यह भूतिया जगह कैमरे में कैद हो गई वरना... कोई यकीन ही नहीं करता..........😱............. How did the ghost pull these children under the ground.....show more

ROSHAN MARMAT
1,097,612 просмотров • 1 месяц назад
यह काला लंगूर इतना गुस्से में क्यों हो गया... 🙄 अच्छा हुआ मैं हिंदू हूं वरना मुझे इस भीड़ में जाना नहीं हमारा मंदिर ही ठीक है सभी लोग आराम से जाते हैं मंदिर में कोई किसी से गुस्सा नहीं करता सब भगवान के बेटे/बेटी हैं।show more

Vaishali Mishra
65,552 просмотров • 9 месяцев назад
रात के अंधेरे में कैमरे में कुछ ऐसा कैद... हुआ... जिसे देखकर घर में खाना बना रही औरत बेहोश हो गई। वीडियो में बाहर एक अजीब-सी परछाईं दिखाई देती है। पहले तो लगता है कोई इंसान है... लेकिन अगले ही पल ऐसा दिखता है मानो कोई रहस्यमयी आकृति खड़ी हो। वीडियो आखिर तक देखिए और सिर्फ एक शब्द में बताइए— "भ्रम" या "भूत"? 👀show more

Shivgopal
7,235,976 просмотров • 2 месяцев назад
बिन बुलाया मेहमान जब खाने की खुशबू से सांप... भी खुद को रोक न पाए... पर शुक्र है कि ढक्कन सही समय पर बंद हो गया। किस्मत अच्छी थी कि कैमरा चल रहा था, वरना इस 'नागिन' वाली रेसिपी पर कोई यकीन ही नहीं करता।🐍🍲😂show more

Shagufta khan
359,654 просмотров • 7 месяцев назад
#सरयू तट पर अद्भुत दृश्य श्री राम की नगरी... अयोध्या सरयू नदी पर #भक्त #हनुमानजी अयोध्या जी की पावन सरयू नदी के तट पर कैमरे में कैद हुआ एक बेहद अनोखा दृश्य— एक बंदर जल में उतरकर आचमन करता और फिर श्रद्धा भाव से सरयू नदी का जल अपने माथे पर लगाता पूजा करता दिखाई दे रहा है... आस्था की कोई भाषा नहीं होती… भाव ही सबसे बड़ी भक्ति है। यह दृश्य देखकर मन स्वतः कह उठता है।।। जय सियाराम राम...show more

Janardan Mishra
86,632 просмотров • 9 дней назад
मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में आग लग गई ,... 2 लोग मारे गए हैं। आग आईसीयू वार्ड में लगी थी। मैने पहले ही बोला था कोई एक भी हॉस्पिटल, होटल, फैक्ट्री, ऑफिस नहीं है जो फायर के मानक पूरा करता हो। मुआवजा देकर पल्ला झाड़ लो। 📍 बिहारshow more

खुचरेंप
31,941 просмотров • 3 месяцев назад
नानी के घर आई थी 2 साल की मासूम…... पानी से भरे टब में डूबने से चली गई जान। लखनऊ में एक महिला अपनी छोटी बच्ची को लेकर नानी के घर आई थी। शुक्रवार रात घर में पानी से भरा टब था। मासूम बच्ची उसी टब में गिर गई और उस वक्त आसपास कोई नहीं था। जब घरवालों ने ढूंढना शुरू किया तो बच्ची टब में मिली। यह देखते ही मां बेहोश हो गई, चीख-पुकार मच गई। लोग इकट्ठा हो गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नानी के घर खुशियां लेकर आई नन्ही अब हमेशा के लिए चली गई। परिवार की एक छोटी सी गलती ने मासूम बच्ची की जान ले ली।show more

Mandeep RajBhar
92,444 просмотров • 16 дней назад
दुर्घटना या साज़िश ? यह है छत्तीसगढ़ में कथित... सुशासन वाले के राज़ में रायपुर शहर में क़ानून व्यवस्था? सुबह लगभग 6:30 निवास के बाहर खड़े मेरे दोनों चौपहिया वाहनों को एक अज्ञात वाहन भयंकर टक्कर मार कर फ़रार हो गया!सुबह उस समय अगर मैं बाहर होता तो शायद बचता नहीं!टक्कर इतनी ज़ोरदार थी की महेंद्रा की गाड़ी तो सड़क के बीच में पहुँच गई! सवाल यह है कि एक साथ मेरे दोनों वाहनों में ही टक्कर कैसे होगी? फ़िलहाल मैं कई बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार RTI लगा रहा हूँ!कहीं कोई इससे संबंधित व्यक्ति तो नहीं? ड्रिंक एंड ड्राइव का मसला होता तो वह देर रात्रि घटित होता,सुबह सबेरे नहीं… सड़क किनारे खड़े वाहनों में कोई टक्कर मार कर फ़रार हो जाये यह साज़िश भी हो सकता है! बरसों पहले भी एक बार मेरे वाहन में घर के बाहर तोड़फोड़ हो चुकी है! मैंने सुबह ही इस मामले में जुर्म दर्ज किए जाने हेतु राजधानी रायपुर के कोतवाली थाने में आवेदन दे दिया है! @RaipurPoliceCGshow more

Kunal Shukla
116,887 просмотров • 2 лет назад
🚨 अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी की चलती मेट्रो ट्रेन... में एक महिला ने ऐसी हरकत कर दी कि वहां मौजूद लोग भागने लगे, जबकि एक शख्स पूरा वीडियो रिकॉर्ड करता रहा। लेकिन असली सवाल ये है कि जब इसी तरह की कोई घटना भारत में होती है, तो सोशल मीडिया पर तुरंत शुरू हो जाता है—“India is not for beginners”, “Only in India” और न जाने क्या-क्या। सच तो यह है कि अजीब, गंदी और शर्मनाक हरकतें किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। चाहे देश अमेरिका जैसा विकसित हो, भारत जैसा विकासशील हो या कोई गरीब देश—ऐसे लोग और ऐसी घटनाएं हर जगह मिल जाएंगी। फिर हर बार भारत को ही दुनिया के सामने सबसे ज्यादा नीचे दिखाने की कोशिश क्यों की जाती है? गलती गलत है, चाहे न्यूयॉर्क की मेट्रो में हो या दिल्ली की मेट्रो में। लेकिन मापदंड दोनों जगह अलग-अलग क्यों हो जाते हैं? #NewYork #Metro #India #DoubleStandards #OnlyInIndia #ViralVideoshow more

Vikash Patel
4,005,658 просмотров • 5 дней назад
यह तस्वीर बहुत कुछ कह जाती है… 😥 ट्रेन... के सफर में जब सीट नहीं मिली, तो भाई ने फर्श को ही अपना सहारा बना लिया। भूख तो हर इंसान को लगती है, लेकिन कुछ लोगों के दिल इतने छोटे हो जाते हैं कि थोड़ी सी जगह भी नहीं दे पाते। सीट से कोई बड़ा नहीं होता, इंसानियत से होता है। काश किसी ने कहा होता “भाई, यहाँ बैठ जाओ।” सफर आसान नहीं था, पर दिल और भी सख्त दिखे। इंसानियत जिंदा रहे, यही दुआ है।show more

Renu Yadav
11,057 просмотров • 5 месяцев назад
रिपोर्टर ने पत्नी से पूछा:- आप पति के साथ... रहेंगी या प्रेमी के साथ? पत्नी रोते हुए बोली:- मैं अपने पति के साथ रहूंगी। यह सुनते ही पति का दर्द फूट पड़ा। उसने कहा, हम इसे नहीं रखेंगे, जरूरत पड़ी तो जहर खा लेंगे। मैं इसके भरोसे चार साल घर छोड़कर चला गया था। मुझे यकीन था मेरी पत्नी ऐसी नहीं हो सकती। रिपोर्टर ने पूछा, आप रो क्यों रही हैं, क्या दिखाना चाहती हैं? कैमरे के सामने आंसू थे, टूटता भरोसा था और एक रिश्ता था, जो सवालों के कटघरे में खड़ा था।show more

Renu Yadav
85,018 просмотров • 8 месяцев назад
सिर्फ़ दो ही संभावनाएँ हैं। या तो रक्षा मंत्री... Rajnath Singh ने जब संसद को संबोधित किया तो उनकों यह जानकारी ही नहीं थी कि छह सैनिक शहीद हो चुके थे। यदि ऐसा है, तो यह उस मंत्री पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, जिसे उसी मंत्रालय के मामलों की जानकारी नहीं है जिसका वह नेतृत्व कर रहे हैं। या फिर उन्हें सच्चाई मालूम थी और इसके बावजूद उन्होंने संसद को गुमराह करना चुना। यह उससे भी अधिक गंभीर है, क्योंकि इससे यह सिद्ध होता है कि यह सरकार लोकतंत्र के मंदिर में, शपथ के साथ, देश से झूठ बोलती है। जो भी सच हो, कुछ तथ्य नहीं बदलते - हमारे छह वीर जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। लेकिन उनके बलिदान को छिपाया गया। उन्हें वह सम्मान और मान्यता नहीं दी गई जिसके वे हकदार थे। और उनके परिवारों से वह पारदर्शिता भी छीन ली गई जिसकी वे अपेक्षा रखते थे। यह हमारे सैनिकों का अपमान है, और कोई भी सच्चा देशभक्त इस पर मौन या संतुष्ट नहीं रह सकता।show more

Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ
207,574 просмотров • 2 месяцев назад
कहाँ गया वो दौर जब हिन्दी फिल्में अच्छी बना... करती थीं? अनन्या पांडे का भरतनाट्यम की मिमिक्री करता वीडियो देखा। यह बॉलीवुड वालों ने भारतीय दर्शकों को समझ क्या रखा है?भारतीय नृत्य कलाओं से छेड़छाड़ क्यों? हर कला में एक शिल्प होता है, एक पवित्रता होती है। क्या दर्शक भी इन्हीं की तरह मूर्ख हैं? वैसे ही अब फिल्मों में डांस कोरियोग्राफ़ी की ऐसी की तैसी कर दी गई है। आता-जाता कुछ नहीं, सभी बस हाथ आजमा रहे हैं। भारतीय नृत्य कला कोई भी हो, यदि उसे कर रहे हैं तो भाव से आएँ, कुछ सीख कर आएँ। भरतनाट्यम सिर्फ़ उसकी वेशभूषा धारण करना नहीं है। जिस प्रकार अनन्या पांडे मटक रही हैं उसे देखकर घिन आ रही है।कितना भद्दा है सब कुछ। लेकिन इसमें अनन्या पांडे से बड़ा दोष कोरियोग्राफ़र का है और उससे बड़ा फिल्म निर्देशक का। जिन्हें इस में सब कुछ आपत्तिजनक नहीं लगा। फिर शिकायत करते हैं कि आजकल फिल्में हिट नहीं हो रहीं। कोई देखता नहीं।show more

Vatsala Singh
46,434 просмотров • 3 месяцев назад
🚨 सुनकर आप दंग रह जाओगे, मेरे घर से... 12 किलोमीटर दूर चीन और भारत के बॉर्डर में बनाया हुआ यह ( एन एच पी सी ) डैम 2000 मेगावाट का है। यह डैम हमारे भारत के सबसे बड़े डैम है इससे बड़ा डैम भारत के किसी भी राज्य में नहीं है। हम नॉर्थ-ईस्ट के लोग खास करके असम के लोग चीन बॉर्डर में है, चीन के साथ हमारे युद्ध हो गई तो सबसे पहले हमारे सीने में बमबारी बरसाया जाएगा। दूसरी बात यह डैम अकास्मिक गड़बड़ हो गया कहीं पर पहाड़ टूट गया तो जहां हम रहते हैं वहां कम से कम 25 से लेकर 30 फीट ऊंचाई तक पानी दौड़ेगी, इसका मतलब हम लोग एक ही झटके में चलें जाएंगे। एक बार सोचिए असम के लोग खास करके एन एच पी सी डैम के आसपास के लोग हर एक सांस को अंतिम सांस सोचकर जीवन निर्वाह कर रहे हैं। नोट - शायद आप लोगों को आज पता चल चुका होगा राहुल छेत्री कैसे जगह से बिलॉन्ग करता है । अपने राय जरुर देना क्या आप ऐसी जगह में रहना चाहोगे ??show more

Rahul chetry
184,695 просмотров • 3 месяцев назад
कैमरे में कैद हुआ दिल को छू लेने वाला... पल, जिसमें एक पिता के बिना स्वार्थ के प्यार की गहराई ने इंटरनेट पर लोगों को इमोशनल कर दिया है। जब एक पिता अपनी बेटी को ट्रेन तक छोड़ने जाते हैं, तो उनका प्यार और चिंता शब्दों में नहीं, बल्कि उन तैयारियों में झलकती है. भले ही बेटी कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, पिता को हमेशा लगता है कि रास्ते में उसे भूख लगेगी। वह घर का बना नाश्ता, फल या रास्ते के लिए उसकी पसंद की कोई चीज़ पैक करना कभी नहीं भूलते। पैसे देना: "बेटा, ये अपने पास रख लो, काम आएंगे।" बेटी के मना करने के बावजूद, ज़बरदस्ती हाथ में या बैग के कोने में पैसे रख देना पिता का अपना तरीका है यह कहने का कि "मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।"show more

Kishan kumar
128,213 просмотров • 6 месяцев назад
नर्मदा किनारे बड़ा दृश्य था, मंत्री जी पसीना बहा... रहे थे, फावड़ा चला रहे थे, जैसे सदियों की गंदगी अकेले ही साफ कर देंगे। उनके पीछे जेसीबी मशीन खड़ी थी शांत, सक्षम और थोड़ी संकोची क्योंकि असली काम करने वालों को अक्सर फोटो में जगह कम मिलती है। जेसीबी मशीन सोच रही होगी “मुझे बुलाया क्यों गया? अगर सफाई करनी है तो मैं आधे घंटे में कर दूं, अगर फोटो खिंचवानी है तो मैं क्या करूं?” लेकिन मशीनों को यह समझ नहीं आता कि असली काम कई बार मिट्टी हटाना नहीं, छवि बनाना होता है। मंत्री जी का पसीना सच्चा हो सकता है, नीयत भी अच्छी हो सकती है, पर सवाल यह है कि जब जेसीबी मशीन मौजूद है, तो फावड़े की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब शायद काम में नहीं, कैमरे में छिपा है। यह वही देश है जहां काम करने से ज्यादा जरूरी है, काम करते हुए दिखना। और नर्मदा किनारे आज यही सबसे साफ दिख रहा था।show more

Anurag Dwary
12,563 просмотров • 5 месяцев назад
सच तो यह है..कि ओडिशा सरकार के पास कोई... सबूत ही नहीं है, कोई दस्तावेज ही नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि वेदांता को ज़मीन देने के लिए ग्रामसभा की बैठक कभी बुलाई भी गई थी....ना ही अभी तक ‘स्टेज-2’ की वन मंजूरी मिली है और ना ही ‘पर्यावरण मंजूरी’ मिली है इसके बावजूद खनन के के लिए रोड का काम शुरू है मानो मोदी जी आदिवासियों की ज़मीन बेचने के लिए तैयार बैठे हों. रायगड़ा और कालाहांडी जिलों में स्थित सिजीमली पर्वत का यह क्षेत्र, जहाँ वेदांता कंपनी को बॉक्साइट खनन का ठेका दिया गया है, संविधान की 5वीं अनुसूची से शासित होता है. यह पूरा क्षेत्र संसद से पारित PESA कानून के दायरे में है. जिसके अनुसार बिना ग्रामसभा की पूर्व अनुमति के किसी भी हालत में खनन का ठेका किसी भी कंपनी को नहीं दिया जा सकता है. स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि 2023 में पेश किए गए ग्रामसभाओं के दस्तावेज फ़र्ज़ी थे और प्रशासन द्वारा ग़ैर-कानूनी तरीके से तैयार किए गए थे. बहुत से लोगों के हस्ताक्षर फ़र्ज़ी थे. पड़ताल से पता चला कि ग्रामसभा की बैठक कभी हुई ही नहीं. इसलिए सितंबर 2024 में ग्रामीणों ने अपनी स्वतंत्र ग्राम सभाएं आयोजित कीं और वेदांता के पक्ष में दिए गए खनन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया. और अब सरकार खुलेआम हिंसा पर उतारू है!show more

Ajay Kumar Lallu
10,109 просмотров • 4 месяцев назад
गाजा में खाना बांटने के लिए एक केंद्र शुरू... किया गया। गाजा की आम पीड़ित जनता वहां पर खाना लेने के लिए इकट्ठा हुई। इजराइल की ओर से वहां पर गोली चलाई गई। इस गोलीबारी में 33 फिलिस्तीन मारे गए। कुछ मीडिया में यह संख्या 37 बताई जा रही है। आप सोचिए कि आप किसी जगह पर अपना पेट भरने के लिए रोटी मांगने पहुंचे हैं और आपको गोली मार दी जाए। दुनिया के किसी हिस्से में कोई देश आम जनता के साथ ऐसा व्यवहार करे, इससे पहले मैंने यह कभी नहीं सुना। गाजा में इस समय अकाल, भुखमरी, मौत और नरसंहार का नंगा नाच चल रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख से लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल समीर तमाम वैश्विक संस्थाओं ने इस कृत्य की निंदा की है। बेशक आप अपने दुश्मन को मारिए, लेकिन यह ऐसा शैतानी कृत्य है इसके बारे में कोई इंसान कल्पना तक नहीं कर सकता। लेकिन इजरायल ऐसा राक्षसी मुल्क है जो धड़ल्ले से काम करता है और अमेरिका उसका सहयोग करता है। जब तक यह दोनों देश धरती पर मौजूद हैं इंसानियत का कत्ल होता रहेगा। शांति के लिए असली खतरा अमेरिका और इजरायल हैं।show more

Krishna Kant
62,298 просмотров • 1 год назад
अगर तुमने बंदरों को संभोग करते देखा हो तो... देखा होगा कि संभोग के बाद वे तुरंत एक—दूसरे से अलग हो जाते हैं। उनके चेहरों को देखो, उनमें प्रसन्नता जरा भी नहीं है, जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं। जब ऊर्जा धक्के देती है, जब वह अतिशय होती है तो वे उसे बस फेंक देते हैं। साधारण काम—कृत्य ऐसा ही है। लेकिन नीतिवादी ठीक उलटी बात कहते आ रहे हैं। वे कहते हैं : भोग मत करो, सुख मत लो। वे कहते हैं. यह तो पशुओं जैसा कृत्य है। लेकिन यह बात गलत है। पशु कभी सुख नहीं लेते हैं, केवल मनुष्य सुख ले सकता है। और तुम जितना गहरा सुख लोगे उतनी ही श्रेष्ठु मनुष्यता का उदय होगा। और अगर तुम्हारा संभोग ध्यानपूर्ण हो जाए, समाधि पूर्ण हो जाए तो परम उपलब्ध हो जाए। लेकिन तंत्र की बात स्मरण रखो. यह घाटी— अनुभव है। यह शिखर—अनुभव नहीं है, घाटी— अनुभव है। पश्चिम में अब्राहम मैसलो ने शिखर—अनुभव की बहुत बात की है। तुम उत्तेजना के शिखर पर पहुंचकर नीचे गिरते हो। यही कारण है कि प्रत्येक संभोग के बाद तुम दीन—हीन अनुभव करते हो। और यह स्वाभाविक है, तुम शिखर से नीचे गिरते हो। लेकिन तांत्रिक संभोग के बाद तुम्हें यह गिरावट कभी अनुभव नहीं होगी। उसमें तुम और नीचे नहीं गिर सकते, क्योंकि तुम घाटी में ही हो। वरन तुम ऊपर उठते हुए अनुभव करोगे। तांत्रिक संभोग से लौटने पर तुम गिरते नहीं, ऊपर उठते हो। तुम ऊर्जा से आपूरित होकर ज्यादा शक्तिवान, ज्यादा जीवंत और तेजोमय हो जाते हो। और वह आनंद घंटों बना रह सकता है, दिनों बना रह सकता है। यह इस पर निर्भर है कि तुम कितनी गहराई से उसमें उतरे थे। तांत्रिक संभोग में उतरने पर देर— अबेर तुम्हें पता चलेगा कि स्खलन ऊर्जा का अपव्यय है, उसकी कोई जरूरत नहीं है। अगर बच्चा नहीं पैदा करना है तो स्खलन बिलकुल जरूरी नहीं है। और इस तांत्रिक काम—अनुभव के बाद तुम पूरे दिन विश्राम अनुभव करोगे। एक तांत्रिक काम—अनुभव के बाद तुम कई दिनों तक विश्रांत, शात, अहिंसक, अक्रोधी और सुखी रह सकते हो। और इस तरह का व्यक्ति कभी दूसरों के लिए उपद्रव नहीं खडा करेगा, मुसीबत नहीं पैदा करेगा। हो सकेगा तो वह दूसरों को सुखी बनाने में सहयोग देगा, अन्यथा वह दूसरों को दुख तो कभी नहीं देगा। केवल तंत्र नए मनुष्य का निर्माण कर सकता है। और यह नया मनुष्य—समयातीत और निरहंकार को, अस्तित्व के साथ गहन अद्वैत को जानने वाला मनुष्य—अवश्य विकासमान होगा। एक नया आयाम खुल गया है। वह बहुत दूर नहीं है, वह दिन बहुत दूर नहीं है, जब काम या सेक्स विलीन हो जाएगा। जब काम अनजाने विदा हो जाता है, जब एक दिन अचानक तुम्हें पता चलता है कि काम बिलकुल विदा हो गया, उसकी कोई वासना न रही, तो ब्रह्मचर्य का जन्म होता है। लेकिन यह कठिन है। यह कठिन मालूम पड़ता है, क्योंकि तुम्हें बहुत गलत शिक्षा दी गई है। और तुम इससे भयभीत हो, क्योंकि तुम्हारा मन संस्कारित है। हम दो चीजों से बहुत डरते हैं, हम कामवासना और मृत्यु से बहुत डरते हैं। और वे दोनों ही बुनियादी हैं। धर्म का सच्चा साधक दोनों में प्रवेश करेगा। वह काम को जानने के लिए काम का अनुभव लेगा। क्योंकि काम को जानना जीवन को जानना है। और वह मृत्यु को भी जानना चाहेगा। क्योंकि जब तक तुम मृत्यु को नहीं जानते हो तब तक तुम शाश्वत जीवन को भी नहीं जान सकते। अगर तुम काम में उसके मर्म तक प्रवेश कर सको तो तुम जीवन को जान लोगे। और वैसे ही अगर तुम स्वेच्छा से मृत्यु में उसके केंद्र तक प्रवेश कर जाओ तो तुम अमृत को उपलब्ध हो जाओगे। तब तुम अमर हो, क्योंकि मृत्यु तो केवल परिधि पर घटित होती है। काम और मृत्यु, दोनों एक सच्चे साधक के लिए बुनियादी हैं। लेकिन सामान्य मनुष्यता के लिए दोनों घबड़ाने वाले है। कोई उनकी चर्चा नहीं करता है। और दोनों बुनियादी हैं और दोनों गहन रूप से एक—दूसरे से संबंधित हैं। वे इतने जुड़े हुए हैं कि तुम कामवासना में प्रवेश करो और तुरंत तुम एक प्रकार की मृत्यु में प्रवेश करने लगते हो। क्योंकि काम—अनुभव में तुम मरते हो, तुम्हारा अहंकार विलीन होता है। काम— अनुभव में समय विलीन हो जाता है, तुम्हारा व्यक्तित्व विदा हो जाता है। तब तुम ही मरने लगते हो। संभोग सूक्ष्म मृत्यु है। और अगर तुम्हें बोध हो जाए कि काम सूक्ष्म मृत्यु है तो मृत्यु तुम्हारे लिए बड़ी काम—समाधि का अनुभव बन जाएगी। कोई सुकरात मृत्यु में निर्भय प्रवेश करता है। बल्कि वह मृत्यु को जानने के लिए उत्साह से भरा है, उल्लास और उत्तेजना से भरा है। उसके हृदय में मृत्यु के लिए गहन स्वागत का भाव है। क्यों? क्योंकि अगर तुम संभोग की छोटी मृत्यु को जानते हो, अगर तुमने उससे प्राप्त होने वाला आनंद जाना है, तो तुम बड़ी मृत्यु को भी जानना चाहोगे। तुम उसके पीछे छिपे आनंद को भी भोगना चाहोगे। #तृप्तshow more

तृप्त ...🖤
813,018 просмотров • 1 год назад
IIT कानपुर में प्रोफेसर रह चुके और पर्यावरण कार्यकर्ता... GD अग्रवाल ने गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सरकार की लापरवाही के विरोध में 111 दिन तक आमरण अनशन किया था। 111 दिन अनशन पर रहने के बाद ही 2018 में उनकी मृत्यु हो गई थी न सरकार ने उनकी मांग को माना न ही मीडिया ने उनके प्रदर्शन को कवर किया था। अब इसी राह पर सोनम वांगचुक चल रहे हैं सरकार इनकी भी मांग को नहीं मानने वाली है और सोनम को आमरण अनशन छोड़ देना चाहिए— इनकी जान एक इस्तीफे से बढ़कर है। और धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा लेकर भी क्या ही हासिल होगा— उनकी जगह कोई भी मिनिस्टर आए सिस्टम ऐसे ही चलता रहेगा। समस्या का हल सिर्फ प्रधान जी का इस्तीफा नहीं है।show more

Dr. Sheetal yadav
77,352 просмотров • 1 месяц назад