
Vikas Kumar Jatav
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An Ambedkarite, Political Analyst, Bahujan Thinker, A lawyer. LLB, B.Ed & BTC https://t.co/3tkoGruHhi M.A (Education) M.A (Political Science) NET Qualified (Commerce)
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"चमार हमारे इंहा कुर्सियों पर नही बैठ सकते, यह हमारे गाँव की मर्यादा है" मामला मध्य प्रदेश के कटनी जिले का बताया जा रहा है। एक महिला के घर के बाहर दुकान पर समोसा बेचा जा रहा था। रक्षा बंधन कर मौके पर गांव में आये धनीराम चौधरी भी समोसा खाने चला गया। वँहा ग्राहकों के लिए रखी कुर्सी पर वो बैठ गया। घर से महिला निकलती है, कहती है कि चमार होकर कुर्सी पर न बैठो। हमारे गाँवो की मर्यादा भंग हो जाएगी।। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav60,470 views • 1 month ago

"अनुराग शर्मा" सादाअत अस्पताल टोंक में सीनियर मेडिकल ऑफिसर है। बैड पर से उठे, और एक महिला के सामने पेशाब कर दिया और फिर गिर गए। शराब का इतना नशा की उठ भी नही पा रहे। फिर मरीजों ने ही उन्हें उठाया। परिवार का कहना है कि दिमागी बुखार से पीड़ित होने की वजह से दो दिन से छुट्टी पर थे व इलाज के लिए भर्ती करवाया गया था। खैर, अच्छा हुआ कि ऑपरेशन वग़ैरह नही कर रहे थे नही तो कैंची छोड़ आते। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav149,398 views • 9 months ago

"पैसा" दलित का। "घर" दलित का। "खाट" दलित की. दर्द; "द्विवेदी को" "FIR"; "पुलिस की" यह अजीब बात है। बन्दा अपने पैसे से बनाये अपने घर के बाहर खाट पर बैठा है। एक फ्रिंज एलिमेंट कमेंद्र द्विवेदी गाड़ी से आता है और गालिया देना शुरू कर देता है यह कहकर की; "पंडित" को देखकर खाट से उठकर सम्मान क्यों नही किया। कानपुर देहात के नहोली गाँव की घटना है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। अब कमेंद्र के लोग फर्जी एससी/एसटी एक्ट का रोना रोएंगे। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav33,462 views • 2 months ago

कोई अजित भारती है। बेचारा अपने पूर्वजो के कुकर्मों पर पर्दा डालने का कार्य कर रहा है। करने दो। क्या फर्क पड़ता है।।क्यो उस बेचारे को टारगेट कर रहे हो। वैसे अवर्ण जातिया अछूत व आदिवासी तो छोड़ो पहले यह देख लो कि शुद्र जाति में पैदा होने के कारण शिवाजी महाराज के साथ कैसा बर्ताव किया गया।। यह क्लिप 1952 में मराठी मे बनी फिल्म "छत्रपति शिवाजी" से ली गई है।। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav39,573 views • 3 months ago

ब्राह्मण पंडित ने "छत्रपति शिवाजी" को शुद्र होने की वजह से मन्दिर में जाने नही दिया था। यह क्लिप 1952 में मराठी मे बनी फिल्म "छत्रपति शिवाजी" से ली गई है।। छत्रपति शिवाजी का नाम आदर से लिया जाता है और एक तरफ उन्हें मन्दिर में जाने नही दिया गया। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav74,126 views • 8 months ago

ऋतु प्रजापति बात तो ठीक कह रही है कि; "जिनके बाप दादाओं को 1950 से पहले खाट के पास खड़ा होने तक नही दिया जाता था वो भी आज पुछते है कि बाबा साहब ने हमारे लिए करा क्या है? " एससी में जितने अधिकतर सरकारी नौकरी में चाहे आईएएस/आईपीएस/पीसीएस बन गए हो उनके दादा परदादा तक किसी सामान्य वर्ग के व्यक्ति की खाट के पास तक खड़े नही हो सकते थे। बल्कि मान्यवर कांशीराम साहब व बहनजी से पहले उत्तर भारत के अधिकतर जिलों में एससी के लिए डीएम ऐसा राजा होता था जिससे मिलना मुश्किल है। बहनजी ने उन्ही डीएम को दलित बस्तियों में घुमवा दिया जो हाथ जोड़कर पुछते थे कि कोई दिक्कत तो नही है। यह परम सत्य है। इसे स्वीकार करना चाहिए। विकास कुमार जाटव Mayawati Akash Anand
Vikas Kumar Jatav62,552 views • 11 months ago

पारसी समुदाय ईरान से नावों में आया था। भारत में उन्हें आश्रय मिला उन्होंने एक दिन बाबा साहब के कपड़े बिस्तर पारसी धर्मशाला से बाहर कर दिया। इस क्लिप में देख सकते हांज। बाबा साहब डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर को पारसी धर्मशाला से इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि वो अछूत जाति से थे। जबकि मराठा राजा सैयाजी गायकवाड़ ने उन्हें उस समय के पीसीएस रैंक के बराबर पद पर नियुक्त किया। वैसे पारसी द्वारा किये इस कार्य के कारण ही बाबा साहब ने नौकरी छोड़कर देश के 18% अछूत समाज को उनके मानव अधिकार दिलवाने के प्रण उसी दिन लिया। एक तरह से यह घटना देश के 27 करोड़ दलितो के लिए वरदान बन गयी। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav36,644 views • 8 months ago

"अंजलीं शर्मा" भी अब प्रसिद्ध हो गयी है। बिहार में कार्यक्रम का हिस्सा बनी। ब्राह्मणवाद, UGC गाइडलाइंस, व ब्रह्मा के मुँह हाथ से उत्तपत्ति, पोंगा वग़ैरह जैसे अन्य विषय समझाती हुई।। अंजलीं शर्मा याद है न? जिसे नीचे गिराकर रुचि तिवारी ड्रामा कर रही थी और कुछ थाने में उनकी माँ च... देंगे जैसी गालियां सरेआम दे रहे थे। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav31,905 views • 7 months ago

अविमुक्तेश्वरानंद एक क्लिप में कह रहे थे कि गौतम बुद्ध की तश्वीर कार्यालयों में क्यो है? क्या यह धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध नही है। इसका उत्तर यह है। अमरीका में भारत से गए बौद्ध भिक्षु 3000 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे है, उनका भव्य स्वागत ईसाई अमरीकन कर रहे है। लम्बी लाइन लगाकर भव्य स्वागत उनका हो रहा है। कारण? वो लोग "शांति, करुणा व अहिंसा" का स्लोगन लेकर यात्रा कर रहे है। जो कि मानव के मूल व्यवहार से जुड़ा हुआ है। दुनिया मे गौतम बुद्ध का आशय धर्म नही बल्कि; "शांति, अहिंसा, करुणा" से है। में काफी मुस्लिम के घर तक में बौद्ध तश्वीर देखी है। क्योंकि यह तीनों तत्व मौलिक व्यवहार से जुड़े हुए है। अविमुक्तेश्वरानंद चाहे तो ऐसी यात्रा अमरीका मे कर सकते है। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav27,987 views • 8 months ago

"Power of Baba Sahab" अनुसुचित जाति देश मे 17% व उत्तर भारत मे 22% तक है। लेकिन वोटर्न पैटर्न की देखे तो उनके बूथों पर वोटिंग 70% से 90% तक रहती है जबकि 2% ब्राह्मण व अन्य सामान्य वर्ग जिनकी कुल आबादी 10% से कम है, उनके बूथों पर वोटिंग 40% तक रहती है जिसमे एससी 22% होकर भी वोटिंग पैटर्न में 32% तक दिखता है। समझे। इसलिए किसी राजनैतिक पार्टी की हिम्मत नही की वो बाबा साहब का अपमान कर दे। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav26,659 views • 9 months ago

मुट्ठी भर पठानों को देखा है। मुट्ठी भर मुगलो को देखा है। थोड़े बहुत संख्या वाले।अंग्रेजो को देखा है। उनके जाने के बाद 15% वाले ऊँची जातियो को देखा है। इनके ऊपर अत्याचार नही होता है। न ही इनकीं महिलाओ का बलात्कार होता है। क्योंकि यह "हुक्मरान" रहे है।। अगर हम भी अन्याय अत्याचार खत्म करना है या इसे खत्म करने की चाहत है तो हम बहुजन समाज को भी; "हुक्मरान" बनना पड़ेगा। मान्यवर साहब कांशीराम को नमन। जय भीम। जय भारत। जय बसपा।
Vikas Kumar Jatav20,427 views • 7 months ago

जिंदा अम्बेडकर से , मरे हुए अम्बेडकर ज्यादा खतरनाक। ओशो दर्शन (समर्थक द्वारा)
Vikas Kumar Jatav17,843 views • 6 months ago

न किसी ने अपने आप को "जगतगुरु" कहा। न किसी ने अपने आप को अन्य से श्रेष्ठ कहा। लेकिन पूरा अमरीका इनके सम्मान में फूल लेकर अभिवादन की मुद्रा में स्वागत करता रहा। सम्मान फर्जी पदवी लगाने से नही बल्कि अर्जित किया जाता है। Walk for Peace के अंतर्गत बौद्ध भिक्षुओं की लंबी यात्रा का समापन वाशिंगटन में हो गया। ।उद्देश्य "शांति" था। इस शांति के संदेश को बौद्ध भिक्षु फैला रहे थे। जो गौतम बुद्ध का संदेश है। जब जब गौतम बुद्ध का संदेश की बात होगी तब तब भारत भूमि के प्रति लोगो का सम्मान बढेगा। ओशो ने सही कहा है कि भारत को केवल गौतम बुद्ध की वजह से सम्मान की नजरों से देखा जाता है।। नमो बुद्धाये। जय भीम। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav19,646 views • 8 months ago