
Shubhankar Mishra
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A Common Man Doing Calm se kaam| A ( Aajtak) to Z (Zee News) of news- seen it all.
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KPS Gill आपकी नज़र में कौन ? पंजाब में दो मांएं हैं। एक वो मां जिसका बेटा रोज़ की तरह बस में बैठा था। उग्रवादियों ने बस रोकी, बेटे को उतारा और गोली मार दी। उस मां से पूछिए कि KPS गिल कौन थे, तो वो कहेगी कि वो न आते तो ये सिलसिला कभी न रुकता, वो रखवाले थे। और दूसरी वो मां जिसके बेटे को एक रात पुलिस उठा ले गई। न गिरफ्तारी, न मुकदमा, न लाश। तीस साल से वो थाने के चक्कर काट रही है। उससे पूछिए कि KPS गिल कौन थे, तो वो कहेगी कि जिस सिस्टम ने मेरा बेटा निगल लिया, उसका चेहरा वही थे। अब बताइए, इन दोनों में से झूठ कौन बोल रहा है? कोई नहीं। दोनों सच बोल रही हैं। और शायद यही इस कहानी की सबसे बड़ी त्रासदी है कि यहां सच एक नहीं, दो हैं। और दोनों के पास सबूत हैं। सतलुज का 48 घंटे में हट जाना बस इतना बताता है कि ये इतिहास अभी इतिहास बना ही नहीं है, ये आज भी वर्तमान है। और सतलुज पहली फिल्म भी नहीं है। माचिस से लेकर पंजाब 1984 और चौथी कूट तक, सिनेमा तीस साल से इसी दौर के सवाल पूछ रहा है। जिस दिन ये देश दोनों मांओं की बात एक साथ सुन पाएगा, उस दिन शायद ये ज़ख्म भरना शुरू होगा। तो अब वापस वही सवाल, जो मैंने ओपनिंग में आपके हवाले छोड़ा था। KPS गिल क्या थे? देश का सबसे जांबाज़ अफसर, पंजाब का सबसे बड़ा कातिल, या वो आदमी जो दोनों था? और इसके नीचे छिपा वो सवाल, जो इन तीनों से बड़ा है... क्या शांति की कीमत इतनी भारी होनी चाहिए? या कुछ कीमतें चुकानी ही पड़ती हैं? कमेंट में सिर्फ एक शब्द लिखिए, अफसर, कातिल, या दोनों। और उसके नीचे एक लाइन ये भी कि क्यों। बस एक शर्त के साथ। अपनी बात रखिए, दूसरे पक्ष को गाली दिए बिना। क्योंकि यही तो वो चीज़ है जो उस दौर में सबसे पहले मरी थी, दूसरे की बात सुनने का सब्र।
Shubhankar Mishra43,009 次观看 • 12 天前

Dear Zubair, जैसे Nupur Sharma की Clip काटकर कन्हैया लाल से लेकर उमेश कोल्हे की ज़िंदगी बरबाद करने से पहले मैं आपको भी Twitter पर Inbox में जवाब दिया करता था, वैसे ही 4-5 महीने पहले Samay Raina की कुछ Clips मुझे अच्छी लगी थी जिसका हंसी मजाक में 1 Podcast में ज़िक्र भी हुआ था। पर उसके बाद जब लोगों ने और Clip साझा की तब अहसास हुआ कि वहां तो गिरने को ही उत्थान समझ लिया गया है और हंसी मजाक से गाली गलौज, फिर अभद्रता से बढ़कर कर जब बात निर्लज्जता पर दिखने लगी थी। जिसके चलते बीते 2-3 महीने में हमने कई बार सार्वजनिक विरोध दर्ज कराया था। बाकी Doglapanti इसे कहते हैं कि मेरा Samay को 4-5 महीने पुराना समर्थन आपने दिखाया पर बीते 2-3 महीने के किए हमारे विरोध को आपने छिपा लिया Mohammed Zubair
Shubhankar Mishra958,761 次观看 • 1 年前

अयोध्या में 500 वर्षों के बाद जब 161 फीट ऊँचे शिखर पर केसरिया ध्वजा फहरा, तो ऐसा लगा मानो अयोध्या का न्याय पूरा हुआ। हम धन्य हैं कि उस युग में जन्मे जब देख लिया कि कैसे रामलला टेंट से निकलकर अपने सिंहासन पर बैठे। धन्य हैं कि उस ध्वज को लहराते देखा जिसने पाँच सौ साल का घाव हमेशा के लिए भर दिया । धन्य हैं कि इस पुनर्जन्म के साक्षी बने। आज पाँच सौ वर्षों का घाव भर गया है, और इतिहास कह रहा ‘राम लौट आए हैं’।
Shubhankar Mishra445,116 次观看 • 7 个月前

भारत में 25 करोड़ बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं। एक तरफ़ सरकारी स्कूल बंद हो रहे और उधर 3 साल में Private स्कूलों की फीस 50-80% बढ़ी। सवाल कि क्या syllabus बदला? क्या Facilities दोगुनी हुईं? Uniform, जूते, किताबें सब स्कूल का ख़रीदना मजबूरी। स्कूल अब पैसा कमाने की Factory हैं.
Shubhankar Mishra503,602 次观看 • 1 年前
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