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Ana Sayfaya Dön

Amendments made to RTI Act thru Data Protection law will restrict access to crucial information needed for seeking accountability from the govt. डेटा संरक्षण कानून से आरटीआई में किए गए संशोधनों से सरकार से जवाबदेही मांगने के लिए आवश्यक जानकारी तक पहुंच मुश्किल हो जाएगी। #SaveRTI

37,684 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)

7 Yorum

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Sayed Haroon Rashid Peerzade1 yıl önce

#SaveRTI

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The Singh / @jun1984nov.bsky.social1 yıl önce

Punjab, Punjabis and Sikhs understood Modi, way back and are fighting him but Indians...

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Rijwan Ansari1 yıl önce

अब बिल्कुल सही बोल रहे है।

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HUDI2 yıl önce

🚀 Introducing the free HUDI DataMask Breach Check! 🔍 Quickly find out if your personal data has been compromised in any breaches. Take control of your privacy effortlessly – it’s simple, secure, and entirely free. 🛡🔒 Check now and stay safe: #HUDI #DataPrivacy #BreachCheck #CyberSecurity

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Gaurav Pilot1 yıl önce

💯

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Qutuboddin Quazi1 yıl önce

देश से जब तक EVM ख़तम नही होता तब तक सारे क़ानून मित्रों के फायदे केलिए हि बनते रहेंगे।

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Gaurav Pilot1 yıl önce

In one incident...HC had directed SC to provide asset information of their Judges under RTI....now this government is eliminating the transparency. Common people should protest it.

Benzer Videolar

सूचना का अधिकार = सूचना ना देने का अधिकार? • RTI पर इससे पहले कभी इतना हमला नहीं हुआ जो अब हो रहा है - अगर मोदी सरकार की चली तो सूचना का अधिकार सूचना देने के बजाय सूचना ना देने का अधिकार बन सकता है। संभव है कि अब आपको सरकार से मांगी जानकारी भी न मिले। आगे पढ़िए 👉 RTI पर हमला कैसे हो रहा है? डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act), 2023 के तहत RTI की धारा 8(1)(j) में संशोधन से RTI निरर्थक और निष्प्रभावी हो गया है 👉 मोदी ने RTI को कमजोर करने के लिए क्या किया है? • सरकार ने RTI Act की धारा 8(1)(j) में संशोधन किया है जो व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित है। बदले हुए नियम के अनुसार RTI के तहत कोई भी व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी जा सकती • यह गोपनीयता की आड़ में सूचना ना देने के अलावा और कुछ नहीं है 👉 DPDP एक्ट पर अब हंगामा क्यों? • मोदी सरकार ने 2023 में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP एक्ट) पारित किया था, जब विपक्ष के अधिकांश सांसदों को निलंबित कर दिया गया था • सरकार ने अब तक नियमों को नोटिफाई नहीं किया था और बदलावों को सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा था, जिसकी समय सीमा आज समाप्त हो रही है • अगर सरकार सब की चिंताओं को नज़रअंदाज़ करके नियमों को अधिसूचित करती है तो RTI एक शक्तिहीन अधिकार बन जाएगा जिसका लोगों को कोई फायदा नहीं होगा 👉 RTI क्यों महत्वपूर्ण है? • सूचना का अधिकार अधिनियम क्रांतिकारी था, इसने नागरिकों को जवाब और सूचना मांगने का अधिकार देकर उन्हें सशक्त बनाया • RTI ने शासन को पारदर्शी और सरकारों को अधिक जवाबदेह भी बनाया - ठीक वैसे ही जैसे किसी भी लोकतंत्र में होना चाहिए • RTI ने बार-बार बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार या नीतियों में खामियों को उजागर किया है • RTI ने नियमों और मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर किया है • RTI ने शक्तिहीन नागरिकों को शक्तिशाली बनाया 👉 क्या RTI वास्तव में व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करता है? • बिल्कुल नहीं। अपने मूल रूप में, RTI अधिनियम 2005 की धारा 8(1) (j) में स्पष्ट रूप से व्यक्तिगत जानकारी को रोकने का प्रावधान था • नियम था कि जो भी जानकारी किसी सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से संबंधित नहीं है या जो निजीता का उल्लंघन करे, वो जानकारी सार्वजनिक ना हो 👉 तो RTI के तहत अब किस तरह की जानकारी देने से मना किया जा सकता है? • अरबपति विलफुल डिफॉल्टर्स के नाम और डिफॉल्ट राशि? • भारत से भाग गए विलफुल डिफॉल्टर/ अरबपति भगौड़े? • बैंकों ने किन बड़े बड़े पूंजीपतियों के और कितने के लोन माफ किए हैं? • मनरेगा के तहत कितने लोगों को कितने दिन का काम दिया है? • PDS के तहत राशन दुकानों से किसको और कितना अनाज वितरित किया गया? • मतदाता सूची में किसके नाम जोड़े या हटाए गए? • जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों और न्यायाधीशों की आय और संपत्ति? • सरकारी योजनाओं के लाभार्थी? 👉 क्या पारदर्शिता और निजिता में परस्पर विरोध है? • नहीं. हमारे जैसे संवैधानिक लोकतंत्र में पारदर्शिता और निजिता में परस्पर विरोध नहीं हैं, बल्कि दोनों ही मौलिक मतलब फंडामेंटल अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी हैं 👉 नागरिक या प्रजा? • DPDP अधिनियम, 2023 के तहत RTI अधिनियम, 2005 को कमजोर करना पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सीधा हमला है जो सूचना के मौलिक अधिकार को खतरे में डालता है। हम भारत के नागरिक हैं जिन्हें हर चीज़ जानने का अधिकार है, न कि किसी राजा की प्रजा जिनको सिर्फ़ जयकारा लगाना है!

Supriya Shrinate

85,242 görüntüleme • 1 yıl önce

अब दिल्ली की कोई भी झुग्गी बिना पुनर्वास के नहीं हटाई जाएगी। गरीबों के सम्मान और अधिकार की रक्षा के लिए हमारी सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील निर्णय लिया है। रेलवे, डीडीए समेत सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक पुनर्वास की पूर्ण, वैकल्पिक और मानवीय व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक राजधानी में किसी भी झुग्गी को न तोड़ा जाए। यदि आवश्यकता पड़ी, तो झुग्गी बस्तियों से जुड़ी नीति में भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे, ताकि कोई भी गरीब परिवार असुरक्षा की भावना में न जिए। सरकार पहले से बने 50 हजार फ्लैट्स को संवार रही है और इनका आवंटन झुग्गियों में रह रहे परिवारों को ही किया जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि वर्षों से झुग्गियों में रह रहे परिवारों को अब सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी घर मिले। हर गरीब परिवार को गरिमामय जीवन देने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हमारी सरकार कृतसंकल्पित है।

Rekha Gupta

27,804 görüntüleme • 1 yıl önce

RTI = RIGHT TO DENY INFORMATION? ▪️The RTI is under attack like never before - if the Modi govt has its way the Right To Information may well become the Right To Deny Information. Because it’s likely that you may no longer get the information you seek from your govt. Read on 👉How is RTI under attack? • Amendment of Section 8(1)(j) of RTI under the Digital Personal Data Protection Act (DPDP Act), 2023 makes RTI redundant and ineffective 👉What has Modi done to dilute RTI? • Govt has amended Section 8(1) (j) of the RTI Act that pertains to Personal Information. The changed rule says that no personal information can be given under RTI • This is nothing more than broad denial of information under the guise of privacy 👉Why Furore Over DPDP Act Now? • Modi Govt had passed Digital Personal Data Protection Act (DPDP Act) in 2023 when majority of opposition MPs were suspended • Govt had not notified rules so far and had put the changes for public consultation, the deadline for which ends today • If the govt undermines concerns from every sector quarter and notifies the rules then RTI becomes a toothless right with no good for people 👉Why is RTI important? • The Right to Information Act was revolutionary, it empowered citizens by giving them the right to seek answers & information • RTI also made governance transparent and govts more accountable - just how it should be in any democracy • RTI has time and again exposed massive corruption or lapses in policy execution • RTI has unravelled violation of rules and human rights • RTI made powerless citizens powerful 👉Did RTI really divulge personal information? • Absolutely NOT. In its original form, Section 8(1) (j) of the RTI Act 2005 clearly provided for withholding Personal Information which doesn’t pertain to a public activity or public interest or which amounts to invasion of privacy 👉So what kind of information can RTI now possibly deny? • Names and amount of billionaire wilful defaulters? • Wilful defaulters who have fled India? • How much loan has been waived off for the crony capitalists by banks? • How many work days have been given under MGNREGA? • How much grain has been distributed under PDS and to whom? • Whose names have been added or deleted from electoral rolls? • Income and assets of public representatives, bureaucrats and judges? • Beneficiaries of govt schemes? 👉Does Transparency compromise Privacy? • No. In a constitutional democracy like ours transparency and privacy are not mutually exclusive but they mutually coexist to ensure various fundamental rights 👉Citizens or Subjects? • The dilution of the RTI Act, 2005 under the DPDP Act, 2023 is a direct attack on both transparency and accountability which threatens the fundamental right to information. We are citizens of India who have a right to know and not subjects in a kingdom! : Supriya Shrinate ji

Congress

27,606 görüntüleme • 1 yıl önce

आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया। रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है। हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा। हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया। इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए। पुलिस का कहना था कि छात्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है। कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।” यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी। यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है? हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है? यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इसे पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आग्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है। यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे। #JantarMantar #StudentVoices #Delhi #NEET Press Trust of India ANI IANS The Wire The Indian Express ravish kumar Prakash Raj Cockroaches of India Congress BJP Delhi Congress Delhi Police Yogendra Yadav Abhijeet Dipke Saurav Das Srinivas BV Uday Bhanu Chib

Avani Bansal

709,764 görüntüleme • 2 ay önce

"Every tree we plant is a promise to future generations." वृक्ष केवल प्रकृति की शोभा नहीं, जीवन की अनिवार्यता हैं, जिस दिन वृक्ष नहीं होंगे यह धरती जीवन विहीन हो जाएगी। अतः भविष्य संरक्षण में वन रक्षकों और पर्यावरण योद्धाओं की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। Forest Watchers वन्य जीवों के संरक्षण के लिए काम करने वाले Front Line Warriors हैं, Forest Guides वनों के Brand Ambassadors हैं। Forest Guides एवं Drivers को Environmental Challenges, Biodiversity Losses के सम्बन्ध में जानकारी होनी चाहिए, तभी वे जंगल आने वाले Tourists को ठीक से Guide कर सकेंगे। आज हर घंटे औसतन तीन प्रजातियां खत्म हो रही हैं, 1970 से अब तक 60% वन्यजीव आबादी नष्ट हो चुकी है, आज 99% संकटग्रस्त प्रजातियों के विलुप्त होने का कारण मनुष्य है। भारत में हर दिन करीब 6,500 लोगों की जान वायु प्रदूषण के कारण जाती है, वायु प्रदूषण के कारण औसत जीवन प्रत्याशा 5 साल तक घट चुकी है, ये आंकड़े अत्यंत चिंताजनक हैं। भारत विश्व की 18% जनसंख्या का निवास है जबकि भारत के पास ताजा जल संसाधनों का सिर्फ 4% हिस्सा ही है, वन रक्षकों को इन चुनौतियों से भली - भांति अवगत होना चाहिए। श्रद्धेय मुख्यमंत्री श्री Yogi Adityanath जी के नेतृत्व में पिछले 8 साल में उत्तर प्रदेश में 200 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। राज्य के वन क्षेत्र में 559.19 वर्ग किमी की वृद्धि हुई। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ कर दोगुनी हुई है। वन रक्षकों को पर्यावरण चुनौतियों, सरकार के सकारात्मक प्रयासों एवं वर्तमान स्थिति से अवगत कराने, उन्हें प्रेरित - प्रोत्साहित और सम्मानित करने के उद्देश्य से आज पीलीभीत टाइगर रिजर्व स्थित FRH मुस्तफाबाद में Wildlife Conservation Event 5.0 का आयोजन किया गया। Photograph दृश्य से कहीं आगे, दृष्टिकोण को आकार देते हैं, एक फोटो में युद्ध रोकने की ताकत होती है। अमेरिका वियतनाम युद्ध के दौरान बम वर्षा के बीच लहुलुहान एक बच्ची के फोटो ने पूरे विश्व को झकझोरा। Photography वन्य जीव संरक्षण में युगांत कारी भूमिका का निर्वहन करे, इसके लिए सुप्रसिद्ध वन्यजीव फोटो ग्राफर Sarosh जी के नेतृत्व में 2 दिवसीय Wildlife Photography Workshop का आयोजन भी किया गया। पर्यावरणीय विषयों पर आधारित Quiz के सभी 4 विजेताओं, Consolation prize पाने वाले अन्य सभी 13 प्रतिभागियों, सही उत्तर देकर Binoculars जीतने वाले अन्य 10 प्रतिभागियों को बधाई। 5 Contributors of forest officer सम्मान से अलंकृत वन्य कर्मियों, साइकिल पाने वाले सभी 30 Watchers को भी बधाई। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी 180 Forest Guides एवं Divers का आभार। अपनी गरिमामयी उपस्थित से कार्यक्रम को विशेष बनाने हेतु सभी सम्मानित अतिथियों का पुनः आभार एवं अभिनन्दन!! #GreenIndia #EnvironmentWarrior #ClimateCrisis #IndiaForClimate #ActOnClimate #BeWithNature

Rajeshwar Singh

60,852 görüntüleme • 1 yıl önce

Sonam Wangchuk ji has ended his fast after my colleagues, Shri Jagat Prakash Nadda ji and Shri Dr Jitendra Singh ji met him at Medanta Hospital, Gurugram, and assured him of the government's commitment to address the concerns. Wangchuk ji’s decision to end his fast reflects his trust in the Modi government's commitment to students' interests. The government has time and again reiterated its resolve to act firmly against paper leaks and strengthen examination reforms. The interests of the nation's youth remain a top priority for the government. As PM Modi ji said, India's youth are a force for nation-building and every culprit operating against the nation’s future will be punished. मेरे सहयोगी श्री Jagat Prakash Nadda जी और डॉ. Dr Jitendra Singh जी द्वारा गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में श्री सोनम वांगचुक जी से भेंट कर छात्रों की चिंताओं के समाधान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का आश्वासन दिए जाने के बाद, वांगचुक जी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। वांगचुक जी का अनशन समाप्त करने का निर्णय छात्रों के हितों के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता पर उनके विश्वास को दर्शाता है। सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे। देश के युवाओं के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। जैसा कि प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी ने कहा है, भारत का युवा राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है, और देश के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले प्रत्येक दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। Sonam Wangchuk Gitanjali J Angmo

Piyush Goyal

375,584 görüntüleme • 2 ay önce

कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुँची है Places of Worship Act, 1991 को बचाने के लिए। यह वही कानून है जिसे #Congress ने 1991 में बनाया था। इस कानून का मूल उद्देश्य बाबर, हुमायूँ, तुगलक, ग़ज़नी, गौरी, खिलजी और औरंगज़ेब जैसे आक्रांताओं द्वारा किए गए अवैध कृत्यों को वैध ठहराना था। मुग़ल शासकों ने जिन मठों और मंदिरों को तोड़ा, यह कानून कहता है कि उन्हें दोबारा पुनर्स्थापित नहीं किया जा सकता। यह कानून यह भी कहता है कि काशी, मथुरा, भद्रकाली, भोजशाला, अटाला, संभल सहित अन्य धार्मिक स्थलों को पुनः प्राप्त करने या पुनर्स्थापित करने के लिए कोर्ट नहीं जाया जा सकता ⚖️🚫 इतना ही नहीं, जो मुकदमे पहले से अदालतों में चल रहे हैं, उन्हें भी बंद कर दिया जाएगा। यह कानून हिंदू, जैन, बौद्ध और सिखों के लिए न्याय के दरवाज़े बंद करता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि कांग्रेस ने अपनी याचिका में कहा है कि यदि Places of Worship Act समाप्त हो गया, तो देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ जाएगी 🇮🇳⚠️ यह एक तरह से सुप्रीम कोर्ट और सरकार दोनों को धमकी है। कांग्रेस का दावा है कि यह कानून हटने से देश में अराजकता फैल जाएगी। इसका सीधा मतलब यह निकाला जा सकता है कि भारत इसलिए एक है क्योंकि बाबर, हुमायूँ, ग़ज़नी, गौरी और औरंगज़ेब द्वारा तोड़े गए मंदिर आज भी दूसरों के कब्ज़े में हैं। और यदि उन मंदिरों को पुनः स्थापित किया गया, तो देश टूट जाएगा — ऐसा आरोप कांग्रेस अपनी याचिका में लगा रही है। कांग्रेस यह भी कह रही है कि सेक्युलरिज़्म को बचाने के लिए Places of Worship Act ज़रूरी है। 👉 यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है। यह पूरा कदम केवल और केवल दिल्ली विधानसभा चुनाव 🎯 को ध्यान में रखकर उठाया गया है। दिल्ली में 10 से अधिक विधानसभा सीटें ऐसी हैं जो सत्ता का फैसला करती हैं। क्योंकि कांग्रेस का खाता पिछले कई चुनावों से दिल्ली में नहीं खुल पाया है, इसलिए उसने यह रणनीति अपनाई है। अगर हम अपने धार्मिक स्थलों को कोर्ट के ज़रिये भी वापस नहीं ले सकते, तो यह कैसी स्वतंत्रता है? 🤔 यह लड़ाई किसी एक धर्म की नहीं है। यह Right to Justice ⚖️, Freedom of Religion 🕉️, और संवैधानिक अधिकारों 📜 की लड़ाई है। आख़िरकार सवाल यह है — क्या हिंदू, जैन, बौद्ध और सिखों को धार्मिक स्वतंत्रता है या नहीं? आदरणीय Ashwini Upadhyay जी

अखण्ड भारत संकल्प

23,260 görüntüleme • 8 ay önce

तथ्यों पर बात करना विपक्ष के लिए बड़ा मुश्किल है क्योंकि वर्तमान महँगाई की दर अथवा रोज़गार के अवसर दोनों ही पर आंकड़े उनके दुष्प्रचार के बिलकुल विपरीत असली तस्वीर बता रहे हैं । जहाँ तक मतदाताओं को प्रभावित करने की बात है तो 9 फ़रवरी 225 को अमेरिकी राष्ट्रपति ने औपचारिक रूप से बयान दिया है कि 2024 चुनाव से पहले कई मिलियन डॉलर USAID ने भारत में वोटर टर्न आउट बढ़ाने के लिए ख़र्च किये। यानी मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए पैसा विदेश से और फ़र्ज़ी मतदाता बांग्लादेश से लाना कहीं इस खेल के ऊपर से पर्दा उठने का डर है जिसकी वजह से इतना बवाल मचाया जा रहा है । It is very difficult for opposition to talk on the issue of inflation or employment because the real data is in stark contrast to what their false propaganda is, as far as voter turn out is concerned , on 9 February 2025US president has categorically said that USAID spent millions of dollar to increase the voter turn out in India before the 2024 election. So it seems that The finance to increase the voters has came from outside ‘Videsh’ and the fake voters has come from ‘Bangladesh’. they are making fake cry as they may be afraid that the curtain may raise from this nefarious design if the transparent verification is done

Dr. Sudhanshu Trivedi

12,561 görüntüleme • 1 yıl önce

इलेक्टोरल बॉन्ड, PM केयर फंड, PM की डिग्री की जानकारी मांगना निजता का हनन है, लेकिन आम जनता के मोबाइल में घुसना मोदी सरकार का हक है। मोदी सरकार ने RTI को तबाह कर दिया। इनकी सरकार में करोड़ों लोगों का आधार का डेटा लीक हो गया। यहां तक कि इस सरकार ने करोड़ों लोगों का डेटा बेचकर 100 करोड़ रुपए कमा लिए। ऐसी सरकार अब हमारे फोन में घुसना चाहती है। जो सरकार इजराइल के साथ मिलकर अपने ही देश और अपनी ही पार्टी के प्रतिद्वंदियों के फोन में पेगासस डाल दे, उन्हें साथी कैसे मान लिया जाए? Can you treat a government like this as your friend? A government which collaborates with Israel and brings Pegasus into our mobiles? What Pegasus was to the VIPs of this country, Sanchar Saathi is to the common man of this country. The objective is the same. The objective is to get into your mobiles, to get into your bedrooms, to get into your lives, to ensure that your teenage daughters, sons, their mobiles, their selfies, their photographs, their information... everything becomes public, everything goes to them; and the two of them have a recorded history of spying on ordinary citizens. : AICC Chairman, Media and Publicity Department Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ ji

Congress

28,332 görüntüleme • 9 ay önce

आज उदयपुर में उदयपुर संभाग में विभिन्न स्थानों से पधारे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नगरीय निकाय चुनावों को लेकर संबोधित किया : भाई, यह तो मीटिंग का रूप ले लिया। यह आपका जो उत्साह है, उसका प्रतीक है। उसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। अभी पूरे प्रदेश में उत्साह है। ए भाई, बैठ जाओ आप लोग। पूरे प्रदेश में उत्साह है कार्यकर्ताओं में और मुख्य कारण उसका यही है कि सरकार तुम्हारी नहीं बनी, पर जो हमारे वक्त में स्कीमें थीं, योजनाएं थीं, वो इतनी शानदार थीं, सोशल सिक्योरिटी की भी थीं, विकास भी काफी हो गए। विधायकगण जो, जिन्होंने मांग करी विकास की, मैंने कहा तुम मांगते-मांगते थक जाओगे, मैं देते-देते नहीं थकूंगा। वही करके दिखाया और उसके कारण से गांव-गांव में वो स्कीमों का जो लाभ मिल रहा था, नई सरकार आते ही वो या तो रुक गया, या रोक दिया गया या बंद कर दिया गया। तो लोगों में बहुत भयंकर आक्रोश है, बहुत भयंकर आक्रोश। ऐसा मैंने आज तक कभी नहीं देखा, इतना गुस्सा गांव में और शहरों में, कस्बों में है। नगर निकाय के चुनाव होने वाले हैं। हमने उनके लिए भी नरेगा की तरह, कोई कानून नहीं था शहरों के लिए, तब भी हमने शहरी रोजगार योजना शुरू करी। नगर पालिकाओं को इतना फायदा हुआ कि वहां गरीब लोग रहते हैं शहरों में, उनको काम मिलने लग गया। बंद कर दी उसको। हमारे वक्त में 12 लाख पट्टे मिले हैं, ₹5 में या ₹500 में। अब ये ढाई साल हो गए इनको, बार-बार कैंप लगाते हैं, कैंप फेल होते हैं। कोई पट्टे बांट नहीं पा रहे, मामूली पट्टे बांटे होंगे। यह स्थिति सरकार की है। सड़कें खुदी पड़ी हैं, सीवरेज, पानी बह रहा है। बिल्डिंगें बन चुकीं अपने वक्त की, उद्घाटन तक नहीं कर रहे ये लोग। यह मुझे आश्चर्य होता है कि बिल्डिंग बन गई, करोड़ों रुपए खर्च हो गए। हमने इंतज़ार शास्त्र निकाला था, देखा आपने 20 दिन तक लगातार एक-एक स्कीम के बारे में लिखा। उस वक़्त सरकार घबरा गई पूरी तरह से, दो-तीन काम शुरू किए, वो आधे-अधूरे हैं वो भी। पर काम सब पड़े हैं ठप। तो समझ के परे है कि सरकार को क्या हो गया। काम क्यों नहीं कर पा रहे? ऐसा कुशासन कभी नहीं देखा गया। सरकार कम करती है, काम ज्यादा करती है पर इस बार तो भ्रष्टाचार की सीमा टूट गई है। ये जो बीजेपी, आरएसएस वाले लोग कहते थे चाल, चरित्र, चेहरा हमारा, वो जनता के सामने एक्सपोज हो गया पूरी तरह से, पूरी तरह एक्सपोज हो गए। जनता के रोज काम पड़ते हैं, बिना पैसे दिए काम होता ही नहीं किसी का। काम ही नहीं होता है। विकास ठप हो गया, स्कूलें बंद हो रही हैं, दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं या कमजोर हो गई हैं। आरजीएचएस स्कीम को ठप कर दिया। अस्पताल वाले पैसा मांगने लग गए लोगों से इलाज का, जबकि ऑपरेशन फ्री थे। हार्ट का ऑपरेशन, घुटनों का ऑपरेशन, दवाएं फ्री, ऑपरेशन फ्री, जांचें फ्री, डायलिसिस फ्री, एमआरआई फ्री, सीटी स्कैन फ्री, 25 लाख तक का अपन ने इलाज फ्री किया और आज भी घर-घर में उसकी चर्चा है, क्योंकि बीमार कोई न कोई पड़ ही जाता है घर के अंदर। घर में बीमार पड़ता है ₹500, ₹5000, ₹50,000, ₹5 लाख खर्च हो जाते हैं। वो पैसे बचत हो गई। अब एक तरफ तो प्याज भी महंगा, शक्कर मिल नहीं रही है मार्केट से, गायब हो गई। ₹70 से पार कर गई उसकी, भाव उसका भी, शुगर का भी और ऊपर से जो स्कीमें थीं, वो स्कीमें उन्होंने कमजोर कर दीं हमारी। वो थैला दिया हम लोगों ने, गांव-गांव में थैला ले के फिर रहे हैं लोग ,अन्नपूर्णा योजना। अभी मेरे घर पे कोई एक थैला ले के आ गया, "साहब, इसको आप कहो सरकार को, वापस शुरू करे।" और वो कह रहा है, "साहब, आपकी फोटो हटा दे, खुद की लगा दे, स्कीम बंद क्यों कर रहा है?" यह भावना है। खाली थैला बांट दिया बाद में, खाली थैला। उसकी मजाक खूब उड़ी खाली थैले की भी। मैंने भी कहा, मुख्यमंत्री जी, आप थैला की स्कीम बंद क्यों कर रहे हो? अपनी फोटो लगा दो, मेरी फोटो हटा दो और कायदे की बात है बुरा मानने वाली बात नहीं, मुख्यमंत्री बदल गए हैं, तो फोटो उनकी लग जाएगी। इतनी शानदार स्कीम को बंद कर दिया। बुजुर्गों का, विधवाओं का, पांच-पांच, छह-छह महीने हो गए, पेंशन नहीं आती उनकी और तो और लोग मर जाते हैं बेचारे एक्सीडेंट में, मैंने ₹5 लाख की योजना बनाई कोई मर गया तो ₹5 लाख मिलेंगे, घर में दो मर गए ₹10 लाख मिलेंगे। 2,500, ढाई हजार लोगों का पैसा पेंडिंग है। सैंक्शन हो गया सरकार से, ट्रेजरी में रुक गया। 1/2.

Ashok Gehlot

37,844 görüntüleme • 29 gün önce