लखनऊ में जमीन पर दिखीं असली परिया..🧚♀️🦋 मॉल में... अचानक चमकते LED पंखों वाली ये खूबसूरत परियाँ घूम रही थी.. लोग इन्हें देखकर बिल्कुल चौंक से गये..😍 अगर हम लोग बचपन में होते तो इन्हें असली परी ही मान लेते..☺️show more

Sanjay Gupta 🇮🇳
16,710 Aufrufe • vor 27 Tagen
आज थाना दिवस पे एक थाना से दूसरे पर... जाते समय देखा ये बच्चियां अपने स्कूल से घर पैदल जा रही थीं, बाहर बारिश हो रही थी। हम लोग रुके और इन्हें इनके गांव/घर पहुंचाया। रास्ते में इनसे #ऑपरेशनजागृति के बारे में बात की। अलग ही खुशी थी इनकी भी और हमारी भी। अपने स्कूल के दिन याद आ गए।show more

Aparna R Kaushik
41,754 Aufrufe • vor 2 Jahren
स्काईरूट की टीम देखी उनके कंट्रोल एंड कमांड सेंटर... में... सब बिल्कुल जवान बच्चे ~ लड़के लड़कियां.... दिल गर्व से भर गया देख के। हमारी असल Gen Z ये हैं या Gen Z का असल इंस्पिरेशन ये लोग हैं। बाकी अपनी जिंदगी में असफल लोग वहां कॉकरोचों के साथ इक्कठे होके नारेबाजी में लगे ही हैं। साला किसी एक को भी पकड़ के पढ़ाई लिखाई से रिलेटेड कुछ पूछलो, अब्बा डब्बा जब्बा करने लगते हैं। हर असफलता का दोष सरकार पर, सिस्टम पर। वैसे ये जो बच्चे सफल होते हैं, ये भी तो इसी सिस्टम, इसी समाज, हम आप लोगों के बीच से ही होते हैं ना।show more

Oc updates
102,281 Aufrufe • vor 2 Monaten
मास्टर राजेंद्र ढाका का असली मकसद बच्चियों को हेलिकाप्टर... में घुमा कर हौसला बढ़ाना था? या रील बाजी करना था? आजकल स्कूलों में अलग ही परिपाटी शुरू हो रही है। ऐसे मास्टर लोग पढ़ाते कम है मोबाइल से रील ज्यादा बनाते है। स्कूल समय में अगर कोई मास्टर रीलबाज़ी करता है तो उस पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। इस मास्टर के सोशल मीडिया अकाउंट पर स्कूल समय में सबसे ज्यादा रील बनाई हुई है। Madan Dilawar Dept of Education, Rajasthan Directorate of Secondary Education, Rajasthanshow more

Ashok Meghwal
26,248 Aufrufe • vor 6 Monaten
क्या किसी को ये वाली भाभी याद है ??... भक्ति में लीन एक सत्संग में इनका वीडियो बनाया गया था तब ये फेमस हो गई थी मगर उसके बाद इनका कोई पता नहीं चला ना किसी रील पर ना यूट्यूब ना फेसबुक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नहीं दिखी ये चाहती तो मौके की नजाकत को समझ कर सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बन सकती थी क्योंकि ये है भी वला की खूबसूरत जरूरी नहीं की खूबसूरती सिर्फ महलों में मिले छोटे घरों में रहने वाली महिलाओं कहीं उन लोगो से ज़्यादा खूबसूरत होती है जो बड़े बड़े महलों में रहती है और शायद उनसे ज़्यादा काम कर के घर को संभालती है यही भारतीय सुंदरता है और संस्कारों की झलकती हुई एक तस्वीर लोग ख़ूबसूरत के आठ साथ खूबसीरत भी होते है आपका क्या विचार है मेरे विचार परshow more

NEHA MEHTA
65,450 Aufrufe • vor 1 Monat
नेपाल सीमा से सटे इलाकों में ये अचानक क्या... हो रहा है? 26 जुलाई की रात सुनसारी के देवानगंज में मंदिर के पास तेज DJ बजाने और धार्मिक झंडा हटाने की बात पर दो पक्षों में कहासुनी हो गई। देखते ही देखते 29 जुलाई को यह तनाव इतना बढ़ा कि हिंसक झड़प हो गई, जिसमें पुलिस फायरिंग के दौरान 24 साल के एक युवक की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। सोचने वाली बात ये है कि ये सिर्फ एक जगह का हाल नहीं है। बीरगंज, नेपालगंज और जनकपुर जैसे शहरों में भी कभी सोशल मीडिया की भड़काऊ पोस्ट को लेकर, कभी मस्जिद-मंदिर के बाहर विवाद तो कभी जुलूसों पर पथराव की वजह से माहौल खराब हो रहा है। नेपाल के तराई इलाके (जो भारत बॉर्डर से बिल्कुल सटे हैं) वहां झगड़े की वजहें हर जगह एक जैसी ही दिख रही हैं। कहीं जबरन धार्मिक झंडे बदले जा रहे हैं, कहीं नफरती अफवाहें फैलाई जा रही हैं, तो कहीं लाउडस्पीकर की आवाज और चुनावों के चक्कर में नेताओं की राजनीति काम कर रही है। अगर समय रहते इन नफरती अफवाहों और विवादों पर रोक नहीं लगी, तो इसका असली नुकसान दोनों तरफ की आम और गरीब जनता को ही उठाना पड़ेगा। #Nepal #Sunsari #Birgunj #Madheshshow more

Lucky Bisht
42,354 Aufrufe • vor 1 Monat
आपसे जो प्यार दुलार आशीर्वाद और अपनापन मिला है,... यही मेरी असली पूंजी है। इसके लिए तो सौ सौ ऐसे टिकट कुर्बान! कल दिन भर बड़ी मुश्किल से अपने लोगों को हमने संभाला है। सब लोग सिर्फ भावुक ही नहीं, आक्रोश में भी हैं। शाम को हमारे क्षेत्र में अपने लोगों ने आतिशबाजी वाली दिवाली तक नहीं मनाया। यह पूरा घटनाक्रम जिस तरह हुआ है, उस कारण हर किसी की आंखों में आंसू है। आपके आंसू मुझे विचलित कर देते हैं। इसलिए आप मजबूत बने रहिए। हम भी बिल्कुल ठीक हैं। मुझे जानने वालों को बहुत अच्छे से पता है कि मेरे लिए राजनीति की परिभाषा क्या है। विधायक सांसद और पद कुर्सी जैसी माया के पीछे हम अपने जीवन में कभी नहीं भागे हैं। लोग तो ये सब पाने के लिए झूठ फरेब और बेइमानी जैसे घटियापने का सहारा लेने से भी नहीं बचते। लेकिन किसी मंजिल पर पहुंचने भर को हम सफलता नहीं मानते। असल सफलता है कि कठिन से कठिन घड़ी में भी अपने विचार व्यवहार और सिद्धांतों से समझौता न किया जाए। विपरीत हालात में भी हम अपने मन वचन और आचरण के बीच सामंजस्य बनाकर रख पाएं। #Supaul #Anupamshow more

Anupam | अनुपम
44,908 Aufrufe • vor 11 Monaten
लोग कहते हैं ये कबूतर रोज़ इतना अनाज खा... जाते हैं, इन्हें भगाते क्यों नहीं? दुकानदार का जवाब सुनकर आपकी सोच बदल जाएगी हर सुबह एक दुकानदार अपनी दुकान के बाहर अनाज की बोरी रख देता है। थोड़ी ही देर में कबूतरों का झुंड वहाँ आ जाता है और आराम से दाने चुगने लगता है। लोग अक्सर उससे कहते हैं, भाई, रोज़ इतना अनाज खा जाते हैं थोड़ा नुकसान तो होता होगा? दुकानदार मुस्कुराकर कहता है मैं इन्हें क्यों भगाऊँ? शायद ऊपरवाले ने इनकी रोज़ी मेरे हाथ से लिखी है। ये जितना खाते हैं, उससे कहीं ज्यादा मेरे घर में बरकत आ जाती है। ❤ फिर उसकी एक बात दिल छू जाती है अगर मेरे थोड़े से दाने से किसी भूखे का पेट भर रहा है, तो इससे बड़ा मुनाफा और क्या होगा? सच में हम अक्सर पैसों का हिसाब रखते हैं, लेकिन कुछ लोग दुआओं का हिसाब समझते हैं। शायद इसी को बरकत कहते हैं दाने थोड़े कम होते हैं, लेकिन दुआएँ बहुत ज्यादा मिल जाती हैं। ❤show more

Mohd Imran ADV
157,135 Aufrufe • vor 17 Tagen
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट हाल के दिनों में... हम लोग ये दोनों शब्दों को सुनते आ रहे हैं । अक्सर लोग दोनों को एक ही चीज़ समझते हैं बल्कि दोनों बिलकुल अलग अलग चीज़ें हैं। हम ज़्यादा टेक्निकल ना जा कर सामान्य शब्दों में समझने की कोशिश करेंगे। चलिये समझने के लिये हम हृदय को एक पानी के पम्प की तरह मानते हैं। पम्प को अगर देखें तो इसमें दो चीज़ें हैं। पहली की उसमें बिजली का प्रवाह आता है और उस बिजली के प्रवाह से जो ऊर्जा आती है उसकी मदद से पम्प पानी को खींच कर बाहर फेंकता है। ⭕️ अगर पम्प के नली में कुछ फँस जाए तो पम्प पानी ठीक से फेंक नहीं पाएगा | हार्ट अटैक में यही होता है। हृदय की नली में किसी कारणवश सिकुड़ने आ जाये या कुछ फँस जाए या जम जाए तो वो शरीर में खून अच्छे से नहीं भेज पाता। हार्ट अटैक में मरीज़ अचानक से बेहोश नहीं होते। उनमें ये लक्षण देखने को मिल सकता है सीने में दर्द होना। यह दर्द पेट के ऊपर की तरफ जाता है कभी बायें हाथ या कंधे की तरफ जाता है कई बार जबड़े में या दांत में भी दर्द हो सकता है। सांस लेने में तकलीफ और पसीना आना। कुछ लोगो को गैस होने की फीलिंग आती है। ⭕️ लेकिन अगर पम्प में बिजली का प्रवाह अचानक बंद हो जाए तो पम्प बिलकुल काम करना बंद कर देगा। कार्डियक अरेस्ट में यही होता है। हृदय में करेंट का प्रवाह अचानक से बंद हो जाता है जिसके कारण हृदय अचानक से पूरी तरह रुक जाता। इसी कारणवश मरीज़ अचानक से तुरंत बेहोश हो जाता। इसमें आप CPR दे कर कोशिश करते हैं कि हृदय वापस पम्प करना शुरू करे या प्रेशर से वो खून पम्प करता रहे। और जैसे ही मरीज़ अस्पताल पहुँचता है AED मशीन की मदद से उसे वापस से स्टार्ट करने की कोशिश की जाती है। आशा करता हूँ कि आपको दोनों के बीच अंतर समझने में थोड़ी आसानी होगी। आप ये वीडियो में एनीमेशन से भी समझने की कोशिश कर सकते हैंshow more

Dr Anuj Kumar
219,744 Aufrufe • vor 2 Jahren
ये है बाड़मेर के तेजतर्रार पत्रकार श्री अशोक सेरा... 🙌🔥 सादगी देखनी हो तो इनसे सीखो, ना दिखावा ना घमंड…. पैसा धन दौलत सब होते हुए भी एक साधारण सी दुकान में बैठकर बाल कटवाना— यही असली पहचान है एक बड़े इंसान की। और कुछ तथाकथित समझदार लोग बालों पर घटिया कमेंट कर रहे हैं… 🤦♂️ अरे ओ ज्ञानियों इंसान की औकात उसके बालों से नहीं उसके किरदार और काम से होती है जो लोग मज़ाक उड़ा रहे हैं, पहले अपनी औकात और सोच का स्तर देख लो। सलाम है ऐसे जमीन से जुड़े इंसान को 🔥 Ashok Sherashow more

𝐑𝐚𝐠𝐡𝐮 𝐁𝐢𝐬𝐡𝐧𝐨𝐢
24,456 Aufrufe • vor 6 Monaten
This happened in Noida .. Watch and share max... .. This should be VIRAL . नोएडा की पॉश कालोनी महागुन सोसाइटी। एक परिवार जिसके यहां एक बांग्लादेशी मुस्लिम महिला घरेलू नौकरानी का काम करती थी, उन्होंने नौकरानी से शक के आधार पर पिछले काफी दिनों से घर से गायब हो रही छुटपुट वस्तुओं और पिछले दिन गायब हुए 10000 रूपये के विषय में पूछताछ की.... पहले तो नौकरानी ने साफ़ मना कर दिया पर जब परिवार ने चोरी करते हुए उसकी CCTV रिकार्डिंग का सबूत अपने पास होने की बात कही तो उसने 10000 रूपये चोरी करना स्वीकार कर लिया.... और अगले दिन पैसे लेकर आने को कहकर अपने घर लौट गयी... परंतु परिवार ने यह बात सोसाइटी में बता दी पूरी सोसाइटी में पास की बांग्लादेशी बस्ती की बहुत सारी महिलाएं काम करती हैं पूरी सोसाइटी ने कल से उन्हें काम पर आने से मना कर दिया फलस्वरूप... आज 12 जुलाई को प्रातः 6 बजे वह औरत अपनी पास ही में बसी बांग्लादेशियों की बस्ती से सैंकड़ो लोगों की भीड़ लेकर महागुन सोसाइटी में पहुँचती है और वो भीड़ पूरी सोसाइटी में आतंक मचा देती है "लूट लो मार दो" की आवाजें आने लगती हैं घरों और गाड़ियों में तोड़फोड़ शुरू हो जाती है..... बाकि आप वीडियो में देख सकते हैं कुल मिलाकर अगर आप इस घटना से सबक लेते हैं तो अपने घरों से इन बांग्लादेशी और जेहादी तत्वों को निकालिये वर्ना किसी दिन आप भी भुगतेंगे। हम लोग ही इन्हें अपने घरों में घुसाते हैं। देखें दोनों वीडियोshow more

AstroCounselKK 🇮🇳
244,305 Aufrufe • vor 1 Jahr
गाँव का विलुप्त दृश्य… जो अब सिर्फ यादों में... ज़िंदा है। 🛖💔😍 अगर आप गाँव से है तो ये पोस्ट आपके दिल को छू लेगी, पूरा पढ़िएगा। 👇 सब कुछ शुरू होता था एक आवाज़ से—रहट की चर्र-चर्र करती लय में बहता पानी, जैसे गाँव की धड़कन चल रही हो। उसके बाद कोयल की कूक सुनाई देती थी, बैलों की घंटियाँ गूंजती थीं। बच्चे मिट्टी में खेलते, कंचे-गिल्ली-डंडा में बचपन उड़ता था। बुज़ुर्ग पीपल के पेड़ के नीचे चौपाल जमाते—कहानियाँ, सलाह और ठहाकों की दुनिया। औरतें तालाब से पानी भरतीं, सिर पर घड़ा, चेहरे पर सुकून। मिट्टी के घर, गोबर से लिपा आँगन, हर दीवार पर अपनापन लिखा होता था। आज हमारी दुनिया... है या एक बकवास ? - रहट की आवाज़ मोबाइल की रिंगटोन में खो गई, - कोयल की कूक मशीनों के शोर में गुम है। - चौपालें अब व्हाट्सएप ग्रुप बन चुकी हैं, - और वो मिट्टी… अब सीमेंट में दब चुकी है। - वो गाँव अब नहीं रहा... बस कुछ पुरानी यादें और एक मीठा सा दर्द रह गया है। 🌾 अगर आपने भी वो गाँव जिया है, तो ये पोस्ट दिल के किसी कोने को ज़रूर छूएगा। कमेन्ट में अपने गाँव के बारे में 1-2 लाइन जरूर लिखे!!! 🔁 रीट्वीट करें, ताकि उस भूले-बिसरे गाँव की सादगी फिर ज़िंदा हो सके, बाकी लोग भी इसे देख और पढ़ सके। धन्यवाद, अगर आप गाँव से है तो मुझे फॉलो करूर कीजिएगा। 🙏show more

Jumedeen Khan
154,028 Aufrufe • vor 1 Jahr
पहली बात तो खाप पंचायत का चलन जाट से... शुरू हुआ तुम्हें कोई भी बुलाना है बुलाओ। पर रही बात गैर बिरादरी में शादी की तो तुम Rakesh Tikait, Naresh Tikait अपनी लड़कियों लड़कों मां फूफी की बालक सभी की शादी दूसरी जाति में कर लो। हम तुम्हें कोई समाज का चौधरी नहीं मानते न ही तुम्हारे कहने से अंतर्जातीय विवाह करेंगे न उसमे जाएंगे। हुक्के पे भी बिठावे सभी को एक घड़े में पानी भी पीवे पर इसका मतलब ये नहीं वहां लड़की भी दे दे। तुम राजनैतिक लोग हो तुम्हें अपनी सस्ती हवाबाजी बनाई रखनी है तो रखो पर तुम्हारे कहने से ग्रामीण समाज का एक भी जाट अपनी बेटी की शादी दूसरी जाति में नहीं करेगा। न हमें अपने कस्टम ख़त्म करने न रिवाज न बदलना खून। तू बदल तुझे मुबारक। सर्व खाप पंचायत बुला या कुछ भी करो पर अगर तुम्हारे कहने से तुम्हारा कोई कार्यकर्ता भी अपनी बहन बेटी को दूसरी जाति में बिहा दे तो बताना। तुम्हारा क्या तुम्हें तो कही भी बिक जाना है।show more

Villager Anuj Tomar 🐉
72,237 Aufrufe • vor 10 Monaten
"हमारे जाटव समाज के लोग अगर घर घर डीएम,... एस पी बन जाएगा तो 20 साल में पूरे भारत में हम लोग का कब्जा हो जाएगा।" - गोल्डन दास सोच के देखिये इन अंबेडकरवादियों की सोच कितनी वीभत्स और खतरनाक है। सवर्ण समाज जब पढ़ता लिखता है अधिकारी बनता है तो वो सबसे पहले ये सोचता है कि मैं कैसे हर समाज का उत्थान कर सकता हूं, कैसे अपने देश को आगे ले जा सकता हूं। वहीं ये भीमराव स्कॉपल की आसमानी किताब का महिमामंडन करने वाले भारत पे कब्जा करना चाहते है, क्यों? सोच के देखिये इस तरह के लोगों के खिलाफ कार्यवाही न होना कितनी खराब मानसिकता को जन्म दे रहा और ऐसे कितने और पैदा होंगे अगर सही समय पर दंड नहीं मिला तो। आखिर इतनी हिम्मत कहां से आ रही। इन्हें भी पता है एक आसमानी किताब जो सवर्ण विरोधी है, जो देवी देवताओं को गाली देने वालों को पूरी छूट और आरक्षण देती है और सच के लिए लड़ने वालों को SC ST act इन्हें पूरा संरक्षण दे रही तभी ये इतनी हिम्मत करते हैं। मनुस्मृति लाओ, देश बचाओ।show more

Shaurya Tripathi
16,094 Aufrufe • vor 3 Tagen
🔴आखिर क्यों हो रही है जिम करते हुए /डांस... करते हुए ऐसी मौत ??? ? जानिए कारण और बचाव ⬇️⬇️ 1. ऐसे लोगों के मृत्यु का कारण ऑटोप्सी के बाद ही पता चल पाता है ,हमारे पास कुछ रिपोर्ट्स /स्टडी हैं जिससे पता चलता है कि ज्यादातर लोग को हृदय से संबंधित समस्या से जान गई तथा कुछ लोगों में ब्रेन से संबंधित समस्या( ब्रेन हेमरेज ) से ,कुछ लोग के टोक्सिलॉजी रिपोर्ट में ट्रामाडोल ड्रग्स पाया गया I 2. 35 साल से कम उम्र के लोग में कंजेनिटल हार्ट डिजीज (CHD)/ ह्य्पेर्ट्रोफिक कार्डियोमायोपैथी (HOCM)नामक हृदय की बीमारी पहले से हो सकती है,जो एक्सट्रीम एक्सरसाइज करने बढ़ गई और अचानक मृत्यु कारण बनी I 3. 35 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (आम भाषा में हार्ट अटैक /हार्ट ब्लॉक )आजकल काफी कॉमन हो गई है और कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और जब हम अचानक से सीवियर एक्सरसाइज /यह फिजिकल एक्टिविटी करते हैं तो ऐसे मृत्यु का कारण बन सकती है I 4 .कोरोना के दौरान ब्लड क्लोटिंग /नसों में खून का थक्का जमना जैसी समस्याएं काफी बढ़ गई थी ,जिससे हार्ट ब्लॉकेज /अटैक के चांस बढ़ते हैं I,पोस्ट कॉविड में इसे भी एक कारण में कंसीडर किया जा सकता है I 🟢कैसे बचाव करें ?? 1. माइल्ड - मॉडरेट एरोबिक एक्सरसाइज हार्ट के लिए अच्छा है एक्सट्रीम /अत्याधिक एक्सरसाइज से बचें I 2.सप्ताह में 4 से 5 दिन एक्सरसाइज करें और एक-दो दिन रेस्ट 3.अचानक से बहुत ज्यादा ना करें एक्सरसाइज 4. अगर आपको चेस्ट पेन ,कंधे में दर्द सांस में तकलीफ हो रही हो तो इसे नजरअंदाज ना करें I 5.आप अपने शरीर को समझते हैं अगर आपको लगता है ,कि हार्ट संबंधित कोई समस्या है ऐसे एक्सरसाइज करने से पहले हार्ट की जांच ईसीजी/ इको /टीएमटी करा कर देख ले I 6. बॉडी बनाने वाली दवाओं से बचें I NOTE:यह पोस्ट डॉक्टरों की टीम के द्वारा डिस्कशन/अनुभव के आधार पर बनाई गई है जिसमें कार्डियोलॉजिस्ट /न्यूरोलॉजिस्ट /जनरल फिजिशियन/न्यूरो सर्जन /कम्युनिटी मेडिसिन से विचार-विमर्श किया गया है I ऑटोप्सी रिपोर्ट की स्टडी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन की वेबसाइट पर देखी जा सकती है I ऐसी हेल्थ संबंधित जानकारी के लिए फॉलो करें @drvikas1111 और इस ट्वीट को रिट्वीट करें ताकि इंफॉर्मेशन दूसरे लोगों तक पहुंचे Chitra Tripathi Anjana Om Kashyap Office of Dr Mansukh Mandaviya PMO Indiashow more

Dr Vikas I The Brain Yogi
177,896 Aufrufe • vor 3 Jahren
#परिहार से जीती हुई बीजेपी विधायक का ये ग़ैर... जिम्मेदाराना बयान सुनिए। कह रही हैं कि रितु जायसवाल को जिन 65,455 मतदाताओं ने वोट किया, वो पाकिस्तान से बुलाए गए थे। जरा सोचिए, चुनाव आयोग और गृह मंत्रालय के होते हुए पाकिस्तान के लोग परिहार में वोट डाल गए ! गलती इस विधायक की नहीं है। ये ऐसी ही हैं। इनके पति पूर्व विधायक रामनरेश यादव को कोर्ट ने गोलीकांड में 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी थी, इसलिए इनको सिर्फ़ एक मुखौटे के रूप में आगे कर दिया गया है। गलती उन लोगों की है जो हिंदू–मुसलमान और भारत–पाकिस्तान के नाम पर वोट देकर ऐसे नमूनों को अपना विधायक चुन लेते हैं, और पाँच साल खुद परेशान घूमते हैं। विधायक जी को मेरी एक ही सलाह है - परिहार और सोनबरसा के ब्लॉक कार्यालयों में भ्रष्टाचार कम करिए। दलाली और कमीशन पर रोक लगाइए। प्रखंड में पीने के पानी की और अन्य जनसमस्याओं पर ध्यान दीजिए। जिन 82,644 लोगों ने आपको वोट दिया है, कम से कम उनके लिए कुछ काम कर लीजिए।show more

Ritu Jaiswal
20,232 Aufrufe • vor 9 Monaten
#मेरठ #उत्तरप्रदेश वीडियो गंगानगर मेरठ के होटल सैफरॉन का... है, जहां पुलिस की छापेमारी में ये सारी लड़कियां पकड़ी जाती हैं, सबके साथ स्कूली बैग है, मुमकिन है कि ये घर से स्कूल के बहाने सीधे होटल गईं हों, इसमें एक हिजाबी मोहतरमा भी हैं, सोचिए अगर इन्हें कोई कुछ बोल दे तो इनके मां बाप फौरन उसके खिलाफ पुलिस केस करने पहुंच जाते हैं, आजकल मां बाप खुद अपनी बच्चियों को इस रास्ते पर जाने केलिए खामोश इजाज़त देते हैं, क्यूंकि रोकटोक न करना, सही गलत की तालीम न देना किसी के बताने और फिर इनके कारनामें सुनने के बाद उसकी तहकीक न करना सीधा साहबजादी को क्लीनचिट देकर सामने वाले को ही बुरा बना देना ही खामोश हिमायत है, आज स्कूल कॉलेज के नाम पर निकलने वाली लड़कियां होटल के कमरों में जाकर एंजॉय कर रही हैं मां बाप को लगता है कि लाडली पढ़ लिखकर कामयाब होकर वापस आएगी, और इधर इनकी एक्स्ट्रा क्लास चालू रहती है, किसी भी शहर के किसी भी होटल में आप जाकर देख लें सारे कमरे फुल रहते हैं, और हर होटल में मुस्लिम लड़कियां ज़रूर मिलेंगी, क्या हम वाकई अपने घरों में बच्चियों पर ध्यान देते हैं ? अगर हां तो फिर ये किस घर की लड़कियां हैं ?show more

AmjadASR 🌍
97,017 Aufrufe • vor 1 Jahr
डोटासरा तो अचानक मानेसर कांड से निकले नेता हैं... या अशोक गहलोत जी के आशीर्वाद से प्रदेश अध्यक्ष बने थे – गुटबाज गहलोत– पायलट और जातिवादी मीडिया। मैं क्या बोलूंगा आप सिखाओगे क्या, बैठ जाएये आप...... बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ को फटकार लगाती ये वो आवाज थी जिसको नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी जी ने तराशा और सदन में 163 विधायकों वाली बीजेपी वसुन्धरा सरकार के सामने जनता की ढाल बनाकर खड़ा किया था, विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक बनाकर मौका दिया था। 2013 चुनाव में जब अशोक गहलोत जी के रहमो कर्म से कांग्रेस सिर्फ 21 सीट पर सिमट गई थी तब सोनिया जी ने अपने भरोसेमंद नेता रामेश्वर डूडी जी को सदन का नेता बनाया था, इन्हें रामेश्वर डूडी जी के नेतृत्व एवं आशीर्वाद से गोविंद सिंह डोटासरा, अशोक चांदना, घनश्याम मेहर जैसे मजबूत जननेता वसुंधरा सरकार के सामने सीना तानकर खड़े होते थे, इन्हें डूडी जी की छत्र छाया में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट जी ने मीडिया और दिल्ली– जयपुर के बाहर राजस्थान भर में अपना पहचान बनाई थी, सर्किट हाउस के दौरों से अलग जनसंघर्ष में ध्यान लगाया था। 2020 में सचिन पायलट मानेसर जाकर बैठ गए तब भी रामेश्वर डूडी जी की सलाह पर ही सोनिया गांधी जी ने केंद्र के अन्य वरिष्ठ नेताओं से विमर्श कर के ही डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, अशोक गहलोत कभी नहीं चाहते थे कि एक मजबूत नेता PCC अध्यक्ष बने, 2020 में गहलोत जी की पसंद के चारों नाम आलाकमान ने ठुकरा दिए थे और डूडी जी एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर ठप्पा लगाया था, अगली बार जब भी गहलोत जी खुद को कांग्रेस का मालिक समझ कर ये कहें कि उन्होंने इस नेता को ये बनवाया या डोटासरा जी तो मानेसर कांड से निकले नेता हैं, उन्हें रामेश्वर डूडी जी का नाम याद दिलवा देना और एक सवाल कर लेना कि गहलोत जी आप ने दिल्ली से सीधे मुख्यमंत्री बनकर राजस्थान आने के बाद हमेशा से क्यों चाहा था कि राजस्थान से लोकसभा में कोई मजबूत युवा सांसद न पहुंचे, प्रदेश अध्यक्ष पद पर मजबूत नेता न बैठें जो संगठन निर्माण पर ध्यान दें। अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbalishow more

अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali
49,940 Aufrufe • vor 8 Monaten
कोसी क्षेत्र में जब नदी बढ़ना शुरू करती थी,... तब बाढ़ का स्वागत होता था। महिलाएँ नदियों की प्रशंसा में मंगल गान गाती थीं। नदी अगर फिर भी बढ़ती रहती, तो उसकी पूजा शुरू होती थी कि, "माँ! अब जाओ।" और कोसी अगर फिर भी न माने, तो उसे सिंदूर दिखाकर डराया जाता कि, "...अब चली जाओ, नहीं तो तुम्हारी शादी कर देंगे।" कोसी, जो कि एक चंचल और कुमारी नदी है, ब्याह के डर से भाग जाती। पारंपरिक मान्यता है कि जिन नदियों की धारा स्थिर होती है, उन्हें विवाहिता स्त्री की तरह धीर-गंभीर माना जाता है। जो नदियाँ अपनी धारा बदलती रहती हैं, उन्हें कुमारी कन्या की तरह चंचल रूप में देखा जाता है। कोसी की धारा स्थिर नहीं है, अतः उसे कुमारी माना जाता है। नदियों के साथ लोगों का बराबरी का रिश्ता था। यही कारण था कि अधिकांश नदियों को लोगों ने माता के रूप में देखा। महर्षि विश्वामित्र कोसी को अपनी बड़ी बहन कहते थे। ब्रह्मपुत्र को स्थानीय लोग बाबा कहते हैं। गंगा, राजा शांतनु की पत्नी तथा प्रत्येक भारतीय की माँ के रूप में प्रख्यात हैं। नर्मदा, मान्धाता की पुत्रवधू और पुरुकुत्स की पत्नी हैं। नदियों में आसक्ति रखने वाले प्रख्यात समाजसेवी काका कालेलकर अपने गाँव के बगल में बहने वाली मारकंडी नदी को अपने बचपन की सहेली मानते थे। असम में जब ब्रह्मपुत्र और दिबांग में एक साथ बाढ़ आती है और उनका पानी एकाकार होने लगता है, तब लोगों की मान्यता है कि दोनों का विवाह संपन्न होता है। इसके पहले कि लोग बाढ़ से अपनी रक्षा करें, नवविवाहितों को भेंट-उपहार देना नहीं भूलते। उत्तर प्रदेश में घाघरा तथा तरैना के बारे में भी इसी तरह की किंवदंती मशहूर है। बाहर कहीं से आए फिरंगियों को यह भारतीय व्यवस्था हजम नहीं हुई। उनका ध्यान रेवेन्यू यानी "दुगुना लगान" वसूलने पर था। तो उन्होंने तटबंधों के बीच नदियों को बाँधकर कृषि से अधिक से अधिक लगान वसूलने की कोशिश की और जल्दी ही उन्हें इसकी निरर्थकता समझ में आ गई। फिरंगियों ने दामोदर पर तटबंध बनाने के बाद ईडन कैनाल भी बना डाली। रेल लाइन तो अपने आप में एक बाँध थी ही। उधर से गुजरने वाली ग्रैंड ट्रंक रोड को भी ऊँचा और मजबूत किया गया। ये सारी संरचनाएँ एक-दूसरे के समानांतर (पैरेलल) थीं। वे जमीन के ढाल को सीधा काटती थीं और पानी की राह में रुकावट बनकर रह गई थीं। एक अंग्रेज इंजीनियर, विलियम विलकॉक्स ने इन बाँधों जैसी संरचनाओं के बारे में लिखा था, "इन पाँच राक्षसी दीवारों ने दामोदर को कैद कर लिया और (बर्धमान से) हुगली के बीच के मस्त और खुशहाल इलाके को मलेरिया और गरीबी के गड्ढे में ढकेल दिया।" दामोदर पर तटबंध बन जाने की आड़ में बाहर के प्राकृतिक तालाब और पोखरे बेमौत मरने लगे; क्योंकि वे पानी में उगने वाले खरपतवार से भर गए, जमीन की उर्वरता समाप्त होने लगी और सूखा तथा अकाल अपना बदनुमा चेहरा दिखाने लगे। रेल लाइन के 1860 में पूरा होने के सिर्फ एक साल के अंदर बर्धमान में 1861 में मलेरिया फैला। आखिरकार दामोदर पर बने दाहिने तटबंध को 1859 में 32 किलोमीटर की लंबाई में सरकार द्वारा तोड़ा गया। इस तरह जमीन की उर्वरा शक्ति वापस लौटी और 1863 तक हालात पर काबू पा लिया गया। (इन्टरनेट से साभार लिया गया वीडियो झंझारपुर में कमला-बलान का है)show more

Acharya Anand Kumar
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भारत अफगानिस्तान की T20 सीरीज के लिए टीम इंडिया... का ऐलान हो चुका है लेकिन क्या आपको एक बात पता है... यह सीरीज “अफगानिस्तान होम सीरीज” है। लेकिन सारे मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में होंगे । भारत की धरती पर। अफगानिस्तान के पास अपना स्टेडियम तो है, लेकिन सुरक्षा और राजनीतिक हालात की वजह से कोई भी अंतरराष्ट्रीय टीम वहाँ खेलने नहीं जाती। इसलिए सालों से उनकी “होम” सीरीज भारत या UAE में हो रही है। इस बार पहली बार वो भारत के खिलाफ खुद “होस्ट” बनकर खेल रहे हैं… भारत में ही। टिकट की कमाई ACB को जाएगी। ब्रॉडकास्ट राइट्स भी उनके पास। BCCI ने जानबूझकर ये व्यवस्था दी है ताकि अफगानिस्तान क्रिकेट को सपोर्ट मिले। लोग बुमराह-हार्दिक-वैभव की बात कर रहे हैं। लेकिन असली स्टोरी ये है कि क्रिकेट की दुनिया में एक अनोखा प्रयोग चल रहा है — एक देश दूसरे देश की जमीन पर “होम” सीरीज खेल रहा है। Shreyas Iyer इस बार तो लाज रख लेणा 🙏 Sanju Samson का comeback होगा?? Vaibhav Sooryavanshi तो 1st चॉइस बन रहे है भाई 🙌 HARDIK PANDYA बस माहिका को ही संभालेंगे 🤣show more

Mr. & Mrs. Riya
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भूख...? “जब बचपन कचरे में भूख तलाशने लगे, तो... समझिए व्यवस्था सड़ चुकी है…” केंद्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan जी के गृह क्षेत्र विदिशा की वो तस्वीर पूरे देश के ज़मीर को झकझोर देने वाली है — एक मासूम बच्ची, कचरे के ढेर में से फेंके गए खाने के पैकेट खोजती है… वो भूख से लड़ रही थी, जबकि सरकार फाइलों में “भोजन सुरक्षा” और “बाल कल्याण” की योजनाओं का गुणगान कर रही थी। Collector Vidisha कलेक्ट्रेट से कुछ दूरी पर, प्रशासन की नाक के नीचे, एक बच्ची को भूख मिटाने के लिए गंदगी में उतरना पड़ा —क्या यही है "विकसित भारत" का सपना? MP MyGov सवाल सरकार ये बताएं: जब हर गांव-शहर में मिड डे मील, बाल आंगनवाड़ी, और पोषण अभियान जैसी योजनाएँ चल रही हैं, तो फिर ये बच्ची भूखी क्यों थी? क्या अधिकारी सिर्फ रिपोर्टों और फोटो से योजनाओं को “सफल” दिखाने में व्यस्त हैं? क्या हमारे बच्चे अब भी सिर्फ चुनावी भाषणों के "वोट बैंक" बनकर रह गए हैं? सीएम Dr Mohan Yadav जी सच्चाई कड़वी है— मध्य प्रदेश जैसे राज्य में जहाँ "लाडली लक्ष्मी" और "पोषण मिशन" की बात होती है, वहीं एक बच्ची को कचरे से रोटी ढूंढनी पड़ती है। ये सिर्फ गरीबी नहीं — ये नीति की असफलता और संवेदनहीन शासन का चेहरा है। Chief Minister, MP हमारी मांगें : विदिशा प्रशासन तत्काल इस बच्ची की पहचान करे और उसे सुरक्षित संरक्षण दे। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी तय की जाए। प्रदेश भर में आंगनवाड़ी और पोषण योजनाओं का वास्तविक ऑडिट कराया जाए। गरीबी-भुखमरी पर श्वेतपत्र (White Paper) जारी किया जाए — ताकि सच्चाई जनता के सामने आए। अगर एक बच्ची को खाना कचरे से निकालना पड़े — तो फिर किस मुँह से कहा जाएगा कि "देश अमृतकाल में है"? इस बच्ची की भूख हम सबकी जिम्मेदारी है। अब वक्त है कि सरकार जवाब दे, क्योंकि बचपन भूख का शिकार नहीं, भविष्य का आधार होना चाहिए।show more

Sunil Astay
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