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.#ElectoralBondScam पर इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट करने वाली Poonam Agarwal पहली भारतीय पत्रकार हैं , जिन्होंने खुद ये बॉन्ड खरीदा था . पूनम ने पूरी जांच करके बताया है कि #ElectoralBonds में एक यूनिक नंबर होता है , जिसे Ultra Violet Rays में ही देखा जा सकता है . इसका मतलब...

283,548 views • 2 years ago •via X (Twitter)

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पहली बात तो ये कि नरेंद्र मोदी का basic character डरने का नहीं है, डराने का है. उनका 25 साल का record बताता है. चाहे वो चुनाव का मैदान हो या जंग का, नरेंद्र मोदी अपने विरोधी को ठिकाने लगाए बगैर चैन से नहीं बैठते. जिस प्रधानमंत्री ने तीन-तीन बार फौज को पाकिस्तान में घर में घुस कर मारने का आदेश दिया उसे indecisive कैसे कहा जा सकता है? जिसने tank, फौज और Air Force को चीन के सामने सीना तानकर खड़े होने का अवसर दिया, उसे डरपोक कैसे कहा जा सकता है? ढाई घंटे तक फौज को direction ना देने का मतलब ये होता है कि back channel पर बात करके रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है. जब Army Chief से कहा जाए कि 'जो ठीक लगे वो करो' इसका मतलब है कि बातचीत से रास्ता नहीं निकला और फौज को free hand दिया गया. लेकिन अगर लिखने वाले की नीयत में खोट हो, समझने वाले का इरादा नापाक हो, तो राई का पहाड़ बनाया जा सकता है. मुझे तो लगता है कि राहुल गांधी को Parliament में बोलने देना चाहिए था. दुनिया को पता चलता कि वो क्या फालतू की बात कह रहे हैं और नरेंद्र मोदी की image को damage करने के चक्कर में फौज को demoralize कर रहे हैं. #RahulGandhi #IndianArmy #ParliamentSession #AajKiBaat #MyTake

Rajat Sharma

69,782 views • 7 months ago

एक ही घर में 100 वोटर! मध्य प्रदेश से आई रिपोर्ट हिला कर रख देने वाली है!! अब कोई भी आसानी से कल्पना कर सकता है कि बिहार में जो चल रहा है, क्यों चल रहा है, किसके फायदे के लिए चल रहा है। Sanjay sharma के साथ राजनीतिक विश्लेषक अभय दुबे की तीखी टिप्पणी- एक ही पते पर 50-100 वोटर! ये गलती नहीं, pre-planned फर्जीवाड़ा है। सवाल ये भी है कि मध्य प्रदेश की जनता नाराज़ थी, लेकिन BJP जीत कैसे गई थी? अब समझ में आ रहा है—खेल वोटर लिस्ट में था। ये कैसा democracy है? Election Commission क्या कर रहा था? अब खुद ही रिपोर्ट निकालकर कह रहा है—problem है। Public को बेवकूफ समझा गया है क्या? अब सवाल सिर्फ EVM का नहीं है... असल घोटाला तो वोटर लिस्ट में है। जब वोटर ही फर्जी हैं, तो नतीजे कैसे genuine होंगे?

4PM News Network

53,718 views • 1 year ago

अनिल अंबानी का ये रवैया किसी तमाशे से कम नहीं है। ED, यानी प्रवर्तन निदेशालय, उन्हें तीसरी बार समन भेज रही है, और जवाब में वो कहते हैं कि एजेंसी अपनी "सुविधा के मुताबिक" उनका 'वर्चुअल' बयान ले ले या एक 'रिकॉर्डेड वीडियो' से काम चला ले। ये क्या हो रहा है? ये कोई कॉलेज असाइनमेंट नहीं है कि तबीयत खराब होने पर वीडियो सबमिट कर दिया। ये एक गंभीर केंद्रीय जांच है, और इस तरह का ऑफर देना जांच एजेंसी का मज़ाक उड़ाने जैसा है। अब जरा उनके बचाव का आधार देखिए। कहा जा रहा है कि वो अप्रैल 2007 से मार्च 2022 तक, यानी पूरे 15 साल, रिलायंस इंफ्रा में 'नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर' थे। ये तर्क दिया जा रहा है कि वो कंपनी के 'रोज़मर्रा के कामकाज' को नहीं देखते थे। ये कॉरपोरेट जगत का सबसे पुराना और लचर बहाना है। क्या हम मान लें कि 15 साल तक जिस कंपनी के बोर्ड में उनका नाम था, उन्हें पता ही नहीं था कि 2010 में जयपुर-रींगस हाईवे प्रोजेक्ट जैसे बड़े मामले में क्या हो रहा है? ये जिम्मेदारी से भागने का साफ प्रयास है। मामला FEMA (Foreign Exchange Management Act) से जुड़ा है। अब कंपनी का स्टेटमेंट आता है कि ये कॉन्ट्रैक्ट 'पूरी तरह घरेलू' था और इसमें 'विदेशी मुद्रा का कोई लेन-देन' शामिल ही नहीं था। ये तो और भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) का कोई लेना-देना था ही नहीं, तो ED ने FEMA का केस बनाया ही क्यों? क्या एजेंसी बिना किसी तथ्य के 15 साल पुराने मामले की जांच कर रही है? साफ बात ये है कि अगर सब कुछ इतना ही पाक-साफ है, तो अनिल अंबानी को तीसरी बार बुलाए जाने पर सीधे ED के दफ्तर जाकर जांच में सहयोग करने में क्या दिक्कत है? ये 'वर्चुअल' और 'वीडियो' वाली बहानेबाजी उसी पुराने घमंड को दिखाती है, जब उन्हें लगता था कि उनका नाम ही हर कानून से बड़ा है। उन्हें याद रखना चाहिए कि ये कांग्रेस का दौर नहीं, नया भारत है। कानून से ऊपर कोई नहीं है, और इस तरह के नाटक से वो जांच को टाल नहीं सकते।

Akshay Yadav

104,387 views • 10 months ago

📌 सीसीटीवी में कैद ये चौंकाने वाला नज़ारा हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई को सामने लाता है। 🚨 वीडियो में देखा जा सकता है कि एक शख्स, जो हाथ में तलवार लेकर तेज़ी से एक बाइक सवार की तरफ बढ़ता है और उसे मारने की कोशिश करने लगता है... ये घटना किसी दूर-दराज़ जगह की नहीं, बल्कि एक मोहल्ले की है—जहां लोग एक-दूसरे के दुख-सुख में साथ देने के बजाय, दुश्मनी और नफरत में जी रहे हैं। सोचने वाली बात है कि पड़ोसी, जो कभी सबसे करीबी सहयोगी और मददगार माने जाते थे, आज एक-दूसरे के खिलाफ हथियार उठा रहे हैं! छोटी-छोटी बातों से शुरू हुई रंजिशें, नफरत के ऐसे रूप में बदल जाती हैं कि इंसान इंसानियत भूल जाता है। 🏵️ क्या हम सच में इतना बदल गए हैं कि मोहल्ले में प्यार और भाईचारे की जगह डर और बैर ने ले ली है? ये वीडियो हमें आईना दिखाता है कि अगर हम समय रहते अपनी सोच और व्यवहार नहीं बदले, तो आने वाली पीढ़ियां शायद “पड़ोसी” शब्द का मतलब भी भूल जाएंगी। 👤“क्या अनोखा समाज बनाया है हमने” — ये सवाल हम सबको खुद से पूछना चाहिए।

Ganesh

483,410 views • 1 year ago

ढोंगी अशोक ख़रात के केस में SIT जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि ज्योतिष बाबा अशोक खरात जी "Wife Swapping" का धंधा भी किया करता था...!! इसका मतलब है कि: 1. पार्टनर स्वैपिंग सामाजिक और यौन संदर्भ में, पत्नी की अदला-बदली जिसमें गैर-एकल विवाह का एक रूप है जहां प्रतिबद्ध जोड़े अन्य जोड़ों के साथ यौन गतिविधियों में संलग्न होते हैं। उसके केबिन में जब महिला इलाज कराने के लिए आती तो झूमर की लाइट बंद करने का मतलब था कि अब कोई भी केबिन के अंदर न आए उसके केबिन में खास किस्म के शीशे थे जिनमें अंदर से बाहर देखा जा सकता था लेकिन बाहर से अंदर दिखाई नहीं देता था। [1500 से अधिक सीक्रेट नंबर मिले है जिनकी जांच जारी है.. 58 वीडियो की संख्या 150 तक जा पहुंची है। 2018 में 8000 की नौकरी करने वाले धीरज जाधव ने बाबा की खोली पोल। उसने केबिन में हिडेन कैमरा लगाया जिससे वो भी बाबा को और महिलाओं को करता था ब्लैकमेल। उसने बताया बाबा 100 किलो के भाव से इमली के बीज खरीद था और उन्हें पॉलिश करके पीड़िती महिलाओं को 1 लाख रुपए मुट्ठी के हिसाब से बेचा करता था।

Jeetu Besla

84,813 views • 5 months ago