
Shivam Samajvadi
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आवाज़ उन मुद्दों की, जिन पर बात होना ज़रूरी है। सामाजिक न्याय • शिक्षा • राजनीति • युवा
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ऐसा क्या छुपा है इस वीडियो में लोग देखने के लिए मजबूर हो गए ? ये पाखण्डी अक्सर महिलाओं को ही क्यों निशाना बनाते इनके रूम में स्पेशल बैड पड़े हुए हैं वहां पर भारी संख्या में महिलाएं दिख रही क्या इन बाबाओं के लिए महिलाओं को मूर्ख बनाना आसान होता जैसे ही महिलाएं पहुंचती बाबा उनके शरीर को दाएं बाएं ऊपर नीचे छूना शुरू कर देते
Shivam Samajvadi101,111 Aufrufe • vor 7 Tagen

वायरल वीडियो में अपाहिज व्यक्ति पर जवानी दिखाने वाला व्यक्ति कैसे बेचारे को मार रहा शर्म इन निर्लज्ज लोगों को नही आती है जो मूक बनकर तमाशा देख रहे इस भीड़ में कितने लोग खड़े हैं किसी के अंदर इतना दम नहीं था जो इस इस व्यक्ति को बचा सकता था बेल्टों के प्रहार से तड़पड़ा रहा व्यकित भरसक कोशिश कर रहा कैसे भी बच जाए लेकिन इस निर्लज्ज को तनिक दया नहीं आ रही उस बेचारे पर प्रहार करे जा रहा
Shivam Yadav430,502 Aufrufe • vor 1 Monat

इस वीडियो में देखकर एक सवाल जरूर उठता है सावर्जिनक जगहों पर सम्मान और अधिकारों की सीमा आखिर कहां तक है।। अगर कोई पुरुष किसी महिला की सीट पर ऐसा वार्ताव करता तो शायद पुरुष ही उसे पीटने लगते लेकिन ये महिलाओं को देखिए इनके अंदर बिल्कुल दया भाव की कोई जगह नहीं है एक गुंडे की तरह वार्ताव करती दो महिलाएं एक बालक से जहां बैठने की जगह नहीं लेकिन जबरदस्ती उसको हटाने लगती देखते ही देखते दोनों महिलाएं उस लड़के को मारने लगती और सीट से नीचे गिरा देती यही समान भाव है क्या जहां महिलाओं के उनके इज्जत मर्यादा की बात की जाती है वही दूसरी तरफ महिलाएं एक सीमा को लांघ रही हैं सोचिये इनके पास इतना पावर कहाँ से आता
Shivam Samajvadi255,196 Aufrufe • vor 1 Monat

आइए, आपको दिल्ली की एक ऐसी घटना बताते हैं जो हमें सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि इंसानियत और संस्कार की ताकत का मतलब समझाती है। भाई साहब अपने आपको ताकतवर समझ रहे थे 2 मिनट में रिक्शा वाले ने इनको सुधार दिया वीडियो में दिखाई देता है कि एक गरीब रिक्शावाला एक व्यक्ति को अपनी मेहनत से उसकी मंजिल तक पहुंचाता है। जब वह अपनी मेहनत का किराया मांगता है तो बात कहासुनी तक पहुंच जाती है और देखते ही देखते मामला हाथापाई में बदल जाता है। शायद सामने वाले को अपनी शारीरिक ताकत पर बहुत भरोसा था। शरीर बनाया जा सकता है, मांसपेशियां मजबूत की जा सकती हैं, लेकिन असली ताकत इंसान के आचरण, व्यवहार और संस्कारों में होती है। जिस रिक्शावाले को कमजोर समझा गया, वह भी आखिर मेहनत करने वाला इंसान है। दिन-रात सड़कों पर पसीना बहाकर अपना और अपने परिवार का पेट पालता है। उसकी कमाई भले कम हो, लेकिन वह अपनी मेहनत की कमाई से जीता है और उसी मेहनत का हक मांगता है। इस घटना से एक बात जरूर सीखनी चाहिए पैसा आपको बड़ा बना सकता है लेकिन सम्मान आपको आपके व्यवहार से मिलता है। गरीबी इंसान को परिस्थितियों से मजबूर कर सकती है, लेकिन उसकी इज्जत नहीं छीन सकती। गरीब आदमी भी सम्मान का हकदार है। उसके साथ अच्छा व्यवहार करना कोई एहसान नहीं, बल्कि इंसान होने की पहचान है। इसलिए चाहे आप जिंदगी में कितने भी बड़े और ताकतवर क्यों न बन जाएं, अपने से कमजोर या गरीब समझे जाने वाले व्यक्ति का अपमान मत कीजिए। क्योंकि शरीर की ताकत कुछ मिनटों की होती है, लेकिन अच्छे आचरण की पहचान जिंदगी भर रहती है। मेरी नजर में इस वीडियो की सबसे बड़ी सीख यही है गरीब की मजबूरी को उसकी कमजोरी मत समझिए। वह भी मेहनत करता है, सपने देखता है और सम्मान के साथ जीने का पूरा अधिकार रखता है। आप इस घटना को देखकर क्या सीखते हैं?
Shivam Samajvadi214,089 Aufrufe • vor 1 Monat

प्रेम प्रसंग के चलते बड़ा मामला सामने आया घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है पहले औरत आदमी के बीच लाठी डंडा चलते रहे । फिर दोनों पक्षों के घर वाले आ जाते जब महिला को आदमी गिरा कर मारने लगता है फिर संग्राम चालू होता मामला यही तक नहीं रुकता फिर हत्यार और फायरिंग भी होने लगते लेकिन मामला में किसी को कोई क्षति नहीं हुई फायरिंग करने वाले वीडियो में सामने दिख रहे । आजकल ये मामले समाज के लिए चिंताजनक बनते जा रहे
Shivam Yadav201,484 Aufrufe • vor 1 Monat

विशाखापट्टनम में ट्रेन और प्लेटफार्म के बीच फंसी छात्रा ,दर्द से कहराती रही । गुंटूर एक्सप्रेस से जब छात्रा उतर रही थी तभी पैर फिसला और नीचे गिर गई । पायलट की सूझबूझ और ट्रेन कर्मचारियों की कड़ी मसक्कत के बाद प्लेटफार्म को तोड़ कर छात्रा को निकाला गया....reed now
Shivam Yadav77,051 Aufrufe • vor 1 Monat

आजकल बाबा भी लॉन्च हो रहे हैं एक से बढ़कर एक कहीं झाड़-फूंक वाला बाबा, कहीं पानी पिलाने वाला, कहीं कंबल बाँटने वाला और कहीं तरह-तरह के ढोंग-ढकोसलों के जरिए लोगों की आस्था का फायदा उठाने वाले बाबा। अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक बाबा लकड़ी के सहारे कथित झाड़-फूंक करता दिखाई दे रहा है और महिलाओं के साथ आपत्तिजनक तरीके से व्यवहार करने के आरोपों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर समाज हम किस दिशा में ले जा रहे हैं? क्या ऐसे ढोंग और अंधविश्वास से देश की उन्नति होगी? देश की तरक्की चमत्कारों और अंधविश्वास से नहीं, बल्कि शिक्षा, वैज्ञानिक सोच, तर्क और संविधान में विश्वास से होगी। किसी भी व्यक्ति को सिर्फ बाबा या साधु होने के नाम पर कानून और मर्यादा से ऊपर नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में वीडियो देखकर फैसला सुनाने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। विडंबना यह है कि कुछ लोग आंख मूंदकर हर बाबा को चमत्कारी मान लेते हैं। जरूरत है कि हम आस्था का सम्मान करें, लेकिन अंधविश्वास को बढ़ावा न दें। सवाल बाबाओं की संख्या का नहीं, हमारी वैज्ञानिक सोच का है। देश तभी आगे बढ़ेगा, जब हम चमत्कार नहीं तर्क और विज्ञान पर भरोसा करेंगे।
Shivam Samajvadi33,852 Aufrufe • vor 22 Tagen

गंगाराम: एक मगरमच्छ जिसने इंसानों को प्रेम, विश्वास और सह-अस्तित्व का अर्थ सिखाया अपने अंतिम समय में हर उस इंसान को रुलाया जो जीव जंतु से डरते थे😭 कहते हैं कि प्रेम की भाषा शब्दों की नहीं, बल्कि विश्वास की होती है। यह कहानी उसी विश्वास की है, जिसने इंसान और एक मगरमच्छ के बीच ऐसा रिश्ता बना दिया कि उसकी विदाई पर पूरा गाँव रो पड़ा। यह सच्ची घटना छत्तीसगढ़ के एक गाँव की है, जहाँ एक तालाब में रहने वाले मगरमच्छ को गाँव वालों ने प्यार से "गंगाराम" नाम दिया था। बताया जाता है कि गंगाराम ने लगभग 193 वर्ष तक जीवन जिया। इतने लंबे जीवन में उसने कभी किसी इंसान, पशु या पक्षी को नुकसान नहीं पहुँचाया। उसी तालाब से गाय, भैंस, बकरियाँ, पक्षी और गाँव के लोग निडर होकर पानी लेते थे, लेकिन गंगाराम ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। समय के साथ गंगाराम गाँव के परिवार का हिस्सा बन गया। जब वह गाँव की ओर निकलता, तो लोग डरते नहीं थे। बच्चे मुस्कुराकर कहते, "गंगाराम आ गए!" और घरों से दाल-चावल निकालकर उसे खिलाते। पूरा गाँव उसे अतिथि नहीं, अपने परिवार के सदस्य की तरह अपनाता था। यह रिश्ता किसी मजबूरी का नहीं, बल्कि वर्षों से बने विश्वास और स्नेह का था। फिर एक दिन वह क्षण आया जिसने पूरे गाँव की आँखें नम कर दीं। गंगाराम की मृत्यु हो गई। उसकी अंतिम विदाई किसी जंगली जीव की तरह नहीं, बल्कि परिवार के प्रिय सदस्य की तरह की गई। गाँव के लोगों ने नम आँखों से उसे विदा किया। उस दिन हर व्यक्ति को ऐसा लगा जैसे उसने अपना कोई अपना खो दिया हो। गंगाराम की कहानी केवल एक मगरमच्छ की कहानी नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि इंसान प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ प्रेम, सम्मान और विश्वास का व्यवहार करे, तो वे भी उसी प्रेम का उत्तर देते हैं। हिंसा हर जीव का स्वभाव नहीं होती; परिस्थितियाँ और व्यवहार उसे वैसा बनाते हैं। आज भी गंगाराम की कहानी लोगों को यह संदेश देती है कि धरती केवल इंसानों की नहीं, बल्कि हर जीव की है। प्रेम और विश्वास की डोर सबसे शक्तिशाली होती है—इतनी शक्तिशाली कि वह इंसान और एक मगरमच्छ के बीच भी अटूट रिश्ता बना सकती है।
Shivam Yadav49,966 Aufrufe • vor 1 Monat
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