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Proposed amendments to RTI Act through #DataProtection bill will be a blow to peoples right to information. We oppose these amendments. #डेटाप्रोटेक्शन बिल के माध्यम से आरटीआई अधिनियम में संशोधन लोगों के सूचना के अधिकार पर प्रहार होगा। हम इन संशोधनों का विरोध करते हैं #SaveRTI

10 Kommentare

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SurendraNathvor 3 Jahren

@t_d_h_nair Yes,we must oppose such illegal proposed amendments to RTAct as it will deprive citizens from getting informations.

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Dr.vor 3 Jahren

What i do in this ? How can I help in this. Really it's serious issue for rights :(

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Pracheta Bvor 3 Jahren

Regressive move. All the good work to bring RTI has been slowly killed. This is the last nail. #SaveRTI

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Uday Newalkarvor 3 Jahren

@pbhushan1 Government is passing all the bills they want. Opposition is immaterial/irrelevant for them.

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Chitpriyavor 3 Jahren

No transparency, accountability, blatant abuse of power leads to what?? Modi age democracy!

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Rajesh Agrawalvor 3 Jahren

Nowadays RTI is being paid deaf ears. Need a strong order and support to save RTI #SaveRTI Maam after a long time you here. @AadhikarRamesh @Jagdish_RTI

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Manish | Creating, without hustle. 🧘🏽‍♂️vor 3 Jahren

Please translate or subtitle this in English as well. 🙏🏽

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Manoj Warriervor 3 Jahren

This is the real face of BJP - regressive and corrupt than all the previous governments put together!

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Suraj S Dubeyvor 3 Jahren

This must be stopped #SaveRTI #DataProtectionBill @PMOIndia

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Saffron_Phoenixvor 3 Jahren

Have you take Money From Big Tech to peddlers this lies, Data protection Act is a Need to the hour and has gone through various consulting from stakeholders, you should have participated instead of peddling this.

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सूचना का अधिकार = सूचना ना देने का अधिकार? • RTI पर इससे पहले कभी इतना हमला नहीं हुआ जो अब हो रहा है - अगर मोदी सरकार की चली तो सूचना का अधिकार सूचना देने के बजाय सूचना ना देने का अधिकार बन सकता है। संभव है कि अब आपको सरकार से मांगी जानकारी भी न मिले। आगे पढ़िए 👉 RTI पर हमला कैसे हो रहा है? डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act), 2023 के तहत RTI की धारा 8(1)(j) में संशोधन से RTI निरर्थक और निष्प्रभावी हो गया है 👉 मोदी ने RTI को कमजोर करने के लिए क्या किया है? • सरकार ने RTI Act की धारा 8(1)(j) में संशोधन किया है जो व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित है। बदले हुए नियम के अनुसार RTI के तहत कोई भी व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी जा सकती • यह गोपनीयता की आड़ में सूचना ना देने के अलावा और कुछ नहीं है 👉 DPDP एक्ट पर अब हंगामा क्यों? • मोदी सरकार ने 2023 में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP एक्ट) पारित किया था, जब विपक्ष के अधिकांश सांसदों को निलंबित कर दिया गया था • सरकार ने अब तक नियमों को नोटिफाई नहीं किया था और बदलावों को सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा था, जिसकी समय सीमा आज समाप्त हो रही है • अगर सरकार सब की चिंताओं को नज़रअंदाज़ करके नियमों को अधिसूचित करती है तो RTI एक शक्तिहीन अधिकार बन जाएगा जिसका लोगों को कोई फायदा नहीं होगा 👉 RTI क्यों महत्वपूर्ण है? • सूचना का अधिकार अधिनियम क्रांतिकारी था, इसने नागरिकों को जवाब और सूचना मांगने का अधिकार देकर उन्हें सशक्त बनाया • RTI ने शासन को पारदर्शी और सरकारों को अधिक जवाबदेह भी बनाया - ठीक वैसे ही जैसे किसी भी लोकतंत्र में होना चाहिए • RTI ने बार-बार बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार या नीतियों में खामियों को उजागर किया है • RTI ने नियमों और मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर किया है • RTI ने शक्तिहीन नागरिकों को शक्तिशाली बनाया 👉 क्या RTI वास्तव में व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करता है? • बिल्कुल नहीं। अपने मूल रूप में, RTI अधिनियम 2005 की धारा 8(1) (j) में स्पष्ट रूप से व्यक्तिगत जानकारी को रोकने का प्रावधान था • नियम था कि जो भी जानकारी किसी सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से संबंधित नहीं है या जो निजीता का उल्लंघन करे, वो जानकारी सार्वजनिक ना हो 👉 तो RTI के तहत अब किस तरह की जानकारी देने से मना किया जा सकता है? • अरबपति विलफुल डिफॉल्टर्स के नाम और डिफॉल्ट राशि? • भारत से भाग गए विलफुल डिफॉल्टर/ अरबपति भगौड़े? • बैंकों ने किन बड़े बड़े पूंजीपतियों के और कितने के लोन माफ किए हैं? • मनरेगा के तहत कितने लोगों को कितने दिन का काम दिया है? • PDS के तहत राशन दुकानों से किसको और कितना अनाज वितरित किया गया? • मतदाता सूची में किसके नाम जोड़े या हटाए गए? • जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों और न्यायाधीशों की आय और संपत्ति? • सरकारी योजनाओं के लाभार्थी? 👉 क्या पारदर्शिता और निजिता में परस्पर विरोध है? • नहीं. हमारे जैसे संवैधानिक लोकतंत्र में पारदर्शिता और निजिता में परस्पर विरोध नहीं हैं, बल्कि दोनों ही मौलिक मतलब फंडामेंटल अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी हैं 👉 नागरिक या प्रजा? • DPDP अधिनियम, 2023 के तहत RTI अधिनियम, 2005 को कमजोर करना पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सीधा हमला है जो सूचना के मौलिक अधिकार को खतरे में डालता है। हम भारत के नागरिक हैं जिन्हें हर चीज़ जानने का अधिकार है, न कि किसी राजा की प्रजा जिनको सिर्फ़ जयकारा लगाना है!

Supriya Shrinate

85,242 Aufrufe • vor 1 Jahr

आज से ठीक 20 साल पहले ऐतिहासिक सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम पूरी तरह लागू हुआ था। यह 2005 से 2013 के बीच लागू किए गए उन परिवर्तनकारी अधिकार-आधारित क़ानूनों की श्रृंखला की शुरुआत थी -जिनमें ग्रामीण रोज़गार, आदिवासियों के अधिकार, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण से जुड़े क़ानून शामिल थे। RTI का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और प्रशासन के हर स्तर पर पारदर्शिता की संस्कृति लाना था। लेकिन मई 2014 के बाद से इसे कमजोर करने की एक सुनियोजित और लगातार कोशिश की जा रही है। सबसे पहले, जुलाई 2019 में RTI अधिनियम में बड़े संशोधन संसद में जबरन पारित किए गए। मैंने 25 जुलाई 2019 को राज्यसभा में इन संशोधनों का विरोध किया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट में इन्हें चुनौती भी दी थी। दुर्भाग्य से, यह याचिका छह साल बाद भी लंबित है। इसके बाद, ज़ोर-ज़बरदस्ती से डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम संसद से पारित कर अगस्त 2023 में लागू कर दिया गया। 23 मार्च 2025 को मैंने संबंधित मंत्री को यह बताया था कि यह नया क़ानून RTI अधिनियम को और भी अप्रासंगिक बना देगा। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), जो RTI अधिनियम के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी निभाता है, आज केवल दो आयुक्तों के साथ काम कर रहा है। इसके प्रमुख सहित नौ पद रिक्त हैं। मोदी सरकार के लिए RTI का मतलब अब Readiness To Intimidate -यानी 'धमकाने की तत्परता' रह गया है।

Jairam Ramesh

18,827 Aufrufe • vor 10 Monaten

मैं विकेश नेगी को निजी तौर पर नहीं जानता. देहरादून की पुलिस ने उन्हें छह महीने के लिए जिला बदर कर दिया. पुलिस के अनुसार वो आदतन अपराधियों और शातिर किस्म के अपराधियों को जिला बदर करती है. लेकिन सार्वजनिक रूप से विकेश नेगी के बारे में जो जानकारी उपलब्ध है, उसके अनुसार वो एडवोकेट हैं. बीते कुछ अरसे से वे देहरादून में सरकारी जमीनें खुर्द-बुर्द किये जाने का खुलासा सूचना अधिकार कानून के जरिये कर रहे थे. देहरादून के निवर्तमान मेयर सुनील उनियाल गामा और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के आय से अधिक संपत्ति के मामले का आरटीआई के जरिये खुलासा करने का दावा विकेश नेगी ने किया. सैन्य धाम के निर्माण में घोटाले का खुलासा भी आरटीआई के जरिये विकेश नेगी ने किया. इसलिए संदेह पैदा होता है कि विकेश नेगी पर कार्यवाही का आधार उन पर दर्ज मुकदमे हैं या कार्यवाही इसलिए की गयी है क्योंकि सूचना अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों के जरिये वे उच्च पदों पर बैठे लोगों और जमीन के धंधेबाजों के लिए परेशानी पैदा कर रहे थे? लगता तो यही है कि यदि वे सूचना अधिकार के जरिये सरकार सत्ता में बैठे लोगों को असहज न करते तो मुमकिन था कि उन पर दर्ज मुकदमें, उन्हें जिले से बाहर नहीं निकलवा पाते ! शासन- प्रशासन और कानून के पहरुओं को कम से कम बदले की भावना से तो कार्यवाही नहीं करनी चाहिए.

Indresh Maikhuri

13,385 Aufrufe • vor 2 Jahren

लोकेशन : पुणे ,महाराष्ट्र दिनांक : 10 मई आरएसएस के सदस्यों ने फिलिस्तीन समर्थक छात्र और युवा कार्यकर्ताओं पर हमला किया और महिलाओं के साथ बदसुलूकी की। पुणे के कर्वे नगर में आरएसएस सदस्यों ने फिलिस्तीन के साथ एकजुटता में भारतीय लोगों और बीडीएस इंडिया के कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों पर हमला किया और उनके साथ मारपीट की। वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे और पर्चे बांट रहे थे। वे लोगों से फिलिस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता में खड़े होने और गाजा के नरसंहार का विरोध करने का आह्वान कर रहे थे। इंडियन पीपल इन सॉलिडरिटी विथ पलेस्टाइन की तरफ से लोगों ने डोमिनोज पिज्जा और अन्य सभी ब्रांडों और कंपनियों का बहिष्कार करने का आह्वान कर रहे थे, जो फिलिस्तीन के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद हैं। हम सभी जागरूक नागरिकों से फासीवादियों की गुंडागर्दी का विरोध करने और फिलिस्तीन के लोगों के न्यायपूर्ण संघर्ष के समर्थन में मजबूती से खड़े होने का आह्वान करते हैं।

The Muslim

25,048 Aufrufe • vor 1 Jahr

जो डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट पास हुआ, उसमें एक बहुत ही खतरनाक सेक्शन है- Section 44(3), जो RTI एक्ट के Section 8(1)(j) को ही संशोधित कर रहा है। सबसे बड़ी बात ये है कि डेटा प्रोटेक्शन बिल ने RTI Act की धज्जियां उड़ा दी हैं। इसमें कहा गया है कि अगर RTI में ऐसी कोई जानकारी मांगी गई है, जिसका जनहित से कोई सरोकार नहीं है, तो उसका जवाब देना अनिवार्य नहीं है। जैसे- अगर आप जानना चाहते हैं कि बिहार में जो पुल टूट गए थे, उनके टेंडर अधिकारियों ने किस कॉन्ट्रैक्टर को दिए थे- तो इस एक्ट के जरिए सूचना और जानकारी का अधिकार साजिशन आपसे छीन लिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री को हमारा सुझाव है कि Section 44(3) को डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट से हटा दिया जाए। हमारे इस पिटीशन पर विपक्षी दलों के करीब 120 नेताओं के हस्ताक्षर हैं। हम जल्द ही इसे मंत्रालय में भेजेंगे। आशा है कि सरकार इस बिल के बारे में गंभीरता से विचार करेगी और हमारे सुझावों पर ध्यान देगी, क्योंकि हमारे इन सुझावों से मूल डेटा प्रोटेक्शन बिल पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट से Section 44(3) हटाकर, हम RTI एक्ट की आत्मा को बचा पाएंगे। : Gaurav Gogoi ji

Congress

19,077 Aufrufe • vor 1 Jahr

वक्फ बिल संशोधन क्यों जरूरी था? अहमदाबाद की एक घटना ने वक्फ बिल संशोधन की महत्ता को उजागर किया है। अहमदाबाद में काँच की मस्जिद के पास 5000 स्क्वेयर मीटर की वक्फ़ प्रॉपर्टी, जिसकी कीमत 100 करोड़ है, का दुरुपयोग किया गया। कुछ लोगों ने न केवल सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया और इसे व्यावसायिक उपयोग में लाया, बल्कि अपने लोगों को भी धोखा दिया, जिनके लिए यह जमीन दी गई थी। इन लोगों ने वक्फ़ जमीन पर 100 से अधिक मकान बना दिए और प्रति घर 6 हजार रुपये महीने का किराया वसूला। 2008 में, पास की उर्दू स्कूल को रेनोवेट करने के लिए कहा गया था, लेकिन वहां दुकानें बना दी गईं और 10 हजार रुपये महीने का किराया वसूला गया। पुलिस ने सलीम खान पठान समेत 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह घटना वक्फ़ प्रॉपर्टी के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को उजागर करती है और वक्फ़ बिल संशोधन की आवश्यकता को दर्शाती है। ये वही लोग हैं जो वक्फ के नाम पर खुद का कारोबार चलाते हैं, कुछ दिन पहले अहमदाबाद में उन्होंने वक्फ बिल का विरोध भी किया था, न समाज के लिए, बल्कि अपनी खुद की आय के लिए। १०० करोड़ से ज़्यादा का सरकार और मुस्लिम समाज के पैसे का ये भ्रष्टाचार उजागर करना जरूरी है।

Harsh Sanghavi

11,828 Aufrufe • vor 1 Jahr

पिछले 2 हफ़्ते से संसद चल नहीं पा रही। हर दिन के सत्र के लिए टैक्सपेयर्स के करोड़ों रुपये खर्च होते हैं और वे चाहते हैं कि उनके मुद्दे हम संसद में उठाएँ, उनपर बहस हो, समस्याओं का हल हो। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसद देश के दूर-दूर के कोनों से अपने लोगों की बात रखने आते हैं। करोड़ों लोगों की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करते हैं। दिन का सत्र शुरू होते ही विपक्ष के कुछ लोग ज़ोर ज़ोर से नारेबाज़ी, टेबल पीटना, तालियाँ बजाना और चिल्लाना शुरू कर देते हैं। अगर संसद चलने दें, तो अपने मुद्दे विपक्ष Zero Hour, Question Hour, bill discussion, special mention में भी रख सकते हैं। इस तरह हर दिन हाउस को ना चलने देना भारत की संसद की गरिमा के ख़िलाफ़ है। प्रोटेस्ट आपका अधिकार है और मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछना आपका कर्तव्य, लेकिन इस तरह संसद में ये सब करके आप किसका भला कर रहे हैं? सारा देश हमें देख रहा है, हम उस सदन में बैठे हैं जहां देश के कई सबसे महान नेता कभी बैठते थे उन्होंने देश के विकास की नींव रखी। It’s my request, please allow the Parliament to function!

Swati Maliwal

86,208 Aufrufe • vor 5 Tagen

हम जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों के खिलाफ हो रहे दमनकारी एवं अलोकतांत्रिक कृत्यों की घोर निंदा करते हैं। एक शिक्षण संस्थान, जो विचारों की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की आज़ादी का प्रतीक होना चाहिए, वहां छात्रों की आवाज़ को कुचलने के लिए 50,000 रुपये का आर्थिक दंड लगाना अस्वीकार्य है। छात्रों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जामिया प्रशासन द्वारा इस अधिकार का हनन करना और विरोध करने वाले छात्रों को गार्डों और पुलिस के माध्यम से डराना-धमकाना न केवल शर्मनाक है, बल्कि एक गंभीर आपत्तिजनक कृत्य भी है। हम प्रशासन द्वारा छात्रों को पिटवाने और पुलिस के माध्यम से उन्हें जबरन उठाने जैसी घटनाओं की कड़ी भर्त्सना करते हैं। यह पहली बार नहीं हो रहा है; पिछले कुछ समय से लगातार छात्रों पर इस प्रकार की कार्रवाई हो रही है, जिससे परिसर का लोकतांत्रिक और शैक्षणिक माहौल बाधित हो रहा है। हम Jamia Millia Islamia (NAAC A++ Grade Central Univ) प्रशासन से मांग करते हैं कि— 1. विश्वविद्यालय प्रशासन तत्काल इस दमनकारी नीति को वापस ले। 2. जिन छात्रों को हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। 3. छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनके संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाए। 4. प्रशासन लोकतांत्रिक संवाद स्थापित करे और छात्र हितों के लिए सकारात्मक कदम उठाए। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी तानाशाही नीतियों पर अड़ा रहता है, तो हम छात्रों के हित में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

Chandra Shekhar Aazad

33,912 Aufrufe • vor 1 Jahr

INDIA पार्टियों ने राज्य सभा से इसलिए walk-out किया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी जी झूठ बोल रहे थे। वे कहते हैं कि हम संविधान के विरोध में हैं, बल्कि सच्चाई यह है कि BJP-RSS, जनसंघ और उनके राजनीतिक पुरखों ने भारत के संविधान का जमकर विरोध किया था। उन लोगों ने डॉ बाबासाहेब अंबेडकर व पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के उस समय पुतले फूंके थे। ये शर्मनाक बात थी। सच्चाई ये है कि डॉ बाबासाहेब अंबेडकर ने संविधान के प्रारूप बनाने का श्रेय कांग्रेस को दिया था। मुझे ये दो बातें भारत की जनता को सदन के माध्यम से बतानी थी। 1) RSS के मुखपत्र Organiser ने 30 नवंबर, 1949 के अंक में संपादकीय में लिखा था कि — “भारत के इस नए संविधान की सबसे बुरी बात यह है कि इसमे भारतीय कुछ भी नहीं है... प्राचीन भारत के अ‌द्भुत संवैधानिक विकास के बारे में इसमें कोई ज़िक्र ही नहीं है... आज तक मनुस्मृति में दर्ज मनु के कानून दुनिया की प्रशंसा का कारण हैं और वे स्वयंस्फूर्त आज्ञाकारिता और अनुरूपता पैदा करते हैं... हमारे संवैधानिक विशेषज्ञों के लिए यह सब निरर्थक है।" यहां आरएसएस साफ तौर पर भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता यानी अंबेडकर के विरोध में और मनुस्मृति के समर्थन में खड़ी है। 2) बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर ने संविधान का प्रस्ताव पेश करते हुए कांग्रेस की तारीफ करते हुए 1949 में कहा था कि — 66 मुझे बहुत आश्चर्य हुआ था जब प्रारूप समिति ने मुझे अपना अध्यक्ष चुना। समिति में मुझसे बड़े, मुझसे बेहतर और मुझसे सक्षम लोग थे। यह कांग्रेस पार्टी के अनुशासन का ही कमाल था कि प्रारूप समित, संविधान सभा में संविधान को हर धारा और हर संशोधन के बारे में निश्चित जानकारी के साथ प्रस्तुत कर सकी। इस लिए संविधान सभा के समक्ष, संविधान के प्रारूप को अबाध रूप से प्रस्तुत किए जाने के समस्त श्रेय पर कांग्रेस पार्टी का हक बनता है।“

Mallikarjun Kharge

155,498 Aufrufe • vor 2 Jahren

#NoTetBeforeRteAct संसद द्वारा 1993 में पारित एनसीटीई अधिनियम के तहत देश भर में भर्ती एवं कार्यरत 20 लाख शिक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये निर्णय से नौकरी पर संकट आ गया है ।इसको 6 माह बीतने को हैं लेकिन भारत सरकार अभी भी सोई हुई है ।संसद में केन्द्रीय शिक्षा राज्यमंत्री द्वारा दिए गए जवाब से देश भर के शिक्षकों में नाराज़गी पैदा हुई है और आज पूरे देश में शिक्षक विरोध कर रहे हैं ।लेकिन देश के 20 लाख शिक्षक व उनके परिवार के करोड़ों लोगों का दर्द का निवारण न करके पुलिस द्वारा विरोध का दमन किया जा रहा है ।गाजियाबाद पुलिस द्वारा बहाँ के जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा को विद्यालय में ही नजरबंद करके शिक्षण कार्य करने से भी वंचित कर दिया गया है ।हम गाजियाबाद पुलिस से अपील करते हैं कि दीपक शर्मा को तुरंत प्रभाव मुक्त करें अन्यथा पूरे प्रदेश का शिक्षक गाजियाबाद पहुंचेगा । इनकी इस प्रकार की कार्यवाही से हम डरने वाले नहीं हैं ।हम अपने शिक्षकों की रोजी रोटी बचाने के लिये हर हद तक जायेंगे ।PMO India Narendra Modi Dharmendra Pradhan Jayant Singh POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD Amitabh Agnihotri भारत समाचार | Bharat Samachar AajTak

Dr Dinesh Chandra Sharma

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