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पहली बात तो ये कि नरेंद्र मोदी का basic character डरने का नहीं है, डराने का है. उनका 25 साल का record बताता है. चाहे वो चुनाव का मैदान हो या जंग का, नरेंद्र मोदी अपने विरोधी को ठिकाने लगाए बगैर चैन से नहीं बैठते. जिस प्रधानमंत्री ने तीन-तीन...

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33 Kommentare

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Rajeev Dhyani•राजीव•راجیو•ਰਾਜੀਵ•রাজীব•రాజీవ్vor 7 Monaten

भक्क The Red

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UPENDRA SINGH BAGHEL (INC)vor 7 Monaten

मुझे अब यकीन हो गया अंग्रेजों ने हिजड़ों की जो फौज बनाई थी, इस पत्रकार के पूर्वज अवश्य उसके कमांडर रहे होंगे! मोदी देश नही है बे दल्ले पत्रकार

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Gaurav Palvor 7 Monaten

यह आदमी भाजपा प्रवक्ताओं की नौकरी खाएगा

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❤️ INDIAN ❤️vor 7 Monaten

पहली बात तो ये कि आपका basic character पत्रकारिता का नहीं है। बेशर्मी की भी हद होती है।

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Skvor 7 Monaten

ऐसे सत्ताखोर पत्रकार अगर सुधरेंगे नहीं तो जनता को इन्हें सड़क पर घेरना चाहिए.. 4थे स्तंभ के नाम पर कलंक बने हुए है ये लालची, पद पैसा प्रतिष्ठा के लोभ में, आतंकवादियों से भी ज्यादा घातक हैं ये देशद्रोही । @narendramodi

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Ashutosh Yadavvor 7 Monaten

प्रधानमंत्री "नरेंद्र मोदी - ना कोई घुसा है, ना कोई घुसा हुआ है! विदेश मंत्री एस जयशंकर- चीन से हम लड़ नहीं सकते, वे बड़ी अर्थव्यवस्था है "विदेश मंत्रालय"- चीन ने हमारे इलाके में दो गांव बसा लिए है! अब दलाल मीडिया के चाटुकार कहेंगे कि यही तो प्रधानमंत्री का मास्टर स्ट्रोक है!

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Pt. Mukesh Tiwarivor 7 Monaten

तुम मोदी के प्रवक्ता हो क्या...? 60 मासिक पराठा वाले....? फिर संसद से क्यों भग गए दुम दबाकर....?

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रवि जाँगल गुर्जरvor 7 Monaten

पहली बात तो ये की रजत बेशर्मा का बेसिक करेक्टर डरने की वजह से भाजपा के जूते चाटने का नहीं है उसका 25 साल का दलाली का रिकॉर्ड बताता है की ये पैसे के लालच मे दलाल बना हुआ है

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Avinash Kumarvor 7 Monaten

🤣🤣 वो तो देश देख रहा है दलाल। अब कितना भी दलाली कर के शेर साबित करने की कोशिश करो, आखिर गीदड़ गीदड़ ही रहता है। चलो एक बात बता दो, सेना अध्यक्ष नरवणे का बुक रिलीज क्यों नहीं होने देता है?

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Ankur Gautamvor 7 Monaten

लेकिन तू पत्रकार होकर सत्ता की चाटुकारिता क्यों कर रहा है लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की कुछ तो लाज रख

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Abhishek Nayarvor 7 Monaten

Kitni gjb baat h ki modiji ke badle aap safai de rahe ho kitne niche gir chuke sir aap

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Jitendra Malviyavor 7 Monaten

Yes... बिल्कुल सही कहा आपने...

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R Sharmavor 7 Monaten

अबे हरामखोर थोड़ी सी गैरत बची हो तो इस पर बात कर ले बेशर्म 👇

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मारवाड़ी चाचाvor 7 Monaten

चिलम की कसम, उन्होंने जिस तरह से 'महामानव' का बचाव किया है, उसे देखकर लगता है कि वो सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि 'रील बजट' के ब्रांड एंबेसडर भी बन सकते हैं!😂🚬

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GULLU 🐶🦴vor 7 Monaten

Dallal Sharma 🐶 teri Dallal khabar ko kaun maanta hai re aakhi public ko maloo hai tujhe Padmabhushan mila hai Modi aur Bjp ke talwe chaatne ke liye Koshish karte raho Dallal Sharma kuch saal baad bharat ratna bhi mil jayega tujhe 🦴.......🐕

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Deepak Bhati Chotiwalavor 7 Monaten

अरे गुल्लू तुम भी आ गए...!! अगर कोई डर नही है, सब झूठ है, तो फिर तुम क्यूँ कूद पड़े इसमें??

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Half_News_007🇮🇳©️vor 7 Monaten

पूरा स्टेट मिलकर सिर्फ मुसलमानों को सताने को बहादुरी नहीं कहते ! पाकिस्तान से कबड्डी खेलने से अच्छा होता वेनजुएला जैसा कुछ करते ! चीन को जितना चाहिए उतना वो ले ही रहा है और बोल भी रहा है ! हिम्मत ईरान से सीखना चाहिए जो खतरा मोल ले, safe zone में सिर्फ बाते नहीं करता!

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प्रमोद तिवारीvor 7 Monaten

परम सत्य दरसल कांग्रेसी इतने डरे सहमें हैं कि ओ सोचते हैं कि अनर्गल प्रलाप से उनके पूर्व में किये पाप धुल जायेंगे तो ओ भ्रम में हैं, मोदी जी छोड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं,

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bablu( غلام سروار )vor 7 Monaten

कूत्ते की नस्ल के दलाल कितना गिरेगा अपने नक़ली बाप को सही साबित करने के लिए 😡

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AAP ka Pankaj Nagpal, District Incharge New Delhivor 7 Monaten

भाइयों और बहनों कल का बजट अच्छा था, यह बात मान लेना वरना देश के करोड़ों लोगों के टैक्स के पैसे विज्ञापनों पर गोदी मीडिया द्वारा खर्च कर दिए जाएंगे, यह बात मनवाने के लिए

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AMIT KOTADIAvor 7 Monaten

जिसने नेशनल मीडिया का गोदी मीडिया बना दिया वो कोई मामूली इंसान थोड़ी ही हो सकता है

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भारत का सत्तावान नागरिकvor 7 Monaten

तुम मोदी के प्रवक्ता बन गये?डरने का करेक्टर नही है तो डर क्यों रहे,चर्चा क्यों नहीं होने देते,ट्रम्प का जबाब क्यो नहीं देते?उनका करेक्टर कमजोर को प्रताड़ित करने व मजबूत के सामने लेट जाने का है।

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Sunil Sharmavor 7 Monaten

चमचा मक्खन तो लगायेगा ही क्योंकि सुखी चमड़ी चाटने से जीभ को नुकसान हो सकता है। 😛

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अमृता त्रिपाठी AmritaTripathivor 7 Monaten

आप मोदी की मक्खनबाजी करके माल बनाते हो अंकल.......

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RPSvor 7 Monaten

डर सबको लगता है, गला सबका सूखता है। 56 इंच 2014 में था, जो कि अब 32 इंच हो चुका है। जनता सब देख रही है

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Vaibhav singh (हिमांशु)vor 7 Monaten

दरबारी कवियों का आगमन हो चुका है ....मोदीनामा को लिखने का काम मिल चुका है। बधाई हो यहाँ के भोली भाली जनता को

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ER.Ashish_meenavor 7 Monaten

आ गए bjp प्रवक्ता बनकर रजत शर्मा नए अवतार में ,, UGC पर बात करो क्यो डर गए ,, जनता हिसाब मांगेगी 2029 दूर नही

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Akhilesh Tiwarivor 7 Monaten

आदरणीय रजत शर्मा जी, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं।मोदी जी ने हम सबको बहुत डरा लिया है। उनसे कहिए कि अब और ज्यादा न डराएं। नहीं तो हम जैसे डरने वालों की बद्दुआ मोदीजी को कहीं का नहीं छोड़ेगी। ध्यान रहें, डरना मना है। जब प्यार किया तो डरना क्या ?? हमनें मोदी जी से प्यार किया था। मोदी जी की तरह झूठा नहीं, हमनें मोदी जी से सच्चा प्यार किया था। और सच्चा प्यार करने वाले कभी डरते नहीं। जो डरते हैं वो प्यार करते नहीं। हम अपने देश से प्यार करते हैं। देश में रहने वाले सभी अपने लोगों से प्यार करते हैं। इसीलिए हम डरते नहीं हैं। डंके की चोट पर अपनी बात कहते हैं। लेकिन हमारे मोदी जी पिछले ग्यारह साल से हम सबको डराने का पाप करते आ रहे हैं। कहते हैं कि कलयुग में पाप की उम्र दस साल से ज्यादा नहीं होती। महामानव के पाप की उम्र बारह पार कर चुकी है। उनका सिंहासन कभी भी डोल सकता है। पिछले ग्यारह सालों से एक राजा अपनी प्रजा को डराकर रख रहा है। ऐसे राजा को ईश्वर कभी माफ़ नहीं कर सकता। हम भले माफ़ कर दें। गौरतलब हो कि रजत शर्मा जैसे लोग ऐसे राजा का दुस्साहस बढ़ाकर राजा से भी ज्यादा पाप का भागीदार बनते हैं।

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s kumar lahotivor 7 Monaten

मोदी जी के चरित्र की ठीक से जांच करो।वो इस देश के सबसे बड़े कायर नेता है।जो बहादुरी उनकी आपको दिखती है वो भीड़ की वजह से दिखती है,भीड़ जो मदारी के आने पर भी इक्कठी हो जाती है।बीजेपी और कायरता एक दूसरे के पर्याय है।ये बहुसंख्यक हिंदुओं को उकसा कर उनके दम पर नाचते हैं

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India Media Movementvor 7 Monaten

अगर डरने का नहीं होता तो सोनम वांगचुक जेल में नहीं होते... तानाशाह इतना डरपोक होता है कि अगर तीन गधे भी एक साथ घास चल रहे हो तो उसे लगता है कि उसके खिलाफसाजिश रच रहे हैं..!!

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Deepak kumarvor 7 Monaten

जंग के मैदान में मोदी इस दलाल का मतलब बंदूक ले कर ख़ुद मोदी लड़ाई लड़ने गया था 😂😂😂

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Rohini Singhvor 7 Monaten

ये है देश की गोदी पत्रकारिता जो सरकार से नहीं विपक्ष से सवाल करने को अपनी शान समझते हैं। इस देश की बरबादी में आप जैसे पत्रकारों का योगदान बहुत है

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Adv Arun Kumarvor 7 Monaten

उसी तरह ठिकाने लगाते हैं जैसे विजय रुपानी ,अजित पवार संजीव भट्ट लालकृष्ण आडवाणी को लगाया है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीनों सेनाओं को आतंकवादियों के खिलाफ action लेने की खुली छूट पर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए. Pakistan के खिलाफ action तो होना ही है. मोदी जो कहते हैं वो करते हैं. मोदी ने बिलकुल साफ-साफ कहा था कि पाकिस्तान ने जो नापाक हरकत की है उसकी उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. अब मोदी के शब्दों के मुताबिक पहलगाम के गुनहगारों को, उनके आकाओं को, हमारी सेना धरती और पाताल से खोदकर निकालेगी और सज़ा देगी. यही हिम्मत नरेंद्र मोदी को बाकी नेताओं से अलग बनाती है. पहले के प्रधानमंत्री यही सोचते रहते थे कि ये करेंगे तो वो हो जाएगा, वो करेंगे तो ये हो जाएगा. इस चक्कर में फैसला नहीं हो पाता था. पर मोदी का track record बिलकुल अलग है. वो बता कर मारते हैं. घर में घुसकर मारते हैं.पाकिस्तान को सबूत देने का ज़माना चला गया diplomatic niceties का वक्त चला गया. अब पाकिस्तान को एक बार फिर उसी की भाषा में जवाब दिया जाएगा. और मोदी के बयान के मुताबिक भारत के दुश्मनों को मिट्टी में मिला दिया जाएगा. #देश_मोदी_के_साथ_है #PahalgamTerroristAttack #MyTake #AajKiBaat

Rajat Sharma

18,988 Aufrufe • vor 1 Jahr

आज राज्यों के इलेक्शन कमीशंस की वेबसाइट बंद होने पर : आज मैंने सुना कि वेबसाइट भी बंद कर दी गई है अभी हम ने निकाला कोशिश करी निकालने की हमनें अभी उसका लिया है स्क्रीनशॉट, तो चार वेबसाइट जो है राजस्थान की महाराष्ट्र की बिहार की और एमपी की ,चार वेबसाइट खुल नहीं रही हैं हो सकता है इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद में खोल दें सुनकर के अलग बात है, अभी तो नहीं खुल रही है इसका मतलब है सुधार कर रहे होंगे वो लोग कुछ भी कर रहे होंगे पर मैं फिर कहना चाहूंगा कि राहुल गांधी का बोलने का गुस्से होने का एटम बम कहने का जो नजरिया है वो कोई व्यक्तिगत नहीं है देश हित के अंदर है उनका जीवन ऐसा है उनका व्यक्तित्व ऐसा है उनके कृतित्व ऐसे हैं मैंने बहुत करीब से पहचाना उनको, दुर्भावना या घृणा नफरत किसी के प्रति नहीं है चाहे वो नरेंद्र मोदी भी क्यों नहीं हों या कोई भी हो ये उनको पहचानने में उनको वक्त लगेगा वो अलग बात है। राहुल गांधी को पहचानने में इन लोगों को वक्त लगेगा वो व्यक्तित्व ऐसा है जो दिल में प्रेम प्यार मोहब्बत भाईचारा ले के चलता है पर देश हित के अंदर, देश हित में जो बोलते हों बात कड़वी लोगों को लगती है, आगाह करते हैं नोट बंदी को ले कर, कोविड को ले के और किसी मुद्दे को लेके तो लोगों को कड़वी लगती है पर सच्चाई सामने आती है वो बाद में। उसी प्रकार से ये जो इश्यू उठाया है LoP के रूप में ये उनका धर्म भी है कर्तव्य भी है कि पब्लिक में क्या मैसेज जा रहा है और खुल कर कहा पहले मैं बोल नहीं पा रहा था क्योंकि मुझको जो है खुद को श्योरिटी नहीं थी इसलिए मैं बोलता था पर उस में वो, वो मैं उस रूप में नहीं बोल पाता था जो मैं बोलना चाहता था अब जब मैंने छह महीने लगाए हैं और छह महीने में देख लिया है कि वास्तव में ये तो वोटों की चोरी हो रही है और ये तो लोकतंत्र को खतरा है तब जाकर के मैं ये प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा हूं एटम बम का नाम दे रहा हूं क्योंकि एटम बम पूरे मुल्क का लोकतंत्र खंडन हो जाएगा कमजोर हो गया तो पूरे मुल्क को नुकसान है इसलिए एटम बम के रूप में है ये मुल्क के लिए मुल्क के भविष्य के लिए।

Ashok Gehlot

99,773 Aufrufe • vor 1 Jahr

पाकिस्तानी फौज के प्रवक्ता और हाफ़िज़ सईद जैसे आतंकवादी एक ही भाषा बोलते हैं ये कोई secret नहीं है. ना ही ये बात किसी से छुपी है कि मोदी की 'water strike' से पाकिस्तान के नेता किस कदर घबराए हुए हैं. लेकिन अगर वो ये सोच रहे हैं कि अमेरिका उन्हें बचा लेगा तो वो गलतफहमी में हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने clear कर दिया है कि पाकिस्तान के मामले में किसी तीसरे मुल्क का ना कोई role है, ना होगा. अगर पाकिस्तान बात करना चाहता है तो भारत सिर्फ PoK के मुद्दे पर बात करेगा और किसी issue पर बात की गुंजाइश नहीं है. जब तक पाकिस्तान की फौज और पाकिस्तान में छुपे हाफ़िज़ सईद और मसूद अज़हर जैसे आतंकवादी एक ही भाषा बोलते रहेंगे, तब तक भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. #AajKiBaat #PakistanArmy #WaterStrike #Modi #MyTake

Rajat Sharma

17,340 Aufrufe • vor 1 Jahr

पहली बात तो ये समझने की है कि राहुल गांधी आज कल वोट चोरी की बातें क्यों कर रहे हैं. असल में इसका Election Commission से कोई मतलब नहीं है. ये सवाल तो राहुल गांधी के political survival से जुड़ा है. राहुल गांधी अपनी पार्टी को ये जताना चाहते हैं कि कांग्रेस की बार-बार हार के लिए वो कतई ज़िम्मेदार नहीं हैं. कांग्रेस को तो वोट चोरी ने हराया. वो जानते हैं कि जिस दिन पार्टी को ये लगेगा कि राहुल गांधी चुनाव नहीं जिता सकते तो पार्टी के नेता उस leader की तलाश में जुट जाएंगे जो उन्हें चुनाव जिता सकता है. चुनाव हराने वाले को कोई leader नहीं मानता. इसीलिए पहली बार 2014 में राहुल ने हार के लिए अपनी पार्टी की कमज़ोरियों को ज़िम्मेदार ठहराया था. अगली बार हार के बाद उन्होंने कहा कि मोदी ED, CBI और Income Tax की मदद से चुनाव जीतते हैं. इसके बाद राहुल गांधी ने अपनी हार के लिए EVM को दोषी बताया था. अब वो चुनाव आयोग को blame कर रहे हैं. Problem ये है कि लोकसभा में मोदी की 240 सीटों से कांग्रेस को जो उम्मीद बंधी थी उसे महाराष्ट्र और हरियाणा की हार ने तोड़ दिया. अब अगर बिहार भी हार गए तो फिर leadership पर सवाल उठेंगे. इसीलिए इस वक्त उनका ये कहना ज़रूरी है कि वो नहीं हारते उन्हें तो कोई हरवा देता है. कभी अपनी पार्टी तो कभी EVM तो कभी Election Commission. लेकिन लोग पूछ रहे हैं 'तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता काफिला क्यों लुटा? मुझे रहज़नों से गिला नहीं, तिरी रहबरी का सवाल है' #MyTake #AajKiBaat #VoteChori #RahulGandhi

Rajat Sharma

471,634 Aufrufe • vor 10 Monaten

मेरे पास confirmed information है कि चुनाव में हार के बाद DMK ने AIADMK की सरकार बनवाने का प्रयास किया था. Stalin ने CPI-CPM और VCK से कहा था कि वो भी AIADMK को outside support दें. पर communist पार्टियों को AIADMK के BJP alliance से problem है. लेकिन उन्होंने विजय को support करने का फैसला Stalin को inform करके किया. इसलिए उनसे नाराज़गी कम है. Stalin की असली नाराज़गी कांग्रेस से है, जिसने बिना बात किए उतावला होकर विजय की TVK को support किया. DMK के नेताओं को लगता है कि अगर कांग्रेस अचानक DMK का साथ नहीं छोड़ती तो DMK और AIADMK मिलकर विजय की सरकार नहीं बनने देते. मज़े की बात ये है कि Congress और Left का support मिलने के बाद भी विजय बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाए हैं. वो राज्यपाल से तीन बार मिल चुके हैं लेकिन उनके पास कुल 116 विधायकों का ही support है. दो विधायकों की अभी भी कमी है. अब बदले हालात में कुछ भी हो सकता है. VCK के नेताओं की Stalin से meeting चल रही है. अब अगर DMK और AIADMK साथ आते हैं तो सबसे ज़्यादा मुश्किल कांग्रेस को होगी. #CMVijay #tamilnadulegislativeassemblyelection2026

Rajat Sharma

134,785 Aufrufe • vor 4 Monaten

हमें समझ नहीं आता कि आखिर नरेंद्र मोदी ने अडानी के आगे सरेंडर क्यों कर दिया है? अडानी के लिए नरेंद्र मोदी ने देश को खतरे में क्यों डाल दिया है? नरेंद्र मोदी का पूरा सरकारी तंत्र ये सुनिश्चित करता है कि अडानी का बिजनेस बढ़ता रहे। केन्या की सरकार ने अडानी का कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर दिया था और अडानी को गिरफ्तार करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन भारत के किसी अखबार में इस बात की कोई चर्चा नहीं की गई। हमें बाहरी अखबारों से पढ़कर अडानी की डील के बारे में पता चल रहा है, लेकिन हमारे देश की मीडिया में कोई बात नहीं कर रहा। देश के सम्मान को ठोस पहुंच रही है, लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा, क्योंकि 'नरेंदर ने सरेंडर' कर दिया है। : Dr. Ajoy Kumar जी

Congress

29,619 Aufrufe • vor 1 Jahr

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी crisis को opportunity में बदलने में माहिर हैं. हमें मोदी पर भरोसा करना चाहिए. Trump के tariff से पैदा होने वाले संकट को भी सफलता में बदलेंगे. हो सकता है कि साल, दो साल मुसीबतों का सामना करना पड़े. हो सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस गति से आगे बढ़ रही है उसमें रुकावट आए. लेकिन इस समय भारत की अर्थव्यवस्था pressure को झेल सकती है. Covid का बुरा वक्त इसका example है. भारत ने संकट को अवसर में बदला. इससे पहले 1998 में अमेरिका ने भारत पर sanctions लगाए थे. उस समय हमारी अर्थव्यवस्था बहुत मज़बूत नहीं थी. अब तो भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में चौथे नंबर की economy है. अमेरिका को होने वाला export हमारी GDP का सिर्फ 2% है. इसीलिए चिंता करने की ज़रूरत नहीं. भारत का market हमारी अर्थव्यवस्था की शक्ति है. अमेरिका के लिए भी ये बहुत बड़ा market है. अगर भारत को tariff से नुकसान होगा तो अमेरिका के हाथ से भी बड़ा market जाएगा. भारत में तो मान्यता है कि जो होता है अच्छे के लिए होता है. अगर अमेरिका कोई रास्ता बंद करेगा तो दूसरे देशों के बाज़ार भारत के लिए खुलेंगे. Trump के रुख से भारत, रूस और चीन करीब आए हैं. भारत, रूस, चीन की आबादी दुनिया की कुल population का 38% है. यानी दुनिया का 38% market इन तीन देशों के पास है. इसी तरह textiles, pharma, engineering goods, steel और marine products का 30% से ज़्यादा market भारत, रूस और चीन के पास है. अगर ये तीनों देश एक साथ आ जाते हैं तो अमेरिका sideline हो जाएगा. अमेरिका की दादागीरी खत्म हो जाएगी. #MyTake #AajKiBaat #TrumpTariffs #Modi

Rajat Sharma

30,211 Aufrufe • vor 1 Jahr

BJP वाले मनुस्मृति के समर्थन में कूद पड़े हैं - यह कोई हैरानी वाली बात नहीं है मनुस्मृति में महिलाओं को सिर्फ दोयम दर्जे का या पुरुष पर निर्भर रहने के लिए ही नहीं कहा गया है - बल्कि तमाम और वाहियात घटिया बातें कहीं हैं -सुनकर खून खौल जाए 👇 ▪️मनुस्मृति के पांचवें अध्याय के 148वें श्लोक में कहा गया है कि "एक स्त्री को हमेशा अपने पिता के संरक्षण में रहना चाहिए, विवाह पश्चात पति द्वारा उसका संरक्षण होना चाहिए, पति की मृत्यु के बाद उसे अपने बच्चों की दया पर निर्भर रहना चाहिए. लेकिन किसी भी स्थिति में एक महिला स्वतंत्र नहीं रह सकती" यानी स्त्री के पास अपने बारे में भी निर्णय लेने के अधिकार नहीं है ▪️मनुस्मृति में महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं है. सिर्फ वे महिलाएं ही वेदों का अध्ययन कर सकती हैं, जिनका यज्ञोपवीत संस्कार होता है. यानी उच्च वर्ण की कुछ महिलाओं को छोड़कर किसी को कोई शिक्षा लेना का अधिकार नहीं है ▪️मनुस्मृति के 15वें नियम में कहा गया है कि 'महिलाओं का चंचल मन और स्वाभाविक हृदयहीनता की वजह से अपने पति के प्रति धोखेबाज हो सकती हैं. ऐसे में उन्हें निगरानी में रखना चाहिए ▪️मनुस्मृति के दूसरे अध्याय में कहा गया है कि 'पुरुषों को उत्तेजित करना और उनको बहकाना महिलाओं का स्वभाव है. ऐसे में समझदार लोगों को महिलाओं के आसपास संभलकर रहना चाहिए. किसी भी पुरूष को अपनी मां, बहन या बेटी के साथ भी एकांत में नहीं रहना चाहिए, वर्ना स्त्रियों की वजह से पुरूष का धर्म भ्रष्ट हो सकता है ▪️मनुस्मृति में कहा गया है कि राजा धन और स्त्रियों की रक्षा करता है. मगर विपत्ति में धन या स्त्रियों के प्रयोग से भी राज्य को सुरक्षित रख सकता है. यानी स्त्रियों का उपयोग वस्तु की तरह किया जा सकता है ▪️मनुस्मृति में कहा गया है कि महिला को अपने माता-पिता या पति की संपत्ति पर प्रत्यक्ष अधिकार नहीं है. अगर वह धन अर्जित करती है तो वो धन उसके पति या पुत्रों को जाएगा. यदि स्त्री के भाई हैं, तो उसे माता-पिता की संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा ▪️मनुस्मृति के तीसरे अध्याय में मनु ने महिलाओं की तुलना कुत्ते और सुअर से की है. कहा है कि “जब ब्राह्मण भोजन करें तब उन्हें किसी सुअर, मुर्गे, कुत्ते या किन्नर या ऐसी महिला जो रजस्वला (पीरियड्स) में हो, उसको देखना भी नहीं चाहिए” तीसरे अध्याय में ही कहा गया है कि उस महिला से विवाह न किया जाए, जिसके बाल और आंखें लाल हो. या एक ऐसी महिला जो नीची जाति की हो ▪️मनुस्मृति के ग्यारहवें श्लोक में कहा गया है कि जिस स्त्री के भाई न हो या जिसके पिता को कोई न जानता हो यानी वो लड़की किसकी है ये किसी को न मालूम हो तो उस स्त्री से विवाह करने वाला आदमी मूर्ख होता है. जबकि बिना बाप वाले पुत्र से विवाह करने में कोई दिक्कत नही है आख़िर कौन हैं वो महिलायें जिनका खून नहीं खौलता यह सब सुनकर? मनुस्मृति जिसकी घटिया बातों से यह कहकर ध्यान भटकाने की कोशिश है कि बाक़ी धर्मों की बात नहीं हो रही - ऐसे लोग तो राजा राममोहन रॉय को सती प्रथा ख़त्म करते वक़्त कहते बाक़ी धर्मों की कुरीतियाँ ख़त्म कीजिए. ये कैसी बचकानी बेहूदी और महिला विरोधी बात है आख़िर BJP वाले मनुस्मृति का बचाव कैसे कर सकते हैं?

Supriya Shrinate

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