
Upmita Vajpai
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Editor, Amar Ujala, Varanasi. Reported extensively on Kashmir/Defence. Born in cleanest city ‘Indore’. Ex Editor, DainikBhaskar Bhopal. [email protected]
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खौफनाक… आजमगढ़ में घर में पूजा करा रही महिला और पूजा करवा रहे दे पंडितों की महिला के पति ने गोली मारकर हत्या कर दी। आरोप है कि बाजार से घर पहुंचे अरविंद सिंह ने पंडितों से आधार कार्ड मांगने को लेकर हुए विवाद के बाद पिस्टल से फायरिंग कर दी। इस घटना में पत्नी बबीता सिंह, पंडित महेंद्र पाठक व पंडित अखिलेश मिश्रा की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं और तीन बच्चों के साथ कमरे में कैद आरोपी को बाहर निकालने के प्रयास में जुटी हुई है। बेटी परी 5 साल की है, बेटा लक्खा 6 साल का है और सात महीने की बेटी फिलहाल आरोपी के साथ बंधक हैं। आरोपी अरविंद ने खुद को तीन बच्चों के साथ घर में ही कैद कर लिया है। शाम करीब छह बजे अरविंद बाजार से घर पहुंचा। घर में पूजा होते देख उसने पंडितों से सवाल किया। पंडितों ने पूजा किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद अरविंद ने उनसे आधार कार्ड मांगना शुरू कर दिया। आधार कार्ड मांगने को लेकर अरविंद और पंडितों के बीच बहस होने लगी। #Azamgarh DIG Range Azamgarh AZAMGARH POLICE UP POLICE #Crime #triplemurder
Upmita Vajpai78,406 views • 15 days ago
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मुख्तार के भाई सांसद अफजाल अंसारी और गाजीपुर की डीएम आर्यका अखोरी के बीच बहस। डीएम ने कहा - आपने मिट्टी देने के लिए परमिशन नहीं ली है, क्या पूरा कस्बा मिट्टी देगा, हम क्या गिनती करते बैठेंगे? एफआईआर कर दूंगी, जिला निर्वाचन अधिकारी हूं। अफजाल ने कहा - मिट्टी देने के लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं। ये आपकी कृपा पर नहीं है कि आप तय करें कि ये लोग ही मिट्टी देंगे। #MukhtarAnsariDeath #AfzalAnsari #DMGazipur
Upmita Vajpai564,568 views • 2 years ago

ये काशी का अस्सी घाट है। आप यहां आरती युद्ध देखने आ सकते हैं। युद्ध इसलिए क्योंकि जब यहां शाम को गंगा आरती होती है तो चार कदमों की दूरी पर दो आरती होती हैं। इनके बीच इतना कम फासला है कि एक आरती की आवाज दूसरी आरती कर रहे अर्चकों के कानों में पड़ना लाजमी हैं। दोनों हमसाये घाटों के मंत्रोच्चार जब अपनी धर्म के तट को पार कर रहे होते हैं तो ऐसा लगता है हवा में ये एकदूजे से गुत्थमगुत्था हो रहे हैं। एक घाट पर गाया जा रहा देवी सुरेश्वरी भगवती.. दूसरे घाट के डमक डमक डमक डमक… से ऐसे लिपटने लगते हैं मानों जबरन कोई गले पड़ रहा हो। यहां तक को ठीक था लेकिन मुश्किल तब हो जाती है जब ढोलक की थाप, घंटे-घंटालों की धुन संघर्ष और संग्राम एक ही वक्त पर आरंभ कर देती है। समझ से परे है कि सीढ़ियों पर सिकुड़े सिमटे बैठे तमाम शहरों, रियासतों, कुनबों से आए असंख्य कान कैसे फिल्टर करते होंगे कि पहले घाट की आरती का आस्वादन करें या दूसरे? #Kashi #AssiGhat #GangaArti
Upmita Vajpai92,572 views • 9 months ago

आज आखिरी बार काशी आएंगे काशी के अपने सबसे दुलारे सप्तक, पद्मभूषण छन्नूलाल जी। कुछ देर बड़ी गैबी वाले घर की दीवारों को अलविदा कहने। जहां आने और रहने पिछले कई सालों से छटपटाते रहे। और फिर मसाने की होरी गाकर जिस मणिकर्णिका के हवाले शवों की राख से होली को काशी के उत्सव की धुन बनाया, वहां हमेशा के लिए बाबा की हथेली पर सो जाने। क्या कहते हैं उसे, चिरनिद्रा…। बात फरवरी की है। सुरों के आला को मृग छौने सा ढूंढती मैं मीरजापुर पहुंची थी। इससे पहले उन्हे जमीन पर मसनत लगाए भारत भवन के मुक्ताकाश मंच पर सुना था। बनारस में वो ढूंढे नहीं मिल रहे थे। बेमन से मीरजापुर रह रहे थे। मीरजापुर में उन्हें दुनियादारी ने दुनिया वालों से छुपा रखा था। गंगा के दुलारे का मीरजापुर में जरा भी मन नहीं लग रहा था। वो कह नहीं पाते थे, पर उन्हें बनारस बहुत याद आता था। बाहर बोर्ड लगा था - संगीत संत पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र, मिलने का समय सायंकाल 7 से 9 बजे। भीतर, अस्पताल वाले बेड जिसे ऊपर, नीचे कर सकते हैं, उस पर वो बिना हिले-डुले लेटे हुए थे। चेहरा मुरझाया सा। हां, लेकिन लाल गोल तिलक उनकी पुरातन शनाख्त सा ललाट पर धरा हुआ था। तार्रूफ करवाया गया। मेरे नाम के साथ बनारस सुनकर उनकी आंखें तारों सी टिमटिमाने लगीं। मैंने पूछा, बनारस याद आता है? क्या-कुछ याद आता है? बोले - हमारा पूजा करना याद आता है। छोटी गैबी में रहते थे। कहने के लिए छोटी गैबी है लेकिन है बड़ी गैबी। कौन सा गाना ध्यान आता है तो कहते हैं बहुत दिन हो गया। लेकिन शिष्यों को सिखाते थे। सब फरमाइश करते थे गुरुजी सुनाइए। खेले मसाने में होरी। हमने कहा गुरुजी हमें भी सुना दीजिए तो बोले, दरअसल…खाने का और गाने का मन नहीं कर रहा है। पीछे से उनका केयरटेकर टोकते हुए कहता है - डॉक्टरवा मना किए हैं अभी बोलने, गाने को। पर वो कहा रुकने वाले, वो गाने लगते हैं। चार अधूरी लाइनें गाए ही थे कि शब्द लड़खड़ाने लगते हैं। वो बोले- शब्दवा भूल जात हैं। कुछ देर बाद कहते हैं, काशी में प्रोग्राम करेंगे। स्वास्थ्य ठीक रहा तो काशी के घाट पर करेंगे। मैंने पूछा - मसाने में होरी सुनाएंगे, तो कहने लगे वो हमीं ने बनाया है। फिर वो अचानक मसाने में होरी गाने लगते हैं। बीच-बीच कुछ शब्द बिसर जाते हैं। फिर क्षण भर सांस लेकर ऊंचा-नीचा सुर लगा गाने लगते हैं…. चिताभस्म भरी झोरी,दिगंबर मसाने में होरी। फिर आखर-आखर गाना समझाने लगते हैं…. होली में कौन कौन था, गोपन गोपी, श्यामन राधा। वो अब थकने लगे थे। वहां तैनात उनका केयरटेकर घूर घूर कर जाने का इशारा कर रहा था। कभी पानी पूछकर तो कभी मिठाई सामने परोस कर। तभी मैंने संगीत के देवता का कंपकंपाता हाथ खुदई उठाकर अपने सिर पर धर लिया।… चलिए जल्दी से आशीर्वाद दे दीजिए। जैसे ही मैंने कहा वो जरा सा मुस्कुरा दिए। काशी और उसे घाट में तुरपे मसाने की होरी, ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी के राग आज हमेशा के लिए याददाश्त का सबसे जहीन टुकड़ा बन गया है। #छन्नूलालमिश्र #kashi #ChannulalMishra
Upmita Vajpai37,801 views • 1 year ago

काशी के बिस्मिल्ला बिस्मिल्ला खां की कब्र पर आज शहनाई वादन हुआ उनकी 18 वीं पुण्यतिथि पर… बिस्मिल्ला ने शहनाई को अपनी बेगम माना और शहनाई को भी वाराणसी के फतहमैन कब्रिस्तान में उनके साथ दफनाया गया था। काशी के विश्वनाथ मंदिर के वे अधिकृत शहनाई वादक थे। वे कहते थे - अभी तो सच्चा सुर लगा ही कहां है? उसी की तलाश में तो हम इतने बरस से बजाए जा रहे हैं। जब सच्चा सुर लगा जाएगा तो समझिएगा कि हम पहुंच गए बाबा विश्वनाथ की शरण में।' #BismlaahKhan #Kashi
Upmita Vajpai26,423 views • 2 years ago

ये घर के काम में मेरी मदद करनेवाली बबली की नानी हैं। बबली के साथ कई बार से भी हमारे यहां आती हैं। ऐसे कपड़े पहनों से लेकर इतनी रात को ऑफिस से क्यों लौटती हो और सुबह देर से क्यों उठती हो वाले तमाम सास टाइप ज्ञान ये मुझे समय समय पर देती रहतीं हैं। वैसे मेरी अपनी सास थोड़ी chill type हैं, तो इन सब बातों का मुझे तिनकाभर फर्क नहीं पड़ता। नानी मुझसे अत्यधिक क्लिष्ट, मतलब टॉप क्लास भोजपुरी में बात करतीं हैं। और अब तो मैं उन्हें टूटी फूटी भोजपुरी में जवाब भी देने लगी हूं। दो दिन पहले नानी ने मेरे हाथ की केसर और दालचीनी वाली चाय के एवज में साथ सोहर गाने के लिए हामी भरी। वो सोहर जो पूर्वांचल में बच्चे के जन्म के समय गाया जानेवाला नेशनल एंथम है। गाना उन्हें पूरा याद नहीं था और लाइन रिपीट करने के लिए वो मुझे डांट रहीं थीं। आवाज, सुर, लय में देसी भोजपुरी से थोड़ी ही कम बाकी रह गई हूं मैं। सुबह सुबह नानी के साथ ये वाला सत्संग गजब रहा। (PS गाने, शब्द, आवाज और गलतियों पर ध्यान न दें, भावनाओं को समझें 🫣) #Bhojpuri #Kashi #BabliKiNani
Upmita Vajpai22,126 views • 1 year ago
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