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uuubbooonntteeeyyyyyyyy

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आज राहुल गांधी कई कांग्रेस नेताओं के साथ अचानक प्रधानमंत्री आवास के गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। लोकतंत्र में धरना-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन सवाल यह है कि प्रदर्शन कहाँ और किस प्रकार किया जाना चाहिए? विरोध-प्रदर्शन के लिए भी कुछ नियम और व्यवस्थाएँ होती हैं। देश भी कुछ निर्धारित नियमों और कानूनों के अनुसार चलता है। प्रधानमंत्री आवास एक अत्यंत संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है। इस स्थान की अपनी सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल और गरिमा है। ऐसी स्थिति में यदि उस भीड़ में कोई अवांछित या असामाजिक तत्व घुस आए और स्थिति का दुरुपयोग करने या सुरक्षा व्यवस्था से समझौता करने का प्रयास करे, तो क्या यह लोकतंत्र के लिए उचित होगा? क्या प्रधानमंत्री के परिसर और आवास को इस प्रकार सुरक्षा जोखिम में डालना उचित है? क्या प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ इस तरह का खिलवाड़ किया जाना चाहिए? मेरा मानना है कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी जी को इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्हें यह समझना होगा कि उनके पद के साथ कुछ विशेष जिम्मेदारियाँ भी जुड़ी हैं, और उन जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना उनका दायित्व है। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि हम अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए कानून और व्यवस्था का भी सम्मान करें।

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"स्कूल व्याख्याता और पदों की संख्या:– OBC अभ्यर्थी " राजनीति विज्ञान:– कुल 225 पद है। केवल OBC के लिए मात्र 18 है। इस विषय में कुल 96624 अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन किया गया है। इसमें से 38153 अभ्यर्थी OBC वर्ग से है। अर्थात् कुल फॉर्म भरने वालों में 40% अभ्यर्थी OBC वर्ग से जबकि सीट में उनकी हिस्सेदारी मात्र 8% ही है। इतिहास :– कुल 90 पद है। केवल OBC के लिए मात्र 17 पद है। इस विषय में कुल 73354 अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन किया गया है। इसमें से 33710 अभ्यर्थी OBC वर्ग से है। अर्थात् कुल फॉर्म भरने वालों में 45% अभ्यर्थी OBC वर्ग से जबकि सीट में उनकी हिस्सेदारी मात्र 18% ही है। भूगोल:– कुल 210 पद है। केवल OBC के लिए मात्र 39 पद है। इस विषय में कुल 61418 अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन किया गया है। इसमें से 29797 अभ्यर्थी OBC वर्ग से है। अर्थात् कुल फॉर्म भरने वालों में 48% अभ्यर्थी OBC वर्ग से जबकि सीट में उनकी हिस्सेदारी मात्र 18% ही है। हिंदी:– कुल 350 पद है। केवल OBC के लिए मात्र 66 पद है। इस विषय में कुल 139422 अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन किया गया है। इसमें से 50722 अभ्यर्थी OBC वर्ग से है। अर्थात् कुल फॉर्म भरने वालों में लगभग 37% अभ्यर्थी OBC वर्ग से जबकि सीट में उनकी हिस्सेदारी मात्र 18% ही है। अन्य विषयों की भी स्थिति कुछ कुछ ऐसी ही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वर्गों के आवेदन और सीट संख्या को देखते है तो एक निराशा ही हाथ लगती है। पिछले करीब करीब 12 से 15 वर्षों में यह सबसे कम सीट के साथ करवाई जाने वाली भर्ती है। 24 विषयों के लिए मात्र 2202 पदों की भर्ती ऊंट के मुंह में जीरे से बदतर स्थिति में है। शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती के लिए ही अधिकांश अभ्यर्थी तैयारी करते है। इसमें से अधिकांश महिलाएं होती है। अगर उदाहरण के तौर पर देखे तो हिंदी विषय में OBC पुरुष अभ्यर्थी लगभग 19000 जबकि महिला अभ्यर्थियों की संख्या 31000 से भी अधिक है। महिलाओं को कम समय में परिणाम देने का दबाव सदैव बना रहता है। इतनी कम सीट में यह दबाव और अधिक हो जाता है क्योंकि अगली भर्ती आने उसके पूरे होने के लम्बे समय तक परिवार इंतजार नहीं करते और उनका आर्थिक सशक्तिकरण का सपना अधूरा ही छूट जाता है। इस विज्ञप्ति के अनुसार पिछड़े समुदायों के लिए आई नाममात्र की सीट अभ्यर्थियों को निराश ही कर रही है। अधिकांश अभ्यर्थी शिक्षा विभाग की ओर आशा भरी नजरों से देखते है ऐसे में यह सीट महज़ एक छलावा ही है। नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi जिस जातिगत जनगणना की मांग को लेकर मुखर रहे है उनकी पार्टी राज्य में मुख्य विपक्षी दल है परंतु इस भेदभाव पर कोई नेता अपनी मुखरता से बात रखता नज़र नहीं आ रहा है। सरकार और विपक्ष दोनों से अभ्यर्थी छला जा रहा है। Bhajanlal Sharma Madan Dilawar Ashok Gehlot Govind Singh Dotasra Tika Ram Jully Sachin Pilot Harish Chaudhary 𝗠𝗮𝗻𝗶𝘀𝗵 𝗬𝗮𝗱𝗮𝘃

Ashok Shera

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