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अगर उपमुख्यमंत्री होते तो सम्राट चौधरी जी इस्तीफा दे दिए होते अब मुख्यमंत्री हो गए हैं ना इसलिए वह सवेर नहीं हो रहा है जिस सवेरे सम्राट चौधरी जी इस्तीफा देना चाहते थे। बहन-बेटीयों और नाबालिकों के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार बहुत ही निंदनीय है। इस तरह का...

11,612 просмотров • 14 дней назад •via X (Twitter)

Комментарии: 6

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देश भक्त14 дней назад

जहां इस तरह के मैटर होते हैं वहां राजद के गुंडे जरूर होते हैं।

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.14 дней назад

Sir ye kis line mey aa gye aap. Ssc ke batch mey wapis aa jaao sir, bache aapko yaad kar rhe hai

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Raju Yadav 𝕏14 дней назад

गैर बीजेपी शासित राज्य रहता तब न ये लोग छाती पीटते, और महिला सम्मान की दुहाई देते

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Abhishek Raj Official13 дней назад

जिस राज्य का CM ही एक अपराधी और न जाने कौन कौन सी धाराएं लगी हो उनपे! उस राज्य की जनता भला कैसे सुरखित रह सकती है!

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HIGHLIGHTER14 дней назад

1 बार फिर गलती हो गई है आप से PM ki लिस्ट मे आल सबसे आगे है 2029 आने दीजिए 😁😁😁

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Amit Pathak13 дней назад

Sir aap jis party m hai us party m bolte h ladke hai galti ho jati h 😂

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सम्राट चौधरी की भाषा और आचरण बिहार के मुख्यमंत्री के पद की गरिमा और मर्यादा को धूमिल करती है! अगर जाति देखकर पुलिस को फर्जी एनकाउंटर की अनुमति देना सम्राट चौधरी सरकार की नीति है तो इसे सबके सामने रखकर सरकार को न्यायपालिका की अप्रासंगिकता और अनावश्यकता पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए और बताना चाहिए कि 7 हत्याओं के अभियुक्त के लिए सम्राट सरकार की फर्जी एनकाउंटर की किताब में trigger happy पुलिस द्वारा किस तरह की मौत उल्लेखित है, वह भी तब जब वह अपनी आयु के बारे में न्यायालय से झूठ बोलकर सज़ा से बच गया हो! सम्राट चौधरी की राजनीतिक आचरण से समाज में आपसी विद्वेष और घृणा के अलावा कुछ और नहीं होगा! इस तरह के फर्जी एनकाउंटर से बिहार पुलिस को हरी झंडी मिल रही है कि वह किसी भी प्रकार से भ्रष्टाचार में लिप्त होकर वास्तविक दोषियों को बचाने के लिए भी कभी भी किसी भी निर्दोष का एनकाउंटर कर सकती है और हत्या के पीछे की वास्तविक मंशा से अनभिज्ञ नागरिकों के हर्षोल्लास के बीच खुद को एवं अपने भ्रष्टाचार को बचा सकती है! #Crime #Corruption Tejashwi Yadav #RJD #bihar

Rashtriya Janata Dal

16,552 просмотров • 3 месяцев назад

जब पुलिस ही धमकी दे, एनकाउंटर की बात कहे और झूठे केस में फंसाने की बात कहे- तो सोचिए कि प्रशासन ने पुलिस वालों को कितनी छूट दे रखी है। दुर्भाग्य है कि पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann जो गृहमंत्री भी हैं.. उनकी तरफ से इस मामले में कोई बयान नहीं आया। पंजाब में 7 से 8 लाख रिटायर्ड और इन-सर्विस फौजी हैं, तो क्या मुख्यमंत्री को इन फौजियों से माफी नहीं मांगनी चाहिए ? कांग्रेस पार्टी की तरफ से मांग है कि👇 • रिटायर्ड जज के तहत ज्यूडिशियल इंक्वायरी होनी चाहिए • इस इंक्वायरी में आर्मी के सीनियर भी शामिल किए जाएं • SSP नानक सिंह का नाम FIR में दर्ज किया जाए भारतीय सेना हमारी रक्षक है, इसलिए इस केस में कड़ी कार्रवाई हो, ताकि आगे से ऐसा कुछ न हो। हमारा मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में भगवंत मान व AAP सरकार पूरी तरह से दोषी हैं।

Alok Sharma

12,290 просмотров • 1 год назад

हनुमान बेनीवाल के बाद अब निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने भी डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के समर्थन में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि – "किरोड़ी जी बड़े नेता हैं और संघर्षों की भट्टी में तपकर निकले हुए व्यक्ति हैं। आज जो कुछ भी हो रहा है, जिस तरीके से हो रहा है और जो तमाम घटनाएं सामने आ रही हैं, उनका उन्हें पूरा पता है। यह सब कौन करवा रहा है, इसकी भी उन्हें अच्छी तरह जानकारी है। मुझे लगता है कि एक मजबूत नेता के लिए यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। राजनीति में ऐसी बातें पहले भी होती रही हैं और आज भी हो रही हैं। यह सब एक प्रयास है, एक सोची-समझी साजिश और षड्यंत्र है। मेरा मानना है कि आने वाले दिनों में पूरी स्थिति प्रदेश के सामने स्पष्ट हो जाएगी।"

Dinesh Bohra

44,285 просмотров • 3 месяцев назад

विपक्ष के लोगों को पता है कि चुनाव मैदान में वे साफ हो चुके हैं। इसलिए NDA में क्या हो रहा है, इस बारे में भ्रांतियां फैला रहे हैं, निराधार स्टोरी प्लांट करवा रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी चुनाव मैदान में जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एक-एक चीज पर खुद उनकी नजर है। सारे लोगों से वे खुद बात कर रहे हैं। एनडीए के घटक दलों के नेतागण, खासकर दिल्ली में बीजेपी के जो बड़े नेता हैं, उनसे भी मुख्यमंत्री जी की बात हो रही है। जो कुछ भी तय हो रहा है, मुख्यमंत्री जी से बात करके ही तय हो रहा है। NDA के पांचो घटक दल साथ मिलकर प्रचंड बहुमत के लिए काम कर रहे हैं। हमलोग तो सीटों की संख्या भी घोषित कर चुके हैं। कौन किस सीट पर लड़ेगा, संभवत: आज शाम तक वह भी फाइनल हो जाएगा। एनडीए का लार्जर परपस है कि बिहार में जो विकास का मोमेंटम पकड़ा हुआ है, वह कहीं से भी बाधित नहीं हो। ऐसे लोग फिर से सत्ता में न आ जाएं, जिनका ट्रैक रिकार्ड बिहार की जनता जानती है। इस उद्देश्य के लिए पूरा एनडीए एकजुट है, और मुख्यमंत्री Nitish Kumar जी नेतृत्व में, उनके गाइडेंस में तथा उनके गार्जियनशिप में ही यह चुनाव सभी लोग लड़ रहे हैं। मैं बिहार की जनता से भी अनुरोध करता हूँ कि अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। आज पटना में ANI से बात करते हुए 👇 #SanjayKumarJha #BiharElections #BiharElections2025 #2025FirSeNitish #NDA4Bihar

Sanjay Kumar Jha

40,193 просмотров • 11 месяцев назад

श्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर मोदी सरकार की चुप्पी ने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि लोकसभा और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष को प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देने को मजबूर होना पड़ा है। आज मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर वार्ता की : मैं बहुत लंबे अरसे से कह रहा हूँ कि यह देश किस दिशा में जा रहा है, कोई नहीं जानता किस दिशा में जाएगा, किसी को नहीं मालूम। यह जो 1 महीने के तमाशे हैं,सरकार ने इस समस्या को जिस रूप में लेना चाहिए था,लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है। NEET पेपर आउट हो गया। जो रिस्पॉन्स देना चाहिए था सरकार को,उसमें पूरी तरह फेल हो गई। आंदोलन शुरू हो गए। भूख हड़ताल पर लोग बैठ गए 15-20-20 दिन तक। और सरकार का कोई नुमाइंदा, चाहे सरकारी हो, चाहे वह मंत्री हो, कोई जा के मिले ही नहीं उनसे, बात भी नहीं करे कि आप चाहते क्या हो। राहुल गांधी लगातार जब से घटना हुई, तब से इस्तीफा मांग रहे हैं धर्मेंद्र प्रधान जी से। कोई जवाब नहीं, सरकार का एक्शन भी नहीं तो यह जो हालात बने हैं आज, वह बहुत दुखद है और बहुत ही अनफॉर्चुनेट है कि नेता प्रतिपक्ष को चाहे वह लोकसभा के हैं, चाहे राज्यसभा के हैं,राहुल जी को, खड़गे साहब को, अनेकों सांसद भी हैं, प्रियंका गांधी जी भी हैं,उनको बैठना पड़े पीएम हाउस के सामने, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा? आप सोच सकते हैं कि देश-दुनिया में क्या मैसेज जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जी क्लेम करते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मुल्क हमारा है। क्या-क्या क्लेम नहीं करते हैं! सब जो दावे करते हैं जाके विदेशों में घूम-घूम के,उन सब की पोल खुल चुकी है इस देश के अंदर, जिस प्रकार का व्यवहार सरकार कर रही है और हालात बहुत गंभीर हैं। जो आक्रोश फूट पड़ा है पब्लिक के अंदर,नौजवानों के अंदर, छात्रों के अंदर, वह सरकार जो सोच रही है, असेसमेंट कर रही है, उससे कई गुना अधिक है। इसको समझना पड़ेगा सरकार को। अगर सरकार का कोई लोकतंत्र में विश्वास बचा है थोड़ा बहुत भी, तो समझना पड़ेगा कि आक्रोश बहुत भयंकर है। यह जो कल दिल्ली में हजारों बच्चे इकट्ठे हो गए पूरे देश भर के,जिस प्रकार लाठीचार्ज हुआ, बेरहमी से पीटा गया लड़कियों को भी, लड़कों को भी,बच्चे छोटे बच्चे भी, छोटे उम्र के भी थे।पर जिस प्रकार पुलिस ने नादिरशाही तरीका अपना करके, जो कुछ भी पिटाई का जो तरीका अपनाया अगर आप दृश्य देखेंगे, तो आप समझ जाएंगे कि उनकी मंशा किस प्रकार की रही होगी या क्या उनका आदेश मिले होंगे सबक सिखाने के,यह समझ के परे है। आंसू गैस के गोले छोड़ दिए,पिटाई कर दी। तो कई पूरे आंदोलन में कई तरह के रहस्य भी हैं। कल मैं देख रहा था कि यह जो बैरीकेड्स लगे हुए हैं, उनको पुलिस खुद ही हटा रही है। जो सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे,उनको हटाया जा रहा है। यह एक नया तरीका निकाला पुलिस ने। हटाने का कारण क्या है? जब आंदोलन चल रहा है, बैरीकेडिंग तो और स्ट्रांग करते, स्ट्रेंथन करते। हटाए क्यों गए? स्पेस बनाने के लिए बैरीकेडिंग हटाए जा रहे हैं। इतिहास में मैंने पहली बार देखा इस प्रकार का कोई जवाब मिलेगा। यह अभी तक रहस्य बना हुआ है। कोई डिस्कशन में आ रहा है यह पॉइंट।पर समझ के परे है कि यह किस प्रकार से स्पेस बनाने के लिए हटाए गए। जो प्रोटेस्ट करने वाले लोग हैं, जितने प्रदर्शनकारी, उनका मानना है कि यह जानबूझकर हटाए गए। जिस प्रकार का तरीका अपनाया गया लाठीचार्ज का बदनाम करने के लिए आंदोलन को या जो मार्च निकाला उसको, कि क्योंकि पार्लियामेंट तक पहुँच गए थे, इसलिए हमने लाठीचार्ज कर दिया, आंसू गैस के गोले छोड़ दिए। यह जस्टिफाई करने के लिए तरीका हो सकता है। यह जो लोग फीडबैक दे रहे हैं, उसमें यही फीडबैक आ रहा है। अगर इस प्रकार के हथकंडे अपनाए जाएंगे, तो आप सोच सकते हो क्या होगा डेमोक्रेसी का? वैसे आक्रोश जो है,वह जो फूट के सामने आया है,जो छात्र-छात्राएं और युवा लोग जो कमेंट दे रहे हैं मीडिया के सामने, अनेकों कमेंट्स एक से मिलेंगे आपको, कि किस प्रकार के हालात देश में, लोकतंत्र नाम की चीज़ नहीं रही है,सुनवाई नहीं हो रही है, किनके पास जाके क्या शिकायत करें,कोई क्षेत्र में सुनवाई नहीं हो रही है। शिकायत भी नहीं हो पा रही,शिकायत किससे करें? यह जो हालात बने हैं पूरे कंट्री के अंदर, वह आक्रोश था, इसीलिए पूरे मुल्क के राज्यों से, दूर-दूर से कई जगह तो मां-बाप के इच्छा के विरुद्ध भी बच्चे आए और भाग लिया उन्होंने आंदोलन के अंदर। तो आज राहुल जी और खड़गे साहब और सब लोग बैठे हैं,अब जा के मंत्री बुला रहे हैं आंदोलनकारियों को, कभी जा के मिल रहे हैं,आज अचानक भेज दिया गया मंत्री जी को मिलने के लिए राहुल जी से। यह नौबत क्यों आई? यह तो सरकार को सोचना पड़ेगा। 1/2

Ashok Gehlot

136,807 просмотров • 2 месяцев назад

अरविंद केजरीवाल जी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान जी से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद भी उन्हें कुर्सी से क्यों नहीं हटाया गया? अकाल तख्त साहिब का निर्णय आने और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद भी कार्रवाई न करना अपराधियों का साथ देना है। यह धर्म और मर्यादा के पूरी तरह खिलाफ है। आखिर आपकी ऐसी क्या मजबूरी या कमजोरी है कि आप उन्हें हटा नहीं पा रहे हैं? जिस व्यक्ति के माथे पर इतना बड़ा कलंक लगा हो, वह पंजाब का मुख्यमंत्री रहने के लायक नहीं है। भगवंत मान जी को खुद आगे आकर तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। पंजाब की कमान किसी ऐसे व्यक्ति के हाथ में हो जो समाज और धर्म की मर्यादा का पालन करता हो।

Kapil Mishra

31,989 просмотров • 3 месяцев назад

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी तथा पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे जी की दिल्ली यात्रा को लेकर प्रश्न के उत्तर में : ये अंदरूनी पार्टी के मामले हैं जबसे धनखड़ साहब का एपिसोड हुआ है तब से गवर्नमेंट खुद डिफेंस में भी आ गई है । इस संवैधानिक पद पर बैठा हुआ व्यक्ति धनखड़ साहब ने, धनखड़ साहब से शिकायत कांग्रेस की बहुत रही है विपक्ष की रही है, विपक्ष की भी रही है पार्टियों की, परंतु धनखड़ साहब को जिस रूप में मजबूर किया गया या वो खुद इस्तीफा दिया उन्होंने, इस्तीफा दिलवाया गया ये तमाम बातें रहस्य बनी हुई हैं तो संवैधानिक पदों पर जो बैठते हैं एक पार्लियामेंट के मेंबर भी इस्तीफा देता है या कोई ऐसी बात बोलना चाहता है, या वो पार्टी की ही पार्टी का है, किसी पार्टी की बात करता है वो भी स्पष्टीकरण देता हो उसके अंदर स्पष्टीकरण देता है और उपराष्ट्रपति जी का इस्तीफा हो गया देश के अंदर आज इतने दिन हो गए हैं अभी तक भी न तो वो कोई बोले न उन्होंने प्रेस से बात करी है न सरकार ने कोई बताया है कि हमारे उपराष्ट्रपति चुने हुए थे वो किन कारणों से इस्तीफा दिया , क्या सरकार नाराज़ थी नइत्तफाकी थी मंत्रियों के बीच में या प्राइम मिनिस्टर के बीच में या धनखड़ साहब के बीच में क्या किसी को नहीं मालूम और वो अभी मौन धारण किए हुए हैं तो ये घटना मामूली नहीं है , संवैधानिक पद पर आप किसी को अगर मजबूर कर देंगे, राष्ट्रपति को कल कर देंगे, जो सुनते हैं हम लोग मजबूर होकर इस्तीफा दिया या इस्तीफा दिलवाया गया जो भी है किसी को नहीं मालूम है सुनी सुनी बाते हैं तो संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्राइम मिनिस्टर, लोकसभा स्पीकर, सीजेआई ये सभी लोग होते हैं बड़े बड़े पदों पर ये संवैधानिक पदों पर होते हैं उनके इस्तीफे ऐसे नहीं होते हैं उनके लिए स्पष्टीकरण देश को देना पड़ता है कि क्यों हम ने इस्तीफा दिया पूरे मुल्क को बताना पड़ता है क्या घनखड़ साहब को अवसर दिया गया क्या ?

Ashok Gehlot

50,315 просмотров • 1 год назад

जनता ने ही खोल दी वायरल वीडियो से बड़बोले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पोल! सम्राट चौधरी दावा कर रहे थे कि उनकी पत्नी के पास कोई सुरक्षा, प्रोटोकॉल, प्रावधान, सिक्योरिटी, व्यवस्था,.. कुछ नहीं है! जबकि सच्चाई यह है कि उनकी धर्मपत्नी के साथ दर्जनों गाड़ियों का काफिला चल रहा है, पूरा पुलिसबल चल रहा है, साथ में DM और SP चल रहे हैं! किस अधिकार से उनको प्रोटोकॉल मिला? और किस क्षमता से वह एक विद्यालय का निरीक्षण कर रही हैं? और अधिकारियों तथा प्रशासन को निर्देश भी दे रही हैं? अहंकारी, तानाशाही, घमंडी, फेक एनकाउंटर के विशेषज्ञ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक तरफ विपक्ष के नेताओं की सुरक्षा को कम कर रहे हैं! लगता है सारी सुरक्षा दूसरे जगह से हटाकर अपनी पत्नी और परिवार की सुरक्षा और हनक में लगा रहे हैं! मानो उनका पूरा परिवार ही बिहार का मुख्यमंत्री बन गया हो! Tejashwi Yadav #RJD #Bihar

Rashtriya Janata Dal

24,631 просмотров • 2 месяцев назад

नेहरू जी, साल 1960 में जिस टेक्नोलॉजिकल सोसाइटी और सिविलाइजेशन और उससे उत्पन्न होने वाली आध्यात्मिक शून्यता (Spiritual Emptiness) की बात कर रहे थे, वह आज हमारे सामने कई गुना अधिक विकराल रूप में मौजूद है। • AI, मनुष्य की क्रिएटिविटी की जगह लेने के दावे कर रही है। आज Deepfake के तमाशे हम चारों ओर देख रहे हैं • गांधी जी की जो आशंका थी कि यंत्र मनुष्य को मुक्त करने के स्थान पर अपना गुलाम भी बना सकते हैं, वहीं आज हमारे सामने सच्चाई के रूप में सामने आ रही है • बहुत से लोगों को यह गलतफहमी है और दुर्भाग्य से इस गलतफहमी का खूब प्रचार भी किया गया कि नेहरू मटेरियलिस्ट थे, उनका आध्यात्म और धार्मिकता से कोई लेना-देना नहीं था • असलियत ये है कि नेहरू जी भारतीय परंपरा की इस विज्डम को जानते थे कि स्पिरिचुअलिटी और मटेरियल रियलिटी, इनके बीच में विरोध का नहीं, बल्कि एक तरह का द्वन्द्वात्मक संबंध है महात्मा गांधी जी से सीखते हुए और अपनी खुद की सोच के चलते जवाहरलाल नेहरू जी ने इस बात को समझा कि आध्यात्मिक शून्यता (Spiritual Emptiness) को दूर करने के लिए जरूरी है कि समाज में एक बुनियादी 'न्याय और समता' संभव करने वाली व्यवस्था हो। : The Nehru Centre के उद्घाटन कार्यक्रम में Purushottam Agrawal जी 📍 नई दिल्ली

Congress

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