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Amendments made to RTI Act thru Data Protection law will restrict access to crucial information needed for seeking accountability from the govt. डेटा संरक्षण कानून से आरटीआई में किए गए संशोधनों से सरकार से जवाबदेही मांगने के लिए आवश्यक जानकारी तक पहुंच मुश्किल हो जाएगी। #SaveRTI

35,087 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

7 Kommentare

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Sayed Haroon Rashid Peerzadevor 1 Jahr

#SaveRTI

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The Singh / @jun1984nov.bsky.socialvor 1 Jahr

Punjab, Punjabis and Sikhs understood Modi, way back and are fighting him but Indians...

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Rijwan Ansarivor 1 Jahr

अब बिल्कुल सही बोल रहे है।

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HUDIvor 1 Jahr

🚀 Introducing the free HUDI DataMask Breach Check! 🔍 Quickly find out if your personal data has been compromised in any breaches. Take control of your privacy effortlessly – it’s simple, secure, and entirely free. 🛡🔒 Check now and stay safe: #HUDI #DataPrivacy #BreachCheck #CyberSecurity

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Gaurav Pilotvor 1 Jahr

💯

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Qutuboddin Quazivor 1 Jahr

देश से जब तक EVM ख़तम नही होता तब तक सारे क़ानून मित्रों के फायदे केलिए हि बनते रहेंगे।

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Gaurav Pilotvor 1 Jahr

In one incident...HC had directed SC to provide asset information of their Judges under RTI....now this government is eliminating the transparency. Common people should protest it.

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सूचना का अधिकार = सूचना ना देने का अधिकार? • RTI पर इससे पहले कभी इतना हमला नहीं हुआ जो अब हो रहा है - अगर मोदी सरकार की चली तो सूचना का अधिकार सूचना देने के बजाय सूचना ना देने का अधिकार बन सकता है। संभव है कि अब आपको सरकार से मांगी जानकारी भी न मिले। आगे पढ़िए 👉 RTI पर हमला कैसे हो रहा है? डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act), 2023 के तहत RTI की धारा 8(1)(j) में संशोधन से RTI निरर्थक और निष्प्रभावी हो गया है 👉 मोदी ने RTI को कमजोर करने के लिए क्या किया है? • सरकार ने RTI Act की धारा 8(1)(j) में संशोधन किया है जो व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित है। बदले हुए नियम के अनुसार RTI के तहत कोई भी व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी जा सकती • यह गोपनीयता की आड़ में सूचना ना देने के अलावा और कुछ नहीं है 👉 DPDP एक्ट पर अब हंगामा क्यों? • मोदी सरकार ने 2023 में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP एक्ट) पारित किया था, जब विपक्ष के अधिकांश सांसदों को निलंबित कर दिया गया था • सरकार ने अब तक नियमों को नोटिफाई नहीं किया था और बदलावों को सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा था, जिसकी समय सीमा आज समाप्त हो रही है • अगर सरकार सब की चिंताओं को नज़रअंदाज़ करके नियमों को अधिसूचित करती है तो RTI एक शक्तिहीन अधिकार बन जाएगा जिसका लोगों को कोई फायदा नहीं होगा 👉 RTI क्यों महत्वपूर्ण है? • सूचना का अधिकार अधिनियम क्रांतिकारी था, इसने नागरिकों को जवाब और सूचना मांगने का अधिकार देकर उन्हें सशक्त बनाया • RTI ने शासन को पारदर्शी और सरकारों को अधिक जवाबदेह भी बनाया - ठीक वैसे ही जैसे किसी भी लोकतंत्र में होना चाहिए • RTI ने बार-बार बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार या नीतियों में खामियों को उजागर किया है • RTI ने नियमों और मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर किया है • RTI ने शक्तिहीन नागरिकों को शक्तिशाली बनाया 👉 क्या RTI वास्तव में व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करता है? • बिल्कुल नहीं। अपने मूल रूप में, RTI अधिनियम 2005 की धारा 8(1) (j) में स्पष्ट रूप से व्यक्तिगत जानकारी को रोकने का प्रावधान था • नियम था कि जो भी जानकारी किसी सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से संबंधित नहीं है या जो निजीता का उल्लंघन करे, वो जानकारी सार्वजनिक ना हो 👉 तो RTI के तहत अब किस तरह की जानकारी देने से मना किया जा सकता है? • अरबपति विलफुल डिफॉल्टर्स के नाम और डिफॉल्ट राशि? • भारत से भाग गए विलफुल डिफॉल्टर/ अरबपति भगौड़े? • बैंकों ने किन बड़े बड़े पूंजीपतियों के और कितने के लोन माफ किए हैं? • मनरेगा के तहत कितने लोगों को कितने दिन का काम दिया है? • PDS के तहत राशन दुकानों से किसको और कितना अनाज वितरित किया गया? • मतदाता सूची में किसके नाम जोड़े या हटाए गए? • जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों और न्यायाधीशों की आय और संपत्ति? • सरकारी योजनाओं के लाभार्थी? 👉 क्या पारदर्शिता और निजिता में परस्पर विरोध है? • नहीं. हमारे जैसे संवैधानिक लोकतंत्र में पारदर्शिता और निजिता में परस्पर विरोध नहीं हैं, बल्कि दोनों ही मौलिक मतलब फंडामेंटल अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी हैं 👉 नागरिक या प्रजा? • DPDP अधिनियम, 2023 के तहत RTI अधिनियम, 2005 को कमजोर करना पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सीधा हमला है जो सूचना के मौलिक अधिकार को खतरे में डालता है। हम भारत के नागरिक हैं जिन्हें हर चीज़ जानने का अधिकार है, न कि किसी राजा की प्रजा जिनको सिर्फ़ जयकारा लगाना है!

Supriya Shrinate

85,242 Aufrufe • vor 1 Jahr

आज से ठीक 20 साल पहले ऐतिहासिक सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम पूरी तरह लागू हुआ था। यह 2005 से 2013 के बीच लागू किए गए उन परिवर्तनकारी अधिकार-आधारित क़ानूनों की श्रृंखला की शुरुआत थी -जिनमें ग्रामीण रोज़गार, आदिवासियों के अधिकार, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण से जुड़े क़ानून शामिल थे। RTI का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और प्रशासन के हर स्तर पर पारदर्शिता की संस्कृति लाना था। लेकिन मई 2014 के बाद से इसे कमजोर करने की एक सुनियोजित और लगातार कोशिश की जा रही है। सबसे पहले, जुलाई 2019 में RTI अधिनियम में बड़े संशोधन संसद में जबरन पारित किए गए। मैंने 25 जुलाई 2019 को राज्यसभा में इन संशोधनों का विरोध किया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट में इन्हें चुनौती भी दी थी। दुर्भाग्य से, यह याचिका छह साल बाद भी लंबित है। इसके बाद, ज़ोर-ज़बरदस्ती से डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम संसद से पारित कर अगस्त 2023 में लागू कर दिया गया। 23 मार्च 2025 को मैंने संबंधित मंत्री को यह बताया था कि यह नया क़ानून RTI अधिनियम को और भी अप्रासंगिक बना देगा। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), जो RTI अधिनियम के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी निभाता है, आज केवल दो आयुक्तों के साथ काम कर रहा है। इसके प्रमुख सहित नौ पद रिक्त हैं। मोदी सरकार के लिए RTI का मतलब अब Readiness To Intimidate -यानी 'धमकाने की तत्परता' रह गया है।

Jairam Ramesh

18,827 Aufrufe • vor 9 Monaten

अब दिल्ली की कोई भी झुग्गी बिना पुनर्वास के नहीं हटाई जाएगी। गरीबों के सम्मान और अधिकार की रक्षा के लिए हमारी सरकार ने एक बड़ा और संवेदनशील निर्णय लिया है। रेलवे, डीडीए समेत सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक पुनर्वास की पूर्ण, वैकल्पिक और मानवीय व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक राजधानी में किसी भी झुग्गी को न तोड़ा जाए। यदि आवश्यकता पड़ी, तो झुग्गी बस्तियों से जुड़ी नीति में भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे, ताकि कोई भी गरीब परिवार असुरक्षा की भावना में न जिए। सरकार पहले से बने 50 हजार फ्लैट्स को संवार रही है और इनका आवंटन झुग्गियों में रह रहे परिवारों को ही किया जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि वर्षों से झुग्गियों में रह रहे परिवारों को अब सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी घर मिले। हर गरीब परिवार को गरिमामय जीवन देने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हमारी सरकार कृतसंकल्पित है।

Rekha Gupta

27,774 Aufrufe • vor 11 Monaten

कांग्रेस सरकार ने जिस तरह का Data Based Census किया है, यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। देश में जब Scheduled Caste और Backward class के लोग सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से मिलकर कांग्रेस को समर्थन करेंगे, तो अल्पसंख्यक वर्ग को मिलाकर हम लोग 50% के पार पहुंच जाएंगे। जिस तरह से राहुल गाँधी जी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक चलकर SC, ST, OBC के हक के लिए अपनी आवाज़ बुलंद की, वो काम कोई दूसरा नेता नहीं कर सकता। राहुल गाँधी जी के बोलने के बाद से आज backward class भी जागृत हुआ है, क्योंकि उनकी हिस्सेदारी की भी बात हो रही है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और एक्सपर्ट कमेटी ने जिस तरह से तेलंगाना में जातिगत जनगणना करवाई है, उसके लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूँ। मेरा मानना है कि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू करना चाहिए, ताकि लोगों का उनका हक मिल सके। अब आरक्षण की 50% की लिमिट पहले ही टूट गई है, क्योंकि कुल 50% आरक्षण तो पहले से ही है और 10% EWS जोड़ दिए गए हैं। इसका मतलब जातिगत जनगणना करने से किसी के साथ अन्याय नहीं होता है। हमारे समाज को तीन चीजों की जरूरत होती है- आर्थिक बल, मनुष्य बल और मानसिक बल। जिस समाज में ये तीनों चीजें होती हैं, वो समाज आगे बढ़ता है। आज के समय में अंग्रेजी भाषा एक जरूरत बन गई है, ऐसे में अगर हम उसे आगे नहीं बढ़ाएंगे तो मुश्किल हो जाएगी। आज कुछ लोग अपने बच्चों को तो अंग्रेजी पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन दूसरों के बच्चों को अंग्रेजी पढ़ने का मौका नहीं देना चाहते। RSS-BJP के नेता अपने बच्चों को लाखों की फीस देकर बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ाते हैं। ऐसे में अगर सरकार गरीबों के बच्चों को भी सरकारी पैसे से पढ़ाए तो इसमें क्या नुकसान है? लेकिन, इनकी ऐसी कोई मंशा नहीं है।

Mallikarjun Kharge

13,370 Aufrufe • vor 11 Monaten

RTI = RIGHT TO DENY INFORMATION? ▪️The RTI is under attack like never before - if the Modi govt has its way the Right To Information may well become the Right To Deny Information. Because it’s likely that you may no longer get the information you seek from your govt. Read on 👉How is RTI under attack? • Amendment of Section 8(1)(j) of RTI under the Digital Personal Data Protection Act (DPDP Act), 2023 makes RTI redundant and ineffective 👉What has Modi done to dilute RTI? • Govt has amended Section 8(1) (j) of the RTI Act that pertains to Personal Information. The changed rule says that no personal information can be given under RTI • This is nothing more than broad denial of information under the guise of privacy 👉Why Furore Over DPDP Act Now? • Modi Govt had passed Digital Personal Data Protection Act (DPDP Act) in 2023 when majority of opposition MPs were suspended • Govt had not notified rules so far and had put the changes for public consultation, the deadline for which ends today • If the govt undermines concerns from every sector quarter and notifies the rules then RTI becomes a toothless right with no good for people 👉Why is RTI important? • The Right to Information Act was revolutionary, it empowered citizens by giving them the right to seek answers & information • RTI also made governance transparent and govts more accountable - just how it should be in any democracy • RTI has time and again exposed massive corruption or lapses in policy execution • RTI has unravelled violation of rules and human rights • RTI made powerless citizens powerful 👉Did RTI really divulge personal information? • Absolutely NOT. In its original form, Section 8(1) (j) of the RTI Act 2005 clearly provided for withholding Personal Information which doesn’t pertain to a public activity or public interest or which amounts to invasion of privacy 👉So what kind of information can RTI now possibly deny? • Names and amount of billionaire wilful defaulters? • Wilful defaulters who have fled India? • How much loan has been waived off for the crony capitalists by banks? • How many work days have been given under MGNREGA? • How much grain has been distributed under PDS and to whom? • Whose names have been added or deleted from electoral rolls? • Income and assets of public representatives, bureaucrats and judges? • Beneficiaries of govt schemes? 👉Does Transparency compromise Privacy? • No. In a constitutional democracy like ours transparency and privacy are not mutually exclusive but they mutually coexist to ensure various fundamental rights 👉Citizens or Subjects? • The dilution of the RTI Act, 2005 under the DPDP Act, 2023 is a direct attack on both transparency and accountability which threatens the fundamental right to information. We are citizens of India who have a right to know and not subjects in a kingdom! : Supriya Shrinate ji

Congress

27,606 Aufrufe • vor 1 Jahr

आज डिजिटल प्लेटफॉर्म बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जिस तरह से सरकार घेराव की तैयारी कर रही, उससे खोजी पत्रकारिता को बहुत नुकसान होगा। ये बात मुझे कहने में कोई हिचक नहीं है कि देश का ब्रॉडकास्ट मीडिया कोलैप्स कर गया है। वो अब Spineless हो गया है। सरकार अब RTI Act को पूरी तरह से तबाह करने में जुटी हुई है। सरकार कई ऐसे प्रावधान लाई है, जिसके तहत अब जनता को जानकारी मिल ही नहीं पाएगी। ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। 2019 और 2021 में जब ये बिल लाने के कोशिश की गई थी, तब उनमें ये प्रावधान नहीं थे, लेकिन जब 2023 में मनमाने तरीके से बिल लाया गया, तब ये प्रावधान जोड़ दिए गए। ये सरकार इस बिल के जरिए प्रेस फ्रीडम और खोजी पत्रकारिता पर भी नकेल कसेगी। यहीं नहीं, इसमें जुर्माने का प्रावधान भी है, जो करोड़ों रुपए तक हैं। साथ ही, इस बिल की सबसे खराब बात ये है कि इसके तहत देशभर में जो डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड बनेंगे, उनके सारे निर्णय केंद्र सरकार के अधीन होंगे। इस बिल में केंद्र सरकार के पास यह भी ताकत होगी, जिसमें वो निर्णय लेंगे कि सूचना कौन साझा कर सकता है। ऐसे में सभी से यही निवेदन है कि इस बिल के खिलाफ आवाज बुलंद करें, ताकि हमारी जो मांग है वो पूरी हों और जनता, खोजी पत्रकारों और पत्रकारिता के अधिकार सुरक्षित रहे। : Priyanka Chaturvedi🇮🇳 जी, शिवसेना (UBT)

Congress

26,628 Aufrufe • vor 1 Jahr

तथ्यों पर बात करना विपक्ष के लिए बड़ा मुश्किल है क्योंकि वर्तमान महँगाई की दर अथवा रोज़गार के अवसर दोनों ही पर आंकड़े उनके दुष्प्रचार के बिलकुल विपरीत असली तस्वीर बता रहे हैं । जहाँ तक मतदाताओं को प्रभावित करने की बात है तो 9 फ़रवरी 225 को अमेरिकी राष्ट्रपति ने औपचारिक रूप से बयान दिया है कि 2024 चुनाव से पहले कई मिलियन डॉलर USAID ने भारत में वोटर टर्न आउट बढ़ाने के लिए ख़र्च किये। यानी मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए पैसा विदेश से और फ़र्ज़ी मतदाता बांग्लादेश से लाना कहीं इस खेल के ऊपर से पर्दा उठने का डर है जिसकी वजह से इतना बवाल मचाया जा रहा है । It is very difficult for opposition to talk on the issue of inflation or employment because the real data is in stark contrast to what their false propaganda is, as far as voter turn out is concerned , on 9 February 2025US president has categorically said that USAID spent millions of dollar to increase the voter turn out in India before the 2024 election. So it seems that The finance to increase the voters has came from outside ‘Videsh’ and the fake voters has come from ‘Bangladesh’. they are making fake cry as they may be afraid that the curtain may raise from this nefarious design if the transparent verification is done

Dr. Sudhanshu Trivedi

12,552 Aufrufe • vor 1 Jahr

कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुँची है Places of Worship Act, 1991 को बचाने के लिए। यह वही कानून है जिसे #Congress ने 1991 में बनाया था। इस कानून का मूल उद्देश्य बाबर, हुमायूँ, तुगलक, ग़ज़नी, गौरी, खिलजी और औरंगज़ेब जैसे आक्रांताओं द्वारा किए गए अवैध कृत्यों को वैध ठहराना था। मुग़ल शासकों ने जिन मठों और मंदिरों को तोड़ा, यह कानून कहता है कि उन्हें दोबारा पुनर्स्थापित नहीं किया जा सकता। यह कानून यह भी कहता है कि काशी, मथुरा, भद्रकाली, भोजशाला, अटाला, संभल सहित अन्य धार्मिक स्थलों को पुनः प्राप्त करने या पुनर्स्थापित करने के लिए कोर्ट नहीं जाया जा सकता ⚖️🚫 इतना ही नहीं, जो मुकदमे पहले से अदालतों में चल रहे हैं, उन्हें भी बंद कर दिया जाएगा। यह कानून हिंदू, जैन, बौद्ध और सिखों के लिए न्याय के दरवाज़े बंद करता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि कांग्रेस ने अपनी याचिका में कहा है कि यदि Places of Worship Act समाप्त हो गया, तो देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ जाएगी 🇮🇳⚠️ यह एक तरह से सुप्रीम कोर्ट और सरकार दोनों को धमकी है। कांग्रेस का दावा है कि यह कानून हटने से देश में अराजकता फैल जाएगी। इसका सीधा मतलब यह निकाला जा सकता है कि भारत इसलिए एक है क्योंकि बाबर, हुमायूँ, ग़ज़नी, गौरी और औरंगज़ेब द्वारा तोड़े गए मंदिर आज भी दूसरों के कब्ज़े में हैं। और यदि उन मंदिरों को पुनः स्थापित किया गया, तो देश टूट जाएगा — ऐसा आरोप कांग्रेस अपनी याचिका में लगा रही है। कांग्रेस यह भी कह रही है कि सेक्युलरिज़्म को बचाने के लिए Places of Worship Act ज़रूरी है। 👉 यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है। यह पूरा कदम केवल और केवल दिल्ली विधानसभा चुनाव 🎯 को ध्यान में रखकर उठाया गया है। दिल्ली में 10 से अधिक विधानसभा सीटें ऐसी हैं जो सत्ता का फैसला करती हैं। क्योंकि कांग्रेस का खाता पिछले कई चुनावों से दिल्ली में नहीं खुल पाया है, इसलिए उसने यह रणनीति अपनाई है। अगर हम अपने धार्मिक स्थलों को कोर्ट के ज़रिये भी वापस नहीं ले सकते, तो यह कैसी स्वतंत्रता है? 🤔 यह लड़ाई किसी एक धर्म की नहीं है। यह Right to Justice ⚖️, Freedom of Religion 🕉️, और संवैधानिक अधिकारों 📜 की लड़ाई है। आख़िरकार सवाल यह है — क्या हिंदू, जैन, बौद्ध और सिखों को धार्मिक स्वतंत्रता है या नहीं? आदरणीय Ashwini Upadhyay जी

अखण्ड भारत संकल्प

23,260 Aufrufe • vor 5 Monaten

इलेक्टोरल बॉन्ड, PM केयर फंड, PM की डिग्री की जानकारी मांगना निजता का हनन है, लेकिन आम जनता के मोबाइल में घुसना मोदी सरकार का हक है। मोदी सरकार ने RTI को तबाह कर दिया। इनकी सरकार में करोड़ों लोगों का आधार का डेटा लीक हो गया। यहां तक कि इस सरकार ने करोड़ों लोगों का डेटा बेचकर 100 करोड़ रुपए कमा लिए। ऐसी सरकार अब हमारे फोन में घुसना चाहती है। जो सरकार इजराइल के साथ मिलकर अपने ही देश और अपनी ही पार्टी के प्रतिद्वंदियों के फोन में पेगासस डाल दे, उन्हें साथी कैसे मान लिया जाए? Can you treat a government like this as your friend? A government which collaborates with Israel and brings Pegasus into our mobiles? What Pegasus was to the VIPs of this country, Sanchar Saathi is to the common man of this country. The objective is the same. The objective is to get into your mobiles, to get into your bedrooms, to get into your lives, to ensure that your teenage daughters, sons, their mobiles, their selfies, their photographs, their information... everything becomes public, everything goes to them; and the two of them have a recorded history of spying on ordinary citizens. : AICC Chairman, Media and Publicity Department Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ ji

Congress

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"The Future of War: A Call to Action for Youth" युद्ध अब बंदूक, बारूद और सेना से नहीं जीता जाता, अब जीत दिमाग, Data और Digital ताकत से तय होती है। युवा पीढ़ी को चाहिए सजगता, समझ और संकल्प! क्यों? क्योंकि युद्ध के मोर्चे अब बदल चुके हैं : 1. युद्ध की बदलती प्रकृति : I. साइबर हमले (Cyber Warfare): साइबर हमलों के उदय ने युद्ध के एक नए मोर्च को जन्म दिया है। उदाहरण : A. WannaCry Ransomware Attack के कारण 2017 में 150 देशों में 2 लाख से अधिक सिस्टम प्रभावित हुए थे। B. NotPetya Malware – लगभग $10 Billion का नुकसान हुआ। भारत में : A. भारतपे (BharatPay) हैक: अगस्त 2022 में 37,000 उपयोगकर्ताओं के डेटा की चोरी। B. स्वच्छता प्लेटफ़ॉर्म हैक: सितंबर 2022 में 16 मिलियन उपयोगकर्ताओं के डेटा की चोरी। C. दिसंबर 2022 में AIIMS Cyber हमले में 1.3 TB data की चोरी हुई। II. Trade War: A. USA और China के बीच, B. USA vs European Union टैरिफ, प्रतिबंध और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा। इन व्यापार युद्धों ने Global Economy को हिला कर रख दिया है। III. सूचना युद्ध (Information Warfare): A. 2016 अमेरिकी चुनाव में Social Media के ज़रिए misinformation का प्रयोग। B. सरकारी स्तर पर Propaganda से जनता की राय को Manipulate करना, जनमत को प्रभावित करना। IV. आर्थिक जासूसी (Economic Espionage): A. Intellectual Property की चोरी, विशेषकर China पर लगे आरोप। B. Competitors को पछाड़ने के लिए trade secrets की जासूसी। V. मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological & Disinformation Warfare): A. प्रचार, साजिशें, और डर पैदा कर मानसिक नियंत्रण की कोशिश। B. युवाओं को भ्रमित कर गलत दिशा में मोड़ने की रणनीति। 2. क्यों ज़रूरी है Digital Literacy? Digital Literacy केवल एक कौशल नहीं, 21वीं सदी में बचाव और बढ़त दोनों की कुंजी है। A. सशक्तिकरण (Empowerment): युवाओं को Digital दुनिया में आत्मनिर्भर बनाना। B. संरक्षण (Protection) : Hacking, Malware, और Cyber Threats से सुरक्षा। C. भागीदारी (Participation): Digital अर्थव्यवस्था और समाज में सक्रिय भूमिका। सरोजनीनगर में किए जा रहे प्रयास : I. 30 Digital Libraries II. 31 Smart Panel Boards III. 13 रण बहादुर सिंह Digital शिक्षा एवं Yuva सशक्तिकरण केंद्र की स्थापना IV. बेसिक स्कूल पहाड़पुर में Robotics, Planetarium, STEM Lab, Multi Play Station आदि की स्थापना हुई। V. 1100 से अधिक मेधावियों को Laptop, Tablet, साइकिल आदि प्रदान कर सम्मानित किया गया। 3. विशेषज्ञों के उद्धरण (Voices of Wisdom): I. "डिजिटल साक्षरता केवल एक कौशल नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी में जीवित रहने के लिए एक आवश्यकता है।" II. "युद्ध का भविष्य केवल प्रौद्योगिकी के बारे में नहीं है, बल्कि यह इस बारे में है कि हम इसे अपने विश्व को आकार देने के लिए कैसे उपयोग करते हैं।" - एश्टन कार्टर, पूर्व अमेरिकी रक्षा सचिव III. "आज के युवा कल के नेता हैं, और उन्हें तेजी से बदलते विश्व की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। - नेल्सन मंडेला अपने देश, अपने समाज और अपने भविष्य की रक्षा के लिए, युवाशक्ति को अब Keyboard और Code से लड़ना है। The battlefield is digital, and the time to prepare is now!! #FutureOfWar #DigitalYudh #CyberShakti #CodeForNation #DigitalDefence #TradeWar

Rajeshwar Singh

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बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरतापूर्ण अत्याचार हो रहे हैं। वहां की अंतरिम सरकार मूक बनकर बैठी है।हिंदुओं पर किए जा रहे भयानक हिंसक आक्रमणों से संपूर्ण विश्व के हिंदू समुदाय में भारी रोष है । हम इन राक्षसी आक्रमणों की घोर निंदा करते हैं । इन दानवी घटनाओं से हम सभी विचलित हैं । बांग्लादेश की अंतरिम सरकार हिंदुओं पर किए जा रहे हिंसक आक्रमणों को रोकने के लिये तथा हिन्दू समुदाय को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अविलंब कठोर कार्यवाही करे | हम संयुक्त राष्ट्र संघ UNO एवं मानवाधिकारों के लिये कार्य करने वाले समस्त वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से अपील करते हैं कि इस वीभत्स हिंसक घटनाओं पर तत्काल संज्ञान लें और बंगलादेश के हिन्दुओं की सुरक्षा तथा उनके हितों की रक्षा के लिए अपना प्रभावी स्वर पैदा कर आगे आएँ । इन घटनाओं पर भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास गंभीर हैं । Hindus are being brutally persecuted in Bangladesh. The interim government there is sitting mute. There is huge anger among the Hindu community all over the world due to the horrific violent attacks on Hindus. We strongly condemn these demonic attacks. We are all disturbed by these demonic incidents. The interim government of Bangladesh should take immediate and strict action to stop the violent attacks on Hindus and to provide security to the Hindu community. We appeal to the United Nations UNO and all the global human rights organizations working for human rights to take immediate cognizance of these gruesome violent incidents and come forward to raise their effective voice for the safety and protection of the interests of Hindus of Bangladesh. The efforts being made by the Government of India on these incidents are serious. PMO India गृहमंत्री कार्यालय, HMO India Rajnath Singh RSS Vishva Hindu Parishad -VHP इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र (IVSK Delhi) United Nations United NationsHumanRights United Nations_HRC

Swami Avdheshanand

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प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, भारत सरकार विषय – महिला दिवस पर महिला सहकर्मी पत्रकारों के सम्मान-स्वाभिमान के लिए न्यूज इंडिया 24/7 न्यूज चैनल के प्रबंधन की पात्रता की गहरी पड़ताल के संदर्भ में. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, देश-दुनिया में महिलाओं के सशक्तिकरण, योगदान, उपलब्धि, सुरक्षा, सम्मान और संभावनाओं का सामूहिक मंगलगान है. स्वावलंबन औऱ स्वाभिमान से भरी आधी आबादी के समुचित औऱ सार्थक योगदान को रेखांकित करने का दिवस. उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने का वैश्विक संकल्प भी. लेकिन आज मैं देश की कुछ योग्य, स्वाभिमानी औऱ कर्मठ महिला पत्रकार सहकर्मियों की पीड़ा आपके सामने रखने आया हूं. यह खुला पत्र अनुशासन औऱ ईमानदारी के ढाई दशक से अधिक के मेरे पत्रकारीय जीवन की सबसे अराजक, पीड़ादायक और भयावह घटना का सार्वजनिक पाठ भी है. तस्वीर साफ करने और मूल बात की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए इसे मैं कुछ प्वांयट्स में रख रहा हूं. 1- न्यूज इंडिया 24/7 न्यूज चैनल के चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा उर्फ शालू पंडित के कई बार के अनुरोध और स्वतंत्र रुप से काम करने के भरोसे के बाद मैंने 25 दिसंबर 2025 को बतौर इडिटर इन चीफ चैनल को ज्वॉयन किया. इस चैनल का दफ्तर सेक्टर 63, नोएडा, गौतमबुद्धनगर, यूपी में है. ज्वॉयन करने के बाद मुझे चैनल की अव्यवस्था औऱ शैलेंद्र शर्मा के मनमाने तरीके से चैनल चलाने के रवैये की जानकारी होने लगी. चूंकि मैंने संपादकीय अधिकार औऱ दायित्व के साथ कभी समझौता नहीं किया, इसलिए चैनल को व्यस्थित ढंग से चलाने और खबरों की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए हर अनावश्यक दखल से चैनल को मुक्त रखने का प्रयास करने लगा. 2- इस दौरान कई नियुक्तियां हुईँ. उनमें महिला एंकर, रिपोर्टर औऱ प्रोड्यूसर भी रहीं. लगभग डेढ महीना पूरा होते होते-होते शैलेंद्र शर्मा ने यह कहना शुरु कर दिया कि जितने भी लोग हायर किए गए हैं, वे अपने पेपर जमा नहीं कर रहे हैं. सच्चाई यह थी कि सबों ने एचआर की तरफ से मांगे गए सारे कागजात जमा कर दिए थे. इसके बाद उन्होंने इस बात पर तकरार शुरु कर दी कि ज्यादातर लोगों के दिए कागजात फर्जी हैं. इनमें उन्होंने महिला पत्रकारों को खास तौर से निशाने पर लिया. मैंने सभी साथियों से व्यक्तिगत रुप से मिलकर उनके जरिए दिए गए पेपर्स की वैधता सुनिश्चित की. एचआर इन बैठकों में रहा. दो-तीन अपवाद के मामलों को मैंने वहीं निपटा भी दिया. मगर इस दौरान रात-विरात कई लोगों को टर्मिनेशन या फिर कागजों के पूरा नहीं होने पर सेवा समाप्त किए जाने के कंपनी नियमों के खिलाफ, मेल आते रहे. मेरी महिला साथी इससे ज्यादा आहत और प्रताड़ित महसूस करती रहीं. 3- मैंने संपादक होने के नाते शैलेंद्र शर्मा उर्फ शालू पंडित के इस अराजक औऱ अवैध तरीके पर सवाल उठाया औऱ उनको सलाह दी कि अगर आपको कागजात चेक ही करवाने हैं तो बेहतर है ऑडिट करवा लीजिए. मगर ऐसा नहीं करके उन्होंने एचआर से आधी रात के बाद रात 2.43 बजे एक मैसेज जेनरेट करवाया कि 26 फरवरी को सुबह 11.30 बजे चेयरमैन ने मीटिंग बुलाई है. 4- 26 फरवरी 2026 को शैलेंद्र शर्मा अपने प्राइवेट सुरक्षागार्ड औऱ एक पुलिसगार्ड के साथ न्यूजरुम में आए. पूरे न्यूजरुम स्टाफ को उन्होंने चारों ओर जमा किया. बीच न्यूजरुम टेबल लगवाया औऱ जितने लोग हायर किए गए थे उनमें से अधिकतर की फाइलें टेबल पर रखवाईं. संपादक होने के नाते मैं भी अपने रुम से निकलकर वहां आ चुका था. मैंने अपने 28 साल के करियर में ऐसा डरावना माहौल औऱ ऐसा आक्रामक-अभद्र व्यवहार चैनल के अंदर नहीं देखा. शैलेंद्र शर्मा ने मेरे एक सीनियर कलीग के साथ जिस तू-तड़ाक और दोयम दर्जे की भाषा में बात करनी शुरु की, उसने खड़े सभी सहकर्मियों को आक्रांत कर दिया. किसी भी व्यवस्था में मुद्दे, असहमति या विरोध हो सकते हैं, लेकिन उन पर चर्चा करने और निपटारे के कुछ तरीके होते हैं. वे निरंकुश, अपमानजनक और भयावह नहीं हो सकते. 5- इसके बाद उन्होंने अपने निजी गार्ड से वीडियो बनावाना शुरु किया औऱ यह कहना भी कि ये फाइलें जितने लोगों की हैं, उन्होंने पेपर जमा नहीं किए हैं, इनकी गारंटी कंपनी नहीं लेती है औऱ इनको सैलरी राणा जी देंगे. मैंने वहां भी इसका विरोध किया औऱ कहा कि हायर किए लोग इसी इंडस्ट्री के हैं, उन्होंने अपने सारे पेपर जमा किए हैं औऱ एचआर के साथ मैंने खुद इसको चेक किया है. घटना के तुरंत बाद वह वीडियो शैलेंद्र शर्मा ने सोशल मीडिया पर डलवाया. उनकी मंशा ताकत का भय पैदा करने औऱ निरंकुश तरीके से न्यूज चैनल चलाने का संदेश देने की थी. वह वीडियो मैं यहां संलग्न कर रहा हूं. 6- क्या कोई भी संस्थान यह बता सकता है कि- जिन लोगों को काम करने के लिए बायोमेट्रिक एंट्री दी गई, उनका ड्यूटी शेड्यूल तैयार करवाया गया, उनसे काम लिया गया - डेढ महीने बाद वह संस्थान किस आधार पर उन कर्मचारियों के डॉकयूमेंट को फर्जी बताते हुए उनको रातों रात टर्मिनेट कर सकता है या फिर काम करने से रोक सकता है? उनको वेतन देने से मना कर सकता है? यह व्यवहार अवांछित, मनमाना तो है ही क्या अवैध भी नहीं है? 7- प्रधानमंत्री जी, मैंने आपका इंटरव्यू लिया है. देश औऱ समाज के प्रति मेरी पत्रकारिता के लिए आपकी तरफ से मुझे प्रशस्ति-पत्र भी भेजा गया. पत्रकारिता के क्षेत्र में मेरे योगदान पर प्रतिष्ठित पुरस्कारों की मुहर है. औऱ मैंने डेढ दशकों से अधिक के संपादकीय दायित्व के साथ सार्थक औऱ सकारकात्मक पत्रकारिता की है. जीवन में अनुशासन, ईमानदारी, पत्रकारीय मर्यादा और सम्मानजनक व्यवहार को मैंने ना सिर्फ बरता है बल्कि सामनेवाले से अपेक्षा भी की है. 8- इस घटना ने ना सिर्फ मुझे मानसिक रुप से आहत किया है बल्कि न्यूज चैनलों के गलत हाथों में जाने के खतरे से भी अवगत कराया है. मीडिया संस्थान देश औऱ समाज के कई तरह के दायित्वबोध के साथ चलते हैं. वे लोकतंत्र का आवश्यक अंग हैं. उनका मालिकाना हक रखनेवालों की पात्रता की गहरी पड़ताल अनिवार्य है. क्षुद्र स्वार्थों की पूर्ति के लिए चैनल को औजार समझनेवाले और संदेहास्पद पृष्ठभूमि के लोगों को लाइसेंस देना, संस्थान में काम करनेवाले पत्रकारों के सम्मान औऱ सुरक्षा तक के लिए घातक है. इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. ऊपर मैंने जिस मूल चिंता की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करने की बात लिखी है, वह यही है. 9- अपने महिला सहकर्मियों के नाम मैं यहां जान बूझकर नहीं लिख रहा हूं. इसमें उनकी भी सहमति है. मैं, महिला औऱ पुरुष सभी साथियों के अधिकार औऱ स्वाभिमान के लिए देश के संविधान और कानून के दायरे में जो भी उचित है, उसकी लड़ाई लड़ रहा हूं औऱ लड़ूंगा. लेकिन मेरा आग्रह यह है कि देश में मीडिया संस्थानों की गरिमा, पत्रकारिता की मर्यादा औऱ पत्रकारों के सम्मानजनक तरीके से काम करने का इकोसिस्टम बनाए रखने के लिए न्यूज चैनल मालिकों की पात्रता और योग्यता अवश्य सुनिश्चित की जाए. आपका राणा यशवंत Narendra Modi PMO India Ministry of Information and Broadcasting Ashwini Vaishnaw गृहमंत्री कार्यालय, HMO India Yogi Adityanath Office Yogi Adityanath CM Office, GoUP

Rana Yashwant

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संतों को पता है “फर्जी शंकराचार्य” है, भक्तों को कुचलने के लिए “रथ” पर जाना चाहता था। अविमुक्तेश्वरानंद खुलेआम योगी जी के लिए तू तड़ाक बोल रहे हैं, योगी को संत मानने से इंकार कर रहे हैं। योगी जी के खिलाफ इतना एजेंडा सपा, कांग्रेस, बसपा और पूरा INDI गठबंधन नहीं चला सका है, जितना एजेंडा ये “फर्जी शंकराचार्य” चला रहे हैं! जब पालघर में साधुओं को मारा गया तो अविमुक्तेश्वरानंद चुप रहे और BJP की सरकार बनी तो कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उद्धव ठाकरे CM नहीं रहे? - CAA कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के मुस्लिमों को भी भारत की नागरिकता देने की मांग की- -अतीक अहमद और अशरफ के वध की न्यायिक जांच की मांग की - बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की ताकि BJP-NDA सरकार को हराया जा सके - मुर्शिदाबाद में हिंदुओं पर अत्याचार और पलायन पर शांतिप्रिय दंगाइयों को क्लीन चिट दी और इसे कानून व्यवस्था का मामला कहा - सनातन धर्म को डेंगू ,मलेरिया बताने वाले INDI गठबंधन के नेताओं का समर्थन किया - महाकुंभ के दौरान कहा कि हमारा CM झूठा है और योगी आदित्यनाथ को इस्तीफ़ा देना चाहिए देश में 4 शंकर पीठें हैं लेकिन सिर्फ ये तथाकथित शंकराचार्य ही लगातार सुर्खियों में क्यों रहते हैं ? माघमेला में पुरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद जी भी गए हैं लेकिन कहीं कोई बवाल नहीं हुआ सभी अखाड़ों, हजारों संतों ने स्नान किया लेकिन कहीं कोई बवाल नहीं हुआ करोड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान किया लेकिन कहीं कोई बवाल नहीं हुआ और जैसे ही अविमुक्तेश्वरानंद पहुंचे तो बवाल हो गया अविमुक्तेश्वरानंद के बड़बोलेपन का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि इनके समर्थन में 100 लोग भी प्रयागराज में खड़े नहीं हुए जबकि योगी जी के समर्थन में करोड़ों लोग खड़े हुए हैं अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे उन्होंने योगी आदित्यनाथ को UP की सत्ता से बाहर करने की सुपारी ले ली हो कल रात उन्होंने अखिलेश यादव से फ़ोन पर बात भी की और इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाला गया अब तथाकथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी 2027 में हिंदू वीर शिरोमणि अखिलेश यादव के साथ मिलकर हिंदू द्रोही योगी आदित्यनाथ को सत्ता से बाहर करने के लिए अभियान चलाएंगे अविमुक्तेश्वरानंद का ईगो देखिए बिना प्रशासन को भरोसे में लिए ये स्वयंभू धनकराचार्य रथ पर सवार होकर और अपने साथ भीड़ लेकर संगम नोज की तरफ निकल पड़े पुल नंबर दो बंद था लेकिन इन्होंने व इनके शिष्यों ने जबरन पुल नंबर दो खोल दिया और उसी पुल से रथ पर सवार होकर संगम नोज की तरफ चले गए अब जाता सोचिए, बंद पुल को इनके समर्थकों ने क्यों खोला ? अगर वहां भगदड़ हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता ? भगदड़ में श्रद्धालु मारे जाते तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता ? प्रशासन ने जिस पुल को बंद किया हुआ है, जबरन उस पुल को खोलना क्या सीधे-सीधे अराजकता फैलाना नहीं है ? प्रशासन ने फिर भी इनका सहयोग किया और माहौल बिगाड़ने से बचा लिया तो बाबा जी ने अब नया ड्रामा शुरू कर दिया अविमुक्तेश्वरानंद जी अवैध रास्ते से रथ पर सवार होकर संगम नोज के पास 50 मीटर दूर तक पहुंच गए यहां प्रशासन ने इन्हें रोका और कहा कि महाराज जी, संगम नोज सिर्फ 1 मिनट की दूरी पर है, कृपया रथ से उतारकर पैदल ही संगम नोज तक चलें क्योंकि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ है रथ से चलेंगे तो समस्या हो सकती है बस इतना सुनते ही अविमुक्तेश्वरानंद का ईगो हर्ट हो गया कि मैं पैदल नहीं जाऊंगा, मैं रथ पर ही जाऊंगा करोड़ों श्रद्धालु कष्ट उठाकर माघ मेले में स्नान करने आए हैं लेकिन ये महाराज जी 50 मीटर पैदल नहीं चल सकते, फिर भले उन श्रद्धालुओं को असुविधा हो, भगदड़ हो और वो मर जाएं एक व्यक्ति के नैरेटिव और ईगो के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ की जान के साथ नहीं खेला जा सकता अविमुक्तेश्वरानंद जी एक ऐसा नेरेटिव खड़ा करने का प्रयत्न कर रहे हैं जो ब्राह्मण समाज को 2027 में BJP के खिलाफ खड़ा कर दे और योगी आदित्यनाथ की सत्ता से विदाई हो जाए अगर आप लोगों को लगता है कि योगी जी वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में आपके और हमारे लिए आवश्यक हैं तो कृपया अविमुक्तेश्वरानंद के एजेंडे का शिकार मत होइए ये अवैध शंकराचार्य अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए सनातन को डेंगू/मलेरिया बताने वाले INDI गठबंधन के पक्ष में बैटिंग कर रहे हैं, इससे अधिक कुछ नहीं है

Sudhir Mishra 🇮🇳

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#BharatJodoYatra is a People’s Movement, unequalled in history. As the Yatra completes one year today, on behalf of the Indian National Congress, I congratulate Shri Rahul Gandhi, all Bharat Yatris and the lakhs of our citizens who walked and joined in this historic endeavour. From Kanyakumari to Kashmir, Bharat Jodo Yatra covered more than 4000 Kms and carried a message of unity in diversity, with lakhs of people from all walks of life. The trend of manufacturing irrelevant headlines to divert attention from the real issues of people to hide the agenda of hate and division is a systemic attack on our collective conscience. The Yatra seeks to bring real issues of economic inequalities, price rise, unemployment, social injustices, subversion of Constitution, centralisation of power, to the centre stage of people’s imagination. The Yatra continues to fight the menace of hate and hostility in our society through a conversation. The Bharat Jodo Yatra is not just a physical endeavour, it is a sincere effort to rebuild our broken collective conscience. Our ingrained values of Justice, Liberty Equality, and Fraternity, for us, are supreme. The Congress party is continuously reaching out to people in an endeavour to reclaim our Constitution and protect our Democracy. Today, Bharat Jodo Yatra continues...🇮🇳 *** #BharatJodoYatra - एक राष्ट्रीय जन-आंदोलन है, जो इतिहास में अद्वितीय है। आज यात्रा के एक वर्ष पूरा होने पर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से, मैं श्री Rahul Gandhi, सभी भारत यात्रियों और हमारे लाखों नागरिकों को बधाई देता हूँ जो इस यात्रा में शामिल हुए। कन्याकुमारी से कश्मीर तक, भारत जोड़ो यात्रा ने 4000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के साथ विविधता में एकता के लिए संवाद स्थापित किया। नफ़रत और विभाजन के एजेंडे को छिपाने के लिए, लोगों के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए, अप्रासंगिक सुर्खियां बनाने की प्रवृत्ति हमारी सामूहिक चेतना पर एक सोचा-समझा प्रहार है। यात्रा आर्थिक असमानताओं, महँगाई, बेरोज़गारी, सामाजिक अन्याय, संविधान के विध्वंस, सत्ता के केंद्रीकरण के वास्तविक मुद्दों को लोगों की कल्पना के केंद्र में लाने का प्रयास करती है। यह यात्रा लोगों की भागीदारी के माध्यम से हमारे समाज में नफ़रत और शत्रुता के खतरे से लड़ने के लिए जारी है। भारत जोड़ो यात्रा सिर्फ एक भौतिक प्रयास नहीं है, यह हमारी टूटी हुई सामूहिक चेतना को फिर से बनाने का एक ईमानदार प्रयास है। हमारे लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के हमारे संवैधानिक मूल्य सर्वोच्च हैं। कांग्रेस पार्टी, हमारे संविधान की रक्षा और हमारे लोकतंत्र की सुरक्षा करने के प्रयास में लगातार लोगों तक पहुंच रही है। आज भी, भारत जोड़ो यात्रा जारी है...🇮🇳

Mallikarjun Kharge

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