
Samar Raj
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Journalist:: @boltahindustan and @boltaup // IIMC & DU Alumni
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बच्ची को बचपन से बताया गया चंद्रशेखर शेर है, सवा शेर है, अढ़ाई शेर है; वो यही बोलती रही, मसीहा मानने लगी। अचानक जंतर मंतर पर भेड़ियों का हमला हो गया, उन्होंने उसी पिता को मारकर अधमरा कर दिया जिसको शेर पर अटूट भरोसा था। भेड़िए का भाई मंत्री है, और मोटा भाई गृहमंत्री; वो छूट गया। पीड़िता का भाई सांसद है, रीलबाज सांसद; मदद माँगती रही, वो मदद नहीं किया। सबक है सबके लिए कि नेताओं के चक्कर में पड़कर जिंदगी दांव पर न लगाएं। गुस्सा है दिल्ली पुलिस पर कि पॉलीटिकल प्रेशर में इतने पक्षपाती न हो जाएं। सहानुभूति है बच्ची और इसके पिता के प्रति, आप लोग हर संभव मदद पहुंचाएं। पॉलीटिकल प्रेशर कल उनकी जुबान बदल दे फिर भी असल सबक क्या है, आप भूल न जाएं।
Samar Raj62,968 views • 1 day ago

बात एकमात्र विधायक की नहीं है, उस भाई की है जो बुरे से बुरे दौर में साथ खड़ा रहा। अटल से लेकर अचल तक, राखी बंधवाकर बहनजी बोलकर, मौके पर धोखा दे दिए। उमाशंकर साथ निभाते रहे, अंतिम सांस तक। सारी सरकारी मशीनरी उनके खिलाफ छोड़ दी गई फिर भी डिगे नहीं, जवाब देते रहे। जिस दौर में 80 में 64 विधायक भाजपा चले जाते हैं उस दौर में अकेले चट्टान की तरह खड़े रहे। हजारों करोड़ की संपत्ति और व्यापार है, उसके बावजूद धमकियों से नहीं डरे। उमाशंकर सिंह अलग तो थे, श्रद्धांजलि💐। दुनिया में ऐसे ही आपसी भरोसा बना रहे, बचा रहे।
Samar Raj243,985 views • 28 days ago

चित्रा त्रिपाठी ने आचार्य प्रशांत में सिर्फ प्रशांत त्रिपाठी देखा और सवाल किया- किस बात का डर था कि आपने नाम के आगे से त्रिपाठी हटा लिया? सवाल का टोन सुनिए समझ आ जाएगा उन्हें क्या ज़वाब चाहिए था? पीड़ित पंडित पर्सपेक्टिव चाहिए था। Acharya Prashant ने उल्टा किया, जाति गौरव के टाइटल को गैर जरूरी तो बताया ही, साथ ही बेवजह जाति से चिपके रहने को शर्मनाक बता दिया। बहुत बुरा हुआ चित्रा के साथ, दिल टूट गया 🥹
Samar Raj39,456 views • 5 days ago

सपा समर्थक ज्यादातर ज़ाहिल हैं महिला अधिकार के मामले में सोचने और बोलने में, ऐसे में डिंपल का बेबाक स्टैंड रखना सराहनीय है ♥️👇 रिपोर्टर: अगर देश की हर बेटी आपसे पूछे कि मैं अपने सपने को पूरा करने के लिए समाज से क्या उम्मीद रखूँ तो आपका संदेश क्या रहेगा? Dimple Yadav का जवाब: समाज की न सुनें जो आपको बंदिशों में रखना चाहता है। जो करना चाहती हैं पूरे पैशन के साथ फॉलो करें।
Samar Raj31,992 views • 8 days ago

अखिलेश यादव इस शंकराचार्य का चरण वंदन करते-करते लगभग सरेंडर कर चुके हैं। अमन चोपड़ा ने चालाकी की, जवाब में इसने बोल दिया हां अखिलेश सनातनी नहीं हैं। मामला इतने पर नहीं खत्म होता। धूर्त एंकर चालाकी से शंकराचार्य को ट्रिगर कर देता है उसके बाद मुलायम सिंह यादव को कारसेवकों का हत्यारा बताते हुए जिस तरह की भाषा इसने यूज़ की है, वैसी भाषा कोई विरोधी नेता भी इस्तेमाल नहीं करता है। इतनी क्लिप काफी है हिंदूवादी मानसिकता के लोगों के लिए अखिलेश मुलायम को सिरे से खारिज कर देने के लिए, BJP को इससे ज्यादा की जरूरत नहीं है। हमेशा कहता हूं आज फिर कह रहा हूं -दलित पिछड़े नेताओं को सामाजिक न्याय पर फोकस रखना चाहिए, ये मंदिर मस्जिद हिंदू मुस्लिम वाली पिच पर खेलने की जरूरत नहीं है। यहां आपकी हार तय है, प्राचीन काल से लिखी हुई है।
Samar Raj97,126 views • 1 month ago
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ये सच है लगभग 90 से 95 फ़ीसदी कांवड़िए दलित पिछड़े समाज से हैं, इससे ज्यादा भी हो सकते हैं। ANIL ने लाइव सर्वे किया था, ऑन कैमरा, लगभग 100% कांवड़िए बहुजन समाज के निकले थे। ऐसे में अगर कोई नेता कहता है चुनाव छोड़ो, सावन का पहला सोमवार है , तो मान्यता में डूबे लोगों को बल मिलता है। वो यही सब और ज्यादा करने के लिए प्रेरित होते हैं। समस्या भक्ति करने से नहीं है वो तो किसी का विशेषाधिकार है, समस्या क्या है उसे एक लाइन में समझिए👇 जो नेता और अधिकारी कांवड़ियों पर फूल बरसाते हैं वो अपने बच्चों को, खासकर बेटियों को किसी भी कावड़ मार्ग पर जाने से रोक देते हैं; क्योंकि सब जानते हैं।
Samar Raj56,821 views • 1 month ago