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Shyamlal Yadav

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Struggler & learner. Works @IndianExpress @ICIJorg Investigates/writes/explains policies & politics. Father of indelible, precious, ever-smiling late Shreeti

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दर्द बांटकर अपने असह्य दर्द को कम करता रहता हूं (मित्रो, बुरा न माना करें)... 25 साल पहले आज ही के दिन भयंकर दुर्घटना का शिकार हुआ था, मैं स्कूटर सवार था, बस ने सामने से टक्कर मारी थी. तड़के की बात है, मुझे शास्त्री भवन से एक पत्रकार दल में मथुरा जाना था, फरह में प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी का एक कार्यक्रम कवर करने. लेकिन बस की टक्कर से तीन दिन बाद होश आया. संयोग से पीछे ही एक एसीपी साहब आ रहे थे, उन्होंने दुर्घटना स्थल से फौरन अस्पताल भिजवाया. मुझे तीन दिन बाद होश आया. बस ड्राइवर साहब गलत दिशा से लेकर आ रहे थे. हिमाचल प्रदेश के शर्मा जी थे. उनका ड्राइ‌विंग लाइसेंस भी फर्जी निकला था. मुकदमे के दौरान वे अदालत से बाहर निकलते तो रोते रहते कि उन्हें सजा हो गई तो उनकी तीन छोटी-छोटी बेटियों का क्या होगा, मैंने उनका दर्द समझते हुए आखिरकार अदालत में कहा कि उन्हें माफ कर दिया जाए. वे सजा से बच गए. उनकी बेटियों की बात सुनकर मुझे यही उचित लगा था. लेकिन मुझे ईश्वर पर तरस तब आया जब करीब तीन साल पहले मेरी युवा पुत्री बिना किसी पूर्व बीमारी के, ढाई दिनों के भीतर काल कवलित हो गई. इतनी तेजी से कि लगता है कोई हम लोगों की गोद से छीनकर ले गया. ईश्वर को मेरी भलाई का तो ख्याल रखना चाहिए था, है न मित्रो? लेकिन पता नहीं किस जन्म के पाप का दुष्परिणाम था यह...

दर्द बांटकर अपने असह्य दर्द को कम करता रहता हूं (मित्रो, बुरा न माना करें)... 25 साल पहले आज ही के दिन भयंकर दुर्घटना का शिकार हुआ था, मैं स्कूटर सवार था, बस ने सामने से टक्कर मारी थी. तड़के की बात है, मुझे शास्त्री भवन से एक पत्रकार दल में मथुरा जाना था, फरह में प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी का एक कार्यक्रम कवर करने. लेकिन बस की टक्कर से तीन दिन बाद होश आया. संयोग से पीछे ही एक एसीपी साहब आ रहे थे, उन्होंने दुर्घटना स्थल से फौरन अस्पताल भिजवाया. मुझे तीन दिन बाद होश आया. बस ड्राइवर साहब गलत दिशा से लेकर आ रहे थे. हिमाचल प्रदेश के शर्मा जी थे. उनका ड्राइ‌विंग लाइसेंस भी फर्जी निकला था. मुकदमे के दौरान वे अदालत से बाहर निकलते तो रोते रहते कि उन्हें सजा हो गई तो उनकी तीन छोटी-छोटी बेटियों का क्या होगा, मैंने उनका दर्द समझते हुए आखिरकार अदालत में कहा कि उन्हें माफ कर दिया जाए. वे सजा से बच गए. उनकी बेटियों की बात सुनकर मुझे यही उचित लगा था. लेकिन मुझे ईश्वर पर तरस तब आया जब करीब तीन साल पहले मेरी युवा पुत्री बिना किसी पूर्व बीमारी के, ढाई दिनों के भीतर काल कवलित हो गई. इतनी तेजी से कि लगता है कोई हम लोगों की गोद से छीनकर ले गया. ईश्वर को मेरी भलाई का तो ख्याल रखना चाहिए था, है न मित्रो? लेकिन पता नहीं किस जन्म के पाप का दुष्परिणाम था यह...

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