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PhysicsWallah maintains a zero-tolerance policy toward any form of discriminatory or insensitive language. We are deeply concerned by the recent remarks made by a faculty member, which represent a grave violation of our core values and institutional code of conduct. ​Taking this matter with the utmost seriousness, the faculty...

222,838 просмотров • 6 месяцев назад •via X (Twitter)

Комментарии: 34

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Ravindra Jatav6 месяцев назад

जातिवादी मानसिकता रखते हुए ऋषि जैन ने यह शब्द बोले थे।👇

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Oppressor6 месяцев назад

हिंदू ऊंची जाति वालों का सही है नीची जाति वालों को नीचा दिखाते हैं और बाद में माफी मांग लेते है और बस फिर......सब चंगा सी। 😀

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Priyanshu Kumar6 месяцев назад

अगर कोई अनपढ़ या कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति ऐसी गलतियां करता है तो चलो मान लिया जाए। परंतु ऋषि जैन एक पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं, वो UPSC के अभ्यर्थियों को तैयार करते हैं....उनके द्वारा ऐसी भाषा बिल्कुल तर्कसंगत नहीं है, मैं खुद हैरान रह गया सुनकर।।

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Ravindra Jatav6 месяцев назад

फिजिक्स वल्लाह PW के शिक्षक ऋषि जैन द्वारा जाटव समाज पर अमर्यादित टिप्पणी की थी जिससे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची हैं। इस को लेकर @physics__wallah ने जातिवादी मानसिकता रखने वाले ऋषि जैन का निलंबन करने का फैसला सही वह उचित हैं। ऐसे लोग किसी भी संस्था में चले जाएं इनकी जातिवादी मानसिकताएं कभी कम नहीं हो सकती हैं। अगर मैं किसी आदमी में जूते मारकर माफी मांगता तो कैसा लगेगा यह बताइए, क्योंकि जूता मार ही दिया ना माफी में क्या माफी तो बोल दूंगा माफ कर दो बात खत्म।

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Ravindra Jatav6 месяцев назад

हैलो ऋषि जैन जी पहले आपके सर में मैं जूते मारूं और बाद में माफी मांग लूं तो कैसा रहेगा।

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Tarun Kumar6 месяцев назад

आपके संस्थान से जातिवाद से जुड़ी शिकायत कई बार आ चुकी हैं लेकिन एक खान सर भी है जो जातिवादी टिपण्णी करने वाले स्टूडेंट्स तक को नहीं बख्शते है तुम दोनों संस्थानों में कितना अंतर है?

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Bhupendra Kumar Guddu6 месяцев назад

कुछ नही होगा तुमसे कुछ दिन बाद फिर जॉइन कर लेना सोचो कितनी नफरत भरी है इस टीचर के अंदर जो खुद अल्पसंख्यक है हिन्दू भी नही है बाबा साहब ने तभी तो कहा था कि एक दलित केवल हिन्दू के लिए अछूत नही बल्कि हर धर्म के लोगो के लिए अछूत है

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Kaushik Jha6 месяцев назад

Waah😂Yeh log Bhrahmanwaad Murdabad ka naara central Universities ke bahar lgate h, mic daal ke Brahman bharat choro ka naara lgate h wo Justified hai lekin Class me uksaane k baad agr chamar bol diya toh gaand sooj gyi😂🤡 Hypocrite saale chamar

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Social6 месяцев назад

You apologize already. I think it's a good gesture. I saw your video and the context was not in bad taste. We shouldn't create unnecessary issues out of this.

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"Sawarn Lives Matter"6 месяцев назад

अरे अपने टीचर्स के साथ खड़े होना सीखो लोडू जो कहा है, वो मुहावरा है, समाज में प्रचलित है, और सही भी है। फ्लो में कहा है कोई अपमानित करने के उद्देश्य से नहीं कहा। वैसे भी डूब ही रहे हो, जल्द डूबोगे

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D6 месяцев назад

What's there to investigate??? Your faculty Rishi Jain has on video addressed a community as "thieves and Chamars" class. And you just suspended him??

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Savita Kumari6 месяцев назад

आपके प्लेटफॉर्म से अक्सर ऐसी शिकायत आती है।या तो आपने टीचर को खुली छूट दे रखी है कि बोलो फिर माफी माँग लेना या आप के टीचर बेलगाम हो चुके हैं?

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Ravindra Jatav6 месяцев назад

अब अध्यापक ऋषि जैन का माफी नामा आपके सामने। 👇

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Ravindra Jatav6 месяцев назад

यह ऋषि जैन नामक अध्यापक अलख पांडे की फिजिक्स वल्लाह में यूपीएससी के लिए अर्थशास्त्र पड़ता हैं। ऋषि जैन लाइव में पढ़ते समय एक अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाली जाटव जाति के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था जो बिल्कुल गलत हैं। अनुसूचित जाति SC में आने वाली जाटव समाज भारत में इसकी आबादी बढ़ी संख्या में हैं और देश में संघर्ष करने वाली जाति भी यही है, जो सामंतवादी जातिवादी ताकतों से डायरेक्ट लड़ रहे हैं। हम बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के संविधान को मानने वाले लोग है, संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात को रखते हैं। चाहते तो हम भी किसी जाति विशेष को टारगेट करके अपनी बात रख सकते थे परंतु हम ऐसा नहीं करते। ऋषि जैन जैसे लोग बच्चों को यूपीएससी में क्या पढ़ते होंगे कि किसी जाति विशेष के लोगों पर अनार गलत भाषा का प्रयोग और टीका टिप्पणी करना। ऋषि जैन अब माफी मांग रहा है आखिर ऐसा कृत करते ही क्यों जो माफी मांगना पड़े। पहले अफशब्द।👇 अब माफीनामा।👇

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दा आज़ाद6 месяцев назад

लिखित में मुकदमा दर्ज करना चाहिए और जेल में डालो माफी से कोई कर नहीं काम चलेगा

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Daemon Targaryen6 месяцев назад

He teaches economics for UPSC btw. This shows how common it is to use Casteist slur where he grew up.

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Kabir Yadav6 месяцев назад

The truth is — he didn’t actually mean what he said. So please let him continue his job. One word can’t define his entire personality, especially when it wasn’t meant that way. So please, allow him to continue his job. Don’t leave him when he needs you the most.

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Dev6 месяцев назад

निकल कैसे जाता है I यैसे लोग की वजह से अलख पांडे जैसे लोग भी बदनाम हो जाते है

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JAY ⚡6 месяцев назад

Thanks kuch accha suna aise hi Boycott krte rhein sb SC ST bhimto ka👌

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Reservation Hatao desh bachao6 месяцев назад

Bhai aisa kya kah diya inhone ? Padhna likha aadmi ye baatein dhyan nhi deta .. ! Jo padhna nhi chahta usko padhana bekaar hai

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घटोत्कच6 месяцев назад

यही हर बार होता है पहेले ऐसे शब्द बोलो फिर माफी मांग लो पर सिर्फ माफी मांगने से कुछ नहीं होगा ,इस मास्टर पर case होना चाहिए,,FIR दर्ज होना चाहिए।

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Bundelkhandi (GC)6 месяцев назад

सिर्फ एक शब्द जो कि उनके जाति प्रमाण पत्र में लिखा है वो गाली या अपशब्द कैसे हो गया? जिस जाति का प्रमाण पत्र लेकर हर तरह की सुख सुविधाएं मिलती है वो शब्द बोलने के लिए माफी मांगना पड़ रहा है? अगर ऋषि जैन के खिलाफ कोई भी कार्यवाही होती है सवर्णों को PW का बहिष्कार करना चाहिए।

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Arey Yaar6 месяцев назад

Chutiya bus camere pe muh banaya . Should be punished as per SC/ST act and jailed

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RAHUL NIMESH6 месяцев назад

Action and apology are noted, but this raises a deeper concern. Can an apology really change a mindset that casually uses such language? Such words don’t come out by mistake — they reflect a deeply rooted thinking. Also, why did the action come only after the issue went viral? If there is truly a zero-tolerance policy, then why wasn’t this addressed immediately during the live class itself? An apology under public pressure often feels like damage control, not accountability. Real accountability would mean: 👉 Identifying and stopping such behaviour instantly 👉 Taking responsibility before public outrage 👉 Ensuring such mindset does not find space on an educational platform Because education is not just about subjects — it’s about values. And those values must be protected, not reacted to only when exposed. कार्रवाई और माफी अपनी जगह है, लेकिन असली सवाल इससे कहीं बड़ा है। क्या सिर्फ माफी मांग लेने से ऐसी सोच बदल जाएगी? ऐसी भाषा गलती से नहीं निकलती — यह अंदर की सोच को दिखाती है। और सबसे बड़ा सवाल — कार्रवाई तब ही क्यों हुई जब मामला वायरल हो गया? अगर सच में ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी है, तो लाइव क्लास के दौरान ही तुरंत एक्शन क्यों नहीं लिया गया? सच यह है कि दबाव में दी गई माफी अक्सर “जवाबदेही” नहीं, बल्कि “डैमेज कंट्रोल” लगती है। असली जवाबदेही तब होती है जब: 👉 ऐसी हरकत को उसी समय रोका जाए 👉 कार्रवाई वायरल होने से पहले हो 👉 और यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी सोच को प्लेटफ़ॉर्म पर जगह ही न मिले क्योंकि शिक्षा सिर्फ पढ़ाई नहीं होती — 👉 यह मूल्यों की भी बात होती है। और उन मूल्यों की रक्षा समय पर होनी चाहिए, बाद में नहीं।

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Jeet Jayasi6 месяцев назад

You are a teacher. first you should work on your soft skills and communication skills and try to learn how to react,what to speak and how to respond. Being an economic teacher and having this type of pathetic mindset can't accepted by anyone hope that you will learn from this mistake. sometimes it happens but be careful to choice of words. A Mistake that makes you humble is better than an achievement which makes you an arrogant. #upsc

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गौरव कुमार6 месяцев назад

पहली बात ये माफी हमे स्वीकार नही और दूसरी बात ऋषि जैन ने चूड़ा चमार बोला किस उद्देश्य से है ?? ऋषि जैन से अच्छा रहते है इससे अच्छा खाते है फिर घमंड किस बात का है इस को 😡😡😒

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Rohan pandey6 месяцев назад

There is nothing wrong with this because his intention was not to insult anyone.

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Prashant Piyadasi6 месяцев назад

ये माफी नहीं है -मुंह से निकलना नहीं चाहिए था: दिमाग में था तभी तो मुंह से निकला - समुदाय को बुरा लगा इसलिए माफी मांगता हूं :समुदाय का विरोध दर्ज नहीं होता, तो माफी नहीं मांगता? -मेरा इंटेंट नहीं था:सदियों से गाली दे दे कर muscle memory बनाई है, कि मुंह से स्वाभाविक निकला

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Anupp6 месяцев назад

When you grow up absorbing a certain culture, it inevitably shapes your thinking. You people are responsible for the divisions we see in society.

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नवनीत प्रियदर्शी6 месяцев назад

भाई तुम लोगो की जब जातिवादी सोच दिख गई तो माफी मांगने का क्या फायदा । अन्दर की नफरत तो दिखा दिए न

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Dr .Sirwalia🇮🇳6 месяцев назад

इसी वजह से मैं आपके ऑनलाइन डिस्ट्रीब्यूटर्स को ड्रॉप कर लिया है

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Prabal Dubey6 месяцев назад

आपको माफ़ी मांगना ज़रूरी नहीं है। जब आपने वह बात जानबूझकर या तीव्रता से नहीं कही, तो यह कोई अपराध नहीं है। अगर आप किसी बात को सोच-समझकर, पूरी समझदारी और होश-हवास में कहते, तब उसे गलत माना जा सकता था। लेकिन यह बात बिना सोचे-समझे आपके मुंह से निकल गई, इसलिए इसे अपराध नहीं माना जाएगा। इसलिए आपको माफ़ी मांगने की आवश्यकता नहीं है।

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Flowta 1.06 месяцев назад

यह कृत्रिम शर्मिंदगी है कोई माफी नहीं मिलनी चाहिए ऐसे गुरु , गुरु नहीं द्रोणाचार्य कहलाते हैं

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☀️࿗🏵️6 месяцев назад

Kuch galat to nahi bola tha. This wasn't required. Koi nahi BHIMTA republic me protest kar nahi sakte publicly bolna to bahut badi ho gayi, koi nahi, it's better to keep distance from leeches. Wise take.

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Umashankar Singh उमाशंकर सिंह

26,499 просмотров • 4 месяцев назад

IIT-Bombay के बीटेक (एनर्जी साइंस) द्वितीय वर्ष के दलित छात्र साहिल वाकोड़े की असामयिक मृत्यु ने देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, सम्मान और संस्थागत जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। साहिल जी की आत्महत्या के अगले दिन कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी बयान में परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन मिलने की बात कही गई। लेकिन साहिल की मृत्यु के अगले दिन प्रशासन द्वारा यह बयान जारी किया जाना और पूरे मामले को मुख्य रूप से मोबाइल मिलने की घटना से जोड़ना कई गंभीर सवाल खड़े करता है और मामले को लेकर संदेह को और गहरा करता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि परीक्षा कक्ष में साहिल जी के आसपास अन्य परीक्षार्थी मौजूद थे, लेकिन अभी तक उनमें से किसी अन्य परीक्षार्थी द्वारा उनके पास मोबाइल फोन होने की बात कहे जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, कॉलेज प्रशासन के नियमानुसार, यदि परीक्षा के दौरान किसी परीक्षार्थी के पास मोबाइल फोन या अन्य प्रतिबंधित सामग्री मिलती है, तो संबंधित सामग्री जब्त कर परीक्षार्थी को नई उत्तरपुस्तिका देकर परीक्षा पूरी कराई जाती है और आगे की कार्रवाई के लिए मामला कमेटी के सामने रखा जाता है। साहिल के परिजनों और साथी छात्रों का कहना है कि उन्हें प्रोफेसर द्वारा परीक्षा कक्ष से बाहर ले जाकर धमकाया गया और एक वर्ष के लिए निलंबित करने की बात कही गई। परिवार ने उनके साथ पहले भी जातिगत भेदभाव और संस्थागत प्रताड़ना किए जाने की भी बात कही है। 18 सितंबर की शाम करीब 6 बजे साहिल ने आत्महत्या कर ली। इसके कुछ ही समय बाद IIT Bombay के छात्र इस घटना से चिंतित होकर कैंपस में एकत्र हुए और कैंडल मार्च निकाला। इसके बाद से छात्र धरने पर बैठे हुए हैं। धरने पर बैठे छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगों में IIT के निदेशक और डीन (छात्र मामले) के इस्तीफे, साहिल जी के परिवार को मुआवजा, IIT प्रशासन की सहमति से प्रोफेसर दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज करने, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने और सभी छात्रों के साथ ओपन हाउस बैठक आयोजित करने की मांग रखी है। हम Ministry of Education से मांग करते हैं कि घटनाक्रम से जुड़े सभी CCTV फुटेज, परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो। देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव, अपमान या किसी भी प्रकार की संस्थागत प्रताड़ना की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। छात्रों की शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस दुःख की घड़ी में हमारी गहरी संवेदनाएँ साहिल के शोकाकुल माता-पिता और पूरे परिवार के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दे। #JusticeForSahilWakode

Chandra Shekhar Aazad

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उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद के राजेपुर थाना क्षेत्र के चाचूपुर जटपुरा गांव में शनिवार सुबह बृजेश लोधी का शव शराब ठेके के नजदीक पुलिया के नीचे नाले में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। परिजनों ने शराब ठेके के सेल्समैन पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के विरोध में उग्र हुए ग्रामीणों और महिलाओं ने शराब ठेके को हटाने की मांग को लेकर शव उठाने से इनकार कर दिया, जिससे मौके पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। इसके बाद जो हुआ, वह और भी शर्मनाक है। दबिश के नाम पर पुलिस द्वारा किसी को भी नहीं बख्शा गया और पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को लाठियों से निर्ममता से पीटा, जो निंदनीय और अस्वीकार्य है। संलग्न वीडियो दबिश के दौरान दूसरे दिन का है। हम तो पहले से ही कह रहे हैं कि हमारी नस्लों को बर्बाद करने के उद्देश्य से हमारी बस्तियों में लंबे समय से बड़े पैमाने पर नशे के ठेके खोले जा रहे हैं। इन ठेकों को बंद कराने के लिए जब हमारे लोग आंदोलन करते हैं, तो सरकार उन्हीं पर मुकदमे दर्ज कर देती है-यह एक कड़वी सच्चाई है। हम Government of UP से माँग करते हैं:- इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो।आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।महिलाओं पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई हो।गांव के पास स्थित शराब ठेके को तुरंत हटाया जाए। उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार आने पर बहुजन बस्तियों से ऐसे सभी नशे के ठेकों को हटाया जाएगा और आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाएगा। CM Office, GoUP Yogi Adityanath #ASP_K_Mission2027

Chandra Shekhar Aazad

36,000 просмотров • 4 месяцев назад

उड़ीसा के बलांगीर जिले के जुराबंध गांव में एक आदिवासी लड़की के साथ हुई अमानवीय घटना ने सरकार की संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपी अभया बाग ने न केवल पीड़िता के साथ दरिंदगी की, बल्कि उसे जबरन मल-मूत्र खिलाने जैसा क्रूरतम और घृणित अपराध किया। इस घटना की गंभीरता को समझते हुए मैंने अपने संगठन की ओर से Manoj Tandi को पीड़ित परिवार से मिलने और घटना की पूरी जानकारी लेने भेजा। मनोज ने परिवारजनों से बातचीत की, जिसके बाद मुझे फोन पर जानकारी दी गई कि आरोपी अभया बाग एक दबंग और प्रभावशाली व्यक्ति है। परिवार ने बताया कि आरोपी स्थानीय बीजेपी विधायक का करीबी है, और इसी राजनीतिक संरक्षण के कारण न तो पुलिस ने उसे अब तक गिरफ्तार किया है और न ही पीड़ित परिवार को कोई सुरक्षा दी गई है। परिवार गहरे भय और असुरक्षा में जीने को मजबूर है, और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद धुंधली नजर आ रही है। यह घटना न केवल एक आदिवासी लड़की के जीवन और सम्मान पर हमला है, बल्कि यह पूरे आदिवासी समुदाय के अधिकारों और गरिमा के प्रति हमारे समाज की उपेक्षा को भी उजागर करती है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह की घटनाओं पर प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक नेतृत्व चुप्पी साधे हुए हैं। हम इस घृणित अपराध की कड़ी निंदा करते हैं और प्रशासन से मांग करते हैं कि आरोपी अभया बाग को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उसे कठोरतम सजा दी जाए। साथ ही, पीड़ित परिवार को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए और उनकी सामाजिक व आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाए। यह मामला केवल एक आदिवासी लड़की का नहीं है, बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय के सम्मान, अधिकार और सुरक्षा का सवाल है। अगर इस घटना पर प्रशासन ने शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की, तो हम इसे लेकर बड़ा जन आंदोलन करेंगे और देशभर में इस मुद्दे को उठाएंगे। आदिवासी बेटियों की गरिमा और न्याय के लिए यह लड़ाई किसी भी स्थिति में रुकेगी नहीं। मैं Mohan Charan Majhi, Narendra Modi, Jual Oram, President of India, Governor Odisha, CMO Odisha, DGP, Odisha, NHRC India Vijaya Rahatkar और National Commission for Scheduled Tribes से अपील करता हूं कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएं। यह लड़ाई सिर्फ न्याय की नहीं, बल्कि इंसानियत को बचाने की है। #TribalLivesMatter

Hansraj Meena

69,946 просмотров • 1 год назад

भारतीय लोकतंत्र का आधार निष्पक्ष चुनाव है। डॉ अंबेडकर ने 15 जून 1949 को संविधान सभा में कहा था कि -- “Franchise is a most fundamental things in a democracy. No person who is entitled to be brought into the electoral rolls….should be excluded merely as a result of prejudice….” परन्तु अब सत्ताधारी दल कुर्सी पर बने रहने के लिए अनैतिकता की हद तक जाने को तैयार है। बड़े पैमाने पर चुनाव में गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं। Special Intensive Revision (SIR) के नाम पर खुले आम विरोधी पक्ष के वोटों को काटा जा रहा है। जो जीवित हैं उन्हें मृत बना दिया गया। केंद्रीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता इस बात से समझी जा सकती है कि वो यह बताने को तैयार नहीं थे कि किन लोगों के और किस आधार पर वोट काटे जा रहे हैं। हम Supreme Court के आभारी है, जो उन्होंने लोगों की आवाज़ सुनी और चुनाव आयोग को Voter List सार्वजनिक करने को कहा। सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि सत्ताधारी दल को 65 लाख लोगों के वोट कटने पर कोई आपत्ति नहीं है। इस बात से साफ़ जाहिर है कि इस Exercise का फ़ायदा किसे पहुचाने की कोशिश थी। राहुल जी ने आँकड़ों के साथ साबित कर दिया कि किस तरह से लोक सभा सीट पर गड़बड़ी कर उसे जीता गया। अब वैसे ही प्रमाण कई सीटों पर सामने आ रहे है, जहाँ सभी Assembly segment पर काँग्रेस पार्टी को बढ़त मिली परन्तु एक segment पर BJP के बढ़त ने काँग्रेस के उम्मीदवार को हराया। हमें यहीं आशंका महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर भी है। पार्टी बारीकी से ऐसे सीटों का अध्ययन कर रही है। समय आनेपर यह लोगों के सामने पेश किया जाएगा। क्योंकि ये हमारे लिए ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। मैं काँग्रेस पार्टी के देश भर में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील करता हूँ कि आप अपने बूथ की Voter List निकालिए और उसकी बारीकी से जाँच करिए। देखिए कि कितने लोगों के नाम काटे गए हैं, या उन्हें मृत बता दिया गया है, या साज़िश के तहत उन्हें दूसरे booth में shift कर दिया गया। कितने बाहरी लोगों के नाम जोड़े जा रहे हैं। या एक ही Voter ID Card को एक से अधिक बार कहाँ--कहाँ जोड़ा गया है। एक नई बात देखने को आई है कि चुनाव से एक दिन पहले additional list के नाम पर नई Voter List भेज दी जाती है। जिसकी जाँच समय के अभाव में candidate नहीं कर पाता। यही हमारे विरोधियों की साज़िश है। लेकिन हमें उनकी इस साज़िश का पर्दाफाश करना होगा। कांग्रेस पार्टी ने एक website बनाई है, उसपर आप सारी गड़बड़ियों की जानकारी दे सकते है। इसके अलावा, पूरे देश से लोग ऐसी जानकारी भेज रहे हैं हम उन्हें भी इकट्ठा कर रहे हैं। याद रखिए, ये चुनाव जीतने की लड़ाई नहीं है, ये भारतीय लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। यह हमारे संविधान को सुरक्षित रखने की लड़ाई है। हम महात्मा गाँधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, डॉ अंबेडकर, मौलाना आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के सपनों को ऐसे बिखरने नहीं दे सकते। हमें इस लड़ाई को उसी शिद्दत से लड़ना होगा, जिस शिद्दत से हमने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। इसी लड़ाई को लड़ने के लिए, राहुल जी आने वाली 17 तारीख़ से बिहार के सासाराम से “वोट अधिकार यात्रा” शुरू करने जा रहे है। आप सभी को मिलकर इसे सफल बनाना है। जय हिन्द 🇮🇳

Mallikarjun Kharge

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आज AICC महासचिवों, प्रभारियों और फ्रंटल संगठनों के अध्यक्षों की बैठक में मेरे शुरुआती वक्तव्य के अंश — पिछले 8-9 अप्रैल को हम सभी लोग अहमदाबाद AICC सत्र में मिले थे। आप सभी को मैं इस सेशन की ऐतिहासिक सफलता के लिए बहुत बधाई देता हूं। इस सेशन में पारित Resolution को आप सभी ने ध्यान से देखा होगा। उस संदेश को आप सभी को जिला, मंडल, ब्लाक और बूथ तक पहुंचाना है। GS-O ने इस संबंध में एक Circular भी जारी किया है। हमारे निँर्णयों की गंभीरता आप इससे समझ सकते हैं कि 15-16 अप्रैल को राहुल गाँधी जी ने गुजरात में जिलाध्यक्षों के चुनाव को लेकर बैठक बुलाई। Observers से संवाद कर के निर्देश दिया कि कैसे जिलाध्यक्षों का चय़न होना है। इसी बीच आपने गौर किया होगा कि कैसे बड़े षडयंत्र के तहत National Herald मामले में CPP Chairperson श्रीमती सोनिया गाँधी और LOP लोकसभा श्री राहुल गाँधी का नाम चार्जशीट में डाल दिया गया है। पर किसी का भी नाम डाल दें हम डरने वाले नहीं है। इसके दो तीन पहले ही National Herald की दिल्ली, लखनऊ और मुंबई की संपत्तियों को अटैच कर दिया गया। इसमें कोई शक नहीं कि यह सब बदले की भावना से किया जा रहा है। ‘Young Indian', ‘not for profit’ company है। इसका मतलब यह है कि AJL के शेयर और संपत्ति या Profit को ना तो कोई ले सकता है और ना ही ट्रांसफर कर सकता है। बीजेपी के लोग झूठ बोलकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। हमें जनता को सच बताना होगा। यह महज संयोग नही हो सकता कि एक तरफ हमारा AICC का अहमदाबाद अधिवेशन हो रहा हो और उसके तत्काल बाद ED की इतनी बड़ी कार्रवाई हो रही हो। मैं यहां आपको याद दिला दूं कि मेरे नेतृत्व में जब रायपुर में कांग्रेस महाधिवेशन हुआ था तो मोदी जी ने वहां भी उसे फेल करने के लिए हमारे नेताओं के ऊपर ED, CBI को लगा कर रेड कराई। उनकी मंशा थी कि सेशन न होने पाए। फिर भी ये हुआ। लोकसभा चुनाव के पहले हमारे खाते बंद किए फिर भी हमारा संख्या बल जनता ने लोक सभा में दो गुना कर दिया। हमारी लड़ाई कमजोर नहीं पड़ी। सरकार के वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने पूरे विपक्ष को एकत्र किया। और बिल का विरोध किया। सभी INDIA दल के लोगों ने साथ दिया। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही है। मुझे खुशी है कि कांग्रेस और विपक्ष के दूसरे दलों ने जिन बिंदुओं को रखा था, सुप्रीम कोर्ट ने उनको महत्व दिया है। खास तौर पर सरकार द्वारा ‘Waqf by user' का मुद्दा, जानबूझ कर वक्फ की संपत्तियों को विवाद में डालने के लिए ही लाया गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई अभी कर रही है, हमें पूरा भरोसा है कि हम इस लड़ाई को भी जीतेंगे। इस मामले में सरकार और भाजपा के नेताओं ने अफवाह को फैलाने और लोगों को भ्रमित करने में कोई कमी नही छोड़ी थी। हमें लोगों के बीच जाकर उनको अपने पक्ष से अवगत कराना होगा और भाजपा के षडयंत्र को बेनकाब करना होगा। इसके अलावा देश के सामने कई ज्वलंत मुद्दे हैं, जिनको हमें लगातार उठाते रहना है। योजनाबद्ध तरीके से काम जारी रखना है। हम आपके सुझाव भी सुनेंगे और फिर आगे की रणनीति तय करेंगे। जय कांग्रेस जय हिंद

Mallikarjun Kharge

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मैं जानती हूँ कि आप में से बहुत सारे लोग हरियाणा के नतीजों से परेशान हैं • चुनाव हमारे पक्ष में होने के बावजूद परिणाम ना आने से हम भी व्यथित हैं. पार्टी एवं नेतृत्व इसका आँकलन करके आगे के लिए रणनीति बना रहे हैं • लेकिन एक बात याद रखियेगा, हमारा वजूद एक हार या एक जीत से तय नहीं हो सकता • हमारी लड़ाई उन ताक़तों से है जिनको साम दाम दंड भेद हर तरह के हथकंडे अपनाने से कोई परहेज़ नहीं है • जिनके लिए हर क़ीमत पर सत्ता हासिल करना एकमात्र लक्ष्य है. जिनके पास अकूत पैसा ही नहीं पूरा तंत्र है • और हमारे पास है केवल सत्य और साहस - पर वो इतना है कि इन जैसों के लिए काफ़ी है • इतना है कि इनको परेशान करके रख देता है • आज वक़्त है सबक़ सीख कर आगे बढ़ने का, आज वक़्त है अपने हौसले और विश्वास को और मज़बूत करने का • आज राहुल गांधी के संकल्प में संकल्प मिलाने का वक़्त है, क्योंकि यह मत भूलिएगा कि जब सबने हथियार डाल दिये थे • तो उस एक आदमी ने अकेले इस देश को जोड़ने का बीड़ा उठा लिया था. बिना अपनी जान की परवाह किए इस देश को पैदल नाप दिया और इस देश में मोहब्बत का परचम लहरा दिया • उस एक आदमी ने मोदी और उनकी निरंकुश सरकार के ख़िलाफ़ संविधान उठा कर उनको बैसाखी पर ला खड़ा कर दिया • सफलता ना मिलना ज़रूर दुखी करता है, लेकिन याद रखियेगा आप अभिमन्यु नहीं अर्जुन हैं और इनके चक्रव्यूह को तोड़ कर ही हम दम लेंगे • एक बार सोचियेगा आप राहुल के साथ क्यों खड़े हैं? सिर्फ़ इसलिए क्योंकि आपको विश्वास है कि यह बंदा डरता नहीं है, यह आँख में आँख डाल कर ललकारता है, यह अजनबियों को, ग़रीबों को, समाज की अंतिम पायदान पर खड़े उस आदमी को गले लगाकर इज़्ज़त देता है जिसको कोई पूछता नहीं है, आप जानते हैं कि राहुल गांधी आपके हक़ की लड़ाई लिए, इस देश के लिए हर क़ीमत चुकाने को तैयार हैं • तो उठिये, निराशा को त्यागिये और फिर से लड़ाई के लिए कमर कस लिजिये. महाराष्ट्र झारखंड में जीत का झंडा गाड़ना है • हम कांग्रेस के सिपाही हैं, उस पार्टी के योद्धा हैं जिसने ब्रिटिश हुकूमत से निहत्थे लड़ कर इस देश को आज़ादी दिलाई • जो लड़ता है - वही जीतता है. और इतिहास गवाह है कि अंततोगत्वा जीत हमेशा सच और साहस की होती है दिनकर के शब्दों में: सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें आगे क्या होता है We are fellow fighters, we are Rahul Gandhi’s soldiers, we are his strength and he is our leader who inspires us to fight the good fight. So rise and together we will shine! हम साथ लड़ेंगे और जीतेंगे! ❤️

Supriya Shrinate

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शर्म करो! यह सिर्फ़ एक छात्र नहीं, बल्कि शिक्षा के बाजारीकरण की पूरी व्यवस्था जल रही है! आज़ाद भारत का यह शायद पहला मामला है जहाँ शिक्षा के लिए एक छात्र ने कॉलेज में खुद को पेट्रोल डालकर जिंदा जला लिया। यह सिर्फ़ एक दर्दनाक घटना नहीं — यह हमारे समाज, हमारी सरकारों और हमारे शिक्षा तंत्र पर सबसे बड़ा कलंक है। मुज़फ्फरनगर के D.A.V. कॉलेज के बी.ए. तृतीय सेमेस्टर का छात्र उज्ज्वल राणा 7,000 रूपए की बकाया फीस के लिए मोहलत मांग रहा था, लेकिन प्राचार्य ने पूरे कॉलेज के सामने उसे बेइज़्ज़त किया और पीटा। अपमान और अन्याय से आहत होकर उज्ज्वल ने कॉलेज के भीतर ही खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। वह इस वक्त ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। उज्ज्वल के वीडियो में उसने कहा है — “अगर मुझे कुछ हुआ, तो प्राचार्य और पुलिस जिम्मेदार होंगे।” फिर भी सरकार और प्रशासन मौन हैं। छात्रों का भी आरोप है कि कॉलेज स्टाफ और पुलिस द्वारा लगातार किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न के कारण ही उज्ज्वल ने यह भयानक कदम उठाया। यह घटना शिक्षा संस्थानों में छात्रों पर पड़ने वाले आर्थिक और मानसिक दबाव के मुद्दे को एक बार फिर उजागर करती है। यह घटना एक छात्र की नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी की चीख है —जहाँ शिक्षा एक बाज़ार, छात्र ग्राहक, और ज्ञान मुनाफ़े का ज़रिया बन चुका है। भारत का संविधान हर नागरिक को मुफ़्त और समान शिक्षा का अधिकार देता है, लेकिन आज शिक्षा संस्थान व्यापार के अड्डे बन चुके हैं —जहाँ गरीब, पिछड़े, दलित और वंचित बच्चों का सपना हर दिन कुचला जा रहा है। केवल सात हज़ार की फीस के लिए एक छात्र ने अपनी जान दांव पर लगा दी! परम पूज्य बाबा साहब ने कहा था —“शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पियेगा वह दहाड़ेगा।” लेकिन आज उसी शिक्षा को बाजारू बना दिया गया है —जहाँ न्याय मांगने पर भी छात्रों को धमकाया, गालियाँ दी जाती हैं और पीटा जाता है। हम अपने छोटे भाई उज्ज्वल के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रकृति से प्रार्थना करते हैं। हम Government of UP से मांग करते हैं — 1. D.A.V. कॉलेज के प्राचार्य को तुरंत निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए। 2. छात्र उज्ज्वल राणा को सर्वोत्तम चिकित्सा व सुरक्षा दी जाए। 3. कॉलेज प्रशासन और संबंधित पुलिसकर्मियों की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो। 4. शिक्षा संस्थानों में फीस और शोषण के मामलों पर राज्यस्तरीय निगरानी तंत्र बनाया जाए। यह मामला सिर्फ उज्ज्वल का नहीं — बल्कि उन लाखों छात्रों का है जो हर दिन शिक्षा के बाजारीकरण की आग में जल रहे हैं। CM Office, GoUP Yogi Adityanath

Chandra Shekhar Aazad

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खसरा नंबर 136, #Devli में जूनियर इंजीनियर #Sachin_Chaudhary के कार्यकाल के दौरान एक साथ 8 बड़े #अवैध_निर्माण खड़े कर दिए गए। #MCD ने इन्हें सिर्फ कागजों में बुक करके खुली छूट दे दी। ​अब भ्रष्ट #Builder_Mafia इन अवैध इमारतों में भोले-भाले लोगों को 70 से 80 लाख रुपए प्रति फ्लैट के हिसाब से बेच रहे हैं। इन खरीदारों को यह तक नहीं पता कि ये इमारतें MCD द्वारा बुक हैं। ​क्या इस भारी #भ्रष्टाचार के लिए JE सचिन चौधरी की उच्च स्तरीय #Vigilance जांच नहीं होनी चाहिए? आखिर #MCDCommissioner ऐसे दागी अधिकारियों को क्यों बचा रहे हैं, यह एक बहुत बड़ा सवाल है। ​ये सभी 8 अवैध निर्माण बिना कोई नक्शा पास कराए, सारे नियम-कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाकर बनाए गए हैं। जूनियर इंजीनियर से लेकर MCD के बड़े अधिकारियों ने करोड़ों रुपए की मलाई खाई है। ​दिखावे के लिए इन ढांचों को सिर्फ बुक किया गया है। कार्यवाही के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकी गई है और बिल्डरों को खुलेआम लूटने का लाइसेंस दे दिया गया है। ​क्या जिनकी जान पहचान BJP Delhi के नेताओं से है, उन्हें हर अवैध काम करने की छूट मिल जाती है? या फिर इस #Illegal_Construction की अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा नीचे से लेकर ऊपर तक बांटा जाता है? ​इसी भ्रष्ट सिस्टम के कारण आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। क्या प्रशासन की आंखें तब खुलेंगी, जब ये कमजोर निर्माण भरभरा कर गिर जाएंगे और मासूमों की जान जाएगी? ​#Delhi की जनता देख रही है कि हमारी माननीय मुख्यमंत्री Rekha Gupta जी इस मामले पर क्या संज्ञान लेती हैं। क्या इन भ्रष्ट अधिकारियों की जांच होगी और इन अवैध इमारतों को ध्वस्त किया जाएगा? ​या फिर इस पूरे मामले को अनदेखा करके, #Delhi_Citizens को चंद रुपयों के लालच में मौत के मुंह में धकेल दिया जाएगा? जनता को तुरंत जवाब और सख्त कार्यवाही का बेसब्री से इंतजार है। ​इस #Corruption से न केवल दिल्ली का विकास खतरे में पड़ रहा है, बल्कि नागरिकों की गाढ़ी कमाई भी लूटी जा रही है। ऐसे अपराधियों को किसी भी कीमत पर बिल्कुल बख्शा नहीं जाना चाहिए। ​हम मांग करते हैं कि इस प्रकरण की एक पारदर्शी और स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए। Municipal Corporation of Delhi को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसा कोई भी अवैध काम न हो। PMO India गृहमंत्री कार्यालय, HMO India LG Delhi CMO Delhi Delhi Development Authority

Prerna Ek Disha Foundation

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“हमारे भाई सुनील गौतम का यह वीडियो योगी सरकार और उनकी पुलिस के अन्याय का सबसे बड़ा गवाह है। परिवार पर दबाव डालकर झूठे बयान दिलवाना और सच्चाई को दबाना न्याय व्यवस्था का मज़ाक है” उत्तर प्रदेश के जनपद कौशाम्बी में हमारे परिवार की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और प्रयागराज के करछना में हमारे परिवारजन की बेरहमी से हत्या कर शव को जलाए जाने की दुखद घटना हुई। मैं जब इन दोनों पीड़ित परिवारों से मिलने प्रयागराज पहुँचा, तो मुझे सुनियोजित साजिश के तहत धोखे से सर्किट हाउस में नजरबंद कर दिया गया और पुलिस की मौजूदगी में असामाजिक तत्वों द्वारा बवाल कराया गया। इसी दौरान मेरे छोटे भाई, भीम आर्मी के कार्यकर्ता सुनील कुमार गौतम (उम्र 25 वर्ष) की निर्मम हत्या कर दी गई। स्थानीय पुलिस और उपद्रवियों ने मिलकर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं पर हमला किया। इस हमले में सुनील को बेरहमी से पीटकर अधमरी हालत में खेत में फेंक दिया गया। सूचना मिलने पर उनके भाई ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद सुनील ने ICU में दम तोड़ दिया। सुनील की निर्मम पिटाई के बाद घायल अवस्था का एक वीडियो मिला है (जो संलग्न हैं), जिसमें सुनील की गंभीर हालत साफ-साफ दिख रही है। यह वीडियो इस निर्मम हत्या का सबसे बड़ा सबूत है और साबित करता है कि उनकी मौत बीमारी से नहीं, बल्कि मारपीट से हुई। मैं यह सोच सकता हूं कि शायद उस दिन भाई सुनील आंदोलन में नही गया हो लेकिन फिर यह मामला और गम्भीर हो जाता है कि क्या जातंकवादियों द्वारा सुनील को सिर्फ जाति पूछकर मारा गया है? इसके बावजूद पुलिस बीमारी को सुनील की मृत्यु का कारण बताकर वास्तविकता से मुँह मोड़ रही है और मौत को करछना की घटना से जोड़ने से इनकार कर रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि पुलिस और प्रशासन सुनील के परिवार पर दबाव बनाकर उनसे जबरन यह बयान दिलवा रहे हैं कि सुनील की मौत बीमारी से हुई, ताकि पुलिस और दोषियों को बचाया जा सके। यह न केवल मृतक के परिवार के अधिकारों का हनन है, बल्कि न्याय प्रक्रिया के साथ खुला खिलवाड़ और साक्ष्य को प्रभावित करने की कोशिश भी है। सुनील के भाई सतीश का भी एक वीडियो सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि उनके चेहरे पर पुलिस का डर और दबाव कितना गहरा है। यह वीडियो प्रयागराज में पुलिस के आतंक और दलित परिवारों पर बन रहे दबाव की सच्ची तस्वीर पेश करता है। यह केवल हत्या नहीं है, बल्कि हजारों सालों से बहुजन समाज पर हो रहे अन्याय और अत्याचार का जिंदा उदाहरण है, जहाँ पीड़ित को ही आरोपी बना दिया जाता है। यही सिलसिला आज भी जारी है और यही प्रयागराज के करछना में हुआ है। सुनील कुमार गौतम की निर्मम हत्या, कई निर्दोष साथियों को जेल भेजा गया है, बल्कि पुलिस द्वारा भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं के घरों पर दबिश डालकर फर्जी तरीके से नाम जोड़कर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। जो लोग वहां मौजूद भी नहीं थे, उन्हें भी परेशान किया जा रहा है। पुलिस द्वारा घर-घर दबिश डालकर दलित परिवारों में दहशत फैलाई जा रही है। यह पूरी तरह असंवैधानिक, अन्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है। *Government of UP से हमारी माँगें:* * इस हत्या में शामिल सभी पुलिसकर्मियों और असामाजिक तत्वों पर BNS की सख्त धाराओं, SC/ST अत्याचार निवारण एक्ट और हत्या , बलवा, व लूट के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए। दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। * * भाई सुनील के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। * * निर्दोष भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं व अन्य दलित समाज के भाइयों के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएँ। यदि हमारी माँगें शीघ्र पूरी नहीं की गईं, तो भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। Government of UP Yogi Adityanath CM Office, GoUP National Commission for Scheduled Castes NHRC India DGP UP

Chandra Shekhar Aazad

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आज आयोग में काम करने का मेरा आखिरी दिन है। आज मैं इतने दिनों के मेरे अनुभवों को निश्चित रूप से आपसे साझा करना चाहूंगा। आयोग में काम करते हुए मुझे प्रोफेशनल और व्यक्तिगत दोनों तरह के अनुभवों के साथ गुजरना पड़ा। लगभग एक दशक का समय इस आयोग में मेरा निकला है। मनुष्य का जीवन नश्वर है और इसका नष्ट होना तय है। हम किस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जीवन को नष्ट कर रहे हैं, यह महत्वपूर्ण है। आयोग में आने के बाद बच्चों के साथ काम करते हुए मेरा जो व्यक्तिगत व्यक्तित्व विकास हुआ है वो मैं साझा करना चाहूंगा। मेरे अंदर एक आध्यात्मिक चेतना का विकास हुआ है और इस अध्यात्मिक चेतना ने मेरे स्वभाव को बदलने का काम किया है। जो लोग मुझे 20-25 वर्षों से जानते हैं उनको पता है कि एक दशक पहले मेरे स्वभाव में कमजोरियां थी और क्रोध मेरी सबसे बड़ी कमजोरी थी। आज यह कहते हुए मैं देश भर के बच्चों के प्रति कृतज्ञता से भर जाता हूं। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के प्रति मेरा मन श्रद्धा से भर जाता है कि उन्होंने ये काम मुझे सौंपा और देश के बच्चों के साथ काम करने का मुझे अवसर दिया। मेरे मन का विकार खत्म हो गया, चित्त निर्मल हो गया औऱ मुझे क्रोध आना बंद हो गया। जब हम उन लोगों की पीड़ा देखते हैं जो संसार के सबसे दुश्वार कष्टों का सामना कर हैं, आनाथ बच्चे, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चे, बलात्कार जैसे यौन शोषण का शिकार बच्चे, ट्रैफिकिंग, दासता, बाल श्रम में लगे हुए बच्चे, मानसिक विकारों से जूझ रहे बच्चे, स्कूल जाने का रास्ता खोज रहे बच्चे, वो लडकियाँ जिनको बराबरी का हक हासिल नहीं हैं, उनके कष्टों को जब हम देखते हैं और कोशिश करते हैं कि उनके कष्टों के सहभागी बनकर उस पीड़ा को कम करने का प्रयास करें। यह कार्य व्यक्तिगत रूप से आपको बदल कर रख देगा और यही मेरे जीवन का अनुभव है जो जीवन भर मेरे साथ चलेगा। मेरा स्वभाव बदला, मेरा व्यक्तित्व बदला गया। प्रधानमंत्री जी के बारे में सब लोग यह बात जानते हैं कि उनके स्पर्श मात्र से लोगों के जीवन बदल गए हैं। मैंने इस बदलाव को अपने अंदर महसूस किया है। मेरे प्रधानमंत्री जी का ही मेरे ऊपर विश्वास है ना केवल मेरा जीवन बदला बल्कि उन्होंने मुझे वो माध्यम बनने का अवसर प्रदान किया है कि मैं देश के बच्चों के कष्टों को उन तक पहुंचा पाया और फिर प्रधानमंत्री जी ने देश के लाखों बच्चों के जीवन को बदलने का काम किया। यह once in a life opportunity है, मैं कृतज्ञता से भरा हुआ हूं। आयोग में यहां के अधिकारी यहां के सहयोगी एक परिवार की तरह हम लोगों ने साथ काम किया। मैं मगर पीछे जाकर याद करूं तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में ऐसे दिन भी है जब हमारे आयोग परिवार के किसी सदस्य ने अपने निकट परिजन में से किसी को खोया। त्रासदियों का सामना किया, उसके बावजूद उस दिन भी बच्चों का काम करने के लिए वह व्यक्ति खड़ा रहा। बच्चों के प्रति जिसके मन में संवेदना, सद्भावना और उनकी पीड़ा को कम करने का जज्बा है वही लोग इस आयोग में टिक के काम कर पाए और आयोग इसी जज्बे के साथ ऐसे ही चलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि जो संसाधन हमने आयोग के रूप में डेवलप किया है वह माननीय प्रधानमंत्री जी की सीधी निगरानी में देश के बच्चों के कल्याण का काम करने के लिए तत्पर हैं। 2014 से जिस नए भारत के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है, उस प्रक्रिया में सहभागिता निभाने के लिए यह आयोग तैयार है। देश के सभी बच्चों को आज मेरी ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। हमने कानूनी, सामाजिक, व्यवस्थागत कमियों का सामना किया, संघर्ष किया और सफलता प्राप्त की है । जीवन में जो प्रवाह है वह नदी के समान होना चाहिए और मोक्ष के सागर में मिलने तक नदी का प्रवाह ऐसे ही बना रहे,इसी कामना के साथ देश के बच्चों को, देशवासियों को बहुत-बहुत धन्यवाद। आदरणीय प्रधानमंत्री जी का मनपूर्वक बहुत बहुत आभार। भारत माता की जय 🇮🇳🙏 PMO India Narendra Modi NCPCR

प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo

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आदरणीय CP Noida मैम, POLICE COMMISSIONERATE GAUTAM BUDDH NAGAR UP POLICE DCP Central Noida, निवेदन है कि चौकी इंचार्ज द्वारा इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई न करके मामले को दबाने अथवा लीपापोती करने का प्रयास किया जा रहा है। हम सभी नागरिकों को CP Noida मैम, आप पर पूरा विश्वास है कि आप इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाकर सत्य के आधार पर उचित एवं सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश देंगी। पीड़ित की पीड़ा: “दिनांक 19 जुलाई 2026 को हुई मारपीट की घटना में गंभीर कान की चोट, पुलिस एवं चिकित्सीय लापरवाही तथा निष्पक्ष जांच एवं न्याय हेतु प्रार्थना। माननीय पुलिस आयुक्त महोदया, सविनय निवेदन है कि दिनांक 19 जुलाई 2026 को मेरे साथ गंभीर मारपीट की घटना हुई, जिसके परिणामस्वरूप मुझे गंभीर शारीरिक चोटें आईं, विशेषकर मेरे बाएं कान में गंभीर क्षति हुई। घटना के पश्चात पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने ले जाया गया। दुर्भाग्यवश, थाना पहुंचने पर मेरी चोटों की गंभीरता को समझे बिना दोनों पक्षों को लॉकअप में बंद कर दिया गया। मैंने बार-बार पुलिसकर्मियों को बताया कि मुझे अत्यधिक दर्द हो रहा है तथा मेरे बाएं कान से सुनाई नहीं दे रहा है, इसलिए तत्काल चिकित्सा सहायता और मेडिकल परीक्षण की आवश्यकता है। काफी अनुरोध के बाद मुझे बिसरख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉ. अमित कुमार टोंक द्वारा प्राथमिक परीक्षण किया गया। मैंने डॉक्टर को स्पष्ट रूप से बताया कि मुझे बाएं कान से सुनाई नहीं दे रहा है तथा कान के अंदर लगातार सीटी जैसी आवाज आ रही है। मैंने ईएनटी विशेषज्ञ के पास रेफर करने का अनुरोध किया, किंतु अस्पताल में विशेषज्ञ एवं आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध न होने की बात कहकर मुझे जिला अस्पताल, सेक्टर-39, नोएडा जाने की सलाह दी गई। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने मामले को MLC बताते हुए रेफरल लेटर की मांग की। जब मैंने इस संबंध में थाने के एसआई राहुल से सहायता मांगी, तो मेरी गंभीर स्थिति को संवेदनशीलता से लेने के बजाय उन्होंने मेरी शिकायत को हल्के में लेते हुए कहा कि मैं “राई का पहाड़ बना रहा हूं” और सामान्य ओपीडी में उपचार कराने की सलाह दी। इसके बाद भी मुझे रेफरल उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण मुझे अस्पताल और थाने के बीच बार-बार भटकना पड़ा। अंततः मैंने स्वयं ओपीडी पर्चा बनवाकर जिला अस्पताल में जांच कराई। जांच के दौरान चिकित्सक ने स्पष्ट रूप से बताया कि मेरे बाएं कान का पर्दा (Eardrum) फट चुका है तथा कान के अंदर रक्त जमा हुआ है। चिकित्सक ने भविष्य में ऑपरेशन की संभावना भी व्यक्त की तथा आगे की विस्तृत जांच के लिए मुझे अली यावर जंग अस्पताल, सेक्टर-12, नोएडा रेफर किया। अली यावर जंग अस्पताल में कराए गए सभी परीक्षणों में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ कि मेरे बाएं कान की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है तथा मुझे Hearing Loss हुआ है। चिकित्सकों ने कान का पर्दा फटने और अंदर रक्त के पैच होने की पुष्टि भी की। सभी मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उन्हें थाने में जमा कर दिया गया। इसके पश्चात लगभग चार-पांच दिन बाद जांच अधिकारी श्री सुनील कुमार के साथ संबंधित अस्पताल में रिपोर्टों का सत्यापन भी कराया गया, जहां चिकित्सक ने जांच अधिकारी के समक्ष भी मेरे कान का पर्दा फटने तथा अंदर रक्त के पैच होने की पुष्टि की। इतने गंभीर एवं स्पष्ट चिकित्सीय प्रमाण उपलब्ध होने के बावजूद आज तक इस मामले में कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद मुझे न्याय दिलाने के बजाय लगातार थाने और अस्पतालों के चक्कर लगाने के लिए विवश किया जा रहा है। यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय से वंचित करने का प्रयास प्रतीत होती है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो गई जब जिस अस्पताल में मेरी जांच हुई थी, वहां से मुझे पुनः जांच करवाने हेतु फोन किए जाने लगे। इससे मुझे आशंका है कि पहले से सत्यापित मेडिकल रिपोर्टों को प्रभावित करने, कमजोर करने अथवा संदेह के घेरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपियों की प्रभावशाली पहुंच के कारण पूरे मामले को दबाने एवं निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। मेरे कान का पर्दा फट चुका है, मेरी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है तथा भविष्य में ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा समय पर उचित धाराओं में कार्रवाई न करना, उपलब्ध मेडिकल प्रमाणों के बावजूद मामले को लंबित रखना तथा एक पीड़ित को लगातार भटकाना अत्यंत गंभीर विषय है।” CP Ma'amपर मुझे पूरा भरोसा हैं कि इस मामले मैं निष्पक्षता से कार्यवाही कर उचित न्याय दिलाएंगी। भवदीय, जयप्रकाश शर्मा मोबाइल: 9910693312

Abhishek Kumar

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आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया। रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है। हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा। हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया। इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए। पुलिस का कहना था कि छात्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है। कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।” यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी। यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है? हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है? यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इसे पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आग्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है। यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे। #JantarMantar #StudentVoices #Delhi #NEET Press Trust of India ANI IANS The Wire The Indian Express ravish kumar Prakash Raj Cockroaches of India Congress BJP Delhi Congress Delhi Police Yogendra Yadav Abhijeet Dipke Saurav Das Srinivas BV Uday Bhanu Chib

Avani Bansal

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प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, भारत सरकार विषय – महिला दिवस पर महिला सहकर्मी पत्रकारों के सम्मान-स्वाभिमान के लिए न्यूज इंडिया 24/7 न्यूज चैनल के प्रबंधन की पात्रता की गहरी पड़ताल के संदर्भ में. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, देश-दुनिया में महिलाओं के सशक्तिकरण, योगदान, उपलब्धि, सुरक्षा, सम्मान और संभावनाओं का सामूहिक मंगलगान है. स्वावलंबन औऱ स्वाभिमान से भरी आधी आबादी के समुचित औऱ सार्थक योगदान को रेखांकित करने का दिवस. उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने का वैश्विक संकल्प भी. लेकिन आज मैं देश की कुछ योग्य, स्वाभिमानी औऱ कर्मठ महिला पत्रकार सहकर्मियों की पीड़ा आपके सामने रखने आया हूं. यह खुला पत्र अनुशासन औऱ ईमानदारी के ढाई दशक से अधिक के मेरे पत्रकारीय जीवन की सबसे अराजक, पीड़ादायक और भयावह घटना का सार्वजनिक पाठ भी है. तस्वीर साफ करने और मूल बात की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए इसे मैं कुछ प्वांयट्स में रख रहा हूं. 1- न्यूज इंडिया 24/7 न्यूज चैनल के चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा उर्फ शालू पंडित के कई बार के अनुरोध और स्वतंत्र रुप से काम करने के भरोसे के बाद मैंने 25 दिसंबर 2025 को बतौर इडिटर इन चीफ चैनल को ज्वॉयन किया. इस चैनल का दफ्तर सेक्टर 63, नोएडा, गौतमबुद्धनगर, यूपी में है. ज्वॉयन करने के बाद मुझे चैनल की अव्यवस्था औऱ शैलेंद्र शर्मा के मनमाने तरीके से चैनल चलाने के रवैये की जानकारी होने लगी. चूंकि मैंने संपादकीय अधिकार औऱ दायित्व के साथ कभी समझौता नहीं किया, इसलिए चैनल को व्यस्थित ढंग से चलाने और खबरों की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए हर अनावश्यक दखल से चैनल को मुक्त रखने का प्रयास करने लगा. 2- इस दौरान कई नियुक्तियां हुईँ. उनमें महिला एंकर, रिपोर्टर औऱ प्रोड्यूसर भी रहीं. लगभग डेढ महीना पूरा होते होते-होते शैलेंद्र शर्मा ने यह कहना शुरु कर दिया कि जितने भी लोग हायर किए गए हैं, वे अपने पेपर जमा नहीं कर रहे हैं. सच्चाई यह थी कि सबों ने एचआर की तरफ से मांगे गए सारे कागजात जमा कर दिए थे. इसके बाद उन्होंने इस बात पर तकरार शुरु कर दी कि ज्यादातर लोगों के दिए कागजात फर्जी हैं. इनमें उन्होंने महिला पत्रकारों को खास तौर से निशाने पर लिया. मैंने सभी साथियों से व्यक्तिगत रुप से मिलकर उनके जरिए दिए गए पेपर्स की वैधता सुनिश्चित की. एचआर इन बैठकों में रहा. दो-तीन अपवाद के मामलों को मैंने वहीं निपटा भी दिया. मगर इस दौरान रात-विरात कई लोगों को टर्मिनेशन या फिर कागजों के पूरा नहीं होने पर सेवा समाप्त किए जाने के कंपनी नियमों के खिलाफ, मेल आते रहे. मेरी महिला साथी इससे ज्यादा आहत और प्रताड़ित महसूस करती रहीं. 3- मैंने संपादक होने के नाते शैलेंद्र शर्मा उर्फ शालू पंडित के इस अराजक औऱ अवैध तरीके पर सवाल उठाया औऱ उनको सलाह दी कि अगर आपको कागजात चेक ही करवाने हैं तो बेहतर है ऑडिट करवा लीजिए. मगर ऐसा नहीं करके उन्होंने एचआर से आधी रात के बाद रात 2.43 बजे एक मैसेज जेनरेट करवाया कि 26 फरवरी को सुबह 11.30 बजे चेयरमैन ने मीटिंग बुलाई है. 4- 26 फरवरी 2026 को शैलेंद्र शर्मा अपने प्राइवेट सुरक्षागार्ड औऱ एक पुलिसगार्ड के साथ न्यूजरुम में आए. पूरे न्यूजरुम स्टाफ को उन्होंने चारों ओर जमा किया. बीच न्यूजरुम टेबल लगवाया औऱ जितने लोग हायर किए गए थे उनमें से अधिकतर की फाइलें टेबल पर रखवाईं. संपादक होने के नाते मैं भी अपने रुम से निकलकर वहां आ चुका था. मैंने अपने 28 साल के करियर में ऐसा डरावना माहौल औऱ ऐसा आक्रामक-अभद्र व्यवहार चैनल के अंदर नहीं देखा. शैलेंद्र शर्मा ने मेरे एक सीनियर कलीग के साथ जिस तू-तड़ाक और दोयम दर्जे की भाषा में बात करनी शुरु की, उसने खड़े सभी सहकर्मियों को आक्रांत कर दिया. किसी भी व्यवस्था में मुद्दे, असहमति या विरोध हो सकते हैं, लेकिन उन पर चर्चा करने और निपटारे के कुछ तरीके होते हैं. वे निरंकुश, अपमानजनक और भयावह नहीं हो सकते. 5- इसके बाद उन्होंने अपने निजी गार्ड से वीडियो बनावाना शुरु किया औऱ यह कहना भी कि ये फाइलें जितने लोगों की हैं, उन्होंने पेपर जमा नहीं किए हैं, इनकी गारंटी कंपनी नहीं लेती है औऱ इनको सैलरी राणा जी देंगे. मैंने वहां भी इसका विरोध किया औऱ कहा कि हायर किए लोग इसी इंडस्ट्री के हैं, उन्होंने अपने सारे पेपर जमा किए हैं औऱ एचआर के साथ मैंने खुद इसको चेक किया है. घटना के तुरंत बाद वह वीडियो शैलेंद्र शर्मा ने सोशल मीडिया पर डलवाया. उनकी मंशा ताकत का भय पैदा करने औऱ निरंकुश तरीके से न्यूज चैनल चलाने का संदेश देने की थी. वह वीडियो मैं यहां संलग्न कर रहा हूं. 6- क्या कोई भी संस्थान यह बता सकता है कि- जिन लोगों को काम करने के लिए बायोमेट्रिक एंट्री दी गई, उनका ड्यूटी शेड्यूल तैयार करवाया गया, उनसे काम लिया गया - डेढ महीने बाद वह संस्थान किस आधार पर उन कर्मचारियों के डॉकयूमेंट को फर्जी बताते हुए उनको रातों रात टर्मिनेट कर सकता है या फिर काम करने से रोक सकता है? उनको वेतन देने से मना कर सकता है? यह व्यवहार अवांछित, मनमाना तो है ही क्या अवैध भी नहीं है? 7- प्रधानमंत्री जी, मैंने आपका इंटरव्यू लिया है. देश औऱ समाज के प्रति मेरी पत्रकारिता के लिए आपकी तरफ से मुझे प्रशस्ति-पत्र भी भेजा गया. पत्रकारिता के क्षेत्र में मेरे योगदान पर प्रतिष्ठित पुरस्कारों की मुहर है. औऱ मैंने डेढ दशकों से अधिक के संपादकीय दायित्व के साथ सार्थक औऱ सकारकात्मक पत्रकारिता की है. जीवन में अनुशासन, ईमानदारी, पत्रकारीय मर्यादा और सम्मानजनक व्यवहार को मैंने ना सिर्फ बरता है बल्कि सामनेवाले से अपेक्षा भी की है. 8- इस घटना ने ना सिर्फ मुझे मानसिक रुप से आहत किया है बल्कि न्यूज चैनलों के गलत हाथों में जाने के खतरे से भी अवगत कराया है. मीडिया संस्थान देश औऱ समाज के कई तरह के दायित्वबोध के साथ चलते हैं. वे लोकतंत्र का आवश्यक अंग हैं. उनका मालिकाना हक रखनेवालों की पात्रता की गहरी पड़ताल अनिवार्य है. क्षुद्र स्वार्थों की पूर्ति के लिए चैनल को औजार समझनेवाले और संदेहास्पद पृष्ठभूमि के लोगों को लाइसेंस देना, संस्थान में काम करनेवाले पत्रकारों के सम्मान औऱ सुरक्षा तक के लिए घातक है. इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. ऊपर मैंने जिस मूल चिंता की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करने की बात लिखी है, वह यही है. 9- अपने महिला सहकर्मियों के नाम मैं यहां जान बूझकर नहीं लिख रहा हूं. इसमें उनकी भी सहमति है. मैं, महिला औऱ पुरुष सभी साथियों के अधिकार औऱ स्वाभिमान के लिए देश के संविधान और कानून के दायरे में जो भी उचित है, उसकी लड़ाई लड़ रहा हूं औऱ लड़ूंगा. लेकिन मेरा आग्रह यह है कि देश में मीडिया संस्थानों की गरिमा, पत्रकारिता की मर्यादा औऱ पत्रकारों के सम्मानजनक तरीके से काम करने का इकोसिस्टम बनाए रखने के लिए न्यूज चैनल मालिकों की पात्रता और योग्यता अवश्य सुनिश्चित की जाए. आपका राणा यशवंत Narendra Modi PMO India Ministry of Information and Broadcasting Ashwini Vaishnaw गृहमंत्री कार्यालय, HMO India Yogi Adityanath Office Yogi Adityanath CM Office, GoUP

Rana Yashwant

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Youth are not only the Agents of Change, they are also the Greatest Beneficiaries of Change. 🇮🇳 A strong democracy is built not only on the courage to raise our voice, but also on the dignity of the words we choose. हाल के दिनों में कुछ ऐसे videos सामने आए, जिनमें कुछ युवा जिस तरह की abusive, derogatory and disrespectful language का प्रयोग करते दिखे, उसने मन को सचमुच विचलित किया। यह केवल भाषा का प्रश्न नहीं है, बल्कि एक बड़ा सवाल है— हम अपने बच्चों को कैसी parenting, mentoring और value system दे रहे हैं? क्या अपशब्दों का सहज प्रयोग अब सामान्य होता जा रहा है? अगर हाँ, तो यह हम सभी के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। असहमति लोकतंत्र की शक्ति है, लेकिन अभद्रता कभी उसकी पहचान नहीं हो सकती। विचारों में मतभेद भी हो सकते हैं, लेकिन शब्दों में संयम, संवाद में शालीनता और व्यवहार में मर्यादा हमेशा बनी रहनी चाहिए। एक माँ होने के नाते मैं इतना अवश्य कहना चाहूँगी— हम अपने बच्चों को अपनी आवाज़ बुलंद करना सिखायें , लेकिन यह भी सिखायें कि शब्दों की गरिमा कभी न खोएँ। क्योंकि व्यक्तित्व की पहचान केवल विचारों से नहीं, बल्कि उन्हें व्यक्त करने के तरीके से भी होती है। Let us empower our youth to speak with courage, compassion and civility. 🙏🏻🌱 Disagreement strengthens democracy. Respectful dialogue sustains it. 🤝 जय हिन्द 🇮🇳

Sonal Goel IAS 🇮🇳

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Environment Warriors: The Guardians of the Green' के तत्वाधान में आज मुस्तफाबाद फॉरेस्ट गेस्ट हाउस, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नौवें चरण में साइकिल एवं स्कूल किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में तैनात 25 वॉचर्स को साइकिलें प्रदान की गईं। इसका उद्देश्य उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाना और गश्त के दौरान उन्हें सुगम आवागमन की सुविधा देना है। Herbivores Species की संख्या बढ़ रही है, जो यह दर्शाता है कि जंगल का स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र बेहतर हो रहा है। विभिन्न प्रजातियों के हिरणों के झुंड भी बढ़ गए हैं, जैसा कि 1980 के शुरुआती दशक में हुआ करता था। इस मौके पर वन एवं वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे जिला वन अधिकारी श्री मनीष सिंह जी एवं क्षेत्रीय वन अधिकारी श्री सहेंद्र यादव जी उपस्थित रहे। इसी क्रम में सीएसआर फंड्स के माध्यम से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए अतिरिक्त वाटर पंप उपलब्ध कराए जाने की घोषणा की गई तथा एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में सहयोग के लिए पीताम्बरा ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया गया। प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी की कक्षा 5 उत्तीर्ण कर चुकी 10 मेधावी छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं, ताकि वे आगे की शिक्षा के लिए दूरी की बाधा को पार कर सकें, साथ ही नवीन प्रवेश लेने वाले छोटे बच्चों का उत्साहवर्धन करने के लिए उन्हें 'वेलकम किट' (स्कूल बैग, स्टेशनरी और कैप) भेंट की गई। पूर्व में विद्यालय में एक स्मार्ट क्लास की भी स्थापना कराई गई थी! बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहे प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी के प्रधानाध्यापक श्री मुनीश पाठक जी भी उपस्थित रहे। इसके साथ ही एक सहज (स्पॉन्टेनियस) क्विज़ का आयोजन भी हुआ, जहाँ जिज्ञासा ने सवालों का रूप लिया और पाँच प्रश्नों ने ज्ञान की लौ को और प्रज्वलित किया। इसी क्रम में एक छात्र ने भावपूर्ण कविता से मन को छू लिया, तो दूसरे ने मधुर गीत से वातावरण को सुरमयी बना दिया। ऐसे अनमोल क्षण ही इस कार्यक्रम की आत्मा बन जाते हैं, युवा छात्र ही देश का भविष्य हैं, और उनकी ऊर्जा में एक उज्ज्वल कल की झलक साफ दिखाई देती है। इन्हीं नन्हे सपनों में कल का सशक्त भारत आकार ले रहा है। इसके उपरांत उपस्थित ग्रामीणों और बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। संस्था के सदस्यों ने 'ग्रीन गार्जियंस' की भूमिका निभाते हुए सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने और वन्यजीवों की रक्षा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। इन टाइगर रिजर्वों में अबतक 6 कार्यक्रम किए गए। इनमें अबतक वन रक्षकों को 250 साइकिलें, पार्क ड्राइवरों व गाइडों को 2000 जैकेट्स तथा निगरानी एवं वन्यजीव अवलोकन के लिए 100 निकॉन दूरबीन प्रदान किए गए हैं, साथ ही दो विद्यालयों में 2 स्मार्ट क्लास की स्थापना कराई गई है तथा महिलाओं के स्वावलंबन के लिए 20 सिलाई मशीनें प्रदान कर 2 तारा शक्ति सिलाई केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, तथा वनजीवन के लिए पानी की सरल उपलब्धता हेतु सोलर संचालित वाटर पम्प भी स्थापित कराए गए हैं। यह कार्यक्रम निरंतर जारी रहेंगे! उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के जंगल और नेशनल पार्क सुरक्षित रखना इसलिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये केवल जैव विविधता के केंद्र नहीं, बल्कि हमारी जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और आपदा नियंत्रण की प्राकृतिक ढाल हैं। ये वन गंगा बेसिन के जलस्तर को बनाए रखते हैं, बाढ़ को नियंत्रित करते हैं, हजारों वन्यजीवों—विशेषकर बाघ, हिरण और हाथियों—का आवास हैं, और स्थानीय समुदायों की आजीविका से भी जुड़े हैं। तराई के जंगलों का संरक्षण दरअसल पर्यावरण सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा है। पर्यावरण संरक्षण की इस अनूठी पहल के अंतर्गत युवा सहभागिता को बढ़ावा देने के समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लखनऊ में प्रख्यात फिल्म अभिनेता संजय दत्त के साथ Net Zero @ Sarojininagar कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें रैली निकाल कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए वृहद स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जाता है। इसी क्रम में सरोजनी नगर में 200 रुद्राक्ष के पौधे लगाए जा चुके हैं। पर्यावरण के साथ-साथ नारी सशक्तिकरण और शैक्षणिक उन्नति की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान श्री अम्बिका मिश्रा जी, श्री अजय गुप्ता जी, सिद्धार्थ हरीश जी भी उपस्थित रहे। Environment Warriors

Rajeshwar Singh

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#BharatJodoYatra is a People’s Movement, unequalled in history. As the Yatra completes one year today, on behalf of the Indian National Congress, I congratulate Shri Rahul Gandhi, all Bharat Yatris and the lakhs of our citizens who walked and joined in this historic endeavour. From Kanyakumari to Kashmir, Bharat Jodo Yatra covered more than 4000 Kms and carried a message of unity in diversity, with lakhs of people from all walks of life. The trend of manufacturing irrelevant headlines to divert attention from the real issues of people to hide the agenda of hate and division is a systemic attack on our collective conscience. The Yatra seeks to bring real issues of economic inequalities, price rise, unemployment, social injustices, subversion of Constitution, centralisation of power, to the centre stage of people’s imagination. The Yatra continues to fight the menace of hate and hostility in our society through a conversation. The Bharat Jodo Yatra is not just a physical endeavour, it is a sincere effort to rebuild our broken collective conscience. Our ingrained values of Justice, Liberty Equality, and Fraternity, for us, are supreme. The Congress party is continuously reaching out to people in an endeavour to reclaim our Constitution and protect our Democracy. Today, Bharat Jodo Yatra continues...🇮🇳 *** #BharatJodoYatra - एक राष्ट्रीय जन-आंदोलन है, जो इतिहास में अद्वितीय है। आज यात्रा के एक वर्ष पूरा होने पर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से, मैं श्री Rahul Gandhi, सभी भारत यात्रियों और हमारे लाखों नागरिकों को बधाई देता हूँ जो इस यात्रा में शामिल हुए। कन्याकुमारी से कश्मीर तक, भारत जोड़ो यात्रा ने 4000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के साथ विविधता में एकता के लिए संवाद स्थापित किया। नफ़रत और विभाजन के एजेंडे को छिपाने के लिए, लोगों के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए, अप्रासंगिक सुर्खियां बनाने की प्रवृत्ति हमारी सामूहिक चेतना पर एक सोचा-समझा प्रहार है। यात्रा आर्थिक असमानताओं, महँगाई, बेरोज़गारी, सामाजिक अन्याय, संविधान के विध्वंस, सत्ता के केंद्रीकरण के वास्तविक मुद्दों को लोगों की कल्पना के केंद्र में लाने का प्रयास करती है। यह यात्रा लोगों की भागीदारी के माध्यम से हमारे समाज में नफ़रत और शत्रुता के खतरे से लड़ने के लिए जारी है। भारत जोड़ो यात्रा सिर्फ एक भौतिक प्रयास नहीं है, यह हमारी टूटी हुई सामूहिक चेतना को फिर से बनाने का एक ईमानदार प्रयास है। हमारे लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के हमारे संवैधानिक मूल्य सर्वोच्च हैं। कांग्रेस पार्टी, हमारे संविधान की रक्षा और हमारे लोकतंत्र की सुरक्षा करने के प्रयास में लगातार लोगों तक पहुंच रही है। आज भी, भारत जोड़ो यात्रा जारी है...🇮🇳

Mallikarjun Kharge

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