब non-military target पर हमला किया जाता है तो attack के बाद दुश्मन देश को इसकी जानकारी दी जाती है. हमले के बाद inform किया जाता है कि हमने military या civilians को निशाना नहीं बनाया. जब अमेरिका ने Abbottabad में हमला करके Osama bin Laden को मार गिराया था तो उन्होंने भी काम पूरा होने के बाद पाकिस्तान को inform किया था. बालाकोट के आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद भी हमारे DGMO ने पाकिस्तान को बताया था. लेकिन राहुल गांधी पता नहीं कौन सी दुनिया में रहते हैं. दूसरी बात, क्या कोई सपने में भी ये सोच सकता है कि भारत के विदेश मंत्री पाकिस्तान को advance में inform करेंगे कि हमारी फौज हमला करने आ रही है? तुम तैयार हो जाओ. ऐसा सिर्फ फिल्मों में होता है जब hero, villain को advance में information देता है. ‘ठाकुर तैयार रहना, मैं तेरे सीने में गोलियां उतारने आ रहा हूं’. राहुल गांधी से सिर्फ कोई ये पूछ ले कि अगर पाकिस्तान को पहले से पता था कि हमारी Air Force strike करने वाली है. तो उन्होंने बहावलपुर, मुरीदके जैसे आतंकी अड्डों पर अपने दहशतगर्दों को क्या कटने-मरने के लिए छोड़ दिया था? क्या वो अपने चीथड़े उड़वाने के लिए सज-धज कर बैठे थे? वो भाग क्यों नहीं गए? इसीलिए मुझे लगता है कि राहुल गांधी की बचकानी बातों को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है. पहले भी उन्होंने air strike और surgical strike पर सवाल उठाकर गलती की थी. नुकसान उठाया था. आजकल public सब कुछ देखती है, सबकुछ जानती है. #RahulGandhi #OperationSindoor #AajKiBaat #MyTake

Rajat Sharma

1,049,869 просмотров • 1 год назад

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Lies Nailed. Next round in court.

Rajat Sharma

1,745,355 просмотров • 2 лет назад

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पहली बात तो ये समझने की है कि राहुल गांधी आज कल वोट चोरी की बातें क्यों कर रहे हैं. असल में इसका Election Commission से कोई मतलब नहीं है. ये सवाल तो राहुल गांधी के political survival से जुड़ा है. राहुल गांधी अपनी पार्टी को ये जताना चाहते हैं कि कांग्रेस की बार-बार हार के लिए वो कतई ज़िम्मेदार नहीं हैं. कांग्रेस को तो वोट चोरी ने हराया. वो जानते हैं कि जिस दिन पार्टी को ये लगेगा कि राहुल गांधी चुनाव नहीं जिता सकते तो पार्टी के नेता उस leader की तलाश में जुट जाएंगे जो उन्हें चुनाव जिता सकता है. चुनाव हराने वाले को कोई leader नहीं मानता. इसीलिए पहली बार 2014 में राहुल ने हार के लिए अपनी पार्टी की कमज़ोरियों को ज़िम्मेदार ठहराया था. अगली बार हार के बाद उन्होंने कहा कि मोदी ED, CBI और Income Tax की मदद से चुनाव जीतते हैं. इसके बाद राहुल गांधी ने अपनी हार के लिए EVM को दोषी बताया था. अब वो चुनाव आयोग को blame कर रहे हैं. Problem ये है कि लोकसभा में मोदी की 240 सीटों से कांग्रेस को जो उम्मीद बंधी थी उसे महाराष्ट्र और हरियाणा की हार ने तोड़ दिया. अब अगर बिहार भी हार गए तो फिर leadership पर सवाल उठेंगे. इसीलिए इस वक्त उनका ये कहना ज़रूरी है कि वो नहीं हारते उन्हें तो कोई हरवा देता है. कभी अपनी पार्टी तो कभी EVM तो कभी Election Commission. लेकिन लोग पूछ रहे हैं 'तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता काफिला क्यों लुटा? मुझे रहज़नों से गिला नहीं, तिरी रहबरी का सवाल है' #MyTake #AajKiBaat #VoteChori #RahulGandhi

Rajat Sharma

471,272 просмотров • 7 месяцев назад

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मैंने कुछ दिन पहले आपसे कहा था कि Nepal में लगी आग की लपटों में हमारे यहां के कुछ लोगों को कुर्सी की झलक दिखने लगी है. आज राहुल गांधी की आरज़ू ज़ुबां पर आ ही गई. उन्होंने Gen Z का नाम लिख ही दिया. वोट चोरी के फर्ज़ी narrative का इस्तेमाल अब युवाओं को उकसाने के लिए किया जाएगा. जैसे ही राहुल गांधी ने press conference खत्म की, social media पर एक group ने planned तरीके से campaign करना शुरू कर दिया. ये अलग बात है कि Election Commission ने 4 sentences में इस campaign की हवा निकाल दी. पर असल बात ना तो voter list है, ना ही Election Commission. मकसद तो किसी तरह नरेंद्र मोदी को हटाना है. इसीलिए 'कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना' है. पर ये narrative खड़ा करने की कोशिश करने वाले भूल गए कि ये बदला हुआ भारत है. हमारे लोग चाहे नए ज़माने के हों, या पुराने के, झूठ पर विश्वास नहीं करते और सच का सामना करने से नहीं डरते. वो जानते हैं कि कब-कब किसकी सरकार ने कितना काम किया. उन्हें मालूम है किसने उनसे क्या छीना और किसने उनको क्या दिया. #RahulGandhi #ElectionCommision #AajKiBaat #MyTake

Rajat Sharma

433,109 просмотров • 8 месяцев назад

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केजरीवाल पर court का फैसला बिलकुल साफ है. CBI का case कमज़ोर निकला. ना कोई गवाह मिला, ना कोई सबूत मिला. Court के मुताबिक ना किसी ने रिश्वत मांगी, ना किसी ने रिश्वत ली. ना CBI का investigate करने का procedure सही था, ना case में कोई दम था. अदालत का फैसला कहता है कि ना कोई घोटाला हुआ, ना केजरीवाल ने बेईमानी की, ना उनके मंत्रियों ने. Court ने 600 pages के फैसले में शक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी. ज़ाहिर है, केजरीवाल के लिए इससे बेहतर फैसला और क्या हो सकता था. अब CBI को जवाब देना होगा. अगर CBI का case इतना कमज़ोर था तो केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह को महीनों तक जेल में क्यों रखा गया? बीजेपी के लिए ये बड़ा embarrassment है. जवाब देना मुश्किल हो गया है और केजरीवाल को अपनी सियासत revive करने का ज़बरदस्त मौका मिला है, और वो ऐसे अवसर का फायदा उठाने में माहिर हैं. #AajKiBaat #MyTake #LiquorScam #ArvindKejariwal

Rajat Sharma

129,592 просмотров • 3 месяцев назад

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जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा क्यों दिया? मुझे लगता है कि वो सरकार के लिए embarrassment बनते जा रहे थे. परेशानियां पैदा करने लगे थे. इसीलिए उन्हें इस्तीफा देने को कहा गया. मैं आपको अंदर की बात बताता हूं कि टकराव कैसे शुरू हुआ. कहां तक गया, ये समझाता हूं. पहली बात, जगदीप धनखड़ जब से राज्यसभा के Chairman बने उन्होंने ये impression दिया कि वो सरकार के शीर्ष नेताओं के बहुत करीब हैं. जो भी करते हैं, वो उन्हीं के कहने पर करते हैं. आपको याद होगा, संसद के परिसर में Vice-President के झुके-झुके व्यवहार की mimicry की गई थी, जिसका video राहुल गांधी ने बनाया था. उसकी वजह ये थी कि Chairman के तौर पर धनखड़ साहब विरोधी दलों के नेताओं से लगातार टकराते थे. विरोधी दलों के नेता convince हो गए थे कि धनखड़ साहब सरकार के इशारे पर उन्हें बोलने नहीं देते. बार-बार उनका अपमान करते हैं. इस कारण सरकार और विरोधी दलों के बीच टकराव बढ़ता गया. दूसरी बात, कुछ महीने पहले धनखड़ साहब ने Judiciary पर direct attack किया. Supreme Court पर हमला किया. Parliament की supremacy की बात की. Judges को भी ये लगा कि Vice-President साहब ये काम सरकार के इशारे पर कर रहे हैं. वो सरकार के करीब हैं. Judiciary और सरकार के बीच टकराव जैसी स्थिति पैदा हो गई. तीसरी बात, इन मामलों पर जब उन्हें समझाने की कोशिश की गई तो वो नाराज़ हो गए. उन्होंने याद दिलाना शुरू किया कि कैसे Vice-President होते हुए भी उन्होंने जगह-जगह सरकार को defend किया. अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी. ये सरकार से उनके direct टकराव की शुरुआत थी. बात बढ़ती गई. चौथी बात, उन्होंने जगह-जगह सरकार की top leadership की शिकायत करनी शुरू कर दी. RSS से लेकर मंत्रियों तक. विपक्षी दलों से लेकर media के senior लोगों तक. उनकी शिकायत थी कि सरकार में उनसे कोई बात नहीं करता. उन्हें घुटन हो रही है और कोई उनकी बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाए वरना मुझे कुछ करना पड़ेगा. ये एक तरह की धमकी थी, सरकार से सीधा टकराव था. Final phase में धनखड़ साहब ने तेवर दिखाने शुरू किए. कांग्रेस के नेताओं से मिले. Arvind Kejriwal को time दिया. इन सबको बहुत कुछ कहा. यशवंत वर्मा के impeachment का case अपने हाथ में लेने की कोशिश की. जब सरकार को लगा कि अब वो राज्यसभा में भी embarrassment create कर सकते हैं, खुले टकराव की situation पैदा हो सकती है, तब उन्हें एक phone गया. ये convey किया गया कि अब ये खेल ज़्यादा नहीं चलेगा और ये भी बता दिया गया कि अगर धनखड़ साहब ने अपना रवैया नहीं बदला तो उनका impeachment भी हो सकता है. धनखड़ साहब को इस बात की उम्मीद नहीं थी. उन्होंने top leadership का assessment करने में गलती कर दी, दांव उल्टा पड़ गया. इसीलिए उन्होंने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा. #JagdeepDhankar #vicepresident #MyTake #AajKiBaat

Rajat Sharma

295,512 просмотров • 10 месяцев назад

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Merit पर देखें तो UGC कानून में बदलाव के misuse होने के, पूरे-पूरे chances हैं. ये कहना काफी नहीं है कि सरकार किसी पर ज़ुल्म नहीं होने देगी. लेकिन ये मामला political भी है. ब्राह्मण और राजपूत समाज का vote ज़्यादा नहीं है, इसलिए उनकी अनदेखी की जाती है. ये राजनीतिक दलों की अपनी विवशता है. इसीलिए समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, BSP, सब पर्दे के पीछे से इस issue को हवा दे रहे हैं. ये सोचकर कि इससे बीजेपी को नुकसान होगा. बीजेपी में भी ब्राह्मण समाज के कई ऐसे नेता है जो काफी पहले से कह रहे हैं कि उनके साथ अन्याय हो रहा है. उनको अब एक और बहाना मिल गया है. वो इस मामले का इस्तेमाल pressure बनाने के लिए करेंगे. इसीलिए इस मसले को लटका कर नहीं छोड़ा जा सकता. समाज समतामूलक हो, सबको बराबरी का हक मिले, जिनके साथ पहले अन्याय हुआ है उनका ज़्यादा ध्यान रखा जाए, ये सब ठीक है. लेकिन इसके साथ-साथ अब अन्याय के, harassment के, नए रास्ते न खुलें, इसका भी ध्यान रखना ज़रूरी है वरना आगे जाकर बड़ी problem होगी. #UGCAct #UGCRules #AajKiBaat #MyTake

Rajat Sharma

134,670 просмотров • 4 месяцев назад