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114,333 次观看 • 1 个月前 •via X (Twitter)

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राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर द्वारा गर्भवती महिलाओं के संदर्भ में दिया गया बयान बेहद निंदनीय, असंवेदनशील और उनके पद की गरिमा के विपरीत है। जिस व्यक्ति के कंधों पर प्रदेश की माताओं, बहनों और मरीजों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी हो, उससे ऐसी टिप्पणी की अपेक्षा नहीं की जा सकती। यह बयान केवल एक महिला का अपमान नहीं है, बल्कि मातृत्व और नारी सम्मान के प्रति भाजपा सरकार की सोच को भी उजागर करता है। सत्ता के मद में चूर मंत्री यदि जनता की पीड़ा को समझने के बजाय उसका उपहास उड़ाने लगें, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री को इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए स्वास्थ्य मंत्री को सार्वजनिक रूप से जनता से माफी मांगने हेतु निर्देशित करना चाहिए | PMO India Bhajanlal Sharma CMO Rajasthan

HANUMAN BENIWAL

60,605 次观看 • 1 个月前

खींवसर के भाजपा विधायक सहित राजस्थान विधानसभा के तीन विधायकों द्वारा विधायक निधि से राशि स्वीकृत करने के एवज में रिश्वत / कमीशन लेने से जुड़े मामले को आज लोक सभा के शून्य काल में उठाया और केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए ऐसे भ्रष्ट आचरण में संलिप्त विधायकों को बर्खास्त करने की मांग की क्योंकि इन विधायकों ने न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाई है, बल्कि जनता के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचाया है | विधायक निधि जारी करने के एवज में रिश्वत लेने और कमीशन लेने के खेल को समाचार पत्र ने तथ्यों और सबूतों के साथ प्रकाशित किया ,चैनलों ने भी उस स्टिंग को दिखाया, जिसमे भाजपा के एक विधायक ने तो स्टिंगर से दस लाख रूपये घर बुलाकर रिश्वत के रूप में लिए | जनता विधायकों और सांसदों को अपने प्रतिनिधि के रूप में चुनती है ताकि हम उनके अधिकारों की रक्षा करें और उनके हितों के लिए कार्य करें,लेकिन जब जनप्रतिनिधि स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर करता है ऐसे में यदि ऐसे आचरण पर कठोर कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार को सहन किया जा सकता है। मैने सदन में कहा कि प्रधानमंत्री जी कहते है कि न खाऊंगा न खाने दूंगा मगर जब उनकी पार्टी के विधायक के ऐसे कृत्य सामने आते है और उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती है पीएम की मंशा पर जनता सवालिया निशान खड़ा करती है |

HANUMAN BENIWAL

23,383 次观看 • 3 个月前

राजस्थान किसी की दया का पात्र नहीं है... अपने हक़ और हिस्से का पानी मांग रहा है। "प्यासे को पानी उपलब्ध कराना" ऐसा बताया जा रहा है कि मानो हरियाणा अपनी मर्जी से पानी दे रहा हो। हरियाणा के साथ किए गए यमुना जल समझौते (MoA) में राजस्थान के हितों की हत्या हुई है। एक तो हितों का समर्पण और ऊपर से हरियाणा की कृपा बताना शर्मनाक है। मुख्यमंत्री भजनलाल जी के द्वारा हरियाणा के सामने किए गए समपर्ण से पूरा राजस्थान शर्मिंदा है। भजनलाल जी को ज्ञात होना चाहिए कि राजस्थान को मिलने वाला पानी किसी की मेहरबानी से नहीं, बल्कि 1994 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में हुए समझौते के तहत उसका हक़ है। जिसको हरियाणा के सामने गिरवी रखकर भाजपा सरकार ने समझौता किया है। अगर 1994 के यमुना जल समझौते के आधार पर ही नया MoA किया गया है, तो फिर राजस्थान के हिस्से के पानी पर नई शर्तें क्यों लगाई गईं? - राजस्थान को सिर्फ जुलाई से अक्टूबर (बारिश के समय) की अवधि में केवल 4 महीने ही पानी मिलेगा। यानि नवंबर से जून की अवधि में राजस्थान को कोई जल आवंटित नहीं होगा। ये समर्पण क्यों? - MoA में राजस्थान सिर्फ 580 MCM पानी मिलने का जिक्र है, जबकि 1994 के मूल समझौते में 1.19 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलना था। यानी 1994 के समझौते के अनुरूप जल आवंटन नहीं होगा। ये समर्पण क्यों? - यमुना नहर की पूरी क्षमता के उपयोग के बाद बारिश के समय अतिरिक्त पानी होने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा, जबकि 1994 के मूल समझौते ये शर्त नहीं थी। ये समर्पण क्यों? - राजस्थान जाने वाली पाइप लाइन से हरियाणा भिवानी, फतेहाबाद और उन गांवों में पहले पानी लेगा जहां से पाइप लाइन गुजरेगी, जो 1994 के मूल समझौते की भावना के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों? - हरियाणा द्वारा पहले 13,000 क्यूसेक पानी, फिर 18,000 क्यूसेक पानी, बाद में 24 000 क्यूसेक पानी, और अब पूरे जल समझौते पर अपनी मनमर्जी करना 1994 के मूल समझौते के खिलाफ है। ये समर्पण क्यों? - 1994 के मूल समझौते के अनुसार सभी राज्यों को Pro Rata Basis यानी पानी की उपलब्धता के अनुपात में पानी मिलना था। लेकिन अब पहले हरियाणा को पानी मिलेगा और फिर अधिशेष जल रहने पर ही राजस्थान को पानी मिलेगा। ये समर्पण क्यों? - जल पर नियंत्रण केंद्रीय जल आयोग का होता है, फिर समझौते में कैसे हरियाणा ने अपनी मर्जी से एकतरफा पानी तय किया? ये समर्पण क्यों? - राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने यमुना जल के लिए MoU का प्रपत्र भेजकर राजस्थान के हितों को आगे रखा लेकिन लेकिन केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार ने अटकाए रखा। बाद में हाईकोर्ट की फटकार पर हरियाणा पानी देने के लिए विवश हुआ। लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल जी ने इवेंटबाजी और वाहवाही के चक्कर में प्रदेश के हितों को गिरवी रख दिया। ये समर्पण क्यों? - मुख्यमंत्री जी ने ढाई साल MoU और MoA में निकाल दिए। इनसे पूर्व भी यमुना जल पर कई समझौते हुए हैं.. लेकिन हितों का समर्पण नहीं हुआ। क्यों? - MoA के हिसाब से अगर राजस्थान को सिर्फ पेयजल का ही पानी मिलेगा। फिर शेखावाटी की 1.05 लाख हेक्टेयर ज़मीन सिंचाई का झूठा भ्रम क्यों फैलाया गया? मुख्यमंत्री जी, राजस्थान की जनता जानना चाहती है कि जिस परियोजना के लिए वर्षों तक संघर्ष हुआ, डीपीआर बनी, अदालतों तक लड़ाई लड़ी गई.. उसका परिणाम "अधिकार है या समर्पण"? यमुना जल समझौते (MoA) की पूरी प्रति तत्काल सार्वजनिक करें.. जल आवंटन, वित्तीय ज़िम्मेदारी, लागत-बंटवारे, पानी छोड़ने के नियमों और सभी शर्तों को जनता के सामने रखें।

Govind Singh Dotasra

66,014 次观看 • 25 天前