#digitalarrest

जब मैं साइबर थाना, #गुरुग्राम #DigitalArrest का मुक़दमा दर्ज कराने निजी कार से पहुँचा। गेट के सिपाही ने नहीं पहचाना। जब मैंने कहा कि मुक़दमा दर्ज कराना है तो बोला कि ड्यूटी ऑफिसर सेकंड फ्लोर पर कमरा नंबर 24 में है। वहाँ वो एक शिकायतकर्ता के काम में लगा था। थोड़ी देर सीपी, डीसीपी, एसीपी, एस एच ओ, डीए एक-एक कर पहुँचें। लंबी वार्ता हुई। फ़ैसला हुआ कि: 1)अगर बैंक ने ड्यू डिलिजेंस नहीं किया तो साइबरक्राइम का नुक़सान बैंक भरेगा। 2)फ्रीज़ हुए छोटे अमाउंट वाले मामले में बग़ैर FIR के आईओ लोक अदालत से कंप्लेनेंट को पैसे वापस दिलाएगा। 3) हेडबॉयज़ एवं गर्ल्स का स्पाइकमैके के सहयोग से एक नेटवर्क बनाया जाएगा जो इवेंट के माध्यम से साइबरक्राइम एवं ड्रग के बारे में इन Gen Alpha के उत्साही बच्चों के माध्यम से लोगों को जागरूक करेगा। एक फीडबैक आया कि लोक अदालत में चालान का रिकॉर्ड महीनों-महीनों नहीं पहुँचता। मैंने सीपी, गुरुग्राम को कहा कि इसका निदान करें। मैंने आईजी, साइबर को कहा कि हर सप्ताह कम से कम एक साइबर थाना विजिट करें। साइबरक्राइम के शिकार के किसी तीन समस्या को पहचान कर उसका निदान करें। #ActionAtGroundLevel
OP Singh549,301 views • 6 months ago



