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अब प्रेम नहीं हो सकता....?

119,342 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

10 Kommentare

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Vikas Tiwarivor 1 Jahr

जी हां प्रेम नहीं हो सकता है क्योंकि आजकल की लड़कियां खाना कम पैसा ज्यादा खाती हैं

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Tomvor 1 Jahr

He is wrong. Love is natural and was developed as a survival mechanism during evolution. A human being can go into severe depression without it. Probably people are no longer in love bcz there is too much pressure to perform by these teachers and parents.

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𝐆𝐮𝐝𝐝𝐮 𝐒𝐢𝐧𝐠𝐡vor 1 Jahr

Amazing! 💯 @abhinaymaths sir

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Rajesh Aroravor 1 Jahr

सही बात 💙💙✳️

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Dr. Dileep Rankawatvor 1 Jahr

एक माइक लेकर लपलप कर दिया..... मतलब प्रेम नहीं हो सकता.... अब बेवकूफ आदमी समझदार इंसान ही प्यार कर सकता है

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govind jhavor 1 Jahr

यहीं तो प्रॉब्लम है इस जनरेशन को प्रेम की परिभाषा एक गणित के अध्यापक से मिलती है और वो भी 30 sec मे कभी कृष्णा को सुन लो प्रेम क्या है

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Vrindavan Officialvor 1 Jahr

Ave jhatu meri lgi pdi h fir bhi prem krta hu

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Rishi Sharmavor 1 Jahr

don't love, but being LOVE!

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Ankush Singhvor 1 Jahr

16-18 mai jo hota hai usko nadani va hawas kehte hai

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Vishaltraveller9955vor 1 Jahr

Naaye dour ke kirdaar, Jismani chahtein Do pal ki mulaqat ko ishq samajte hain. Wo zamana alag tha, wo kitabe alg thi Ruh se ishq sikhati thi..💞

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स्त्री ने कभी यह घोषणा ही नहीं की कि मेरे पास भी आत्मा है । वह चुपचाप पुरूष के पीछे चल पड़ती है । युधिष्ठिर जैसा अद्भुत आदमी द्रौपदी को जुए में दाँव पर लगा देता है ! फिर भी कोई यह नहीं कहता कि हम कभी युधिष्ठिर को धर्मराज नहीं कहेंगे । नहीं, कोई यह नहीं कहता ! बल्कि कोई कहेगा तो हम कहेंगे कि अधार्मिक आदमी है । नास्तिक आदमी है, इसक़ी बात मत सुनो ! स्‍त्री को जुए पर, दाँव पर लगाया जा सकता है, क्योंकि भारत में स्‍त्री सम्पदा है, सम्पत्ति है । हम हमेशा से कहते रहें हैं, स्‍त्री सम्पत्ति है और इसीलिए तो पति को स्वामी कहते हैं । स्वामी का मतलब आप समझते हैं, क्या होता है ? अगर हिन्दुस्तान की स्‍त्री में थोड़ी भी अक्ल होती तो एक—एक शब्द से उसे ‘#स्वामी’ निकाल बाहर कर देना चाहिए । कोई पुरुष कोई स्‍त्री का स्वामी नहीं हो सकता । स्वामी का क्या मतलब होता है ? स्‍त्री दस्तखत कर देती है अपनी चिट्ठी में ‘ #आपकी_दासी ’ और पति देव बहुत प्रसन्न हो कर पढ़ते हैं । बड़े आनन्दित होते हैं कि बड़ी प्रेम की बात लिखी है । लेकिन इसका पता है कि स्वामी और दास में कभी प्रेम नहीं हो सकता । प्रेम की सम्भावना समान तल पर हो सकती है । स्वामी और दास में क्या प्रेम हो सकता है ? इसलिए हिन्दुस्तान में प्रेम की सम्भावना ही समाप्त हो गयी । हिन्दुस्तान में स्‍त्री—पुरुष साथ रह रहे हैं और साथ रहने को प्रेम समझ रहे हैं ! वह प्रेम नहीं है । हिन्दुस्तान में प्रेम का सरासर धोखा है । साथ रहना भर प्रेम नहीं है । किसी तरह कलह कर के 24 घण्टे गुजार देना, प्रेम नहीं है । ज़िन्दगी गुजार देनी प्रेम नहीं है । प्रेम की पुलक और है । प्रेम की प्रार्थना और है । प्रेम की सुगन्ध और है । प्रेम का सँगीत और है । लेकिन वह कहीं भी नहीं ! असल में गुलाम और दास में, मालिक में और स्वामी में, कोई प्रेम नहीं हो सकता । लेकिन हमारे खयाल में नहीं है यह बात कि पूरब की स्‍त्री नेहु विशेष कर भारत की स्‍त्री ने अपनी आत्मा का अधिकार ही स्वीकार नहीं किया है । आत्मा की आवाज भी नहीं दी है । उसने हिम्मत भी नहीं जुटायी कि वह कह सके कि ‘#मैं_भी_हूँ !

तृप्त ...🖤

210,828 Aufrufe • vor 2 Jahren