
Sachin Singh Gaur
@sachinsgaur • 8,694 subscribers
writer-director, journalist Channel link: https://t.co/Cf79d4N4ID
Shorts
Videos
0:30
Sensitive content
This media may contain sensitive content.

ये दुलाल गिरी जी महाराज हैं जो शिव के आराधक हैं और पिछले 12 वर्षो से खड़े हैं। इनकी टाँगे सूज गयी हैं , कई जख्म भी हैं और ये अपार पीड़ा में भी लगते हैं। इनको समझा बुझाकर बिठाने की जगह , इनका इलाज कराने की जगह इनका महिमा मंडन किया जा रहा है जो बहुत खतरनाक है क्यूंकि इससे और लोगो में भी इस तरह के बेतुके काम करने की प्रवृति जन्म लेती है। असल में कपोत कल्पित कहानियां जिनमे तरह तरह की कठिन तपस्याओं के बारे में बताया गया है ,वही कहानियां इस तरह के बाबाओं को प्रेरित करती हैं। अगर ईश्वर को तुम्हे सच में 24 घंटे खड़ा ही रखना होता तो तुम्हे घोडा बना देता, मनुष्य क्यों बनाता ? शांति से ध्यान में बैठकर भी ईश्वर का चिंतन किया जा सकता है उसके लिए शरीर को गलाने या नष्ट करने की आवश्यकता नहीं।
Sachin Singh Gaur53,815 Aufrufe • vor 18 Tagen

लवकुश मिश्रा के बाप ने भी स्वीकार लिया लवकुश मिश्रा ने राम मंदिर से पैसा चुराया। राम मंदिर के दानपात्र से धन गबन के आरोप में दबोचे गए लवकुश मिश्रा के घर से पुलिस ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की मौजूदगी में 10 -12 लाख रूपये बरामद किये गए हैं। आरोपी युवक लवकुश मिश्रा (27 वर्ष) राम मंदिर में कर्मी के तौर पर कार्यरत था । वह पिछले 5-6 महीने से राम मंदिर में काम कर रहा था। उसे वहां रवि मिश्रा ने काम पर लगवाया था। ग्रामीणों के अनुसार, लवकुश मिश्रा पहले कार मिस्त्री था और मंदिर में नौकरी मिलने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदली थी। लवकुश मिश्रा ने अयोध्या में 40 लाख का भूखंड भी ख़रीदा और वहां आलीशान निर्माण भी करवा रहा था। लवकुश मिश्रा के अलावा एक और सेवादार तिवारी भी पकड़ा गया है।
Sachin Singh Gaur44,622 Aufrufe • vor 22 Tagen

आज की दादरी रैली से अखिलेश को पश्चिम उत्तर प्रदेश में सपा की और गूजरों की ताकत का एहसास हो गया होगा। मुश्किल से मुश्किल 50000 की भीड़ थी। वो भी तब जब राजकुमार भाटी ने 2 महीनो से पूरी ताकत झोक रखी थी। सभी गूजर गाँव में घूम आये, खुलकर जाति का कार्ड खेला। इस भीड़ में दादरी के लोकल गूजर थे, अतुल प्रधान मेरठ सहारनपुर से गूजरों को लाया था और नैना गढ़ से गूजर लायी थी। लोनी से भी लोग आये थे और हरपाल मलिक भी मुज़फ्फर नगर से कुछ लोग लेके आया था। इकरा ने भी जोर लगाया होगा। तब इतनी भीड़ इकट्ठी हुई थी। असल में गूजरों की जनसँख्या बेहद कम है , दादरी, लोनी , गढ़, मेरठ अमरोहा बिजनौर के कुछ हिस्से और सहारनपुर में। मुश्किल से 10 विधानसभा सीटों में प्रभाव है। वो भी अकेले दम पर नहीं। जो भीड़ शामियानों में आ जाये उसे चुनावी रैली नहीं कहते। इससे ज्यादा भीड़ तो ठाकुर पुरण सिंह की महापंचायतों में थी जिसके कारण सपा कांग्रेस ने सहारनपुर, कैराना मुज़फ्फरनगर की सीटे जीती थीं। इस रैली के बहाने राजकुमार भाटी ने अपना कद बढ़ करने का प्रयास किया है और कुछ नहीं हुआ। रैली से अखिलेश ने ये मेसेज लाउड और क्लियर दिया है कि उन्हें ठाकुरो के वोट नहीं चाहिये। राजनीती में लोगों को जोड़ा जाता है तोडा नहीं जाता। इस तरह की राजनीति कोई लाभ नहीं देती केवल नुकसान पहुँचाती , ये आप 2027 के परिणाम में देख लेना।
Sachin Singh Gaur65,392 Aufrufe • vor 3 Monaten

दोगलापन किसे कहते हैं, वो देख लो... दिन रात हिन्दू मुस्लिम करने वाली चित्रा त्रिपाठी मुस्लिम आमिर खान के साथ जन्मदिन मना रही है.... इनके अनुसार आम हिन्दू तो आम मुस्लिम से दुश्मनी रखे लेकिन ये लोग मुसलमानों के साथ birthday celebrate करेंगे... केक खाएंगे.. वाह
Sachin Singh Gaur142,713 Aufrufe • vor 1 Jahr

आरक्षण का सबसे बड़ा साइड इफ़ेक्ट है, ये लक्ष्मण जैसे लोग। समाज की खर पतवार जो बुद्धिजीवी बनकर बैठे हैं। इस लड़की ने प्रश्न पूछा कि सवर्ण और पिछड़ा क्यों कहते हैं। बोला बहुत दार्शनिक प्रश्न है (अब इसमें दार्शनिक क्या था , ये तो लच्छू को ही पता होगा ) फिर इसने एंकर का 6 मिनट तक दिमाग का दही किया , बातो की जलेबी बनाई , बुद्ध, कबीर , रैदास, राहुल संकृत्यान से लेकर चार्वाक तक सबका नाम ले डाला। एक दो रटे हुए दोहे भी पढ़ दिए , फिर बोला इसका जवाब तो मेरे पास नहीं है। अब बताइये ये सपा का सबसे बड़ा बुद्धिजीवी है। इस गधे को ये नहीं मालुम कि पिछड़े भी सवर्ण हैं अवर्ण नहीं। वो वर्ण व्यवस्था का हिस्सा थे। अवर्ण तो आदिवासी थे जिनका कोई वर्ण नहीं था। केवल अगड़ी जातियों को सवर्ण कहना तकनीकी रूप से गलत है (वैसे तो अब अगड़ा पिछड़ा कुछ है नहीं )
Sachin Singh Gaur35,215 Aufrufe • vor 4 Monaten

समय रैना की तरह के के रैना भी फिल्म घातक में डेनी डोंगजप्पा के डर से कश्मीरी पंडत विजडम लगाकर अपनी दुकान अपनी जमीन सब छोड़कर गाँव भाग जाना चाहता था लेकिन शुक्र है वहां अपना जाट लौंडा सनी देओल था जो के के रैना को धिक्कार कर समझाता है कि जमीन माँ है , जमीन इज़्ज़त है और इज़्ज़त से बढ़कर कुछ नहीं होता।
Sachin Singh Gaur18,359 Aufrufe • vor 2 Monaten

उन्नाव की ये महिला क्यों कह रही है तथाकथित रेप पीड़िता को डायन... एक बार सुनिये
Sachin Singh Gaur28,043 Aufrufe • vor 6 Monaten

ये जादो जी की लड़की खुलेआम कह रही है, हम यादव हैं डरते नहीं डराते हैं इसीलिए जादों जी कहलाते हैं।
Sachin Singh Gaur18,500 Aufrufe • vor 4 Monaten

ठाकुरों के प्रति अखिलेश के मन में कितनी घृणा है सुन लीजिये, जबकि अखिलेश के पिताजी हर बार मुख्यमंत्री ठाकुरों की कृपा से बने, खुद अखिलेश को पूर्ण बहुमत ठाकुरो की कृपा से मिला, लोकसभा में 37 सीट भी ठाकुर कृपा से आयी हैं। ठाकुरो की कृपा से ही इनकी आने वाली नस्ल भी सुधर गयी है , फिर भी ठाकुरो के प्रति इतना जहर। ठाकुरों 2027 में मिटटी में मिला दो सपा को। इन्हे दिखा दो ठाकुर की दोस्ती और दुश्मनी दोनों क्या होती है ?
Sachin Singh Gaur17,535 Aufrufe • vor 4 Monaten

अखिलेश जी आपकी याददाश्त बहुत कमजोर है , आपने नहीं आपके पिताजी ने पोटा का निर्णय पलटा था। आप तो उस समय टीपू थे जो "भैया" का स्वागत करने गया था और "भैया" ने देखा तक नहीं था। खैर आपके पिताजी ने भी कोई उपकार नहीं किया था बल्कि सदन में सबसे बड़ी पार्टी होने के वाबजूद डेढ़ साल से cm बनने को छटपटा रहे थे। तब निर्दलीय और बसपा से टूटे विधायकों का समर्थन "भैया" के कारण ही मिला था क्यूंकि "भैया" के सजातियों की संख्या काफी ज्यादा थी जिससे आपके पिताजी cm बने और शर्त वही थी पोटा हटाना है। वो छोड़िये 2012 में आपकी पूर्ण बहुमत की सरकार भी "भैया" के समर्थन के कारण ही बनी। और आपको तो शायद ये भी नहीं पता होगा कि आपके पिताजी उस समय आपकी "बुआ" के जानी दुश्मन थे। गेस्ट हाउस काण्ड तो सुने होंगे। नहीं तो चच्चा से पूछ लीजिये
Sachin Singh Gaur29,072 Aufrufe • vor 1 Jahr

जबसे ये वीडियो देखा है, हंसी रुक ही नहीं रही। oh my goat
Sachin Singh Gaur12,843 Aufrufe • vor 7 Monaten
0:56
Sensitive content
This media may contain sensitive content.
Keine weiteren Inhalte verfügbar