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अमेरिका से ट्रेड डील न हो पाने की कहानी 👇

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अमेरिका से भारत की ट्रेड डील ना होने के जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी हैं। आज BJP और मोदी समर्थक अमेरिकी कॉमर्स सचिव की आधी अधूरी बात सुन कर ख़ुश हो रहे हैं, लेकिन पूरा सच देश विरोधी हरकत का प्रमाण है। असलियत यह है कि- मोदी ट्रम्प को फ़ोन करने से झिझक रहे थे, इसलिए ट्रेड डील नहीं हो पाई। हालांकि, 3 हफ्ते बाद ही मोदी और उनकी सरकार बात करने को तैयार हो गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मोदी को जब खुद का PR करना था तब तो सामने से कॉल किया- 'Sir, may I see you please' लेकिन जब बात देश की आई तो आना कानी करने लगे। अमेरिका 'पहले आओ-पहले पाओ' के नियम के तहत ट्रेड डील कर रहा है। ट्रेड डील में पहले भारत का नंबर 2 था, हमसे पहले UK के प्रधानमंत्री ने समय पर बात करके अपनी डील फाइनल कर ली थी। जब हमारा नंबर आया तो नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने तेजी से काम नहीं किया। अगर काम किया होता तो आज ट्रेड डील हो जाती। लेकिन ये हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे और वक्त निकल गया। अब अमेरिका के आगे डील के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन वो राजी नहीं हो रहा है। मोदी ने भारत की विदेश नीति का बहुत नुकसान किया है। साथ ही भारत के प्रधानमंत्री के पद की गरिमा तो खत्म ही कर दी है। आज अमेरिका खुलेआम भारत का और प्रधानमंत्री का मजाक बना रहा है। अमेरिका में भारत विरोधी कानून लाने की तैयारी हो रही है। लेकिन नरेंद्र मोदी की ओर से एक आवाज नहीं निकल रही। ना लाल आंख दिखा रहे हैं, ना जवाब दे रहे हैं।

Congress

38,253 Aufrufe • vor 7 Monaten

भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ट्रेड सरप्लस वाला पार्टनर था। कई दशकों से भारत ने भारी मात्रा में अमेरिका को निर्यात किया और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। लेकिन अब ट्रंप की इस ट्रेड डील से भारत अमेरिका का डंपिंग ग्राउंड बन गया है और ये नरेंद्र मोदी के सरेंडर की वजह से हुआ है। इस ट्रेड डील के अनुसार 5 साल में हमें 500 बिलियन डॉलर का आयात अमेरिका से करना है। यानि भारत को अपना आयात 3 गुना बढ़ाना पड़ेगा। अर्थव्यव्सथा और रुपए की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। मतलब हमें हर साल अमेरिका से 40-42 बिलियन डॉलर के आयत को 100 बिलियन डॉलर करने होगा। सवाल है कि हम अमेरिका से क्या सामान खरीदेंगे, इसका जवाब पीयूष गोयल के पास नहीं है। पीयूष गोयल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बताया कि हम अमेरिका से क्या नहीं लेंगे, लेकिन ये नहीं बताया कि क्या-क्या आएगा। नरेंद्र मोदी का किसानों से रिश्ता आप जानते ही हैं। जब किसान सड़क पर निकलते हैं तो उनका सिर फोड़ा जाता है, लेकिन अब इस ट्रेड डील से किसानों की कमर तोड़ी जा रही है, जो आने वाले दिनों में साबित हो जाएगा। अमेरिका के किसान इस डील से खुश हैं क्योंकि उन्हें भारत का बड़ा मार्केट मिल गया। दोस्ती बराबरी की होती है। ऐसे में जब दोस्त आपको रोज 2 थप्पड़ मारे और आपके कुछ कहने पर एक थप्पड़ कम कर दे। तो आप इसे रियायत समझकर खुश नहीं हो सकते। क्या ये दोस्ती है? 3% के टैरिफ को बढ़ाकर 50% कर दिया और अब घटाकर 18% कर दिया, तो मोदी खुश हो रहे हैं। जिस 3% की वजह से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई, क्या उसे आप भूल जाएंगे? : AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ जी 📍 दिल्ली

Congress

21,006 Aufrufe • vor 6 Monaten

बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया... आज कुछ ऐसा ही नरेंद्र मोदी और BJP के लोग कर रहे हैं। यह लोग 18% ट्रेड डील पर जश्न मना रहे हैं - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सिर्फ़ विशुद्ध मूर्ख ख़ुश हो सकते हैं। यह डील इतनी एकतरफा और भारत के लिए ख़राब है कि इसे एक देशद्रोही ही सही ठहरा सकता है। इसीलिए BJP वालों को जश्न मनाते देख कोई आश्चर्य नहीं हुआ- वो राष्ट्र-विरोधियों का झुंड जो ठहरे। खैर इस ट्रेड डील के मुताबिक 👇 • अमेरिका भारतीय export पर 18% टैरिफ लगाएगा - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था • भारत अमेरिकी सामान पर zero मतलब शून्य टैरिफ लगाएगा- जबकि अभी तक भारत अमेरिका पर 30-100% तक टैरिफ लगाता था • भारत, अमेरिका से 500 अरब डॉलर की ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पादों और कोयला ख़रीदेगा और अन्य चीज़ों की खरीद बढ़ाएगा • भारत, रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदेगा। इसके बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल ख़रीदेगा अब कुछ ज़रूरी सवाल उठते हैं 👇 👉 सीजफायर की तरह, हमारी ट्रेड डील की घोषणा ट्रम्प ने पहले क्यों की? 👉 हमारे ऊपर औसतन 3% से कम टैरिफ लगता था, अब 18% लगेगा। यह भारत की जीत कैसे है? 👉 जिन अमेरिकी चीज़ों पर भारत अभी तक 30-100% टैरिफ लगाता था, उस पर ज़ीरो टैरिफ लगाना हमारी जीत कैसे है? 👉 भारत ने अमेरिका के लिए अपना बाजार पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई लगती है - इससे घरेलू भारतीय उद्योग और व्यापारियों की सुरक्षा कैसे होगी? 👉 ज़्यादा अमेरिकी सामान खरीदने से 'मेक इन इंडिया' और हमारी मैनुफैक्चरिंग का क्या होगा? 👉 जिस तरह से इस डील के बाद अमेरिकी कृषि सचिव ने ख़ुशी जताई है, उससे बिल्कुल साफ़ है कि अमेरिकी किसानों की तो बल्ले-बल्ले है, लेकिन हमारे किसानों पर इस तरह के हमले के लिए आप राज़ी कैसे हुए मोदी जी? 👉 अमेरिका कौन होता है, यह निर्णय करने वाला कि हम रूस से तेल ख़रीदेंगे या नहीं? 👉 ईरान के चाबहार पोर्ट में हम रहेंगे या नहीं? 👉 मोदी ने यह देशविरोधी डील इतना नतमस्तक होकर क्यों की है? : AICC-सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन Supriya Shrinate जी

Congress

27,782 Aufrufe • vor 7 Monaten

बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया आज कुछ ऐसा ही नरेंद्र मोदी और BJP के महामूर्ख कर रहे हैं यह लोग 18% ट्रेड डील पर जश्न मना रहे हैं - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सिर्फ़ विशुद्ध मूर्ख ख़ुश हो सकते हैं. यह डील इतनी एकतरफा और भारत के लिए ख़राब है कि इसे एक देशद्रोही ही सही ठहरा सकता है इसीलिए BJP वालों को जश्न मनाते देख कोई आश्चर्य नहीं हुआ - महामूर्खों और राष्ट्र-विरोधियो का झुंड जो ठहरे खैर इस ट्रेड डील के मुताबिक • अमेरिका भारतीय export पर 18% टैरिफ लगाएगा - जबकि अभी तक भारत पर अमेरिका औसतन 3% से कम टैरिफ लगाता था • भारत अमेरिकी सामान पर zero मतलब शून्य टैरिफ लगाएगा - जबकि अभी तक भारत अमेरिका पर 30-100% तक टैरिफ लगाता था • भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर की ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पादों और कोयला ख़रीदेगा और अन्य चीज़ों की खरीद बढ़ाएगा • भारत रूस से सस्ता तेल नहीं खरीदेगा, इसके बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल ख़रीदेगा अब कुछ ज़रूरी सवाल उठते हैं👇 👉सीजफायर की तरह, हमारी ट्रेड डील की घोषणा ट्रम्प ने पहले क्यों की? 👉 हमारे ऊपर औसतन 3% से कम टैरिफ लगता था, अब 18% लगेगा. यह भारत की जीत कैसे है? 👉 जिन अमेरिकी चीज़ों पर भारत अभी तक 30-100% टैरिफ लगाता था उस पर ज़ीरो टैरिफ लगाना हमारी जीत कैसे है? 👉भारत ने अमेरिका के लिए अपना बाजार पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई लगती है - इससे घरेलू भारतीय उद्योग और व्यापारियों की सुरक्षा कैसे होगी? 👉ज़्यादा अमेरिकी सामान खरीदने से 'मेक इन इंडिया' और हमारी मैनुफैक्चरिंग का क्या होगा? 👉जिस तरह से इस डील के बाद अमेरिकी कृषि सचिव ने ख़ुशी जतायी है उससे बिल्कुल साफ़ है कि अमेरिकी किसानों के तो बल्ले बल्ले हैं लेकिन हमारे किसानों पर इस तरह का हमला आख़िर कैसे होने के लिए आप राज़ी हुए मोदी जी? 👉अमेरिका कौन होता है यह निर्णय करने वाला हम रूस से तेल ख़रीदेंगे या नहीं? 👉ईरान के चाबहार पोर्ट में हम रहेंगे या नहीं? 👉मोदी ने यह देशविरोधी डील इतना नतमस्तक हो कर क्यों की है?

Supriya Shrinate

71,020 Aufrufe • vor 7 Monaten