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Ana Sayfaya Dön

Jaiky Yadav मेरी कोई ख्वाहिशें नहीं है, सब ख्वाहिशें मर गई हैं, यहां बच्चे पालना मुश्किल हो रहा है कौन सी ख्वाहिशें करें..!! बची हुई खेती सांड चर रहे हैं, रोजी-रोटी बचाएं या परिवार..!! 2 पैसे की मजदूरी करेंगे तो शाम को आटा लेकर जाएंगे तो बच्चे खाएंगे।।

65,145 görüntüleme • 2 yıl önce •via X (Twitter)

11 Yorum

Jaiky Yadav profil fotoğrafı
Jaiky Yadav2 yıl önce

इस तस्वीर को गौर से देखना इस तस्वीर में अरविंद केजरीवाल और कन्हैया कुमार दोनों ही लोग मुस्कुरा रहे हैं मगर इस तस्वीर में एक तीसरा व्यक्ति भी है जो आपको दिखाई नहीं दे रहा है मगर उसके रोने की आवाज़ यहां तक आ रही है। वह तीसरा व्यक्ति अपनी आगामी अभूतपूर्व हार के भय से रो रहा है। आपको अब तो पता ही चल गया होगा कि वह रोता हुआ व्यक्ति कौन है? यह मुलाकात बेहद ही खास है अब और समय नहीं लगेगा आपको अरविंद केजरीवाल जी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में प्रचार करते देखते हुए।

रवि प्रताप सिंह चौहान🚩 profil fotoğrafı
रवि प्रताप सिंह चौहान🚩2 yıl önce

@JaikyYadav16 सही बात है ये सांड मोदी और योगी सरकार ने छोड दिया ताकि इनकी खेती खराब हो, ६हजार महीने ले रहे हैं लेकिन बकचोदी देखो,

R.S.Sharma Modi Ka Parivar profil fotoğrafı
R.S.Sharma Modi Ka Parivar2 yıl önce

@JaikyYadav16 इतना घुमाकर और वीडियो डालकर क्यो समझा रहा है सीधे बोल ना तू कांग्रेस का बंधुआ मजदूर चापलूस है और तुम्हारे रग रग में मोदी विरोध है वीडियो में भी उन्ही की बात करता है जो तुम्हारे जैसे कांग्रेस के गुलाम है ऐसे लोगों को सरकार कोई भी सहूलियत दे लेकिन करेंगे तो मोदी विरोध ही ?

R K Sharma profil fotoğrafı
R K Sharma2 yıl önce

@JaikyYadav16 भाई इस बार चिंदी चोरों को वोट दीजिए ,कमाना नहीं पड़ेगा ,सारे चोर मिलकर सांड भगाएंगे ,,न आटे की फिक्र न बच्चों की चिंता ,

प्रवीण कुमार सिंह profil fotoğrafı
प्रवीण कुमार सिंह2 yıl önce

@JaikyYadav16 काहे पैदा किये जब पालने का औकात नही थी

Fuleshwar Singh profil fotoğrafı
Fuleshwar Singh2 yıl önce

@JaikyYadav16 बुढ़ापे में क्या ख़्वैश रहेगी सब ख़त्म हो जाती है

Naveen Kumar Patel profil fotoğrafı
Naveen Kumar Patel2 yıl önce

@JaikyYadav16 तुम्हारे बस की अब मेहरिया अब नाही है,अब तुम खेत ही तको।।

raj tewatia profil fotoğrafı
raj tewatia2 yıl önce

@JaikyYadav16 Jinko berojgar Rahana Hai vah berojgari Denge koi bhi Sarkar Aaye Ho Jaaye ghar mein so jao kam dhandha Kuchh karo mat FIR bolo ki Ham berojgar Hai free Mein Sab Kuchh mil jaaye

JITENDRA SINGH profil fotoğrafı
JITENDRA SINGH2 yıl önce

@JaikyYadav16 अगर इस रामदेव नाम के व्यक्ति को साठ साल की उम्र में भी बच्चे पालने पड़ रहे है तो धिक्कार है इसकी जिंदगी पर.... आक थू 🤣🤣🤣🤣

Modiji Ka Parivar profil fotoğrafı
Modiji Ka Parivar2 yıl önce

@JaikyYadav16 Gaddar ladki

Sunil Saroj profil fotoğrafı
Sunil Saroj2 yıl önce

@JaikyYadav16 To pahle jaisa kar do na lekar jaate the kat kar khate the aise hi kar do

Benzer Videolar

मुझे तरस आ रहा है उस सिस्टम पर जो इनको 15 करोड़ रुपए सालाना देता हैं। इनके अनुसार रोड में कोई अफरा तफरी नहीं तो गैस को लेकर सब बढ़िया चल रहा है। मतलब अगर गैस की शॉर्टेज है तो रोड में लोग एक दूसरे के ऊपर सिलेंडर क्यों नहीं फेंक रहे हैं? दूसरी बात, भाई साहब कह रहे हैं कि, लोगो द्वारा कहा गया था कि कोविड के समय ऑक्सीजन की कमी हो गई है, भाई साहब इतनी भी द... मत करो, सबको पता है कि ऑक्सीजन की कमी हुई थी। आगे कह रहे हैं कि पहले रोजाना 50 से 55 लाख सिलेंडर बुक हो रहे थे, लेकिन अब 70 से 75 लाख सिलेंडर प्रति दिन बुकिंग हो रही है। तो ये कौन बताएगा कि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुक गई है जिस वजह से छोटे दुकानदार घरेलू सिलेंडर उपयोग कर रहे हैं। सुधीर चौधरी जी, अगर थोड़ी सी भी पत्रकारिता कर लो न तो देश का भला हो जाएगा। Sudhir Chaudhary

खुचरेंप

43,637 görüntüleme • 5 ay önce

मैं अपने पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती कर रहा हूँ। जरबेरा फूल की डिमांड शादी-विवाह और बाकी कार्यक्रमों में बहुत होती है। जरबेरा की अलग-अलग वैरायटी यहाँ लगी हुई है। फूलों की खेती में किसानों से एक निवेदन मैं जरूर करना चाहूंगा कि बहुत ध्यान देने की जरूरत है, रोज ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही पौधे को खराब कर देती है। इधर आप देख रहे हैं पूरे पौधे स्वस्थ हैं, लेकिन इस तरफ आप देखेंगे तो कुछ पौधे उतने स्वस्थ नहीं हैं, इनके पत्ते पीले पड़ गए हैं। आज मैंने खुद देखभाल की है। जिनमें पीले पत्ते हैं, उनको ठीक करेंगे। पौधों को बच्चों की तरह पालना पड़ता है, तब कहीं स्वस्थ और अच्छे पौधे होते हैं। खेती करना, पौधे लगाना यानी जीवन रोपना है। तो उनकी देखभाल भी वैसे ही करनी पड़ती है।

Shivraj Singh Chouhan

37,000 görüntüleme • 1 ay önce

बिहार का भविष्य अंधकारमय हो रहा है... हर कोई धृतराष्ट्र बन गया है। आँखें बंद कर ली हैं, कानों में रुई ठूँस ली है। सड़कों पर, रेलवे स्टेशनों के किनारे और सरकारी इलाकों में तक 10 साल से कम उम्र के बच्चे नशे की चपेट में हैं। कुछ सिगरेट, कुछ गांजा, कुछ चिपकने वाली गोंद, कुछ इंजेक्शन... तरह-तरह के नशे खुले आम चल रहे हैं। ये बच्चे स्कूल की जगह नशे के आदी हो रहे हैं, सपनों की जगह झुमरी और बेहोशी चुन रहे हैं। माँ-बाप चुप, समाज चुप, नेता चुप, प्रशासन चुप। जैसे कोई देख ही नहीं रहा। जैसे ये हमारा भविष्य नहीं, किसी और का है। जब 10-12 साल बाद ये बच्चे बड़े होंगे, तो बिहार किस मुकाम पर होगा? जब पूरी पीढ़ी नशे की लत में डूबी होगी, तब कौन पढ़ाएगा, कौन काम करेगा, कौन बिहार को आगे ले जाएगा? धृतराष्ट्र की आँखें अंत में खुलीं तो तब भी सब कुछ बर्बाद हो चुका था। क्या हम भी वही गलती दोहरा रहे हैं? जागो नहीं तो कल बिहार सिर्फ नशे की लाशों का ढेर बनकर रह जाएगा। #BiharDrugsMenace #WakeUpBihar #SaveOurChildren

With Love Bihar

25,923 görüntüleme • 2 ay önce

बेटों को सरकार में दखल नहीं करना चाहिए के सदंर्भ में पूर्व में दिए मेरे बयान पर टिप्पणी : कल मैंने बेटों के लिए कह दिया तो मैंने कहा बेटों को सरकार में दखल नहीं करना चाहिए ये मत छूट दो बेटों को बेटियों को सालो को सालियों को किसी परिवार वालों को उसमें आप ये दखल करने की इजाजत मत दो| आप उनको राजनीति में लाओ वो हमारे एग्जांपल दे रहे सोनिया जी , मेरे, आप लाओ ना उनको राजनीति में उनका स्वागत करेंगे अगर हमारी वर्तमान पीढ़ी जो है चाहे किसी पार्टी की है उनके परिवार के लोगों को मोटिवेट भी करना चाहिए। अगर कोई छात्र युवा आ सकता है कोई परिवार का तो पॉलिटिक्स के छात्र भी आ सकते हैं उनके बच्चे भी आ सकते हैं , खाली आप आउट ऑफ टर्न उनको मदद नहीं मिले इतनी तो बात है या किसी का हक मत मारो ये तो होता है| बाकी आने में क्या हर्ज है अगर मान लो परिवार होगा पारिवारिक पॉलिटिकल पृष्ठभूमि का उनके परिवार के लोग आएंगे अगर उनसे अनुभव काम आएगा तो अनुभव तो पब्लिक के काम आएगा ना तो हम क्यों डिसकरेज करें बच्चों को| सब आए बेटा बेटी कोई आओ पर सरकार में दखल करेंगे करप्शन करवाएंगे, बदनामी किसकी होगी मुख्यमंत्री जी की होगी मंत्रियों की होगी, हो भी रही है क्या ये खबरे नहीं पहुंचती है मुख्यमंत्री के पास में ? जबसे सरकार बनी है तबसे ये काम शुरू हो गया बेटे बेटियों का क्या मतलब भाई और खुले आरोप लग रहे हैं हम तो पहली बार बोल रहे हैं हमने प्रयास किया कि पर्सनली हम लोग कन्वे करें कि देखिए बदनामी बहुत हो रही है। हमारे प्रयास काम नहीं आए तब मुझे बोलना पड़ा है अब मैं कहना चाहूंगा बहुत बदनामी होती है, बेटों को दूर रखो। मैंने अपने बेटे को तो मुख्यमंत्री निवास में नहीं रखा पूरे परिवार को किराए का मकान लेकर वो रहे पांच साल। आप बता दीजिए कि ये उदाहरण हम लोग दे रहे हैं हम लोगों का उदाहरण दे रहे हैं चाहे वो आर.सी.ए के चेयरमैन बने हो तो सी.पी जोशी जाने वो जाने भैया मैंने तो एक सेकंड भी टाइम नहीं दिया उसके अंदर, मैं तो पड़ा भी नहीं हूं। और अगर वो चुनाव लड़े हैं पार्टी ने टिकट दिया उसको,ऐसी स्थिति बनी होगी उनको टिकट मिला वहां पर उससे इन बातों का क्या संबंध जो मैं बोल रहा हूं मैं तो कह रहा हूं बेटे बेटियों का आप सरकार में दखल करने की इजाजत मत दो ये मैंने कहा है। और जो यह स्टेडियम वाला, श्री अनिल अग्रवाल से बात करके हम लोगों ने दो ढाई सौ करोड़ का प्रोजेक्ट है उनसे इमदाद ले रहे थे हम लोग, वो स्ट्रक्चर खड़ा हो गया है, बंद कर दिया, लाखों बच्चे जो हैं क्रिकेट के लिए रात दिन एक करते हैं, आम लोगों में लोकप्रिय है। मैं चाहे फुटबॉल का या कबड्डी का पक्षधर हो सकता हूं क्रिकेट का पक्षधर मैं नहीं रहा होऊंगा कभी मान लो ठीक है, वो अलग मेरी अलग बात है पर एज़ ए मुख्यमंत्री मेरी ड्यूटी है ना जो जनता क्या चाहती है? युवा पीढ़ी क्या चाहती है? उन खेलों को प्रोत्साहन दे हम लोग। वो मैंने प्रयास किया, वो अधूरा पड़ा हुआ है। दो साल हो गए आरसीए के चुनाव ही नहीं हो रहे हैं और आपस में लड़ रहे हैं ये लोग। कौन लड़वा रहा? कौन भिड़वा रहा? मुख्यमंत्री की नॉलेज में नहीं है क्या? कोई बोल नहीं रहा है। चुनाव नहीं करवा रहे हैं विश्वविद्यालय के, कॉलेज के। विश्वविद्यालय चुनाव क्यों नहीं करवा रहे? आप नई पीढ़ी को प्रोत्साहन नहीं देना चाहते हैं क्या? ये तमाम बातें जो हो रही है न वो बहुत ही बुरी हो रही है। इसलिए मैंने दो बातें कही थी। मैं आज भी कहना चाहूँगा मुख्यमंत्री जी से। मुख्यमंत्री जी आप भले आदमी हो, कृपा करके आप अपनी पकड़ बनाओ, इन सबको टाइट करो और जो आपके सलाहकार हैं उनको वापस उनको एक्ज़ामिन करो। ये आपको जिस प्रकार से जवाब आज आए हैं उससे मैं बहुत निराश हुआ हूँ। जनता में बहुत आक्रोश है। पूछ कुछ रहे हैं हम लोग ,जवाब कुछ और दे रहे हैं। कांग्रेस द्वारा आज राजस्थान दिवस मनाए जाने पर सवाल का जवाब: कांग्रेस क्या मना रही है, हर राज्य के अंदर देश भर के अंदर उसी दिन मनाया जाता है जिस दिन उनका गठन हुआ था। पीएम खुद करते हैं ट्वीट करते हैं। आज तो पता नहीं उन्होंने किया कि नहीं किया है। पर ये नई-नई बातें लाकर इनकी राजनीति विकास की तो है नहीं, इनकी राजनीति धर्म के नाम पर बंटवारा करने की है। कब तक करेंगे? कब तक करेंगे? जनता समझ चुकी है कि ये कब तक हमें गुमराह करेंगे।

Ashok Gehlot

24,841 görüntüleme • 5 ay önce

प्रदेश के वर्तमान हालात पर मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर बातचीत की : दिक्कतें ही दिक्कतें हैं चारों ओर। सरकार बनते ही ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ कि दो चार महीने के अंदर ही लोग कहने लगे गवर्नेंस नहीं हो रही, शासन नहीं हो रहा। कुशासन चल रहा है और मैं बराबर आग्रह करता हूं मुख्यमंत्री जी से, वो इसे लेते आलोचना और हम चाहते हैं कि सुधार हो जिससे कि पब्लिक को फायदा मिले। अगर सरकार इन्हीं को रहनी है मान लीजिए इनकी मेजॉरिटी है तो शासन तो यही करेंगे। मगर कुशासन होगा तो पब्लिक में काम नहीं होंगे। आप कल्पना कीजिए कि क्या हालत बने, करप्शन की हदें पार हो गई। चाल, चेहरे, चरित्र एक्सपोज हो गए इनके पर उसके अलावा भी जिस प्रकार से पेमेंट नहीं हो रहे हैं कोई डिपार्टमेंट के अंदर तो फिर क्या हो रहा है? शिक्षा में, स्वास्थ्य सेवाएं तो चरमरा गई है। आप बताइए जिस प्रकार से शिक्षा की स्थिति बनी है, वो तो बड़ी अजीब सी बन गई है। स्कूलें बंद हो रही है, टीचर्स नहीं है और साथ में आपका यह स्वास्थ्य, RGHS का पता ही नहीं है। लोग खुद दुखी हो गए तो चारों ओर से आकर शिकायतें करते जो आप बात पूछ रहे थे हैं वही उसी बात। तो कहने का मतलब है कि हम बार बार कहते हैं मुख्यमंत्री जी को कि कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट, रेप अलग हो रहे हैं, डकैती अलग हो जाती है, फायरिंग करके मार देते हैं ज्वेलर्स को या किसी को। एक के बाद एक घटना, इतने सारे मुद्दे एक साथ हो गए हैं कि विपक्ष की पार्टी भी क्या क्या मुद्दा उठाए? सरकार जब तक खुद आगे नहीं आएगी, पूरा मंत्रिमंडल जब तक उस ढंग से बिहेव नहीं करेगा, जनता के साथ में डिपार्टमेंट की पकड़ नहीं करेंगे, मजबूती से डिपार्टमेंट को कसेंगे नहीं वो, तो नीचे तक जो हालात होते हैं वो बदलेंगे नहीं और नुकसान क्या होगा पब्लिक का। हमें चिंता पब्लिक की है। बाकी तो देखिए शासन तो आते जाते रहते हैं, उन्नीस बीस तो देखो हर शासन में होता है करप्शन तो यह मैं दावा नहीं कर सकता, लेकिन कांग्रेस शासन होते तब नहीं होता है, होता है, पूरे देश में होता है, सब जगह होता है। पर जो इस बार जो जिस रूप में हो रहा है ना तो आम जनता से पूछ लीजिए, मालूम पड़ेगा। स्थिति बड़ी नाजुक है। मैं चिंता कर रहा हूं कि वो ठीक होनी चाहिए।

Ashok Gehlot

43,688 görüntüleme • 28 gün önce