
Shaurya Vaishnav
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अगर नशा, हुड़दंग और अव्यवस्था ही उत्सव है - तो फिर शांति, मर्यादा और पवित्र आनंद क्या है? If chaos, intoxication, and noise define celebration - then what happened to purity, balance, and inner joy? महालक्ष्मी और विष्णु का यह संवाद हमें स्पष्ट करता है कि उत्सव का अर्थ मांस, मदिरा और उन्माद नहीं है। उत्सव वह है जो ऋतुओं के आगमन का स्वागत करे, जो समाज में संतुलन लाए और जीवन को उल्लास से भर दे। जो नगर का जीवन अस्त-व्यस्त कर दे और विवेक हर ले, वह उत्सव नहीं - वह असुर संस्कृति का असभ्य प्रदर्शन है। कभी हमारे पर्व आत्मा को शांति देते थे, परिवारों को जोड़ते थे और मन को हल्का करते थे। आज अगर वही पर्व शोर, नशे और अराजकता में बदल जाएँ, तो देवी का यह प्रश्न हमें अपनी दिशा पर सोचने को मजबूर करता है। आइए, उत्सव को फिर से उसकी पवित्रता लौटाएँ - जहाँ आनंद हो, पर मर्यादा के साथ; उल्लास हो, पर शांति के साथ...
Shaurya Vaishnav43,992 Aufrufe • vor 8 Monaten

Shri Krishna says - no action ever escapes its result; karma never misses... श्रीकृष्ण कहते हैं - कर्म से कोई नहीं बचता, न समय, न परिस्थिति... जिस नीयत से तुम कर्म करते हो, उसी नीयत के अनुसार तुम्हें फल मिलता है। कर्म का यह विधान अटल है - यह न पक्षपात करता है, न भूलता है। कोई भी कर्म, छोटा या बड़ा, कभी नष्ट नहीं होता; हर कर्म अपना परिणाम लेकर ही आता है। इसीलिए कई बार जीवन में बिना कारण सुख या दुःख मिलता दिखता है - असल में वह किसी पुराने कर्म की वापसी होती है। समय लग सकता है, पर न्याय कभी चूकता नहीं। इसलिए हे अर्जुन—कर्म शुद्ध रखो, नीयत साफ रखो। फल अपने समय पर स्वयं चलकर आएगा। GOOD MORNING X FAM ❤️ 🌻 🌅
Shaurya Vaishnav19,419 Aufrufe • vor 8 Monaten

गीता कहती है - पतन अचानक नहीं, धीरे-धीरे शुरू होता है... असंयमित दृष्टि से विचार जन्म लेता है, विचार से आदत बनती है, आदत विवेक को खा जाती है - और धर्म मौन हो जाता है। कामना की अग्नि पहले मन जलाती है, फिर चरित्र - और अंत में आत्मा को अकेला छोड़ देती है। आज ही मन और दृष्टि पर विजय पाएं - गीता का ज्ञान जीवन में उतारें... Book Mark करें और शेयर करना ना भूलें... Good morning x fam ❤️ Can you reply "jai shree Krishna"? 🙌
Shaurya Vaishnav13,142 Aufrufe • vor 9 Monaten
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