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Santosh Yadav, Ph.D.

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Senior Scientist, जौनपुरी, बनारसी, इलाहाबादी, खेती किसानी, राजनीति और ज्ञान विज्ञान!

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ये कितने झूठे लोग हैं। संसद में पूरे देश के सामने झूठ बोला कि ऑपरेशन सिंदूर में एक भी जवान हताहत नहीं हुआ। अब तेरह महीने बाद बताया जा रहा है कि छह जवान शहीद हुए। विपक्ष को अगले सत्र में राजनाथ सिंह के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का प्रस्ताव लाना चाहिए।

ये कितने झूठे लोग हैं। संसद में पूरे देश के सामने झूठ बोला कि ऑपरेशन सिंदूर में एक भी जवान हताहत नहीं हुआ। अब तेरह महीने बाद बताया जा रहा है कि छह जवान शहीद हुए। विपक्ष को अगले सत्र में राजनाथ सिंह के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का प्रस्ताव लाना चाहिए।

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चंदा चोरों और ईश्वर के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाने वालों के बारे में गीतकार गुलशन बावरा ने 1967 में ही ये पंक्तियाँ लिख दी थीं: “देते हैं अपने भगवान को धोखा, इंसान को क्या छोड़ेंगे।”

चंदा चोरों और ईश्वर के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाने वालों के बारे में गीतकार गुलशन बावरा ने 1967 में ही ये पंक्तियाँ लिख दी थीं: “देते हैं अपने भगवान को धोखा, इंसान को क्या छोड़ेंगे।”

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पहले मोदी दावा करते थे कि चाइना अपने जीडीपी का 20% शिक्षा पर खर्च करता है और भारत 7% का सपना देखा और 4% पर अटक गया। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने हर साल शिक्षा का बजट घटा कर 2.5% पर पहुँचा दिया।

पहले मोदी दावा करते थे कि चाइना अपने जीडीपी का 20% शिक्षा पर खर्च करता है और भारत 7% का सपना देखा और 4% पर अटक गया। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने हर साल शिक्षा का बजट घटा कर 2.5% पर पहुँचा दिया।

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सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा में दावा किया कि अमेरिका ने गाय के मूत्र का पेटेंट कराया है। आइए, इस दावे की वास्तविकता समझते हैं। 1. जिस अमेरिकी पेटेंट का हवाला दिया जा रहा है, वह किसी अमेरिकी संस्था का नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा दायर किया गया था। 2. यह पेटेंट 2020 में मेंटेनेंस (एक्सटेंशन) फीस जमा न होने के कारण समाप्त (Expired) हो गया। 3. यह पेटेंट गाय के मूत्र पर नहीं, बल्कि गाय के मूत्र के डिस्टिलेट (Cow Urine Distillate) के असर का है अर्थात दावा मूत्र पर नहीं, बल्कि उसके आसुत (distilled) अंश के संभावित प्रभाव पर था। 4. स्वयं पेटेंट में यह भी उल्लेख है कि इसी प्रकार का प्रभाव भैंस, ऊँट और हिरण के मूत्र के डिस्टिलेट में भी देखा गया। डिस्टिलेशन (Distillation) क्या है? किसी भी मिश्रण में उपस्थित विभिन्न घटकों का वाष्प दाब (Vapor Pressure) और क्वथनांक (Boiling Point) अलग-अलग होता है। इसी सिद्धांत का उपयोग करके डिस्टिलेशन के माध्यम से कुछ वाष्पशील (volatile) घटकों को अलग किया जाता है। यही तकनीक पानी के शुद्धिकरण, समुद्री जल के अलवणीकरण (desalination), रसायन उद्योग और यहाँ तक कि सीवेज के उपचार में भी उपयोग की जाती है। इसलिए किसी पदार्थ का डिस्टिलेट प्राप्त होना अपने-आप में उस मूल पदार्थ के औषधीय या सेवन योग्य होने का प्रमाण नहीं है। अब एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है। गाय सहित लगभग सभी जानवरों के मूत्र में विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव और खरनाक रोगजनक (pathogenic) बैक्टीरिया पाए जाते हैं। यदि मूत्र में इतना शक्तिशाली एंटीमाइक्रोबियल कंपोनेंट होता, तो सबसे पहले उसी में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट हो जाने चाहिए थे। वास्तविकता यह है कि अनेक रसायनों और प्राकृतिक पदार्थों में प्रयोगशाला स्तर पर एंटीमाइक्रोबियल गतिविधि (antimicrobial activity) पाई जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होता कि वे सीधे पीने, खाने या चिकित्सा के लिए सुरक्षित और प्रभावी सिद्ध हो जाते हैं। किसी पदार्थ को दवा मानने के लिए कठोर प्रीक्लिनिकल और क्लिनिकल परीक्षण आवश्यक होते हैं। भारत जैसे देश में, जहाँ अभी भी वैज्ञानिक साक्षरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने की आवश्यकता है, संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच से इस प्रकार के अधूरे या भ्रामक दावे करना लोगों में भ्रम और अंधविश्वास को बढ़ावा मिलेगा । सार्वजनिक जीवन में वैज्ञानिक विषयों पर चर्चा हमेशा उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों और तथ्यों के आधार उस विषय के एक्सपर्ट को करनी चाहिए न कि प्रोपेगंडा के लिए भाषण बाजी करना चाहिए।

Santosh Yadav, Ph.D.

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