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K P Malik

@TheKPMalik • 21,267 subscribers

Political Editor : Dainik Bhaskar. Vice President : DJA (NUJ-India). Executive Member : Press Association of India, Member : PCI, personal views.

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इन नरपिशाचों के सामने खड़ी ये मासूम बच्चियाँ कितनी सहमी और घबराई हुई है! क्या इन्हे इतनी छोटी सी उम्र की बच्चियों पर भी तरस नहीं आया? #EpsteinFiles #EpsteinTrumpFiles #EpsteinFiles #Epstein #EpsteinFilesIndia

इन नरपिशाचों के सामने खड़ी ये मासूम बच्चियाँ कितनी सहमी और घबराई हुई है! क्या इन्हे इतनी छोटी सी उम्र की बच्चियों पर भी तरस नहीं आया? #EpsteinFiles #EpsteinTrumpFiles #EpsteinFiles #Epstein #EpsteinFilesIndia

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अमेरिकन कुत्तों ने किया था निरीक्षण (एच-1बी वीज़ा) देश प्रमुख चैनल एबीपी पर एच-1बी वीज़ा पर डिबेट चल रही थी। एंकर संदीप चौधरी ने जब राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जयंत चौधरी के वरिष्ठ राजनीतिक सलाहकार गु-हित घग्घर-वाल से ट्रंप सरकार के एच-1बी वीज़ा के विषय में सवाल पूछा तो स्टूडियो में पिन ड्रॉप साइलेंस हो गया। दरअसल महान विशेषज्ञ ने बताया कि बराक ओबामा के भारत आने से पहले अमेरिकन कुत्ते निरीक्षण करने आए थे उसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति भारत आए थे। एच-1बी वीज़ा से अमेरिका को बहुत बड़ा नुक्सान होगा। और भारत का...? इसलिए कहा जाता है कि रालोद से काबिल प्रवक्ता, किसी अन्य दल के पास नहीं है। सारे तराशे हुए हीरे यहीं हैं। यही कारण है कि पार्टी का ग्राफ भयंकर तरीके से बढ़ता ही जा रहा है। बहरहाल संदीप चौधरी ने जो आरती उतारी है उनसे ऐसी आशा नहीं थी उनको समझना चाहिए कितनी मजबूरियां हैं चवन्नी, खीर और महामानव में किसान मसीहा की छवि आदि। Rashtriya Lok Dal BJP Uttar Pradesh UP Congress Samajwadi Party I.P. Singh prof dr Arun Prakash Mishra 🇺🇲 #RLD

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जयंत को निपटाने की रणनीति... भाजपा की चौधरी चरण सिंह के वंशजों को सियासत से समाप्त करने की पुरानी हसरत रही है उसी के मद्देनजर भाजपा ने जयंत चौधरी को सियासी चक्रव्यूह में जकड़ लिया है। और उसी के तहत उनसे यूपी सीएम योगी के खिलाफ या तमिलनाडु में स्टालिन के खिलाफ बयान दिलवाये जा रहे हैं। यें वही जयंत चौधरी हैं जिनका भाजपा का नाम लेते ही पारा चढ़ जाया करता था। अगर मैं 2014 या 2017 में भाजपा के ऑफर की बात करूं तो छोटे चौधरी यानि अजित सिंह यह ऑफर ठुकराने के मूड में नहीं थे लेकिन उस समय जयंत ने भाजपा के उस ऑफर को ठुकराते हुए कहा था कि मरना पसंद है लेकिन भाजपा में जाना गवारा नहीं है। मैं भाजपा में जाने से अच्छा राजनीतिक छोड़ना पसंद करूंगा। चवन्नी थोड़ी हूं जो पलट जाऊंगा, यह जुमला तो सबको याद ही होगा। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एकाएक जयंत चौधरी को क्यों बीजेपी में जाना पड़ा? क्या इसके पीछे कोई दबाव है या कोई मजबूरी है? अगर कुछ ऐसा है तो जयंत चौधरी को अपने समाज के सामने इस बात को रखना चाहिए ताकि समाज उनके साथ उठ खड़ा हो। दूसरी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भाजपा के स्थानीय नेता और दूसरे सियासी दलों के नेता भी जयंत चौधरी की सियासी जमीन को हड़पने और उसका राजनीतिक कैरियर खत्म करने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं। माना यह जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत किसानों की राजधानी कहे जाने वाले सिसौली में जाट आरक्षण को लेकर एक महा पंचायत हो रही है। उस पंचायत में निर्णय लिया जाएगा कि भाजपा की मोदी सरकार से जाटों को आरक्षण दिलाने का काम किया जाए, यह बात जग जाहिर है कि भाजपा जाट आरक्षण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी और अंत में यह बॉल क्या भाजपा के चक्रव्यूह में फस चुके हैं जयंत? भाजपा की चौधरी चरण सिंह के वंशजों को सियासत से समाप्त करने की पुरानी हसरत रही है उसी के मद्देनजर भाजपा ने जयंत चौधरी को सियासी चक्रव्यूह में जकड़ लिया है। और उसी के तहत उनसे यूपी सीएम योगी के खिलाफ या तमिलनाडु में स्टालिन के खिलाफ बयान दिलवाये जा रहे हैं। यें वही जयंत चौधरी हैं जिनका भाजपा का नाम लेते ही पारा चढ़ जाया करता था। अगर मैं 2014 या 2017 में भाजपा के ऑफर की बात करूं तो छोटे चौधरी यानि अजित सिंह यह ऑफर ठुकराने के मूड में नहीं थे लेकिन उस समय जयंत ने भाजपा के उस ऑफर को ठुकराते हुए कहा था कि मरना पसंद है लेकिन भाजपा में जाना गवारा नहीं है। मैं भाजपा में जाने से अच्छा राजनीतिक छोड़ना पसंद करूंगा। चवन्नी थोड़ी हूं जो पलट जाऊंगा, यह जुमला तो सबको याद ही होगा। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एकाएक जयंत चौधरी को क्यों बीजेपी में जाना पड़ा? क्या इसके पीछे कोई दबाव है या कोई मजबूरी है? अगर कुछ ऐसा है तो जयंत चौधरी को अपने समाज के सामने इस बात को रखना चाहिए ताकि समाज उनके साथ उठ खड़ा हो। दूसरी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भाजपा के स्थानीय नेता और दूसरे सियासी दलों के नेता भी जयंत चौधरी की सियासी जमीन को हड़पने और उसका राजनीतिक कैरियर खत्म करने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं। माना यह जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत किसानों की राजधानी कहे जाने वाले सिसौली में जाट आरक्षण को लेकर एक महा पंचायत हो रही है। उस पंचायत में निर्णय लिया जाएगा कि भाजपा की मोदी सरकार से जाटों को आरक्षण दिलाने का काम किया जाए। हालांकि यह बात भी जग जाहिर है कि भाजपा की मोदी सरकार किसी भी कीमत पर जाट आरक्षण पर कोई विचार नहीं करने जा रही है लेकिन जयंत को घेरने के लिए उनके विरोधियों के लिए यह है स्वर्णिम अवसर है। अंत में यह बॉल जयंत चौधरी के पाले में डालकर उनको बली का बकरा बनाने की रणनीति दिखाई दे रही है। अब इस रणनीति का मुकाबला जयंत कर पाते हैं? या इसमें फंसकर वह शहीद हो जाते हैं यह तो समय ही बताएगा। Rashtriya Lok Dal BJP West UP Aazad Samaj Party - Delhi Samajwadi Party

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64,665 просмотров • 1 год назад

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उत्तराखंड की महिलाओं ने फिर दिखाया दम! अंकिता को न्याय का ऐतिहासिक जन विद्रोह! आज उत्तराखंड की सड़कें गूंज उठीं, सीएम घेराव और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का वो जन आंदोलन जो न भजन मंडली था, न राजनीतिक तमाशा। हजारों उत्तराखंडवासी देहरादून की सड़कों पर उतरे, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ताओं का गुस्सा और राज्य सरकार के विरोध में महिलाओं का विद्रोह साफ़ नज़र आ रहा था। दरअसल खास बात यह थी कि इसका आह्वान, नेतृत्व और दिशा सब उत्तराखंड की उन वीरांगनाओं ने तय कीं, जिन्होंने राज्य गठन के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। सोशल मीडिया पर लाखों लोग, प्रदेश से लेकर दुनिया भर के लोग अपनी सहभागिता दर्ज कराते हुए नज़र आए। ये कोई 'पार्टी का ज़ुमला' नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनता का ठोस संदेश है! 4 जनवरी 2026 की तारीख़ उत्तराखंड के इतिहास की किताब में दर्ज हो गई! ये दिन महिलाओं को न्याय दिलाने और सशक्तिकरण के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। सरकार को महिलाओं की सीधी चेतावनी कि सीबीआई की जांच करके दोषियों को सज़ा करो! मासूम अंकिता के परिवार को न्याय के नाम पर सत्ताधारी नेताओं षड्यंत्र बंद करो, 'यूकेडी का ड्रामा' या 'विपक्षी साजिश' जैसे जुमलों से तंग मत करो और सिद्धांतवादी पार्टी का नैतिक पतन बंद करो! बहरहाल ये पब्लिक मूवमेंट है उत्तराखंड के स्थानीय लोगों का, बेटियों का गुस्सा है। अपेक्षाएं हैं जो सड़कों पर गूंजीं। अब बोलो, कब तक 'राजनीतिक चश्मा' लगाकर जनता को बेवकूफ बनाओगे? न्याय दो, वरना ये आग इस पूरे भ्रष्टाचारी सिस्टम को ही लपेट लेगी! #Uttarakhand #uttarakhandnews #AnkitaBhandariCase #AnkitaBhandari #englot #njwk20 #Parasakthi

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क्या चाणक्य ने चक्रव्यूह रच दिया है? यूपी में शिवलिंग पर बिच्छु बैठा है। हाथ बढ़ाओ तो आस्था डसने का डर, जूता उठाओ तो संस्कार कुचलने का अपराध। यही तो चाणक्य का असली चक्रव्यूह है। यह बिच्छु कोई साधारण नहीं है। यह खुद को धर्मरक्षक बताता है, ज़हर फैलाता है और कहता है कि “मैं न होता तो शिवलिंग सुरक्षित न रहता।” समस्या यह नहीं कि बिच्छु बैठा है, समस्या यह है कि उसे बैठने दिया गया, फिर बचाया गया, और अब वह मालिक बनने लगा है। चाणक्य ने तलवार नहीं, दुविधा दी। ऐसी दुविधा जिसमें हर विकल्प या तो आस्था के खिलाफ़ दिखे या राजनीति के खिलाफ़ नज़र आए। हाथ से हटाओ तो डस ले, जूते से मारो तो शोर मचे कि “देखो, शिवलिंग का अपमान हुआ!” यही तो चाल है। बिच्छु को मारना मुद्दा नहीं, उसे अपरिहार्य बना देना असली साज़िश है। तो उपाय क्या है? बिच्छु को शहीद बनाने का अवसर मत दो। न हाथ उठाओ, न जूता दिखाओ। बस इतना उजाला कर दो कि वह खुद अपनी ज़हरिली पहचान में नंगा खड़ा दिखे। जब समाज समझ जाएगा कि शिवलिंग की रक्षा बिच्छुओं से नहीं होती, तब बिच्छु अपने आप मर जाएगा, बिना शोर, बिना तमाशे। और शिवलिंग? वह तो तब भी पवित्र था, अब भी है। जय बाबा महाकाल!

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देश के बड़े व्यापारी और राजनीतिक मौसम विज्ञानी का सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बेटे की शादी का न्यौता देने उनके घर आना, राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का पिछले दो-तीन दिनों से एकाएक सक्रिय होना, राजस्थान सरकार के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का अपने पद से इस्तीफा देना। उधर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अपनी पसंद का मुख्य सचिव बनाया जाना, 10 विधानसभा उप चुनाव के लिए अपने डेढ़ दर्जन मंत्रियों को प्रभारी बनाकर टिकट बांटने की तैयारी करना आदि जताता है कि माहौल में बदलाव दिखाई पड़ने लगे हैं। मीडिया संस्थानों का एनडीए शासित राज्य बिहार में गिरते पुलों की विशेष कवरेज़ करना, चुनाव के दौरान रायबरेली में एक मीडिया संस्थान के आधा दर्जन से अधिक लोगों का प्रियंका गांधी का इंटरव्यू करना और तस्वीरें खिंचवाने के लिए याचना करना आदि तमाम कारण एक ही संकेत दे रहे हैं कि आज की सरकार मोदी जी की गारंटी की नहीं बल्कि एनडीए की कमज़ोर बैसाखियों पर खड़ी सरकार है। ख़ैर हमारे जैसे छोटे पत्रकार आज भी मुख्य सत्ताधारी दल भाजपा से खुलकर सवाल पूछ रहे हैं और जब कभी सरकार बदलेगी तो उस समय की सरकार के मुख्य सत्ताधारी दल से भी कड़वे सवाल पूछेगें। जैसी डिबेट अभी कर रहे हैं तब भी करेंगे। बस आप मेन स्ट्रीम मीडिया पर नजरे बनाए रखिए।

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दस सालों में क्या बदला? अपराधी अब ‘अपना-पराया’ है सत्ताधारी पार्टी हो या अन्य सियासी दल देखो, जनता का गुस्सा मैनेज है। अंकिता पर बीजेपी ने ‘क्लीन चिट’ ट्राई की, सेंगर पर ‘फैमिली प्रॉब्लम’ कहा। देश का मीडिया में 2012 में चीखता था, आज पीआर एजेंसी बना हुआ है, किसे ‘राष्ट्रभक्त’ बता बचाओ, किसे ‘वोटबैंक’ ठहराओ। संस्थाएँ यानि सीबीआई-ईडी राजनीतिक हथियार, न्यायपालिका पर दबाव। जनता को पुलिस का डर, सड़क पर उतरोगे तो ‘अराजक’। 2012 में सत्ता डरती थी, आज जनता डर गई। बेटी की इज्जत ‘वोटबैंक’ से नीचे गिर गई। समाज सुन्न नहीं बेजान हो चुका, ये खामोशी क्रांति की नहीं, पतन की घंटी है। Yogita Bhayana योगिता भयाना #UnnaoCaseFacts #UnnaoCase

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श्री-श्री रविशंकर को एकाएक क्यों याद आए खाप चौधरी और किसान? हरियाणा में चुनावी मौसम में तमाम सियासी दलों के अलग-अलग पैंतरे और अलग-अलग सियासी तौर तरीके दिखाई पड़ रहे हैं। उसी के तहत सत्ताधारी दल भाजपा का एक नया अनोखा पैंतरा सामने आया है। प्राकृतिक खेती सीखने और हरियाणा की खाप पंचायत की कार्यशैली से दक्षिण भारत के लोगों को परिचित कराने के लिए हरियाणा से कुछ किसानों और खाप पंचायतों के कुछ लोगों को ग्रुप आज बेंगलुरु रवाना हो गया है। इस ग्रुप का श्री श्री रविशंकर के आश्रम में जाने और उनसे रूबरू होने का भी कार्यक्रम है। हरियाणा के कुछ लोग सवाल भी पूछ रहे हैं कि एकाएक बेंगलुरु में बैठे श्री श्री रविशंकर को हरियाणा के खाप चौधरियों की याद क्यों आई? अपुष्ट खबरें हैं कि रुकने और मुफ्त हवाई यात्रा का सारा इंतजाम श्री श्री रविशंकर की ओर से ही कराया जा रहा है। दरअसल सवाल उठता है कि हरियाणा में जहां इतना महत्वपूर्ण चुनाव चल रहा है, ऐसे में एकाएक किसानों और पंचायत के प्रतिनिधियों का श्री-श्री रविशंकर से बेंगलुरु जाकर मिलना इतना आवश्यक क्यों है? सूत्र बताते हैं कि हरियाणा चुनाव में भाजपा की खराब स्थिति को देखते हुए इस नए पैंतरे के तहत किसान वर्ग और खापों में तोड़फोड़ करने के मद्देनजर बेंगलुरु में किसानों के कैंप के नाम पर किसानों को हवाई जहाज से एक सप्ताह घूमने के लिए बेंगलुरु ले जाया जा रहा है। इस से समझ सकते हैं कि इस समय इस तरह के कैंप लगाने और किसानों को हवाई जहाज से बेंगलुरु ले जाने का यह आइडिया किसका होगा और इसके पीछे क्या रणनीति होगी? क्या कोई संगठन एकाएक किसानों का हितैसी बनकर खड़ा हो गया है जो उसको चुनाव के दौरान किसानों की चिंता हो गई है? इस पर हरियाणा के किसान विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि आज उनको किसान मसीहा चौधरी छोटूराम की वह बात याद आ रही है कि : "हे किसान पहले तो बोलना सीख ले और दुश्मन को पहचानना सीख ले।"

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यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे और विपक्ष की खामोशी के मायने? सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए अस्पष्ट नियमों पर रोक लगाते हुए साफ कहा कि भारत की एकता हर शैक्षणिक संस्थान में झलकनी चाहिए। लेकिन सवाल वही पुराना है कि सरकार के फ़ैसले पर विपक्ष ने 'राष्ट्रवादी' हस्तक्षेप का विरोध या समर्थन क्यों नहीं किया? जवाब साफ है कि उसे भी चुनावी फायदे की भूख है! भाजपा हो या विपक्ष की तमाम पार्टियां, सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही सबका आचरण एक ही रंग का हो जाता है। यूजीसी को अपने इशारों पर नचाना हर दल का पुराना हथियार है। क्योंकि इन्हे असली चिंता लोकतंत्र की नहीं, वोटबैंक की है। BJP Uttar Pradesh BJP Samajwadi Party Media Cell Akhilesh Yadav Mayawati Rahul Gandhi Rashtriya Lok Dal Chandra Shekhar Aazad Dr Nishikant Dubey #GOLD #Silver

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