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Terror attacks in India from 2014 to 2025 under BJP rule: 1.Gurdaspur Attack (2015) 2.Pathankot Air Base Attack (2016) 3.Pampore Attack (2016) 4.Uri Attack (2016) 5.Nagrota Army Base Attack (2016) 6.Amarnath Yatra Massacre (2017) 7.Sunjuwan Army Camp Attack (2018) 8.Sopore IED Blast (2018) 9.Pulwama Attack (2019) 10.Handwara Encounter (2020)...

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मोदी के फैसलों से काँपा पाकिस्तान पहलगाम आतंकी हमले के बाद अब तक मोदी सरकार ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ यह बड़ी कार्यवाही की है 👇 1) पाकिस्तान के 16 यूट्यूब चैनल भारत में ब्लॉक 2) पाकिस्तान एक्टर्स के इंस्टा अकाउंट भारत में ब्लॉक 3) पाकिस्तानी खिलाड़ियों के अकाउंट भारत में ब्लॉक 4) पाकिस्तान रक्षा मंत्री का X अकाउंट भारत में बैन 5) पाकिस्तान सरकार का X अकाउंट और वेबसाइट भारत में बैन लेकिन कल शाम मोदी जी ने सबसे तगड़ा एक्शन लिया है 6) पाकिस्तान प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ का यूट्यूब चैनल भारत में ब्लॉक कर दिया गया है मोदी जी बेचारे लाल आँख दिखा कर कठोर कार्यवाही कर रहे हैं, पर कुछ लोग कहेंगे इससे काम नहीं चलेगा - कुछ निर्णायक करना होगा

Supriya Shrinate

256,837 просмотров • 1 год назад

अमेरिका की US-China Economic and Security Review Commission ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में जो कहा है वो भारत के लिए बेहद आपत्तिजनक है. इस पर नरेंद्र मोदी चुप नहीं रह सकते 800 पन्नों की इस रिपोर्ट में पेज 108 और 109 में लिखा है कि: ▪️अप्रैल 2025 का पहलगाम आतंकी हमला ‘विद्रोही हमला’ (insurgent attack) था ▪️भारत-पाकिस्तान के चार दिन के युद्ध में ‘पाकिस्तान की सैन्य सफलता’ हुई ट्रंप ने अब तक 60 बार ऑपरेशन सिंदूर को रोकने का श्रेय लिया है - और प्रधानमंत्री मोदी के मुँह से एक चूँ तक नहीं निकली 👉अब US-China Economic and Security Review Commission वार्षिक रिपोर्ट में जो कहा गया है वो कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है? 👉लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय ने इस पर कोई आपत्ति और विरोध क्यों नहीं दर्ज कराया है? 👉आख़िरकार अमेरिका की इस कमिटी को ऑपरेशन सिंदूर पर ब्रीफ कौन कर रहा है? मोदी जी ने तो इतने के भाषण दिए, संसद में बयान दिए गए, संसदीय प्रतिनिधिमंडल वहाँ दौरे के लिए गया - इस सबके बावजूद इतनी भारत विरोधी रिपोर्ट कैसे बनी? 👉इससे बड़ी विफलता हमारी विदेश नीति की और क्या होगी? 🔺🔺प्रधानमंत्री की चुप्पी और बड़े सवाल खड़े कर रही है

Supriya Shrinate

89,359 просмотров • 10 месяцев назад

मोदी जी की ट्रंप से मित्रता और केमिस्ट्री के बड़े चर्चे होते थे. पर देखिए तो हमारा देश कितनी क़ीमत चुका रहा है मोदी मित्र ट्रम्प ने क्या क्या किया? ▪️भारत के ऊपर 25% टैरिफ ठोका और जुर्माना लगाया ▪️हमारी 6 तेल रिफाइनिंग करने वाली कंपनीज बार बैन लगाया ▪️हमारी अर्थव्यवस्था को dead economy कहा ▪️पाकिस्तान के साथ तेल समझौता करके भारत के ख़िलाफ़ चुटकी ली ▪️आतंकी मुल्क पाकिस्तान का नाम भारत के साथ लेने की जुर्रत बार बार की ▪️आतंकी देश पाकिस्तान को महान देश बताया ▪️पहलगाम नरसंहार के सबसे बड़े गुनहगार असीम मुनीर को दावत पर बुलाया ▪️31 बार भारत-पाकिस्तान सीजफायर का श्रेय लिया ▪️Apple को भारत में उत्पादन के ख़िलाफ़ धमकाया ▪️IT कंपनीज़ को भारत में नौकरियां बनाने के लिए हड़काया ▪️हमारे लोगों को हथकड़ियों और बेड़ियों में खदेड़ा ▪️दुनिया भर के ऐरे ग़ैरों को अपने दरवाज़े तक लेने आए, हमारे प्रधानमंत्री को लेने नहीं आए ▪️जिस दिन मोदी अमेरिका में थे उस दिन भारत को waste fraud abuser जैसे शब्द कहे 👉इस सबके लिए अंधभक्तों ने यज्ञ किए थे, मंत्र जपे थे? 👉इस सबके लिए मोदी जी ने ट्रम्प को अपना मित्र घोषित किया था? 👉इस सबके लिए नमस्ते ट्रम्प, Howdy Modi और अबकी बार ट्रम्प सरकार के नारे लगाए थे? 👉इस सबके लिए बिना न्यौते के अपनी और देश की फजीहत कराने अमेरिका पहुँच गए थे? 👉👉कहाँ है MIGA + MAGA = MEGA ? मोदी जी आप कुछ तो कहिये, घबराइए मत. 140 करोड़ का यह पूरा देश आपके साथ खड़ा है - पर आप मुँह चोरी तो कर ही रहे हैं और ट्रम्प के सामने और सरेंडर हुए जा रहे हैं

Supriya Shrinate

48,717 просмотров • 1 год назад

• डोनाल्ड ट्रंप ने कौन सी ठेकेदारी ले रखी है? • ट्रंप या तो ख़ुद ठेकेदार बन गए या हमारी चुप्पी ने उनके हौसले को बढ़ा दिया है, जिस कारण वो सीजफायर की घोषणा कर रहे हैं। • अब ट्रंप कह रहे हैं कि कश्मीर मुद्दे को भी वे सुलझाएंगे, जबकि इससे पहले तक भारत की नीति सिर्फ द्विपक्षीय ही रही है। • कश्मीर मसले को सुलझाने को लेकर ट्रंप जो बात कह रहे हैं, वह बहुत ही गंभीर है। • इधर PM मोदी का संबोधन होने वाला था, लेकिन उससे पहले ही ट्रंप ने ऐलान कर दिया कि हमने भारत-पाकिस्तान से कहा कि व्यापार करना है तो युद्धविराम करना होगा। इन तमाम बातों का जवाब प्रधानमंत्री मोदी को देना चाहिए। हमें पाकिस्तान की ऐसी स्थिति कर देनी चाहिए थी कि वो आतंकी घटना करने के काबिल न रहें, लेकिन अचानक सीजफायर हो गया। ट्रंप के ऐलान के बाद पूरा देश सकते में है कि आख़िर हो क्या रहा है? क्योंकि सीजफायर के बाद भी पाकिस्तान का हमारे देश के ऊपर हमला जारी रहा। इससे जुड़ी अलग-अलग बातें मीडिया में चल रही हैं, इसलिए इसके बारे में जब तक सरकार खुद नहीं बोलेगी, तब तक मीडिया के लोग सूत्रों के आधार पर लिखते रहेंगे। देश जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री मोदी पर किस प्रकार का दबाव है कि वे कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पा रहे हैं। कल प्रधानमंत्री मोदी ने जब संबोधन दिया तो उम्मीद थी कि वे इन बातों पर जवाब देंगे, लेकिन वे बोले ही नहीं। इस कारण सरकार और देश को बहुत भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि सेना बहुत अच्छा काम कर रही थी, लेकिन अचानक सीजफायर कर दिया गया। : पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot जी

Congress

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नरेंद्र मोदी ने अपने मित्र अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से कितना बड़ा समझौता किया है - आगे पढ़िए/ सुनिए👇 ▪️राष्ट्रीय सुरक्षा और सरहदों की रक्षा के मद्देनज़र भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से 10 किलोमीटर तक मौजूदा गांवों और सड़कों को छोड़कर किसी भी बड़े निर्माण की अनुमति नहीं है ▪️लेकिन मोदी मित्र अडानी कच्छ के रण में भारत-पाकिस्तान सीमा से सिर्फ 1 किलोमीटर दूर एक बहुत बड़े सोलर और विंड पॉवर प्लांट का निर्माण कर रहे हैं ▪️असल में हुआ ऐसा कि गुजरात के कच्छ क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी SECI को गुजरात सरकार ने एक नवीकरणीय ऊर्जा पार्क के लिए 23,000 हेक्टेयर भूमि आवंटित की थी ▪️लेकिन एक बाधा थी: SECI को आवंटित ज़मीन भारत-पाकिस्तान सीमा के काफी करीब थी, और वहाँ रक्षा प्रतिबंधों का मतलब था कि वह जमीन पर केवल विंड टरबाइन ही बन सकता था, सोलर पैनल नहीं लग सकता था. SECI का कहना था कि इन बंदिशों की वजह से यह परियोजना होने में दिक्कत है ▪️बस फिर क्या था, अप्रैल 2023 में गुजरात के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिख कर इस मामले को रक्षा मंत्रालय के साथ उठाने को कहा ▪️गुजरात सरकार के सोलर और विंड प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 21 अप्रैल 2023 को दिल्ली में एक गोपनीय सरकारी बैठक बुलाई गई ▪️इसमें सैन्य संचालन महानिदेशक, गुजरात और न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा SECI ने भी भाग लिया ▪️रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर टैंक मूवमेंट और सुरक्षा निगरानी में सोलर पैनलों से दिक्कतें आने की “आशंकाएं” जताई गईं थीं ▪️पर डेवलपर्स ने आश्वासन दिया कि “दुश्मन की टैंक गतिविधियों को देखने में सोलर पैनल बाधा नहीं बनेंगे’’ ▪️लेकिन सोलर पैनल के साइज में बदलाव की सैन्य अधिकारियों के अनुरोध को डेवलपर्स ने खारिज कर दिया था ▪️बैठक के अंत में, रक्षा मंत्रालय ने सोलर पैनलों को 2 किमी और विंड टरबाइनों को पाकिस्तान से 1 किमी के करीब बनाने की अनुमति दे दी ▪️8 मई 2023 तक मोदी सरकार ने इस फैसले को औपचारिक रूप भी दे दिया था ▪️यही नहीं, नियमों में परिवर्तन बताने के लिए सभी मंत्रालयों को एक अधिसूचना जारी की गई ▪️और फिर हुआ खेल, SECI की सभी चिंताओं के निवारण के बावजूद 3 महीने बाद, कंपनी ने नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर जमीन वापस कर दी ▪️इसके बाद गुजरात सरकार ने इसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए आरक्षित करने के अपने पहले के फैसले को पलटा और इसे अडानी को आवंटित कर दिया ▪️🔺▪️तो ऐसे केंद्र की मोदी और गुजरात की BJP सरकार ने पूरी साँठगाँठ से साज़िश रचकर, सारे नियम कानून बदल कर ज़मीन अंततोगत्वा अडानी को सौंप ही दी ▪️🔺▪️और कमाल की बात यह है कि नियम में राहत ना केवल भारत-पाकिस्तान सीमा पर, बल्कि बांग्लादेश, चीन, म्यांमार और नेपाल से सटी सरहद पर भी कर दी गई 🔺🔺इतना बड़ा रणनैतिक फैसला जो कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरे में डाल सकता है - वो सिर्फ़ अडानी को सस्ती जमीन देने के अंदेशे से लिया गया 🔺🔺सीमा सुरक्षा के मानदंडों और नियमों में बदलाव करके नरेंद्र मोदी ने हमारी भूभागीय अखंडता के साथ भद्दा मज़ाक किया है. यह है इनका फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद और नक़ली देशप्रेम

Supriya Shrinate

99,139 просмотров • 1 год назад

प्रेस वक्तव्य: नागरिकता रजिस्टर का काम शीघ्र प्रारंभ हो तथा पाकी नागरिकों व उनके स्लीपर सेलों को बाहर खदेड़ा जाए : विहिप नई दिल्ली। मई 2, 2025। विश्व हिन्दू परिषद ने आज मांग की है कि भारत में नागरिकता रजिस्टर बनाने की प्रक्रिया तुरंत प्रारंभ कर पाकिस्तानी नागरिकों के साथ उनके स्लीपर सेलों को सीमा पार खदेड़ा जाए। विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महा मंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने आज कहा कि पहलगाम में जिहादी आतंकवादियों द्वारा हिंदुओं के निर्मम नरसंहार के बाद केंद्र सरकार ने जो कठोर कदम उठाए हैं, उनके कारण कई राष्ट्र विरोधी षड्यंत्र उजागर भी हो रहे हैं, जो दशकों से देश की जड़ों को खोखला कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसी लाखों महिलाएं सामने आई हैं जिनके शौहर पाकिस्तानी मुसलमान हैं व वहीं के पासपोर्ट धारी भी हैं। लेकिन वे महिलाएं और उनके बच्चे भारत के नागरिक हैं। ऐसे हजारों और भी मामले हैं जिसमें भारतीय मुस्लिम महिला ने किसी पाकिस्तानी से शादी की और खुद भी पाकिस्तान की नागरिकता ली लेकिन बच्चों को भारत की ही नागरिकता दिला रखी है। ये सब लोग भारत में मिल रही सुविधाओं का तो लाभ ले ही रहे हैं, ये भारत के पैसे पर पलकर भारत की ही जड़ों पर आघात कर रहे हैं। ये पाकिस्तान से सहानुभूति रखते है और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ जैसे नारों पर भड़ककर हिंसक हो जाते हैं। ये पाकिस्तानी स्लीपर सेल हैं जिन्हें अबिलंब सीमा पार खदेड़ा जाना बहुत जरूरी है। विहिप की मांग है कि अब भारतीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) शीघ्र बनना चाहिए। जो भी भारत के अधिकृत नागरिक नहीं है, उनके राशन कार्ड, आधार कार्ड या वोटर कार्ड की गहन जांच होनी चाहिए और उनको रद्द करके इन लोगों को भारत से निष्कासित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना के साथ-साथ एनआरसी भी बन जाए और भारत के दुश्मनों व उनके स्लीपर सेल को तत्काल प्रभाव से भारत से बाहर निकाल दिया जाए, यह जरूरी है। अब समय आ गया है कि जो भी भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं, उन्हें भारत में ना रहने दिया जाए। डॉ जैन ने यह भी कहा कि दुर्भाग्य से कुछ लोग ऐसे षड्यंत्र करने वालों को रोते-धोते दिखाकर उनके प्रति संवेदना निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि इन राष्ट्र विरोधियों के ये षड्यंत्र कई दशकों से चल रहे हैं और लाखों महिलाएं भी इसमें संलिप्त हैं। जिहादी-सेकुलर ताकतों के अपवित्र गठजोड़ भी उनकी सहायता करते रहे हैं। अब, जबकि इनका पर्दाफाश हो गया है, ये संवेदना के नहीं, भारत से निष्कासन के पात्र हैं। जारी कर्ता: विनोद बंसल राष्ट्रीय प्रवक्ता विश्व हिन्दू परिषद

Vishva Hindu Parishad -VHP

12,683 просмотров • 1 год назад

आज डरपोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कायर सरकार ने Molitics National Dastak Rajeev Nigam के साथ ही कई फ़ेसबुक पेज को भारत में ब्लॉक कर दिया गया है किस बात से डरते हैं आप मोदी जी? यही ना कि आपके चरणचुंबक मीडिया में जो सवाल पूछने की हिम्मत नहीं है, वो कुछ निर्भीक पत्रकार उठा रहे हैं बजाय उन सवालों का जवाब देने के - आप उनके चैनल ही ब्लॉक किए दे रहे हैं! जितने ज़्यादा चैनल आप ब्लॉक कीजिएगा, जितने ज़्यादा हैंडल आप सस्पेंड कीजिएगा, जितने ज़्यादा लोगों को आप चुप कराइएगा, उतनी ज़्यादा बात साफ़ होती जाएगी कि आप compromised हैं, आपको ब्लैकमेल करा कर देशविरोधी काम कराये जा रहे हैं रील मंत्री अश्विनी वैष्णव चैनल ब्लॉक करके आपकी नैया पार नहीं लगा रहे हैं, बल्कि आपको डुबो रहे हैं आप विश्वगुरु तो ना बन पाये, लेकिन सस्ते किम जोंग ज़रूर बन गए. पर आप यह भूल गए कि हिंदुस्तान नार्थ कोरिया नहीं है, हमने ब्रिटिश हुकूमत को खदेड़ के दम लिया था. यह अलग बात है तब आपके पुरखे माफीनामे लिख रहे थे और मुखबिरी कर रहे थे अरे सवालों का सामना कीजिए. समाधान ढूँढिये. यह अकाउंट और चैनल बंद करने जैसी टुच्ची हरकतें क्या कर रहे हैं? जितने सवालों और आवाज़ों को दबाइयेगा उतनी बेबाकी और मज़बूती से सवाल और पूछे जायेंगे

Supriya Shrinate

189,663 просмотров • 5 месяцев назад

भारतीय मीडिया तो हमेशा की तरह मोदी सरकार की ढाल बनने में व्यस्त है - वह यह सवाल नहीं पूछेगा - सोचा हम ही पूछ लें यह जो 7 डेलीगेशन दुनिया के तमाम देशों में गए हैं - यह सब अंडर सेक्रेटरी, भूतपूर्व सदस्यों वगैरह के अलावा किससे मिले हैं? इक्के दुक्कों को छोड़कर अभी तक कोई बड़ा राष्ट्राध्यक्ष इनसे क्यों नहीं मिला है? 1) अब तक यह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कितने राष्ट्राध्यक्षों से मिलकर भारत का पक्ष रख चुके हैं? 2) जितने भी देशों में यह डेलीगेशन गए हैं उनमें वे कितनों ने दो टूक शब्दों में हमारा समर्थन किया है या कोई आधिकारिक बयान दिया है? 3) क्या यह देश पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के ख़िलाफ़ खुल कर बोलने को तैयार हैं? 4) क्या यह डेलीगेशन विदेशी प्रेस से मिल रहे हैं? 5) और अंत में क्या इन सब मीटिंग के बाद दुनिया भर में हमारे पक्ष में माहौल बन रहा है?

Supriya Shrinate

83,517 просмотров • 1 год назад

RSS और चीन के बीच में चल क्या रहा है? मोदी-चीन की प्रेम कथा की क़ीमत तो आज भी देश चुका रहा है. अब RSS के साथ क्या पक रहा है? 🔺इतिहास में पहली बार चीन के राजनयिकों का एक दल दिसंबर 2023 में नागपुर स्थित RSS के मुख्यालय गया 🔺उसके कुछ ही दिनों बाद चीनी सरकार के मुखपत्र में PM मोदी का गुणगान हुआ 🔺RSS ना राजनीतिक दल है ना सरकार, तो यह राजनयिक नागपुर में RSS के मुख्यालय क्या करने गये? 🔳🔳लेकिन इससे पहले क्या हुआ और किसने क्या कहा यह और दिलचस्प है ▪️जनवरी 2024, आज से 48 घंटे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा चीन और भारत के रिश्ते सामान्य नहीं हैं ▪️फ़रवरी 2023 में विदेश मंत्री ने कहा हम एक छोटी इकॉनमी हैं, हम चीन जैसी बड़ी इकॉनमी के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कर सकते ▪️अप्रैल 2020 में चीन ने लद्दाख में हिंदुस्तान की सरज़मीं पर घुसने की धृष्टता की ▪️15 जून 2020 को 20 जाँबाज़ों की गलवान में शहादत हुई ▪️19 जून 2020 को प्रधानमंत्री ने बिना पलक झपकाए झूठ कहा ‘कोई घुसा नहीं है’ ▪️मोदी की क्लीन चिट चीन के काम आयी - यही बात चीन 19 बार कोर कमांडर लेवल की वार्ता में कह चुका है ▪️4 साल बाद भी अप्रैल 2020 की यथावत स्थिति बहाल नहीं हुई है ▪️अलबत्ता हम जहां तक गश्त करते थे वो पेट्रोलिंग पॉइंट 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16 बफर ज़ोन में डाल दिये ▪️यही नहीं 21 परमवीर चक्र विजेताओं में से एक मेजर शैतान सिंह, जिन्होंने भारत-चीन युद्ध में अपने शौर्य का अद्भुत परिचय दिया, लद्दाख में बने उनके स्मारक का स्थान बदलना पड़ा क्योंकि वो अब बफर ज़ोन में हैं ▪️लद्दाख के चुने हुए ख़ुद BJP के काउंसिलर ने चीनी अतिक्रमण की पुष्टि की, चरवाहों ने चीनी घुसपैठ का सच बयाँ किया ▪️हमारी पराक्रमी सेना ने जिन रणनैतिक जगहों पर क़ब्ज़ा किया उनसे भी पीछे हटाया गया ▪️इस दौरान मोदी सरकार ने चीन को सबसे बड़ा व्यापार पार्टनर ही नहीं बनाया, उसके साथ व्यापार घाटे को 100 बिलियन डॉलर भी पार कराया ▪️मोदी और शी जिनपिंग की 18 से ज़्यादा मुलाक़ातें हुईं हैं, आख़िरी तो अगस्त 2023 में हुई जिसके बाद में चीन ने भारत के हिस्सों को अपना दिखाते हुए मैप निकाला कहते तो थे कि लाल आँख दिखानी चाहिए - यहाँ तो ख़ुद झूले झूलने, शहनाई सुनाने, नारियल पानी पिलाने, लाल शर्ट पहन कर गलबहियां करने से बाज नहीं आ रहे मोदी-चीन की प्रेम कहानी में हुई RSS की इस एंट्री से राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ है, आख़िर चीनी राजनयिक वहाँ क्यों गए?

Supriya Shrinate

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद कांग्रेस पार्टी ने शुरुआत से ही सरकार का साथ दिया। हमने कहा कि हम सरकार और सेना के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं, चाहे वे कोई भी कदम उठाएं। हमने 'ऑपरेशन सिंदूर' का पूरा समर्थन किया था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा कर दी कि उन्होंने वाशिंगटन में रहकर भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवा दिया। ट्रंप के इस बयान पर प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ कहा ही नहीं। प्रधानमंत्री मोदी को कई सवालों के जवाब देने हैं, लेकिन वे चुप हैं। पिछले 2 हफ्तों में 2 सर्वदलीय बैठक हुई है, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी मौजूद नहीं थे। ऐसे में कोई चर्चा नहीं हो पाई। हम मांग करते हैं कि PM मोदी एक बैठक बुलाकर सभी विपक्षी नेताओं को विश्वास में लें। साथ ही बताएं कि राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार जो न्यूट्रल साइट पर बातचीत की बात कह रहे हैं, उसकी सच्चाई क्या है? अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप, उप-राष्ट्रपति और सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट के बयानों पर हमारा क्या रूख है- हमारे विदेश मंत्री चुप हैं, NSA चुप है और प्रधानमंत्री तो ऐसे मामलों में चुप्पी तोड़ते ही नहीं हैं। हालांकि 19 जून 2020 को उन्होंने चुप्पी तोड़ते हुए चीन को क्लीनचिट दे दी थी, जिसके कारण हम कमजोर पड़ गए थे। जब हमने कारगिल युद्ध जीता था तो उसके सिर्फ 3 दिन बाद 29 जुलाई 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने कारगिल समीक्षा समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता रक्षा मामलों के विशेषज्ञ के. सुब्रह्मण्यम जी ने की थी, जो विदेश मंत्री एस. जयशंकर जी के पिता हैं। कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट को संसद में पेश भी किया गया था, लेकिन क्या सरकार अब कोई विश्लेषण करेगी? क्या प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता और विपक्ष को विश्वास में लेकर सवालों के जवाब देंगे, क्योंकि ये बेहद गंभीर मामला है। : कांग्रेस महासचिव (संचार) Jairam Ramesh जी

Congress

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पहले चरण की वोटिंग में क्या कहती है भारत की जनता? 1. कोई लहर नहीं , न सत्ता पक्ष के लिये ना बदलाव के लिए 2. वोटर में पहले के मुक़ाबले कम उत्साह 3. ये silent चुनाव है।कोई कुछ नहीं बोल रहा 4. Modi is the new normal। लोगों को लगता है उन्हें हराना मुश्किल है।अब वो व्यवस्था और आम जीवन में पूरी तरह स्थापित हो चुके हैं।इसलिए बीजेपी के कार्यकर्ता भी ज़्यादा मेहनत नहीं कर रहे। 5. 2019 में पुलवामा हमले के बाद लोगों में अचानक जागृति आई थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। 6. राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के 4-6 हफ़्ते में चुनाव हो जाता तो बीजेपी को ज़्यादा लाभ मिलता। 7. 2014 में बदलाव की लहर थी।मोदी बदलाव का चेहरा थे।2019 में मोदी में उम्मीद दिखती थी, लोग चाहते थे उन्हें उन्हें और समय मिलना चाहिए, विपक्ष उनके नायक को काम नहीं करने दे रहा इसलिए मज़बूत बहुमत दिया ताकि मोदी को free hand मिले।2024 में जनता का नायक स्थापित हो चुका है।लोगो को लगता है अब मोदी सम्राट की तरह हैं उन्हें कोई हटा नहीं सकता।इसलिए उनके एक वोट से कुछ नहीं होगा। 8. जो बदलाव चाहते हैं उन्हें रास्ता और चेहरा समझ नहीं आ रहा इसलिए शायद ऐसे लोग भी वोट डालने नहीं निकले। कुल मिला कर उत्साह हीन चुनाव। ऐसा मैच जिसके आख़िरी ओवर और आख़िरी बॉल तक जाने की संभावना नहीं के बराबर है इसीलिए स्टेडियम ख़ाली है। 9. जो धुँआधार प्रचार और चुनावी उत्साह सोशल मीडिया और टीवी पर दिख रहा है वो ज़मीन से ग़ायब है।लोगों में उसका आधा उत्साह भी नहीं है।मतलब सोशल मीडिया पर IT Cell वाले डिजिटल कार्यकर्ता ज़बरदस्ती का माहौल बनाये हुए हैं जो मोबाइल फ़ोन तक ही सीमित है।सड़कों पर शांति है। #LokSabhaElections2024

Sudhir Chaudhary

663,938 просмотров • 2 лет назад

जब 7 साल तक मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और गृह व रक्षा मंत्रालय में करीब 15 साल काम कर चुके श्री आर.के. सिंह खुद कह रहे हैं कि चीन अब लद्दाख के बाद अरुणाचल में भी भारतीय सीमा में घुसकर हमारी जमीन पर कब्ज़ा कर रहा है, तो मोदी सरकार क्यों चुप्पी साधे है? देश को सच जानने का पूरा अधिकार है। हमें अपनी बहादुर भारतीय सेना के शौर्य, सामर्थ्य और संकल्प पर पूरा भरोसा है। सवाल मोदी सरकार की नीति, नीयत और जवाबदेही से हैं, जिन्होंने सेना के हाथ बाँध रखे हैं । क्या मोदी सरकार जबाब देगी -: ▪️ क्या यह सच है कि अरुणाचल प्रदेश के तकसिंग के पास PLA भारतीय क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, कैंप बना रही है और स्थानीय लोगों की पुश्तैनी जमीन, पारंपरिक चरागाह और शिकार क्षेत्रों तक उनकी पहुंच घटती जा रही है? ▪️ क्या यह सच है कि शेरा 5, जो भारत का निर्धारित Patrolling Point था, वहाँ 2023 में PLA से टकराव के बाद फिर वहाँ नियमित भारतीय पहुंच बहाल नहीं हुई? क्या PLA ने वहाँ से भारतीय निशान हटाकर हमारी गश्त रोक दी? ▪️ क्या यह सच है कि नांगा पहाड़, जहाँ नाह और मारा समुदाय पीढ़ियों से शिकार और याक पालन करते आए हैं, अब स्थानीय लोगों की पहुंच से बाहर है? इससे PLA को आगे बढ़ने का मौका क्यों मिला? ▪️ क्या यह सच है कि इस क्षेत्र में भारतीय गश्त मुख्यतः अप्रैल से अक्टूबर तक सीमित रहती है, जबकि PLA साल भर सक्रिय रहती है? सर्दियों के इस रणनीतिक खालीपन को भरने के लिए सरकार ने क्या किया? ▪️ जब सीमा के लोग जून 2026 में अपनी जमीन बचाने की गुहार लगा रहे थे, तब 28 जून को चीन में भारतीय दूतावास शिन्हुआ के साथ तस्वीरें और बातचीत क्यों कर रहा था? ▪️ जिस चीन ने 2017 से अरुणाचल प्रदेश की 112 जगहों के नाम बदलने की कोशिश की, जिसने 2022 में तवांग में यथास्थिति बदलने का प्रयास किया, उसके सामने सरकार आज तक यह साफ क्यों नहीं कर पाई कि मई 2020 से पहले वाली स्थिति पूरी तरह बहाल हुई या नहीं? ▪️ अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू अतिक्रमण के संकेत न होने की बात करते हैं, लेकिन स्थानीय लोग और अब मोदी सरकार के पूर्व वरिष्ठ मंत्री गंभीर सवाल उठा रहे हैं। आखिर सच क्या है? ▪️ 2020 में गलवान के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था “न कोई हमारी सीमा में घुसा है, न ही कोई घुसा हुआ है।” और चीन को CLEAN CHIT दी, आज उन्हीं की सरकार के पूर्व मंत्री के आरोप उस दावे पर गंभीर सवाल नहीं खड़े करते? और सबसे बड़ा सवाल एक तरफ चीन के निवेश और PLI के लिए लाल कालीन बिछाया जा रहा है, दूसरी तरफ क्या हमारी जमीन और हमारे Patrolling Points पर चीन की बढ़ती पकड़ को नजरअंदाज किया जा रहा है? देश जानना चाहता है कि चीन के सामने मोदी सरकार की असली नीति क्या है?

Randeep Singh Surjewala

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Zero Dose Children 👇👇 यह ख़बर शायद आपकी नज़रों से बच गई हो कि वर्ष 2023 में हमारे देश के 16 लाख बच्चों को किसी प्रकार का कोई टीका ही नहीं लगा. जिनमें पोलियो, डिप्थीरिया, टिटनस, चेचक, और हेपटाइटिस जैसे अनेक टीके शामिल हैं. UNICEF की ये रिपोर्ट भयावह है. भारत में प्रतिवर्ष क़रीब 2.5 करोड़ बच्चे पैदा होते हैं और सामान्यतः एक बच्चे को जन्म से 1 वर्ष की आयु होने तक 9 से 10 तरह के टीके लगते हैं. अगर सिर्फ़ 1 वर्ष में 16 लाख बच्चे टीकों से वंचित रह जाते हैं तो आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि मोदी सरकार की यह विफलता कुछ ही सालों में कितनी बड़ी महामारी का रूप ले लेगी. आज़ादी के बाद से कांग्रेस सरकार ने मुफ़्त टीकाकरण पर ज़ोर दिया और डॉ॰ मनमोहन सिंह की UPA सरकार में NRHM (National Rural Health Mission) के ज़रिए गाँव-गाँव में प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर टीकाकरण एक बेहद सफल कार्यक्रम रहा. इसी कार्यक्रम के ज़रिए हम पोलियो मुक्त देश बन पाए. लेकिन UNICEF के आँकड़े देख कर डर लगता है कि हमारे देश में पोलियो और चेचक जैसे रोग फिर से वापस न आ जाएँ. दूसरी बात यह कि एक नवजात का टीकाकरण उतना ही अनिवार्य है जितना कि उसके पैदा होने पर साँस लेना और रोना शुरू करना. यह किसी भी सरकार का दायित्व है कि देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे का ‘मुफ़्त टीकाकरण’ सुनिश्चित करे. लेकिन यह सरकार तो काम करने में कम और ढिंढोरा पीटने में ज़्यादा विश्वास रखती है. हमारे देश में हमेशा से आवश्यक टीके मुफ़्त रहे हैं लेकिन इसका कभी ढिंढोरा नहीं पीटा गया और न ही इस पर राजनीति खेली गई. लेकिन कोविड के दौरान जिस तरह से टीकों के नाम वोट माँगने की राजनीति की गई और जनता पर एहसान जताया गया, वो साबित करता है कि इन्हें चिन्ता आपके स्वास्थ्य की नहीं, अपने वोट की है. विश्वगुरु होने का दम्भ भरने वाला यह देश Zero Dose Children के मामले में दूसरे नम्बर का देश बन गया है, पहले नम्बर पर नाइजीरिया है और यह दिखाता है कि- -कोरोना जैसी महामारी से इस सरकार ने कुछ नहीं सीखा -स्वास्थ्य सेवाओं की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है -ग़रीब जनता के लिए सस्ता इलाज तो दूर की बार, प्राण रक्षक टीके भी मुश्किल हो गए हैं -नरेंद्र मोदी ने अपने दो कार्यकाल में सिवाय फ़ोटो खिंचाने और बड़े-बड़े विज्ञापनों के अलावा कुछ नहीं किया -तीसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी अपनी सरकार बचाने और अंतर्कलह सुलझाने में व्यस्त हैं, स्वास्थ्य जैसा अहम मुद्दा दूर-दूर तक उनके एजेंडा में ही नहीं है तो अब आपके बच्चों के स्वस्थ रहने और बीमारियों से बचने की ज़िम्मेदारी भी आप ही के हाथ में है - सरकार का कोई लेना देना नहीं है

Supriya Shrinate

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आपको चीख चीख कर दिन रात नरेंद्र मोदी और BJP यह बताते नहीं थकते कि भारत दुनिया की fastest growing इकॉनमी है, हम चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था हैं, हम विश्वगुरु हैं वगैरह वगैरह. और देश का मीडिया - हर टीवी चैनल, रेडियो, अखबार तुरंत सुर में सुर मिलाने लग जाते हैं - बिना सवाल पूछे, बिना आँकड़े जाने, बिना ज़मीनी असलियत दिखाये लेकिन इसी गाने बजाने चकाचौंध के बीच देश को बनाने वाले मेहनतकश कर्मचारियों, मजदूरों के सामने रोटी और भविष्य का संकट है. ये लोग अब कार्पोरेट और सरकार के शोषण से इतने आक्रोशित हैं कि लाठियां खाते हुए भी सड़क पर प्रदर्शन करने को विवश हैं ये कहानी सिर्फ़ नोएडा की नहीं है, ये कहानी गुड़गांव,फरीदाबाद,दिल्ली,मुंबई जैसे देश के अधिकांश शहरों की है, जहां कर्मचारियों से असल में बंधुआ मजदूरी कराई जा रही है अभी नोएडा के वीडियो आ रहे हैं जहाँ लोग 10,000 की सैलरी पर पिछले 10-12 साल से 12-12 घंटे काम कर रहे हैं कुछ ऐसा ही हाल थोड़े दिनों पहले आपने लखनऊ की उन तस्वीरों में देखा था जिसमें CM हेल्पलाईन में काम करने वाली महिलाएं रो रो कर बता रहीं थी कि इस महंगाई में उनका गुजारा 7,000 रूपये की नौकरी में नहीं हो पा रहा है. इससे पहले ऐसी ही बात और मुद्दा कर्मचारियों ने फरीदाबाद और गुड़गांव में उठाया था. तो एक बात साफ़ है सरकार की गरीब, मजदूर विरोधी नीतिओं और महंगाई से जनता आजिज़ आ चुकी है एक मजदूर जो रोज 12 घंटे पसीने बहाता है, जीतोड़ मेहनत करता है, उसे महीने के अंत में सिर्फ 8-10,000 रूपये मिलते हैं. जो 10 साल पहले मिलता था, वही सैलरी आज भी मिल रही है. तनख्वाह बढ़ने के नाम पर साल में किसी की तनख्वाह 30 रूपये तो किसी की 40 रूपये बढ़ी है. जबकि इस बीच रूम का किराया, बच्चों की पढ़ाई की फीस, राशन-तेल, दवाई सबके दाम आसमान छू रहे हैं अभी तो इन लोगों को गैस सिलिंडर भी 400-500 रूपये किलो के हिसाब से खरीदना पड़ रहा है नोएडा-फरीदाबाद जैसे महंगे शहरों में ये कर्मचारी, 8-10 हज़ार रूपये में कैसे अपना और अपने परिवार का गुजारा करते हैं, कैसे काम चलाते हैं यह दर्द और मजबूरी समझना मुश्किल है. वो क्या खाते हैं, कितना बचाते हैं, ये सिर्फ वही जानते हैं वहीं दूसरी ओर मोदी मित्र अडानी 1600 करोड़ से ज़्यादा रोज़ कमा रहे हैं क्या ये फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी सिर्फ धन्नासेठों के लिए है ? क्या यही है नरेंद्र मोदी का क्रूर अमृतकाल - जहां देश लूटने वाला मालामाल और देश को बनाने वाला हो रहा है कंगाल ? मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड जल्दबाज़ी में बिना बातचीत और विचार विमर्श के नवंबर, 2025 से लागू करके काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया. और आज उसी के आधार पर शोषण किया जा रहा है. हर बार मोदी सरकार की किसी भी नीति का - यहाँ तक कि अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील तक का बुरा असर कर्मचारियों पर, मज़दूरों पर पड़ता है. जबकि मोदी जी की आँखों के तारे अडानी जैसे लोगों की तो पौ बारह है. अगर सरकार ने समय रहते ध्यान न दिया तो आने वाले समय में हालात और भीषण होंगे, क्योंकि भाषणों से पेट नहीं भरता, जुमलों से परिवार नहीं चलता पर बजाय समाधान ढूंढ़ने के और इन लोगों के लिए सही नीतियां बनाने के, सत्ता में बैठे हुए लोगों ने तो इसको पहले ही अंतरराष्ट्रीय साज़िश डिक्लेअर कर दिया है. इसमें पाकिस्तान के हाथ होने की भी बेतुकी दलीलें दी जा रही हैं. मतलब अपनी मेहनत का सही मेहनताना माँगना, शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना - अपना हक़ माँगना एक साज़िश है? लेकिन इस सबमें एक उम्मीद की किरण भी है. लोग अब उकता चुके हैं, और फ़र्ज़ी अच्छे दिन के बजाए कामगार और मेहनतकश़ लोग अपनी मेहनत का हक़ से अच्छा मेहनताना मांग रहे हैं कुछ भी कहिये, देश ने अंगड़ाई लेना तो शुरु कर दिया है

Supriya Shrinate

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मैंने बजट स्पीच सुना। मैंने सोचा था कि वित्त मंत्री POOR और MIDDLE CLASS के लिए कोई नई योजनाएँ लाएगी। उनकी तकलीफ़ों को कम करने के लिए कुछ घोषणाएँ होगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हर साल की तरह मोदी सरकार का अंतरिम बजट केवल रंग-बिरंगे शब्दों का मायाजाल था ! इसमें ठोस कुछ नहीं था, बड़े-बड़े और खोखले दावे करना इस सरकार की आदत है। वित्त मंत्री ने #Budget2024 में कहा कि वे 2014 और 2024 की तुलना करने के लिए White Paper सदन में रखेंगी। तो उनको बताना चाहिए कि - 1. पिछले 10 सालों में सरकार ने जितने वादे किए गए, उनमें से कितने पूरे हुए? कितने बाक़ी हैं? बजट में उन वादों का कोई ज़िक्र नहीं था। सालाना 2 करोड़ नौकरियाँ, किसानों की आय दोगुनी करना, 2022 तक सभी को पक्का घर, 100 SMART CITIES, ये सभी वादें आज तक पूरे नहीं हुए। 2. 2014 में जो कृषि विकास दर 4.6% था, वो इस साल 1.8% कैसे हो गया। UPA के दौरान हमारी खेती 4% औसत से बढ़ती थी, वो आधा क्यों हो गया? क्यों 31 किसान हर रोज़ आत्महत्या करने पर मजबूर हैं? 3. 2014 में शिक्षा का बजट जो कुल बजट का 4.55% था, वो गिरकर 3.2% कैसे हो गया? 4. SC, ST, OBC & MINORITY WELFARE काकुल बजट की तुलना में share लगातार क्यों गिर रहा है? 5. रक्षा बजट और स्वास्थ्य बजट में लगातार गिरावट क्यों जारी है? 6. पूरे बजट मेंJobs शब्द केवल एक बार इस्तेमाल किया गया है। बेरोज़गारी 45 साल में सबसे अधिक क्यों हैं? 20-24 साल के युवाओं की बेरोज़गारी 45% पर क्यों है? मोदी सरकार ने 3 करोड़ से ज़्यादा लोगों की नौकरियां क्यों छीनी? हर महीने पेपर लीक क्यों होते हैं? 7. आसमान छूती महंगाई से हर कोई परेशान है। ज़रूरी वस्तुओं पर 5% से18% GST क्यों लगाया? आटा, दाल, चावल, दूध, सब्ज़ियों के दाम क्यों बढ़ते जा रहें हैं? यह बतानेवाला कोई नहीं है। 8. वित्त मंत्री दावा करती हैं कि आम आदमी की income बढ़ी है। ये झूठ है, सच है कि पिछले 5 वर्षों में ग्रामीण भारत का वेतन घटा है। ग्रामीण दिहाड़ी 10 सालों में बढ़ने के बजाय गिरी है। 9. वित्तमंत्री जी ने पूरे बजट के भाषण में मनरेगा का नाम तक नहीं लिया। क्योंकि UPA के वक़्त 100 दिन का काम मिलता था, वो अब केवल साल में 48 दिन रह गया है। 10. महिला व बाल विकास मंत्रालय का बजट भी कुल बजट की तुलना में इस सरकार ने कम किया है। Female Labour Force Participation जो 2005 में 30% पर था वो अब 24% पर क्यों गिर गया? 11. Congress-UPA के दौरान देश का औसत आर्थिक विकास दर जो New Series के मुताबिक, 8% पर था, वो इस सरकार में लुढ़क कर 5.6 % पर क्यों पहुँच गया? जब से मोदी सरकार बनी है, तब से बस बड़े-बड़े सपने दिखाने का काम हो रहा है। नाम बदल बदल कर योजनाएँ LAUNCH होती है। लेकिन ये नहीं बताया जाता कि पुराने वादों का क्या हुआ? जो नये सपनों दिखाए जा रहे, वो कैसे पूरे होगा? दरअसल किसी भी बजट के दो काम होते है: एक पिछले साल का ब्योरा होता है और दूसरा आने वाले साल के लिए VISION होता है। इस बजट में ये दोनों ही चीजें MISSING थी।

Mallikarjun Kharge

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